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टेढागाछ स्थित ई-किसान भवन में एक खरीफ कर्मशाला का आयोजन किया गया। इस कर्मशाला के माध्यम से किसानों को कम लागत में अधिक उपज प्राप्त करने की तकनीकों के बारे में जागरूक किया गया।

1 day ago
user_Md Abu Farhan
Md Abu Farhan
Kishanganj, Bihar•
1 day ago

टेढागाछ स्थित ई-किसान भवन में एक खरीफ कर्मशाला का आयोजन किया गया। इस कर्मशाला के माध्यम से किसानों को कम लागत में अधिक उपज प्राप्त करने की तकनीकों के बारे में जागरूक किया गया।

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  • किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ फुलबड़िया क्षेत्र से एक विकलांग व्यक्ति ने जिलाधिकारी (डीएम) विशाल राज से ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने की मांग की थी। जिलाधिकारी विशाल राज ने इस मामले का संज्ञान लिया है और संबंधित विभाग को बैटरी वाली साइकिल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
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    किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ फुलबड़िया क्षेत्र से एक विकलांग व्यक्ति ने जिलाधिकारी (डीएम) विशाल राज से ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने की मांग की थी। जिलाधिकारी विशाल राज ने इस मामले का संज्ञान लिया है और संबंधित विभाग को बैटरी वाली साइकिल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
    user_Md Abu Farhan
    Md Abu Farhan
    Kishanganj, Bihar•
    23 hrs ago
  • देश की नीतियों को लेकर एक सीधा सवाल उठाया गया है कि क्या वे आम लोगों की सुविधा के लिए हैं या कुछ ताक़तवर लोगों के हितों की रक्षा के लिए बनाई जाती हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 100 प्रतिशत इथेनॉल से जुड़े नियमों को कानूनी रूप देने की घोषणा की है, लेकिन इस पर जनता की राय कब ली गई या संसद में कितनी गंभीर चर्चा हुई, इस पर सवाल खड़े किए गए हैं। यह भी पूछा गया है कि आम लोगों को इसका फायदा होगा, यह साबित करने वाला कौन-सा स्वतंत्र अध्ययन जनता के सामने रखा गया है। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो जनता को अंधेरे में क्यों रखा जा रहा है? एक बड़ा सवाल हितों के टकराव का भी है। जब किसी नीति से जुड़े क्षेत्र में मंत्री के परिवार से संबंधित कंपनियों के व्यावसायिक हित होने की बात सामने आती है, तो पारदर्शिता की आवश्यकता बढ़ जाती है। लोकतंत्र में केवल ईमानदार होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि ईमानदार दिखाई देना भी ज़रूरी है। जनता को यह जानने का अधिकार है कि फैसले देशहित में लिए जा रहे हैं या किसी खास वर्ग के लाभ के लिए। वाहन स्क्रैपिंग नीति हो या इथेनॉल का मामला, हर बार बोझ आम आदमी पर ही क्यों डाला जाता है? यह भी सवाल है कि जनता कब तक अपनी जेब से ऐसे प्रयोगों की कीमत चुकाती रहेगी? यह लड़ाई इथेनॉल के पक्ष या विपक्ष की नहीं, बल्कि जवाबदेही और पारदर्शिता की है। सरकार से मांग की गई है कि वह सभी अध्ययन, आंकड़े और संभावित प्रभाव जनता के सामने रखे, क्योंकि लोकतंत्र में जनता का काम केवल टैक्स देना नहीं, बल्कि सरकार से सवाल पूछना और फैसलों का हिसाब मांगना भी है। इथेनॉल पर शोध करने वाले कई लोगों का मानना है कि जब 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण से ही कई गाड़ियों पर असर पड़ रहा है, उनकी उम्र कम हो रही है और इंजन समय से पहले खराब हो रहे हैं, तो 100 प्रतिशत इथेनॉल के उपयोग से क्या स्थिति होगी? मध्यम वर्ग के लोग अपनी मेहनत की कमाई से वाहन खरीदते हैं ताकि वर्षों तक उसका लाभ उठा सकें, लेकिन यदि इथेनॉल उनके वाहनों के लिए नुकसानदायक साबित होता है, तो इसका बोझ भी उन्हें ही उठाना पड़ेगा। सवाल यह भी है कि यदि कोई आम व्यक्ति पेट्रोल या डीज़ल में मिलावट करके बेचे तो वह अपराधी माना जाता है, लेकिन जब सरकार में बैठे लोग स्वयं पेट्रोल और डीज़ल में इथेनॉल मिलाने की नीति अपनाते हैं, तो उसे देशहित का कदम बताया जाता है। इस पूरे मामले में पूछा जा रहा है कि क्या इथेनॉल नीति जनता के लिए है या कुछ खास लोगों के फायदे के लिए।
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    देश की नीतियों को लेकर एक सीधा सवाल उठाया गया है कि क्या वे आम लोगों की सुविधा के लिए हैं या कुछ ताक़तवर लोगों के हितों की रक्षा के लिए बनाई जाती हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 100 प्रतिशत इथेनॉल से जुड़े नियमों को कानूनी रूप देने की घोषणा की है, लेकिन इस पर जनता की राय कब ली गई या संसद में कितनी गंभीर चर्चा हुई, इस पर सवाल खड़े किए गए हैं। यह भी पूछा गया है कि आम लोगों को इसका फायदा होगा, यह साबित करने वाला कौन-सा स्वतंत्र अध्ययन जनता के सामने रखा गया है। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो जनता को अंधेरे में क्यों रखा जा रहा है?

