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आप छतरपुर का हाल दे सकते हैं एक एंबुलेंस का रास्ता नहीं मिल रहा आम आदमी को कितना रिश्ता मिलता होगा
Ravinder Goyal
आप छतरपुर का हाल दे सकते हैं एक एंबुलेंस का रास्ता नहीं मिल रहा आम आदमी को कितना रिश्ता मिलता होगा
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- 543 से 850 सीटें: क्या बदल जाएगा देश का पावर बैलेंस? नॉर्थ vs साउथ पर बड़ा सवाल देश में लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने की चर्चा तेज हो गई है। यह सिर्फ संख्या बढ़ाने का मामला नहीं, बल्कि भारत के पूरे राजनीतिक पावर मैप को बदलने वाला फैसला साबित हो सकता है। दरअसल, सीटों का पुनर्निर्धारण (Delimitation) जनसंख्या के आधार पर होता है। ऐसे में जिन राज्यों की आबादी ज्यादा तेजी से बढ़ी है—जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश—उन्हें ज्यादा सीटें मिल सकती हैं। इससे उत्तर भारत की राजनीतिक ताकत और मजबूत हो सकती है। वहीं दक्षिण भारत के राज्य—जैसे तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक—जहां जनसंख्या वृद्धि नियंत्रित रही है, वहां सीटों का अनुपात कम हो सकता है। इससे “नॉर्थ vs साउथ” का संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर ऐसा होता है तो संसद में नीतियों और फैसलों पर उत्तर भारत का प्रभाव और बढ़ जाएगा, जबकि दक्षिण भारत खुद को राजनीतिक रूप से कमजोर महसूस कर सकता है। फिलहाल यह मुद्दा सिर्फ चर्चा में है, लेकिन अगर यह लागू हुआ तो देश की राजनीति में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है।1
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