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एक शातिर अपराधी छोटू उर्फ किशन को एक साल की अवधि के लिए जिला बदर कर दिया गया है। इस महत्वपूर्ण फैसले की सार्वजनिक घोषणा नगाड़ा बजवाकर की गई, जिससे सभी संबंधित लोगों को इसकी जानकारी मिल सके।
Shrikant Dubay पत्रकार
एक शातिर अपराधी छोटू उर्फ किशन को एक साल की अवधि के लिए जिला बदर कर दिया गया है। इस महत्वपूर्ण फैसले की सार्वजनिक घोषणा नगाड़ा बजवाकर की गई, जिससे सभी संबंधित लोगों को इसकी जानकारी मिल सके।
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- नरसिंहपुर पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के अपने अभियान के तहत आदतन अपराधी छोटू उर्फ किशन को एक साल के लिए जिले से बाहर कर दिया है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना के निर्देश पर गोटेगांव पुलिस ने की है। पुलिस ने इस आदेश की सार्वजनिक घोषणा शहर में डुग्गी पिटवाकर मुनादी के ज़रिए की, जिससे आम जनता को इसकी जानकारी मिल सके। गोटेगांव के नर्मदा मंदिर के पास रहने वाले इस अपराधी, छोटू उर्फ किशन (पिता रवि चौधरी), पर मारपीट, बलवा, अपहरण, महिला के शीलभंग और विस्फोटक अधिनियम जैसे कुल सात गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। उसकी लगातार बढ़ती आपराधिक गतिविधियों और लोक शांति पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव के कारण पुलिस ने उसके खिलाफ जिला बदर का प्रस्ताव तैयार किया था। पुलिस के इस प्रस्ताव पर सुनवाई करते हुए, जिला दण्डाधिकारी (कलेक्टर) नरसिंहपुर ने मध्य प्रदेश राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 की धारा 5 के तहत यह आदेश जारी किया। आदेश के तहत, छोटू उर्फ किशन को नरसिंहपुर जिले और उसके सभी पड़ोसी (सीमावर्ती) जिलों की राजस्व सीमाओं से एक वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया गया है। मुनादी के बाद पुलिस द्वारा आरोपी को जिले की सीमा से बाहर खदेड़ने की वैधानिक कार्रवाई भी की गई। नरसिंहपुर पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जिले में शांति व्यवस्था भंग करने वाले गुंडों और असामाजिक तत्वों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और अपराधियों के खिलाफ यह सख्त अभियान लगातार जारी रहेगा।3
- एक दबंग व्यक्ति ने पहले एक जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया है, और अब वह पीड़ित पक्ष को जान से मारने की धमकी दे रहा है।1
- करेली से मिली जानकारी के अनुसार, एक शातिर अपराधी जिसे छोटू उर्फ किशन के नाम से जाना जाता है, उसे एक साल की अवधि के लिए जिले से बाहर कर दिया गया है। इस आदेश की सार्वजनिक घोषणा नगाड़े बजवाकर की गई।1
- नरसिंहपुर में एस.आर. ट्रस्ट एलिमको के माध्यम से एक निःशुल्क दिव्यांगजन सहायता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में दिव्यांगजनों का चिन्हांकन किया गया और उनकी आवश्यकतानुसार, उन्हें मौके पर ही कृत्रिम हाथ-पैर एवं कैलिपर्स निःशुल्क प्रदान किए गए।1
- छिंदवाड़ा जिले के तामिया विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम डोढ़ा ढाना के युवा बिहारी लाल ऊईके का मध्य प्रदेश पुलिस में चयन होने पर पूरे गांव में खुशी और उत्साह का माहौल है। बिहारी लाल, रविन्द्र ऊईके और सीता बाई ऊईके के पुत्र हैं। उनके चयन से परिवार के साथ-साथ पूरे गांव का नाम रोशन हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि लंबे समय बाद गांव के किसी युवा का चयन पुलिस विभाग में हुआ है, जिससे क्षेत्र के अन्य युवाओं को भी प्रेरणा मिलेगी। प्रशिक्षण के लिए रवाना होने से पहले ग्रामीणों, मित्रों और परिजनों ने बिहारी लाल का फूल-माला पहनाकर और तिलक लगाकर भव्य स्वागत और सम्मान किया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि मेहनत, लगन और संघर्ष के बल पर हासिल की गई यह सफलता गांव के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। परिवारजनों ने भी उनकी उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए सभी शुभचिंतकों का आभार जताया है। ग्रामवासियों, मित्रों और क्षेत्रवासियों ने बिहारी लाल ऊईके को मध्य प्रदेश पुलिस में चयनित होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।1
- नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा क्षेत्र के खंचारी गांव में एक युवक के बैंक खाते से लगभग ₹4.39 लाख गायब हो गए, जब उसने अपने मोबाइल पर आई एक संदिग्ध APK फाइल को डाउनलोड कर लिया। यह घटना 24 घंटे के भीतर हुई, जिसने युवक को स्तब्ध कर दिया। शिकायतकर्ता ऋषभ दीक्षित ने बताया कि उनके मोबाइल पर एक मैसेज आया था, जिसमें ऊपर की तरफ शादी का कार्ड दिख रहा था। उन्होंने जैसे ही इस APK फाइल पर क्लिक किया, उनका मोबाइल फोन हैक हो गया, जिसके बाद 24 घंटे के अंदर उनके बैंक खाते से ₹4 लाख 39 हजार रुपये का लेनदेन हो गया। इस धोखाधड़ी का पता चलते ही, उन्होंने बिना देर किए तत्काल साइबर सेल और पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना के पास जाकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अधीक्षक की टीम ने शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की। उन्होंने बैंक और संबंधित संस्थानों से समन्वय स्थापित कर संदिग्ध खातों को होल्ड करा दिया। इन त्वरित और प्रभावी प्रयासों के कारण, पुलिस आज ग्रामीण का पूरा पैसा वापस दिलाने में सफल रही।2
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कार्यरत संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ, मध्य प्रदेश के आह्वान पर प्रदेशभर में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन पूरी ताकत के साथ जारी है। नरसिंहपुर समेत प्रदेशभर में यह आंदोलन दिन-ब-दिन उग्र होता जा रहा है और कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह धरना समाप्त नहीं होगा। आंदोलन के तीसरे दिन आज कर्मचारियों ने शासन-प्रशासन की सद्बुद्धि के लिए 'ठेंगड़ी भवन, भोपाल' से तय कार्ययोजना के अनुसार अनोखा रास्ता चुना, जिसमें जिला मुख्यालयों और धरना स्थलों पर सामूहिक रूप से सुंदरकांड पाठ और प्रार्थना का आयोजन किया गया। कर्मचारियों का मानना है कि सरकार की न्यायपूर्ण मांगों के त्वरित निराकरण के लिए भगवान की शरण में जाना बेहद जरूरी हो गया है। इससे पहले, आंदोलन के पहले दिन (2 जून) कर्मचारियों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा जारी अप्रेजल संबंधी आदेशों की सांकेतिक प्रतियां जलाकर सरकार के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया था, वहीं दूसरे दिन (3 जून) आम जनता का समर्थन हासिल करने के लिए जिला अस्पतालों, प्रमुख चौराहों और धरना स्थलों पर 'प्याऊ' की स्थापना कर राहगीरों को पानी पिलाया था। आंदोलन के चौथे दिन यानी कल, कर्मचारी व्यापक स्तर पर सोशल मीडिया अभियान जिसे 'डिजिटल स्ट्राइक' कहा गया है, चलाने जा रहे हैं, जिसका उद्देश्य समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाना और देशव्यापी जनसमर्थन जुटाना है। संघ ने सोशल मीडिया को इस आंदोलन का सबसे बड़ा हथियार बताया है, जिसे रोज़ाना की गतिविधि में शामिल किया गया है। पांचवें दिन, संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के समक्ष ज्ञापन सौंपकर हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। इसके बाद, छठवें दिन प्रशासन की बेरुखी पर तंज कसते हुए कर्मचारी प्रतीकात्मक रूप से "भैंस के आगे बीन" बजाकर प्रदर्शन करेंगे। यह आंदोलन प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र भदोरिया, प्रदेश महामंत्री जितेन्द्र यदुवंशी और प्रदेश संयोजक विजय ठक्कर के नेतृत्व में चल रहा है।3
- एक दिव्यांग बुजुर्ग महिला को सरकार की पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस संबंध में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।1
- जबलपुर जिले के सिहोरा में बुधवार को एक महिला जमीन विवाद और अपनी शिकायतों की सुनवाई न होने से नाराज होकर मोबाइल टावर पर चढ़ गई। यह हाई-वोल्टेज ड्रामा करीब 9 घंटे तक चला, जिसमें महिला 20 से अधिक शिकायतों के बाद भी सुनवाई न होने से परेशान थी। आखिरकार, पुलिस और प्रशासन की समझाइश के बाद वह सुरक्षित नीचे उतर आई।1