खाकी के नाक के नीचे सरेआम गुंडगर्दी: ठाकुरगंज की घटना कानून-व्यवस्था पर करारा तमाचा राजधानी लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके में एक नाबालिग किशोर के साथ दबंगों द्वारा की गई बर्बरता सिर्फ एक मारपीट की घटना नहीं है, बल्कि यह उस प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान है जो नागरिकों की सुरक्षा का दम भरती है। तहसीनगंज जैसे घनी आबादी वाले इलाके में सरेआम किसी बच्चे को जानवरों की तरह पीटना और पूरे क्षेत्र में भय का साम्राज्य स्थापित करना यह साबित करने के लिए काफी है कि बदमाशों के दिलों से कानून का खौफ पूरी तरह गायब हो चुका है। मुफ्तीगंज निवासी ज़मन, अली हमजा और कुमैल जैसे युवकों द्वारा इस प्रकार की सरेआम गुंडगर्दी इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय स्तर पर इन असामाजिक तत्वों को खुली छूट मिली हुई है। क्या उत्तर प्रदेश की राजधानी की पहचान अब इस बात से होगी कि जब तक कोई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल नहीं होता, तब तक पुलिसिया तंत्र कुंभकर्णी नींद से नहीं जागता? घटना के बाद आरोपियों का आसानी से फरार हो जाना और पीड़ित परिवार को न्याय के लिए थानों के चक्कर काटना इस बात की गवाही देता है कि जमीनी स्तर पर पुलिसिंग कितनी लाचार हो चुकी है। यदि समय रहते इन दबंगों की कमर नहीं तोड़ी गई, तो यह घटनाएं अन्य असामाजिक तत्वों का हौसला बढ़ाएंगी। वायरल वीडियो के आधार पर खानापूर्ति करने से काम नहीं चलेगा; पुलिस प्रशासन को यह साबित करना होगा कि कानून का इकबाल अभी जिंदा है। आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए और उनके खिलाफ ऐसी नजीर पेश करने वाली कार्रवाई होनी चाहिए, जिससे भविष्य में कोई भी सिरफिरा कानून को अपने हाथ में लेने की हिम्मत न जुटा सके।
खाकी के नाक के नीचे सरेआम गुंडगर्दी: ठाकुरगंज की घटना कानून-व्यवस्था पर करारा तमाचा राजधानी लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके में एक नाबालिग किशोर के साथ दबंगों द्वारा की गई बर्बरता सिर्फ एक मारपीट की घटना नहीं है, बल्कि यह उस प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान है जो नागरिकों की सुरक्षा का दम भरती है। तहसीनगंज जैसे घनी आबादी वाले इलाके में सरेआम किसी बच्चे को जानवरों की तरह पीटना और पूरे क्षेत्र में भय का साम्राज्य स्थापित करना यह साबित करने के लिए काफी है कि बदमाशों के दिलों से कानून का खौफ पूरी तरह गायब हो चुका है। मुफ्तीगंज निवासी ज़मन, अली हमजा और कुमैल जैसे युवकों द्वारा इस प्रकार की सरेआम गुंडगर्दी इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय स्तर पर इन असामाजिक तत्वों को खुली छूट मिली हुई है। क्या उत्तर प्रदेश की राजधानी की पहचान अब इस बात से होगी कि जब तक कोई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल नहीं होता, तब तक पुलिसिया तंत्र कुंभकर्णी नींद से नहीं जागता? घटना के बाद आरोपियों का आसानी से फरार हो जाना और पीड़ित परिवार को न्याय के लिए थानों के चक्कर काटना इस बात की गवाही देता है कि जमीनी स्तर पर पुलिसिंग कितनी लाचार हो चुकी है। यदि समय रहते इन दबंगों की कमर नहीं तोड़ी गई, तो यह घटनाएं अन्य असामाजिक तत्वों का हौसला बढ़ाएंगी। वायरल वीडियो के आधार पर खानापूर्ति करने से काम नहीं चलेगा; पुलिस प्रशासन को यह साबित करना होगा कि कानून का इकबाल अभी जिंदा है। आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए और उनके खिलाफ ऐसी नजीर पेश करने वाली कार्रवाई होनी चाहिए, जिससे भविष्य में कोई भी सिरफिरा कानून को अपने हाथ में लेने की हिम्मत न जुटा सके।
- खबर का हुआ असर राम पथ पर शुरू हुई सीवर की सफाई; जनता ने फिर बताई कड़वी सच्चाई1
