संभल से समाजवादी पार्टी में 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम मुख्यमंत्री चेहरे की मांग तेजी से उठने लगी है। सपा के जिला सचिव नवाब साद आदिल ने इस मांग का समर्थन किया है, जिसमें मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी द्वारा अखिलेश यादव को लिखे गए पत्र का जिक्र है। साद आदिल का कहना है कि मुसलमानों ने हमेशा समाजवादी पार्टी का साथ दिया है और अब उन्हें नेतृत्व का अवसर मिलना चाहिए। नवाब साद आदिल ने मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी की उस मांग को पूरी तरह से समर्थन दिया है, जिसमें 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए सपा की ओर से मुस्लिम मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करने की बात कही गई है। उन्होंने तर्क दिया कि उत्तर प्रदेश में मुसलमानों की आबादी लगभग 22 प्रतिशत है और उन्होंने हमेशा मजबूती से समाजवादी पार्टी का समर्थन किया है। आदिल ने इस बात पर जोर दिया कि मुलायम सिंह यादव, रामगोपाल यादव और अखिलेश यादव को सत्ता और संसद तक पहुंचाने में मुस्लिम समाज की अहम भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि जब मुस्लिम समाज लगातार पार्टी के साथ खड़ा रहा है, तो 2027 में मुख्यमंत्री पद के लिए मुस्लिम चेहरे को आगे लाने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। साद आदिल ने यह भी तर्क दिया कि आबादी के हिसाब से मुसलमान प्रदेश का एक बड़ा वर्ग हैं और उन्हें नेतृत्व का अवसर मिलना उनका अधिकार है। सपा नेता ने याद दिलाया कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और देश में पूर्व में भी मुस्लिम राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी की यह मांग पूरी तरह से लोकतांत्रिक और संवैधानिक है, और पार्टी नेतृत्व को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
संभल से समाजवादी पार्टी में 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम मुख्यमंत्री चेहरे की मांग तेजी से उठने लगी है। सपा के जिला सचिव नवाब साद आदिल ने इस मांग का समर्थन किया है, जिसमें मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी द्वारा अखिलेश यादव को लिखे गए पत्र का जिक्र है। साद आदिल का कहना है कि मुसलमानों ने हमेशा समाजवादी पार्टी का साथ दिया है और अब उन्हें नेतृत्व का अवसर मिलना चाहिए। नवाब साद आदिल ने मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी की उस मांग को पूरी तरह से समर्थन दिया है, जिसमें 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए सपा की ओर से मुस्लिम मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करने की बात कही गई है। उन्होंने तर्क दिया कि उत्तर प्रदेश में मुसलमानों की आबादी लगभग 22 प्रतिशत है और उन्होंने हमेशा मजबूती से समाजवादी पार्टी का समर्थन किया है। आदिल ने इस बात पर जोर दिया कि मुलायम सिंह यादव, रामगोपाल यादव और अखिलेश यादव को सत्ता और संसद तक पहुंचाने में मुस्लिम समाज की अहम भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि जब मुस्लिम समाज लगातार पार्टी के साथ खड़ा रहा है, तो 2027 में मुख्यमंत्री पद के लिए मुस्लिम चेहरे को आगे लाने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। साद आदिल ने यह भी तर्क दिया कि आबादी के हिसाब से मुसलमान प्रदेश का एक बड़ा वर्ग हैं और उन्हें नेतृत्व का अवसर मिलना उनका अधिकार है। सपा नेता ने याद दिलाया कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और देश में पूर्व में भी मुस्लिम राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी की यह मांग पूरी तरह से लोकतांत्रिक और संवैधानिक है, और पार्टी नेतृत्व को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
