बुंदेलखंड के टीकमगढ़ जिले में रोज़गार का गंभीर संकट बना हुआ है, जिसके कारण प्रतिदिन हज़ारों की संख्या में लोग अपने गांव और परिवार छोड़कर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। इस व्यापक पलायन की दर्दनाक तस्वीरें खरगापुर रेलवे स्टेशन पर देखने को मिल रही हैं, जहां ट्रेनों में चढ़ने के लिए यात्रियों के बीच भारी अफरा-तफरी और जद्दोजहद मची रहती है। खरगापुर रेलवे स्टेशन पर रोज़ाना मजदूर, किसान और युवा अपने सिर पर गठरी और हाथों में सामान लेकर ट्रेन का इंतज़ार करते हैं। ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचते ही, सामान्य डिब्बों में जगह बनाने के लिए लोगों में होड़ मच जाती है। हालात इतने विकट हैं कि यात्रियों को डिब्बों में घुसने के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। कई लोग दरवाजों पर लटककर यात्रा करने को मजबूर होते हैं, जबकि डिब्बों के अंदर यात्री एक-दूसरे से सटकर बैठे और खड़े दिखाई देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिले के अधिकांश गांवों में रोज़गार के साधनों का घोर अभाव है। खेती भी अब मौसम की अनिश्चितता और बढ़ती लागत के कारण घाटे का सौदा बनती जा रही है। गांवों में न तो कोई बड़ा उद्योग स्थापित है और न ही ऐसा कोई स्थायी रोज़गार उपलब्ध है, जिससे परिवार का भरण-पोषण हो सके। इसी मजबूरी के चलते लोग अपने घर, परिवार और छोटे बच्चों को छोड़कर दूसरे राज्यों में मजदूरी करने निकल पड़ते हैं। हर साल की तरह इस वर्ष भी पलायन का यह सिलसिला तेज़ हो गया है, जिससे सबसे ज़्यादा गरीब और मजदूर परिवार प्रभावित हो रहे हैं, जिनके पास रोज़गार का कोई स्थानीय विकल्प नहीं है। लोगों की मांग है कि यदि जिले में उद्योग स्थापित किए जाएं, रोज़गारपरक योजनाओं का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन हो और युवाओं को स्थानीय स्तर पर काम मिले, तो उन्हें अपना घर छोड़कर सैकड़ों किलोमीटर दूर जाने की विवशता से मुक्ति मिल सकती है। खरगापुर रेलवे स्टेशन की ये तस्वीरें टीकमगढ़ जिले की उस भयावह हकीकत को दर्शाती हैं, जहां रोज़गार की तलाश में हज़ारों लोग हर दिन अपना गांव छोड़ने को मजबूर हैं, सिर पर गठरी और आँखों में बेहतर भविष्य की उम्मीद लिए, लेकिन दिल में परिवार से बिछड़ने का दर्द।
बुंदेलखंड के टीकमगढ़ जिले में रोज़गार का गंभीर संकट बना हुआ है, जिसके कारण प्रतिदिन हज़ारों की संख्या में लोग अपने गांव और परिवार छोड़कर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। इस व्यापक पलायन की दर्दनाक तस्वीरें खरगापुर रेलवे स्टेशन पर देखने को मिल रही हैं, जहां ट्रेनों में चढ़ने के लिए यात्रियों के बीच भारी अफरा-तफरी और जद्दोजहद मची रहती है। खरगापुर रेलवे स्टेशन पर रोज़ाना मजदूर, किसान और युवा अपने सिर पर गठरी और हाथों में सामान लेकर ट्रेन का इंतज़ार करते हैं। ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचते ही, सामान्य डिब्बों में जगह बनाने के लिए लोगों में होड़ मच जाती है। हालात इतने विकट हैं कि यात्रियों को डिब्बों में घुसने के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। कई लोग दरवाजों पर लटककर यात्रा करने को मजबूर होते हैं, जबकि डिब्बों के अंदर यात्री एक-दूसरे से सटकर बैठे और खड़े दिखाई देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिले के अधिकांश गांवों में रोज़गार के साधनों का घोर अभाव है। खेती भी अब मौसम की अनिश्चितता और बढ़ती लागत के कारण घाटे का सौदा बनती जा रही है। गांवों में न तो कोई बड़ा उद्योग स्थापित है और न ही ऐसा कोई स्थायी रोज़गार उपलब्ध है, जिससे परिवार का भरण-पोषण हो सके। इसी मजबूरी के चलते लोग अपने घर, परिवार और छोटे बच्चों को छोड़कर दूसरे राज्यों में मजदूरी करने निकल पड़ते हैं। हर साल की तरह इस वर्ष भी पलायन का यह सिलसिला तेज़ हो गया है, जिससे सबसे ज़्यादा गरीब और मजदूर परिवार प्रभावित हो रहे हैं, जिनके पास रोज़गार का कोई स्थानीय विकल्प नहीं है। लोगों की मांग है कि यदि जिले में उद्योग स्थापित किए जाएं, रोज़गारपरक योजनाओं का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन हो और युवाओं को स्थानीय स्तर पर काम मिले, तो उन्हें अपना घर छोड़कर सैकड़ों किलोमीटर दूर जाने की विवशता से मुक्ति मिल सकती है। खरगापुर रेलवे स्टेशन की ये तस्वीरें टीकमगढ़ जिले की उस भयावह हकीकत को दर्शाती हैं, जहां रोज़गार की तलाश में हज़ारों लोग हर दिन अपना गांव छोड़ने को मजबूर हैं, सिर पर गठरी और आँखों में बेहतर भविष्य की उम्मीद लिए, लेकिन दिल में परिवार से बिछड़ने का दर्द।
