झारखंड में भारी बारिश को लेकर आपदा विभाग का हाई अलर्ट रांची: मौसम विभाग ने लो प्रेशन एरिया के प्रभाव से झारखंड के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है और इसके चलते ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विज्ञान केंद्र, रांची की चेतावनी के बाद स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सभी अस्पतालों और आपदा विभाग को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों को सतर्क रहने के लिए कहा ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, अगले 36 घंटों में डिप्रेशन झारखंड से उत्तरी छत्तीसगढ़, पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश और दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ेगा, जिससे तेज हवाओं और भारी बारिश की संभावना बनी रहेगी। मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने राज्यवासियों से बिना जरूरत घर से बाहर न निकलने, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों का विशेष ध्यान रखने तथा जलभराव वाले इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को 24x7 सक्रिय रखने और पीने के पानी को उबालकर पीने की भी हिदायत दी। झारखंड में भारी बारिश को लेकर आपदा विभाग का हाई अलर्ट रांची: मौसम विभाग ने लो प्रेशन एरिया के प्रभाव से झारखंड के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है और इसके चलते ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विज्ञान केंद्र, रांची की चेतावनी के बाद स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सभी अस्पतालों और आपदा विभाग को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों को सतर्क रहने के लिए कहा ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, अगले 36 घंटों में डिप्रेशन झारखंड से उत्तरी छत्तीसगढ़, पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश और दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ेगा, जिससे तेज हवाओं और भारी बारिश की संभावना बनी रहेगी। मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने राज्यवासियों से बिना जरूरत घर से बाहर न निकलने, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों का विशेष ध्यान रखने तथा जलभराव वाले इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को 24x7 सक्रिय रखने और पीने के पानी को उबालकर पीने की भी हिदायत दी।
झारखंड में भारी बारिश को लेकर आपदा विभाग का हाई अलर्ट रांची: मौसम विभाग ने लो प्रेशन एरिया के प्रभाव से झारखंड के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है और इसके चलते ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विज्ञान केंद्र, रांची की चेतावनी के बाद स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सभी अस्पतालों और आपदा विभाग को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों को सतर्क रहने के लिए कहा ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, अगले 36 घंटों में डिप्रेशन झारखंड से उत्तरी छत्तीसगढ़, पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश और दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ेगा, जिससे तेज हवाओं और भारी बारिश की संभावना बनी रहेगी। मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने राज्यवासियों से बिना जरूरत घर से बाहर न निकलने, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों का विशेष ध्यान रखने तथा जलभराव वाले इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को 24x7 सक्रिय रखने और पीने के पानी को उबालकर पीने की भी हिदायत दी। झारखंड में भारी बारिश को लेकर आपदा विभाग का हाई अलर्ट रांची: मौसम विभाग ने लो प्रेशन एरिया के प्रभाव से झारखंड के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है और इसके चलते ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विज्ञान केंद्र, रांची की चेतावनी के बाद स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सभी अस्पतालों और आपदा विभाग को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों को सतर्क रहने के लिए कहा ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, अगले 36 घंटों में डिप्रेशन झारखंड से उत्तरी छत्तीसगढ़, पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश और दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ेगा, जिससे तेज हवाओं और भारी बारिश की संभावना बनी रहेगी। मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने राज्यवासियों से बिना जरूरत घर से बाहर न निकलने, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों का विशेष ध्यान रखने तथा जलभराव वाले इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को 24x7 सक्रिय रखने और पीने के पानी को उबालकर पीने की भी हिदायत दी।
- झारखंड में भारी बारिश को लेकर आपदा विभाग का हाई अलर्ट रांची: मौसम विभाग ने लो प्रेशन एरिया के प्रभाव से झारखंड के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है और इसके चलते ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विज्ञान केंद्र, रांची की चेतावनी के बाद स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सभी अस्पतालों और आपदा विभाग को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों को सतर्क रहने के लिए कहा ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, अगले 36 घंटों में डिप्रेशन झारखंड से उत्तरी छत्तीसगढ़, पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश और दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ेगा, जिससे तेज हवाओं और भारी बारिश की संभावना बनी रहेगी। मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने राज्यवासियों से बिना जरूरत घर से बाहर न निकलने, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों का विशेष ध्यान रखने तथा जलभराव वाले इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को 24x7 सक्रिय रखने और पीने के पानी को उबालकर पीने की भी हिदायत दी। झारखंड में भारी बारिश को लेकर आपदा विभाग का हाई अलर्ट रांची: मौसम विभाग ने लो प्रेशन एरिया के प्रभाव से झारखंड के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है और इसके चलते ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विज्ञान केंद्र, रांची की चेतावनी के बाद स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सभी अस्पतालों और आपदा विभाग को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों को सतर्क रहने के लिए कहा ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, अगले 36 घंटों में डिप्रेशन झारखंड से उत्तरी छत्तीसगढ़, पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश और दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ेगा, जिससे तेज हवाओं और भारी बारिश की संभावना बनी रहेगी। मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने राज्यवासियों से बिना जरूरत घर से बाहर न निकलने, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों का विशेष ध्यान रखने तथा जलभराव वाले इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को 24x7 सक्रिय रखने और पीने के पानी को उबालकर पीने की भी हिदायत दी।1