एक बड़ा सवाल हितों के टकराव का भी है। जब किसी नीति से जुड़े क्षेत्र में मंत्री के परिवार से संबंधित कंपनियों के व्यावसायिक हित होने की बात सामने आती है, तो पारदर्शिता की आवश्यकता बढ़ जाती है। लोकतंत्र में केवल ईमानदार होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि ईमानदार दिखाई देना भी ज़रूरी है। जनता को यह जानने का अधिकार है कि फैसले देशहित में लिए जा रहे हैं या किसी खास वर्ग के लाभ के लिए। वाहन स्क्रैपिंग नीति हो या इथेनॉल का मामला, हर बार बोझ आम आदमी पर ही क्यों डाला जाता है? यह भी सवाल है कि जनता कब तक अपनी जेब से ऐसे प्रयोगों की कीमत चुकाती रहेगी?

यह लड़ाई इथेनॉल के पक्ष या विपक्ष की नहीं, बल्कि जवाबदेही और पारदर्शिता की है। सरकार से मांग की गई है कि वह सभी अध्ययन, आंकड़े और संभावित प्रभाव जनता के सामने रखे, क्योंकि लोकतंत्र में जनता का काम केवल टैक्स देना नहीं, बल्कि सरकार से सवाल पूछना और फैसलों का हिसाब मांगना भी है। इथेनॉल पर शोध करने वाले कई लोगों का मानना है कि जब 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण से ही कई गाड़ियों पर असर पड़ रहा है, उनकी उम्र कम हो रही है और इंजन समय से पहले खराब हो रहे हैं, तो 100 प्रतिशत इथेनॉल के उपयोग से क्या स्थिति होगी? मध्यम वर्ग के लोग अपनी मेहनत की कमाई से वाहन खरीदते हैं ताकि वर्षों तक उसका लाभ उठा सकें, लेकिन यदि इथेनॉल उनके वाहनों के लिए नुकसानदायक साबित होता है, तो इसका बोझ भी उन्हें ही उठाना पड़ेगा।