- बुंदेलखंड के टीकमगढ़ जिले में रोज़गार का गंभीर संकट बना हुआ है, जिसके कारण प्रतिदिन हज़ारों की संख्या में लोग अपने गांव और परिवार छोड़कर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। इस व्यापक पलायन की दर्दनाक तस्वीरें खरगापुर रेलवे स्टेशन पर देखने को मिल रही हैं, जहां ट्रेनों में चढ़ने के लिए यात्रियों के बीच भारी अफरा-तफरी और जद्दोजहद मची रहती है। खरगापुर रेलवे स्टेशन पर रोज़ाना मजदूर, किसान और युवा अपने सिर पर गठरी और हाथों में सामान लेकर ट्रेन का इंतज़ार करते हैं। ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचते ही, सामान्य डिब्बों में जगह बनाने के लिए लोगों में होड़ मच जाती है। हालात इतने विकट हैं कि यात्रियों को डिब्बों में घुसने के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। कई लोग दरवाजों पर लटककर यात्रा करने को मजबूर होते हैं, जबकि डिब्बों के अंदर यात्री एक-दूसरे से सटकर बैठे और खड़े दिखाई देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिले के अधिकांश गांवों में रोज़गार के साधनों का घोर अभाव है। खेती भी अब मौसम की अनिश्चितता और बढ़ती लागत के कारण घाटे का सौदा बनती जा रही है। गांवों में न तो कोई बड़ा उद्योग स्थापित है और न ही ऐसा कोई स्थायी रोज़गार उपलब्ध है, जिससे परिवार का भरण-पोषण हो सके। इसी मजबूरी के चलते लोग अपने घर, परिवार और छोटे बच्चों को छोड़कर दूसरे राज्यों में मजदूरी करने निकल पड़ते हैं। हर साल की तरह इस वर्ष भी पलायन का यह सिलसिला तेज़ हो गया है, जिससे सबसे ज़्यादा गरीब और मजदूर परिवार प्रभावित हो रहे हैं, जिनके पास रोज़गार का कोई स्थानीय विकल्प नहीं है। लोगों की मांग है कि यदि जिले में उद्योग स्थापित किए जाएं, रोज़गारपरक योजनाओं का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन हो और युवाओं को स्थानीय स्तर पर काम मिले, तो उन्हें अपना घर छोड़कर सैकड़ों किलोमीटर दूर जाने की विवशता से मुक्ति मिल सकती है। खरगापुर रेलवे स्टेशन की ये तस्वीरें टीकमगढ़ जिले की उस भयावह हकीकत को दर्शाती हैं, जहां रोज़गार की तलाश में हज़ारों लोग हर दिन अपना गांव छोड़ने को मजबूर हैं, सिर पर गठरी और आँखों में बेहतर भविष्य की उम्मीद लिए, लेकिन दिल में परिवार से बिछड़ने का दर्द।1
- ग्राम बेला में नाली पर अतिक्रमण को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। बारिश के पानी से गांव में हुए जलभराव से परेशान होकर ग्रामीणों ने नौगांव–पलेरा मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले में तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है।1
- टिकमगढ़ जिले के पलेरा क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के बीच शनिवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। थाना क्षेत्र के ग्राम कछौरा में अपने खेत पर काम कर रहे 45 वर्षीय किशन अहिरवार की आकाशीय बिजली गिरने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि किशन अहिरवार खेत पर मौजूद थे, तभी अचानक तेज गर्जना के साथ बिजली गिरी, जिसकी चपेट में आने से वह गंभीर रूप से झुलस गए। इस घटना के बाद परिजन और ग्रामीण तत्काल उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पलेरा लेकर पहुंचे, जहाँ डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस द्वारा शव का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया कराई जा रही है। लगातार हो रही बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, खेतों और पेड़ों के नीचे जाने से बचें तथा सतर्क रहें।1
- जतारा थाना पुलिस ने सोशल मीडिया पर विधायक हरिशंकर खटीक के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणी करने के मामले में लारोन निवासी रिंकू पाठक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह कार्रवाई शिकायतकर्ता रोहित चौरसिया की शिकायत पर की गई है। पुलिस ने बीएनएस की धारा 196(1)(ए) और 296, साथ ही आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, इस मामले की जांच पूरी होने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।3
- दमोह पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुजीत सिंह भदौरिया और हटा एसडीओपी सौरभ त्रिपाठी के निर्देशन में हटा थाना प्रभारी सुधीर बेगी ने अवैध शराब पर बड़ी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के तहत, लुहारी के पास एक स्कूटी से दो बोरी अवैध शराब पकड़ी गई। हटा थाना प्रभारी सुधीर बेगी ने इस संबंध में जानकारी प्रदान की।2
- उत्तर प्रदेश के सिकंदरा क्षेत्र में एक चौंकाने वाले मामले में पुलिस ने पति की हत्या के आरोप में उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी पत्नी पर आरोप है कि उसने हत्या करने के बाद पति के शव को घर के बाथरूम में दबा दिया और उस पर प्लास्टर करा दिया था। इतना ही नहीं, करीब 45 दिनों तक वह अपने पति के लापता होने का नाटक करती रही। मृतक के भाई द्वारा दी गई सूचना के आधार पर पुलिस ने बाथरूम खुदवाकर शव को बरामद किया। शव को फिलहाल पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और पुलिस इस मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी गहन जांच कर रही है।1