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- जलजमाव से बेहाल पेलावल उत्तरी पंचायत, आखिर जवाबदेही किसकी? --- आजाद नगर, कब्रिस्तान रोड और रहमत नगर में सड़कों पर पानी; घरों में घुस रहा जल, लोगों का निकलना हुआ मुश्किल --- डुभिया आहर के ओवरफ्लो से बढ़ी समस्या, तालाब के चारों ओर गार्ड वॉल और घाट निर्माण की उठी मांग --- गुहिया आहर में गंदगी, जलकुंभी और झाड़ियों का अंबार; जनप्रतिनिधियों के साथ नागरिकों की जवाबदेही भी जरूरी --- हजारीबाग। कटकमसांडी प्रखंड अंतर्गत पेलावल उत्तरी पंचायत इन दिनों जलजमाव की गंभीर समस्या से जूझ रही है। पंचायत के आजाद नगर, कब्रिस्तान रोड, रहमत नगर सहित कई इलाकों में चारों ओर पानी जमा होने से आम लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। लगातार जलजमाव के कारण राहगीरों, रोजमर्रा के काम पर जाने वाले लोगों, महिलाओं और विशेष रूप से स्कूल जाने वाले बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि कई स्थानों पर सड़कें जलमग्न हो गई हैं और कुछ घरों में भी पानी प्रवेश करने की शिकायत सामने आ रही है। इससे लोगों का सामान्य जनजीवन प्रभावित हो गया है और जलजमाव के कारण बीमारी फैलने की आशंका भी बनी हुई है। *डुभिया आहर का पानी ओवरफ्लो, बढ़ी जलजमाव की समस्या* पेलावल उत्तरी पंचायत के पूर्वी क्षेत्र में स्थित डुभिया आहर (तालाब) को भी वर्तमान जलजमाव की समस्या का एक प्रमुख कारण बताया जा रहा है। बारिश के बाद तालाब में पानी भर जाने से पानी ओवरफ्लो होकर आसपास के क्षेत्रों की ओर बह रहा है। इसका सीधा असर आजाद नगर और कब्रिस्तान रोड समेत आसपास के इलाकों पर पड़ रहा है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि यदि तालाब के चारों ओर उचित गार्ड वॉल तथा पानी तक पहुंचने के लिए व्यवस्थित घाट की सीढ़ियां बनाई जाएं, तो तालाब के किनारों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ पानी के अनियंत्रित फैलाव को भी काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। *जिला स्तर से योजना बनाकर हो सकता है समाधान* जलजमाव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए केवल पंचायत स्तर की योजनाओं पर निर्भर रहने के बजाय जिला प्रशासन के स्तर से भी योजना तैयार कर काम कराया जा सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डीएमएफटी सहित उपलब्ध विकास मदों और अन्य उपयुक्त योजनाओं के माध्यम से तालाब के चारों ओर गार्ड वॉल, घाट तथा जलनिकासी की समुचित व्यवस्था विकसित करने की दिशा में पहल की जा सकती है। यदि किसी योजना के तहत काम संभव नहीं है, तो उसके लिए केवल 15वें वित्त आयोग की योजना को जिम्मेदार ठहराना समाधान नहीं हो सकता। पंचायत के विकास की जिम्मेदारी व्यापक है और इसके लिए पंचायत प्रतिनिधियों तथा जिला प्रशासन के बीच समन्वय आवश्यक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि संवेदनशीलता के साथ पहल करें और जिला स्तर पर प्रस्ताव भेजें, तो समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाया जा सकता है। *गुहिया आहर का अस्तित्व भी संकट में* वहीं पेलावल इब्राहिमी मस्जिद के सामने से पबरा रोड की ओर जाने वाले रास्ते के समीप स्थित गुहिया आहर की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार तालाब के चारों ओर गंदगी, कचरे, जलकुंभी और झाड़ियों का अंबार लगा हुआ है। स्थिति ऐसी है कि कई स्थानों पर तालाब का पानी तक दिखाई देना मुश्किल हो गया है। समय रहते साफ-सफाई और संरक्षण की व्यवस्था नहीं की गई तो तालाब का अस्तित्व प्रभावित होने की आशंका है। इसके लिए नियमित सफाई, जलकुंभी हटाने, कचरा फेंकने पर रोक और उचित कचरा प्रबंधन की व्यवस्था जरूरी है। *सिर्फ जनप्रतिनिधि नहीं, नागरिकों की भी जवाबदेही जरूरी* पंचायत क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की जवाबदेही महत्वपूर्ण है, लेकिन स्थानीय नागरिकों की भूमिका भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। यदि लोग तालाबों और जलनिकासी वाले क्षेत्रों में कचरा फेंकते रहेंगे, तो जलजमाव और प्रदूषण की समस्या और गंभीर होती जाएगी। जरूरत है कि पंचायत क्षेत्र में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि लोगों को कचरा फेंकने के लिए निर्धारित और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध हो तथा तालाबों और नालियों में कचरा जाने से रोका जा सके। *चुनाव से पहले विकास के दावों पर जनता के सवाल* स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि चुनाव के समय विकास और मूलभूत सुविधाओं को लेकर किए जाने वाले वादों के बावजूद वर्षों बाद भी जलजमाव जैसी बुनियादी समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं हो सका। आगामी पंचायत चुनाव के मद्देनजर जनता के बीच यह चर्चा स्वाभाविक है कि क्षेत्र में विकास कार्यों और जनसमस्याओं के समाधान को लेकर जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता क्या रही है। फिलहाल पेलावल उत्तरी पंचायत के लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती जलजमाव से निजात पाने की है। आवश्यकता है कि पंचायत प्रतिनिधि, प्रखंड प्रशासन और जिला प्रशासन मिलकर मौके का निरीक्षण करें, जलजमाव के कारणों का तकनीकी आकलन कर स्थायी जलनिकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करें तथा डुभिया आहर और गुहिया आहर के संरक्षण की दिशा में ठोस पहल करें। जनता का सवाल सीधा है—जलजमाव की इस समस्या का स्थायी समाधान कब होगा और इसकी जवाबदेही किस स्तर पर तय होगी? इसका जवाब आने वाले समय में प्रशासनिक पहल और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली से ही सामने आएगा।4
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