- संभल से समाजवादी पार्टी में 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम मुख्यमंत्री चेहरे की मांग तेजी से उठने लगी है। सपा के जिला सचिव नवाब साद आदिल ने इस मांग का समर्थन किया है, जिसमें मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी द्वारा अखिलेश यादव को लिखे गए पत्र का जिक्र है। साद आदिल का कहना है कि मुसलमानों ने हमेशा समाजवादी पार्टी का साथ दिया है और अब उन्हें नेतृत्व का अवसर मिलना चाहिए। नवाब साद आदिल ने मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी की उस मांग को पूरी तरह से समर्थन दिया है, जिसमें 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए सपा की ओर से मुस्लिम मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करने की बात कही गई है। उन्होंने तर्क दिया कि उत्तर प्रदेश में मुसलमानों की आबादी लगभग 22 प्रतिशत है और उन्होंने हमेशा मजबूती से समाजवादी पार्टी का समर्थन किया है। आदिल ने इस बात पर जोर दिया कि मुलायम सिंह यादव, रामगोपाल यादव और अखिलेश यादव को सत्ता और संसद तक पहुंचाने में मुस्लिम समाज की अहम भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि जब मुस्लिम समाज लगातार पार्टी के साथ खड़ा रहा है, तो 2027 में मुख्यमंत्री पद के लिए मुस्लिम चेहरे को आगे लाने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। साद आदिल ने यह भी तर्क दिया कि आबादी के हिसाब से मुसलमान प्रदेश का एक बड़ा वर्ग हैं और उन्हें नेतृत्व का अवसर मिलना उनका अधिकार है। सपा नेता ने याद दिलाया कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और देश में पूर्व में भी मुस्लिम राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी की यह मांग पूरी तरह से लोकतांत्रिक और संवैधानिक है, और पार्टी नेतृत्व को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।1
- संभल जिले में थाना बबराला पुलिस टीम ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई को अंजाम दिया है। पुलिस ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में वांछित चल रहे एक अभियुक्त को पुलिस मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है।1
- शाहबाद अकैडमी में फौजी भाई अपनी ट्रेनिंग को पूरे उत्साह और मस्ती के साथ अंजाम दे रहे हैं। इस दौरान वे एक-दूसरे का पूरा सपोर्ट भी कर रहे हैं, जिससे उनका प्रशिक्षण और भी बेहतर बन रहा है।1
- संभव दिवस के अवसर पर अधिशासी अधिकारी दिनेश कुमार ने जनता की समस्याओं को सुना। इस कार्यक्रम के दौरान उन्हें कुल 6 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से कुछ का मौके पर ही समाधान कर दिया गया।1
- NEET री-एग्जाम के दौरान कुछ छात्रों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिल पाया, जिसके बाद वे गेट के बाहर रोते हुए नज़र आए। उनकी यह तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गईं, जिससे यह घटना व्यापक चर्चा का विषय बन गई और छात्रों का दर्द सामने आया। इस पूरी घटना ने परीक्षा व्यवस्था, समय-पालन के कड़े नियमों और छात्रों को झेलनी पड़ी कठिनाइयों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। वीडियो में इस बात पर जोर दिया गया है कि क्या ऐसे मामलों में नियमों का सख्ती से पालन करने के साथ-साथ मानवीय संवेदनशीलता के लिए भी जगह होनी चाहिए।1
- अमरोहा के गजरौला स्थित मोहल्ला अतरपुरा निवासी कथित तांत्रिक जाने आलम का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिन पर पैसे डबल करने और तंत्र क्रिया के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी के आरोप पहले से लगे हैं। इस वायरल वीडियो में जाने आलम एक व्यक्ति, जिनका नाम हाशम भाई बताया गया है, को पैसे डबल करने का भरोसा देते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो के सामने आने के बाद इस मामले को लेकर चर्चाएँ तेज हो गई हैं, और इसे सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है। हालांकि, वायरल वीडियो की सत्यता और उसमें किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है। फिलहाल, पुलिस या प्रशासन की ओर से इस वीडियो को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि वीडियो की पुष्टि होती है, तो यह मामले की जांच में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है।1
- लखनऊ में हुए एक भयावह अग्निकांड में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। इस दर्दनाक घटना से जुड़े शुरुआती वीडियो में छात्र अपनी जान बचाने के लिए लाइब्रेरी से निकलकर बिजली केबिल के सहारे फर्स्ट फ्लोर से नीचे उतरते दिखाई दिए हैं। यह घटना लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में एक कोचिंग संस्थान में लगी आग का परिणाम है, जिसे एक बड़ी ब्रेकिंग न्यूज के रूप में देखा जा रहा है। अग्निकांड के बाद मौके पर बचाव अभियान जारी है, जहाँ छात्रों को सुरक्षित निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।1