- अयोध्या (पुराकलंदर/ प्राथमिक स्वास्थ केंद्र मसौधा मे डॉक्टर की लापरवाही अयोध्या (पुराकलंदर/ प्राथमिक स्वास्थ केंद्र मसौधा मे डॉक्टर की लापरवाही मारपीट में घायल घंटों तड़पता रहा मरीज डॉक्टर कई घंटे से गायब मुख्यमंत्री का गोद लिया अस्पताल है स्वास्थ केंद्र मसौधा पीड़ित के साथ साथ पुलिस भी दो घंटे से डॉक्टर के इतजार में इलाज से पहले मृत्यु हुई तो कौन होगा जिम्मेदार मृतक या डॉक्टर डॉक्टर को किसी के बाप के खाते से मिलती है या जनता के टैक्स का है पैसे से मिलती है सैलरी भाजपा नेत्री मंजू निषाद डॉक्टर की जिलाधिकारी एवं उच्च अधिकारियों से करेगी शिकायत उनका कहना ऐसे डॉक्टर मुख्यमंत्री को कर रहे बदनाम पुराकालंदर थाना क्षेत्र के अंतर्गत मसौधा स्वास्थ केन्द्र मसौधा का मामला मुख्यमंत्री ने लिया है गोद1
- शहर के रिकाबगंज स्थित बलरामपुर हाउस मे रहने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय को ट्रस्ट का सदस्य बनाए जाने पर उन्होंने कहा, "यह राम मंदिर को लेकर हमने मुकदमे की लंबी लड़ाई लड़ी है। अयोध्या शहर के रिकाबगंज स्थित बलरामपुर हाउस मे रहने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय को ट्रस्ट का सदस्य बनाए जाने पर उन्होंने कहा, "यह राम मंदिर को लेकर हमने मुकदमे की लंबी लड़ाई लड़ी है। 1994 से ही इस लड़ाई में जुटे रहे। पहले परमहंस जी के वकील थे और बाद में रामलला के भी वकील बने। सुप्रीम कोर्ट ने कृपा की। अब कोशिश यही रहेगी कि जो भी दायित्व दिया जाएगा, उसका पूरी निष्ठा से पालन करूंगा।1
- नेपाल में रसुवा जिले के टिकोरे गांव में तीन दिन तक आपदा के कीचड़ में दबी 06साल की मासूम बालिका मनीषा ने मौत से जंग जीता, मौत को पीछे हटना पड़ा और तीन दिन बाद मौत से जिंदगी जीत गई मासूम बालिका मनीषा,बाढ़ और भूस्खलन के बीचतीन दिन तक आपदा के कीचड़ में दबी 06 साल की बच्ची मनीषा को नेपाल के सुरक्षा बलों द्वारा जीवित अवस्था में बाहर निकाला गया,यह घटना किसी आश्चर्य से कम नहीं है।1
- डीएम एसपी पुजारी को बाहर ले जाने मंदिर पहुंचे, पुजारी का जवाब सुन रह गए दंग चित्रकूट मंदिर में घुसा बाढ़ का पानी, डीएम एसपी पुजारी को बाहर ले जाने मंदिर पहुंचे, पुजारी का जवाब सुन रह गए दंग बाढ़ में मंदिर में पानी घुस गया। मंदाकिनी खतरे के निशान से ऊपर! DM/SP पुजारी को मंदिर से बाहर निकालने पहुंचे पुजारी ने कहा कि जिंदगी भगवान के चरणों में... बीती उन्हें कैसे छोड़ दूं…. अधिकारी बेरंग लौटे। मंदिर की पवित्रता ऐसे पुजारियों ने बनाकर रखी है।1
- खाकी के नाक के नीचे सरेआम गुंडगर्दी: ठाकुरगंज की घटना कानून-व्यवस्था पर करारा तमाचा राजधानी लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके में एक नाबालिग किशोर के साथ दबंगों द्वारा की गई बर्बरता सिर्फ एक मारपीट की घटना नहीं है, बल्कि यह उस प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान है जो नागरिकों की सुरक्षा का दम भरती है। तहसीनगंज जैसे घनी आबादी वाले इलाके में सरेआम किसी बच्चे को जानवरों की तरह पीटना और पूरे क्षेत्र में भय का साम्राज्य स्थापित करना यह साबित करने के लिए काफी है कि बदमाशों के दिलों से कानून का खौफ पूरी तरह गायब हो चुका है। मुफ्तीगंज निवासी ज़मन, अली हमजा और कुमैल जैसे युवकों द्वारा इस प्रकार की सरेआम गुंडगर्दी इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय स्तर पर इन असामाजिक तत्वों को खुली छूट मिली हुई है। क्या उत्तर प्रदेश की राजधानी की पहचान अब इस बात से होगी कि जब तक कोई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल नहीं होता, तब तक पुलिसिया तंत्र कुंभकर्णी नींद से नहीं जागता? घटना के बाद आरोपियों का आसानी से फरार हो जाना और पीड़ित परिवार को न्याय के लिए थानों के