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छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में सुशासन तिहार अब गांवों तक पहुंच गया है। इस पहल के अंतर्गत, 13 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से सड़कों का निर्माण किया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

12 hrs ago
user_Deepesh Jangde
Deepesh Jangde
Local News Reporter कवर्धा, कबीरधाम, छत्तीसगढ़•
12 hrs ago

छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में सुशासन तिहार अब गांवों तक पहुंच गया है। इस पहल के अंतर्गत, 13 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से सड़कों का निर्माण किया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

More news from Bilaspur and nearby areas
  • बिल्हा थाना क्षेत्र से एक 17 वर्ष 6 माह की नाबालिग बालिका बिना बताए घर से फरार हो गई है। उसके परिजनों ने बिल्हा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई है। शुक्रवार रात 10 बजे बिल्हा पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम 17:04 बजे बिल्हा थाना क्षेत्र के एक ग्राम पंचायत में रहने वाली 40 वर्षीय मां ने थाने में आकर रिपोर्ट लिखवाई है। मां के अनुसार, वह बिल्हा क्षेत्र के एक गांव में अपने परिवार के साथ रहती है और सिलाई का काम करती है। उसके तीन बच्चे हैं, जिनमें से बड़ी बेटी शादीशुदा है। 27 मई 2026 की सुबह 07:30 बजे वह बिलासपुर सामान खरीदने गई थी। जब वह दोपहर करीब 01:00 बजे घर वापस लौटी, तो उसके 11 वर्षीय सबसे छोटे बेटे ने बताया कि दीदी सुबह लगभग 09:00 बजे घर से कहीं जाने के लिए निकली थी। बेटे ने जब उससे पूछा कि वह कहां जा रही है, तो उसने कहा कि वह लौटने के बाद बताएगी। रिपोर्ट के अनुसार, लापता लड़की की उम्र 17 साल 6 माह 22 दिन है और उसने कक्षा 10वीं तक पढ़ाई के बाद स्कूल छोड़ दिया था। घर वापस न आने पर परिजनों ने आसपास और रिश्तेदारों में काफी खोजबीन की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। लड़की का हुलिया साँवला रंग, 5 फीट ऊँचाई, गोल चेहरा, काले बाल और सामान्य शारीरिक बनावट बताई गई है। वह काले रंग का पैंट और सफेद रंग की शर्ट पहने हुई थी। मां ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कराने के दिन तक पता न चलने पर वह अपने भाई के साथ थाने में रिपोर्ट करने आई है और कार्यवाही की मांग कर रही है। प्रार्थीया की रिपोर्ट पर बिल्हा पुलिस ने अपराध धारा- 137(2) भान्यासं. के तहत मामला दर्ज कर लिया है और आगे की विवेचना जारी है।
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    बिल्हा थाना क्षेत्र से एक 17 वर्ष 6 माह की नाबालिग बालिका बिना बताए घर से फरार हो गई है। उसके परिजनों ने बिल्हा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई है। शुक्रवार रात 10 बजे बिल्हा पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम 17:04 बजे बिल्हा थाना क्षेत्र के एक ग्राम पंचायत में रहने वाली 40 वर्षीय मां ने थाने में आकर रिपोर्ट लिखवाई है।

मां के अनुसार, वह बिल्हा क्षेत्र के एक गांव में अपने परिवार के साथ रहती है और सिलाई का काम करती है। उसके तीन बच्चे हैं, जिनमें से बड़ी बेटी शादीशुदा है। 27 मई 2026 की सुबह 07:30 बजे वह बिलासपुर सामान खरीदने गई थी। जब वह दोपहर करीब 01:00 बजे घर वापस लौटी, तो उसके 11 वर्षीय सबसे छोटे बेटे ने बताया कि दीदी सुबह लगभग 09:00 बजे घर से कहीं जाने के लिए निकली थी। बेटे ने जब उससे पूछा कि वह कहां जा रही है, तो उसने कहा कि वह लौटने के बाद बताएगी।

रिपोर्ट के अनुसार, लापता लड़की की उम्र 17 साल 6 माह 22 दिन है और उसने कक्षा 10वीं तक पढ़ाई के बाद स्कूल छोड़ दिया था। घर वापस न आने पर परिजनों ने आसपास और रिश्तेदारों में काफी खोजबीन की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। लड़की का हुलिया साँवला रंग, 5 फीट ऊँचाई, गोल चेहरा, काले बाल और सामान्य शारीरिक बनावट बताई गई है। वह काले रंग का पैंट और सफेद रंग की शर्ट पहने हुई थी। मां ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कराने के दिन तक पता न चलने पर वह अपने भाई के साथ थाने में रिपोर्ट करने आई है और कार्यवाही की मांग कर रही है।