सवाल यह भी है कि यदि कोई आम व्यक्ति पेट्रोल या डीज़ल में मिलावट करके बेचे तो वह अपराधी माना जाता है, लेकिन जब सरकार में बैठे लोग स्वयं पेट्रोल और डीज़ल में इथेनॉल मिलाने की नीति अपनाते हैं, तो उसे देशहित का कदम बताया जाता है। इस पूरे मामले में पूछा जा रहा है कि क्या इथेनॉल नीति जनता के लिए है या कुछ खास लोगों के फायदे के लिए।
    user_Zafar Rabbani
    Zafar Rabbani
    पोठिया, किशनगंज, बिहार•
    49 min ago
  • Looking for Job Job Title : Office Boy Job Field : Office Boy Expected Salary : 25000 City / Locality : Araria Experience Level : 1-2 Years Job Type : Full Time Education Qualification : 10th Pass hum office boy ka jab kar chuke hain
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    Looking for Job
Job Title : Office Boy
Job Field : Office Boy
Expected Salary : 25000
City / Locality : Araria 
Experience Level : 1-2 Years
Job Type : Full Time
Education Qualification : 10th Pass
hum office boy ka jab kar chuke hain
    user_Amit Chaudhary
    Amit Chaudhary
    जोकीहाट, अररिया, बिहार•
    14 hrs ago
  • santosh Kalki Shiv Baba suandaranath dham sarakar 🏴‍☠️🧿🦁🐯🏹🪈🔱🪓🇮🇳🪡🌺🌹🌿🐁☕🐒🐕‍🦺🚨🚓🕋🚔✝️🪯🕉️🐉🐢🐊🎡🪔🎠 me antim avatar hu (kalki avatar.?)
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    santosh Kalki Shiv Baba suandaranath dham sarakar 🏴‍☠️🧿🦁🐯🏹🪈🔱🪓🇮🇳🪡🌺🌹🌿🐁☕🐒🐕‍🦺🚨🚓🕋🚔✝️🪯🕉️🐉🐢🐊🎡🪔🎠
me antim avatar hu (kalki avatar.?)
    user_Santosh kalki shiv baba 🏴‍☠️
    Santosh kalki shiv baba 🏴‍☠️
    Tour Guide कुरसाकट्टा, अररिया, बिहार•
    2 hrs ago
  • अररिया जिले के कुर्सकाटा में स्थित हमारे गांव का जीवन बेहद आसान और सरल है। गांव की खूबसूरती और सादगी यहां के लोगों के जीवन में स्पष्ट रूप से झलकती है, जो इसे और भी आकर्षक बनाती है।
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    अररिया जिले के कुर्सकाटा में स्थित हमारे गांव का जीवन बेहद आसान और सरल है। गांव की खूबसूरती और सादगी यहां के लोगों के जीवन में स्पष्ट रूप से झलकती है, जो इसे और भी आकर्षक बनाती है।
    user_Luck ashish
    Luck ashish
    Araria, Bihar•
    3 hrs ago
  • उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल, हजारीबाग के प्रमंडलीय आयुक्त विजय कुमार गुप्ता ने बुधवार को कोडरमा समाहरणालय सभागार में एक समीक्षा बैठक की। इस बैठक में उन्होंने राजस्व, भू-अर्जन, भू-हस्तांतरण, खनन और विभिन्न विभागों के राजस्व संग्रहण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता सहित सभी अंचल अधिकारी और विभागों के पदाधिकारी इस दौरान मौजूद थे। आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि दाखिल-खारिज, रसीद निर्गत, रजिस्ट्री, जाति, आय और आवासीय प्रमाण-पत्रों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करें, ताकि आम लोगों को कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने जनहित से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। भू-अर्जन और भू-हस्तांतरण के लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए आयुक्त ने विकास परियोजनाओं से संबंधित लंबित मामलों को शीघ्र निपटाने का निर्देश दिया। राजस्व संग्रहण की समीक्षा के दौरान विभिन्न विभागों के वार्षिक लक्ष्यों और उपलब्धियों का आकलन भी किया गया। आयुक्त ने परिवहन विभाग को निर्धारित राजस्व लक्ष्य प्राप्त करने, उत्पाद विभाग को अवैध शराब निर्माण और तस्करी के खिलाफ सघन अभियान चलाने, तथा खनन विभाग को अवैध बालू उठाव और अवैध खनन पर कड़ी निगरानी रखते हुए सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। दाखिल-खारिज के लंबित मामलों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने सभी अंचल अधिकारियों को ऐसे मामलों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया और स्पष्ट किया कि अनावश्यक लंबितता किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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    उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल, हजारीबाग के प्रमंडलीय आयुक्त विजय कुमार गुप्ता ने बुधवार को कोडरमा समाहरणालय सभागार में एक समीक्षा बैठक की। इस बैठक में उन्होंने राजस्व, भू-अर्जन, भू-हस्तांतरण, खनन और विभिन्न विभागों के राजस्व संग्रहण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता सहित सभी अंचल अधिकारी और विभागों के पदाधिकारी इस दौरान मौजूद थे।

आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि दाखिल-खारिज, रसीद निर्गत, रजिस्ट्री, जाति, आय और आवासीय प्रमाण-पत्रों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करें, ताकि आम लोगों को कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने जनहित से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। भू-अर्जन और भू-हस्तांतरण के लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए आयुक्त ने विकास परियोजनाओं से संबंधित लंबित मामलों को शीघ्र निपटाने का निर्देश दिया। राजस्व संग्रहण की समीक्षा के दौरान विभिन्न विभागों के वार्षिक लक्ष्यों और उपलब्धियों का आकलन भी किया गया।

आयुक्त ने परिवहन विभाग को निर्धारित राजस्व लक्ष्य प्राप्त करने, उत्पाद विभाग को अवैध शराब निर्माण और तस्करी के खिलाफ सघन अभियान चलाने, तथा खनन विभाग को अवैध बालू उठाव और अवैध खनन पर कड़ी निगरानी रखते हुए सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। दाखिल-खारिज के लंबित मामलों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने सभी अंचल अधिकारियों को ऐसे मामलों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया और स्पष्ट किया कि अनावश्यक लंबितता किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
    user_झारखंड news
    झारखंड news
    Court reporter कुरसाकट्टा, अररिया, बिहार•
    5 hrs ago
  • रौशन आनंद सर के भाई प्रिंस यादव की मौत हो गई है। इस घटना के संबंध में एक लड़की ने 'पोल खोल दिया' है।
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    रौशन आनंद सर के भाई प्रिंस यादव की मौत हो गई है। इस घटना के संबंध में एक लड़की ने 'पोल खोल दिया' है।
    user_Niraj Kumar
    Niraj Kumar
    News Anchor Araria, Bihar•
    9 hrs ago
  • गांव के निवासियों ने स्थानीय मुखिया पर अनदेखी का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि जहां मुखिया द्वारा गांव की लगभग सभी गलियों में सड़कों का निर्माण कराया गया है, वहीं उनकी अपनी गली में सड़क नहीं बनाई गई है। इस 'रोड की समस्या' पर मुखिया कोई सुनवाई नहीं कर रहे हैं, जिससे ग्रामीण परेशान हैं और इस असमान विकास को लेकर शिकायत कर रहे हैं।
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    गांव के निवासियों ने स्थानीय मुखिया पर अनदेखी का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि जहां मुखिया द्वारा गांव की लगभग सभी गलियों में सड़कों का निर्माण कराया गया है, वहीं उनकी अपनी गली में सड़क नहीं बनाई गई है। इस 'रोड की समस्या' पर मुखिया कोई सुनवाई नहीं कर रहे हैं, जिससे ग्रामीण परेशान हैं और इस असमान विकास को लेकर शिकायत कर रहे हैं।
    user_Amit Chaudhary
    Amit Chaudhary
    जोकीहाट, अररिया, बिहार•
    14 hrs ago
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