चक्कर काटना इस बात की गवाही देता है कि जमीनी स्तर पर पुलिसिंग कितनी लाचार हो चुकी है। यदि समय रहते इन दबंगों की कमर नहीं तोड़ी गई, तो यह घटनाएं अन्य असामाजिक तत्वों का हौसला बढ़ाएंगी। वायरल वीडियो के आधार पर खानापूर्ति करने से काम नहीं चलेगा; पुलिस प्रशासन को यह साबित करना होगा कि कानून का इकबाल अभी जिंदा है। आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए और उनके खिलाफ ऐसी नजीर पेश करने वाली कार्रवाई होनी चाहिए, जिससे भविष्य में कोई भी सिरफिरा कानून को अपने हाथ में लेने की हिम्मत न जुटा सके।1
- जब सत्ता के करीब या उसकी छत्रछाया में पलने वाले संगठन इस तरह की खुली गुंडागर्दी पर उतर आते हैं, तो यह सवाल खड़ा होना लाजमी है कि क्या देश में कानून का शासन बचा है या फिर धमकियां देने वालों को खुली छूट मिल चुकी है? आगरा में योगी यूथ ब्रिगेड के पदाधिकारियों द्वारा अभिनेत्री स्वरा भास्कर के खिलाफ जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया है और उनकी जुबान काटने के लिए 1 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की गई है, वह लोकतंत्र और कानून के राज पर सीधा तमाचा है। वैचारिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन खुलेआम हिंसा भड़काना, जान से मारने या अंग-भंग करने की धमकियां देना और सार्वजनिक रूप से अपमानजनक गालियां ("वेश्या" जैसे शब्दों का प्रयोग) देना न केवल असहिष्णुता की पराकाष्ठा है, बल्कि साफ तौर पर आपराधिक कृत्य भी है। जब सत्ता के करीब या उसकी छत्रछाया में पलने वाले संगठन इस तरह की खुली गुंडागर्दी पर उतर आते हैं, तो यह सवाल खड़ा होना लाजमी है कि क्या देश में कानून का शासन बचा है या फिर धमकियां देने वालों को खुली छूट मिल चुकी है? किसी महिला कलाकार या किसी भी नागरिक की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से असहमति हो सकती है, लेकिन हिंसा का खुला आह्वान और इस तरह की गिरी हुई टिप्पणियां उस सड़ चुकी मानसिकता को उजागर करती हैं जो हर असहमति का जवाब गालियों और हिंसा से देना चाहती है। यदि इस तरह के तत्वों पर तुरंत और सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती है, तो यह समाज में अराजकता को और बढ़ावा देगा। लोकतंत्र में असहमत होने का हक सबको है, लेकिन किसी की जुबान काटने का ऐलान करने की छूट कानून किसी को नहीं देता। #SwaraBhasker #YogiYouthBrigade #AgraNews #FreeSpeech #LawAndOrder #HateSpeech #IndianPolitics #DemocracyInDanger1
- मारपीट में घायल व्यक्ति घंटों रहा तड़पता और डॉक्टर कई घंटे से गायब मारपीट में घायल घंटों तड़पता रहा मरीज डॉक्टर कई घंटे से गायब मुख्यमंत्री का गोद लिया है यह प्राथमिक स्वास्थ केंद्र मसौधा जिम्मेदारी कौन और किसकी है जिम्मेदारी अयोध्या। जनपद अयोध्या का मुख्यमंत्री द्वारा गोद लिया हुआ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मसौधा का एक मामला सामने आया है जिसमें मारपीट के दौरान घायल व्यक्ति को स्वास्थ्य केंद्र लाया गया लेकिन यहां का दशा देखकर बहुत सारे सवाल उठ रहे है। ऐसी स्थिति में जहां डां. गायब तो स्टाफ भी गायब क्योंकि किसी की जान से क्या लेना देना अस्पताल में ये सब होता रहता हैं सबको अपनी पड़ी है डर तो किसी को है नहीं और न ही इंसानियत । इतना ही नही पीड़ित के साथ साथ पुलिस भी दो घंटे से डॉक्टर के इतजार रही में । यदि इलाज से पहले मृत्यु हुई तो कौन होगा जिम्मेदार, मृतक या डॉक्टर। इस खबर को सुनकर भाजपा नेत्री मंजू निषाद डॉक्टर की जिलाधिकारी एवं उच्च अधिकारियों से करेगी शिकायत। उनका कहना है ऐसे डॉक्टर मुख्यमंत्री को कर रहे बदनाम। पुराकालंदर थाना क्षेत्र के अंतर्गत मसौधा स्वास्थ केन्द्र मसौधा का है मामला। मुख्यमंत्री ने लिया है गोद।1