प्रार्थीया की रिपोर्ट पर बिल्हा पुलिस ने अपराध धारा- 137(2) भान्यासं. के तहत मामला दर्ज कर लिया है और आगे की विवेचना जारी है।
    user_Patrkar Sarthi
    Patrkar Sarthi
    Reporter Bilha, Bilaspur•
    10 hrs ago
  • डिण्डौरी जिले के शहपुरा में स्थित नर्मदांचल गौ सेवा समिति, ढोंढ़ा, जैविक खेती का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करने वाला एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। जिले के प्रसिद्ध जैविक कृषि विशेषज्ञ श्री बिहारी लाल साहू द्वारा संचालित यह समिति विगत 10 वर्षों से जैविक खेती के क्षेत्र में सक्रिय है। श्री साहू न केवल स्वयं जैविक खेती करते हैं, बल्कि डिण्डौरी और आसपास के क्षेत्रों के किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए निरंतर प्रशिक्षण भी देते हैं। वे किसानों के साथ-साथ महाविद्यालयों, विद्यालयों, शासकीय संस्थानों और एनजीओ के माध्यम से डिण्डौरी सहित अन्य जिलों में जैविक खेती के प्रति जागरूकता फैलाने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं, जिसमें उनके फार्म हाउस में जैविक खेती का लाइव डेमो भी प्रदर्शित किया जाता है। समिति पशुओं के गोबर से बायोगैस के निर्माण का भी प्रदर्शन करती है, जिसे प्लास्टिक के 6 फुट चौड़े और 10 फुट लंबे टांके में घोलकर डाला जाता है। इसमें 4 इंच का पाइप गोबर घोल डालने के लिए और दूसरा 4 इंच का पाइप ओवरफ्लो के लिए लगा होता है, जहाँ से गैस बनने के बाद निकलने वाली वेस्ट स्लरी उत्तम जैविक खाद का काम करती है। एक तीसरा पाइप गैस को सीधे चूल्हे तक ले जाता है। यह जैव-अपघटनीय पदार्थों को बिना ऑक्सीजन के सड़ाकर बनती है, जिसमें 55-65% मीथेन और 30-40% CO2 होती है, जो एक बार लगने के बाद कई वर्षों तक चलती है। यह कार्य आत्मा परियोजना के तहत डिण्डौरी जिले में 33 बीआरसी किसानों को भी दिया गया है। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन, भारत सरकार, जैव आदान संसाधन केंद्र द्वारा प्राकृतिक खेती के लिए आवश्यक जैविक उत्पाद उपलब्ध कराए जाते हैं, और बिहारी लाल साहू एक बीआरसी के रूप में प्राकृतिक खेती पर मार्गदर्शन, जानकारी और सलाह भी देते हैं, जिसके लिए उनका नारा है, 'जैविक खेती अपनाएं, स्वास्थ्य और धरती बचाएं'। नर्मदांचल गौ सेवा समिति में गौवंश आधारित प्राकृतिक जैविक खाद जैसे केंचुआ खाद, वर्मीवाश, जीवामृत, अग्नि अस्त्र आदि का निर्माण कर विक्रय किया जाता है। साथ ही बीज उपचार सहित जैविक कृषि से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाओं की जानकारी निशुल्क प्रदान की जाती है। यहां जैविक फार्म में केला, पपीता, अदरक, करेला, सेमी, टमाटर, गोभी, बैंगन, आलू, मटर, प्याज, लहसुन, लाल भाजी, मेथी भाजी जैसी विभिन्न फसलें जैविक विधि से उगाई जाती हैं। जैविक कृषि विशेषज्ञ बिहारी लाल साहू ने इस अवसर पर बताया कि जैविक उत्पाद मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होते हैं और रासायनिक मुक्त खेती मिट्टी की उर्वरता तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए भी आवश्यक है। उनके अनुसार, जैविक खेती से किसानों की लागत कम होती है और उपज की गुणवत्ता बेहतर होती है। कार्यक्रम में बिहारी लाल साहू, आयुष साहू, प्रगति साहू सहित अन्य जन उपस्थित रहे। बिहारी लाल साहू डिण्डौरी जिला आत्मा परियोजना के सभी अधिकारियों का हार्दिक अभिनंदन करते हैं। उन्होंने 20 हजार से अधिक विद्यार्थियों और 80 हजार से अधिक किसानों को प्राकृतिक/जैविक खेती पर प्रशिक्षण दिया है, और इस संदेश को एक दोहे के माध्यम से भी व्यक्त किया है: 'ऐसी खेती कीजिए, खाद रसायन दूर। खेत बचे जीवन बचे, स्वाद रहे भरपूर।'
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    डिण्डौरी जिले के शहपुरा में स्थित नर्मदांचल गौ सेवा समिति, ढोंढ़ा, जैविक खेती का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करने वाला एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। जिले के प्रसिद्ध जैविक कृषि विशेषज्ञ श्री बिहारी लाल साहू द्वारा संचालित यह समिति विगत 10 वर्षों से जैविक खेती के क्षेत्र में सक्रिय है। श्री साहू न केवल स्वयं जैविक खेती करते हैं, बल्कि डिण्डौरी और आसपास के क्षेत्रों के किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए निरंतर प्रशिक्षण भी देते हैं। वे किसानों के साथ-साथ महाविद्यालयों, विद्यालयों, शासकीय संस्थानों और एनजीओ के माध्यम से डिण्डौरी सहित अन्य जिलों में जैविक खेती के प्रति जागरूकता फैलाने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं, जिसमें उनके फार्म हाउस में जैविक खेती का लाइव डेमो भी प्रदर्शित किया जाता है।

समिति पशुओं के गोबर से बायोगैस के निर्माण का भी प्रदर्शन करती है, जिसे प्लास्टिक के 6 फुट चौड़े और 10 फुट लंबे टांके में घोलकर डाला जाता है। इसमें 4 इंच का पाइप गोबर घोल डालने के लिए और दूसरा 4 इंच का पाइप ओवरफ्लो के लिए लगा होता है, जहाँ से गैस बनने के बाद निकलने वाली वेस्ट स्लरी उत्तम जैविक खाद का काम करती है। एक तीसरा पाइप गैस को सीधे चूल्हे तक ले जाता है। यह जैव-अपघटनीय पदार्थों को बिना ऑक्सीजन के सड़ाकर बनती है, जिसमें 55-65% मीथेन और 30-40% CO2 होती है, जो एक बार लगने के बाद कई वर्षों तक चलती है। यह कार्य आत्मा परियोजना के तहत डिण्डौरी जिले में 33 बीआरसी किसानों को भी दिया गया है। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन, भारत सरकार, जैव आदान संसाधन केंद्र द्वारा प्राकृतिक खेती के लिए आवश्यक जैविक उत्पाद उपलब्ध कराए जाते हैं, और बिहारी लाल साहू एक बीआरसी के रूप में प्राकृतिक खेती पर मार्गदर्शन, जानकारी और सलाह भी देते हैं, जिसके लिए उनका नारा है, 'जैविक खेती अपनाएं, स्वास्थ्य और धरती बचाएं'।

नर्मदांचल गौ सेवा समिति में गौवंश आधारित प्राकृतिक जैविक खाद जैसे केंचुआ खाद, वर्मीवाश, जीवामृत, अग्नि अस्त्र आदि का निर्माण कर विक्रय किया जाता है। साथ ही बीज उपचार सहित जैविक कृषि से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाओं की जानकारी निशुल्क प्रदान की जाती है। यहां जैविक फार्म में केला, पपीता, अदरक, करेला, सेमी, टमाटर, गोभी, बैंगन, आलू, मटर, प्याज, लहसुन, लाल भाजी, मेथी भाजी जैसी विभिन्न फसलें जैविक विधि से उगाई जाती हैं।

जैविक कृषि विशेषज्ञ बिहारी लाल साहू ने इस अवसर पर बताया कि जैविक उत्पाद मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होते हैं और रासायनिक मुक्त खेती मिट्टी की उर्वरता तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए भी आवश्यक है। उनके अनुसार, जैविक खेती से किसानों की लागत कम होती है और उपज की गुणवत्ता बेहतर होती है। कार्यक्रम में बिहारी लाल साहू, आयुष साहू, प्रगति साहू सहित अन्य जन उपस्थित रहे। बिहारी लाल साहू डिण्डौरी जिला आत्मा परियोजना के सभी अधिकारियों का हार्दिक अभिनंदन करते हैं। उन्होंने 20 हजार से अधिक विद्यार्थियों और 80 हजार से अधिक किसानों को प्राकृतिक/जैविक खेती पर प्रशिक्षण दिया है, और इस संदेश को एक दोहे के माध्यम से भी व्यक्त किया है: 'ऐसी खेती कीजिए, खाद रसायन दूर। खेत बचे जीवन बचे, स्वाद रहे भरपूर।'
    user_Pradeep singh Rajput
    Pradeep singh Rajput
    डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    15 min ago
  • राज टॉकीज रायपुर अब दर्शकों के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा प्रदान कर रहा है। दर्शक बुक माय शो (Book My Show) के माध्यम से अपनी टिकटें ऑनलाइन बुक कर सकते हैं। अधिक जानकारी या सहायता के लिए 0771-2229223 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके साथ ही, राज टॉकीज ने एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया है, जिसमें जुड़ने के लिए लिंक दिया गया है। दर्शकों से अनुरोध किया गया है कि वे खुद ग्रुप से जुड़ें और यह लिंक अन्य लोगों के साथ भी साझा करें।
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    राज टॉकीज रायपुर अब दर्शकों के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा प्रदान कर रहा है। दर्शक बुक माय शो (Book My Show) के माध्यम से अपनी टिकटें ऑनलाइन बुक कर सकते हैं। अधिक जानकारी या सहायता के लिए 0771-2229223 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके साथ ही, राज टॉकीज ने एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया है, जिसमें जुड़ने के लिए लिंक दिया गया है। दर्शकों से अनुरोध किया गया है कि वे खुद ग्रुप से जुड़ें और यह लिंक अन्य लोगों के साथ भी साझा करें।
    user_Raj Talkies Raipur
    Raj Talkies Raipur
    Cinema औदगी, रायपुर, छत्तीसगढ़•
    1 hr ago
  • डिंडौरी जिला जल संरचनाओं के निर्माण और जल स्रोतों के जीर्णोद्धार में पूरे देश में दूसरे स्थान पर है। पिछले दो महीनों से जिले में जनभागीदारी के माध्यम से लगातार यह कार्य किया जा रहा है। अब तक जिला और जनपद पंचायत क्षेत्रों में कुल 6 लाख 26 हजार 955 जल संरचनाओं का निर्माण कराया जा चुका है, जिसमें ग्रामीणों की सक्रिय भूमिका रही है। अधिकारियों ने ग्रामीणों को जल संरक्षण का महत्व समझाया, जिससे उन्हें यह बात समझ आई कि पानी रोकने से ही बचेगा और फिर से उपलब्ध होगा। इस समझ के बाद, लोगों ने स्वयं प्रेरित होकर अपने घरों में जल संचय के कार्य शुरू कर दिए। बजाग जनपद पंचायत की सिंहपुर ग्राम पंचायत में, जहाँ लगभग साढ़े तीन सौ मकान हैं, हर घर में सोखता पिट और छतों से बारिश के पानी को रोकने के लिए पाइप के जरिए वाटर हार्वेस्टिंग की तैयारी की गई है। गांव की महिला मेकिन बाई ने बताया कि पहले उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी, लेकिन सरपंच दीपचंद पूषाम और अधिकारियों ने उन्हें जल का महत्व समझाया, जिसके बाद उन्होंने स्वयं मेहनत कर और थोड़ा पैसा खर्च कर पाइप खरीदे और घर के सामने सोखता पिट बनाया, जिसमें अब निस्तार का पानी जा रहा है। इसी तरह, जमुना खैरवार ने भी स्वीकार किया कि वे पहले पानी का महत्व नहीं जानते थे और सोचते थे कि पानी उपलब्ध कराना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। सरपंच और अधिकारियों द्वारा थोड़ी मेहनत से पानी बचाने और धरती को रिचार्ज करने की जानकारी देने के बाद उन्होंने अपने घर में दो सोखता पिट बनवाए। अब वे गांव में जाकर अन्य लोगों को भी जागरूक कर रही हैं ताकि बारिश का पानी रोका जा सके और आने वाली पीढ़ी के लिए पानी बचाया जा सके। इसके अतिरिक्त, आजीविका परियोजना से जुड़ी कृषक सखी सुदामा सुरेश्वर ने 'मां की बगिया' योजना के बारे में बताया, जिसके तहत पांच हितग्राही हैं। एक बगिया में 15 नींबू और 35 आम के पेड़ लगाए गए हैं, जिन्हें टपक पद्धति से पानी दिया जा रहा है। कृषक सखी ने पानी बचाने और पेड़ों को सुरक्षित रखने के लिए हितग्राहियों को जागरूक किया और उन्हें टपकना, हांडी और स्लाइन की बोतल से पेड़ों को पानी देने के तरीके बताए। अब ये हितग्राही स्वयं पेड़ों की सुरक्षा और सिंचाई का कार्य कर रहे हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि पानी की बचत के साथ-साथ पर्यावरण का भी ध्यान रखा जा सके।
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    डिंडौरी जिला जल संरचनाओं के निर्माण और जल स्रोतों के जीर्णोद्धार में पूरे देश में दूसरे स्थान पर है। पिछले दो महीनों से जिले में जनभागीदारी के माध्यम से लगातार यह कार्य किया जा रहा है। अब तक जिला और जनपद पंचायत क्षेत्रों में कुल 6 लाख 26 हजार 955 जल संरचनाओं का निर्माण कराया जा चुका है, जिसमें ग्रामीणों की सक्रिय भूमिका रही है। अधिकारियों ने ग्रामीणों को जल संरक्षण का महत्व समझाया, जिससे उन्हें यह बात समझ आई कि पानी रोकने से ही बचेगा और फिर से उपलब्ध होगा।

इस समझ के बाद, लोगों ने स्वयं प्रेरित होकर अपने घरों में जल संचय के कार्य शुरू कर दिए। बजाग जनपद पंचायत की सिंहपुर ग्राम पंचायत में, जहाँ लगभग साढ़े तीन सौ मकान हैं, हर घर में सोखता पिट और छतों से बारिश के पानी को रोकने के लिए पाइप के जरिए वाटर हार्वेस्टिंग की तैयारी की गई है। गांव की महिला मेकिन बाई ने बताया कि पहले उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी, लेकिन सरपंच दीपचंद पूषाम और अधिकारियों ने उन्हें जल का महत्व समझाया, जिसके बाद उन्होंने स्वयं मेहनत कर और थोड़ा पैसा खर्च कर पाइप खरीदे और घर के सामने सोखता पिट बनाया, जिसमें अब निस्तार का पानी जा रहा है। इसी तरह, जमुना खैरवार ने भी स्वीकार किया कि वे पहले पानी का महत्व नहीं जानते थे और सोचते थे कि पानी उपलब्ध कराना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। सरपंच और अधिकारियों द्वारा थोड़ी मेहनत से पानी बचाने और धरती को रिचार्ज करने की जानकारी देने के बाद उन्होंने अपने घर में दो सोखता पिट बनवाए। अब वे गांव में जाकर अन्य लोगों को भी जागरूक कर रही हैं ताकि बारिश का पानी रोका जा सके और आने वाली पीढ़ी के लिए पानी बचाया जा सके।

इसके अतिरिक्त, आजीविका परियोजना से जुड़ी कृषक सखी सुदामा सुरेश्वर ने 'मां की बगिया' योजना के बारे में बताया, जिसके तहत पांच हितग्राही हैं। एक बगिया में 15 नींबू और 35 आम के पेड़ लगाए गए हैं, जिन्हें टपक पद्धति से पानी दिया जा रहा है। कृषक सखी ने पानी बचाने और पेड़ों को सुरक्षित रखने के लिए हितग्राहियों को जागरूक किया और उन्हें टपकना, हांडी और स्लाइन की बोतल से पेड़ों को पानी देने के तरीके बताए। अब ये हितग्राही स्वयं पेड़ों की सुरक्षा और सिंचाई का कार्य कर रहे हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि पानी की बचत के साथ-साथ पर्यावरण का भी ध्यान रखा जा सके।
    user_NILMANI CHOUDHARY
    NILMANI CHOUDHARY
    Farmer डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • डिंडौरी जिले की कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने ग्राम पंचायत घुसिया माल के ढीमरटोला में पेयजल की लंबी समस्या का त्वरित समाधान कर प्रशासनिक संवेदनशीलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। यह कार्रवाई तब हुई जब कुछ दिन पूर्व ढीमरटोला के ग्रामीण पेयजल संकट को लेकर जनसुनवाई में कलेक्टर के पास पहुँचे थे। समस्या की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को दो दिनों के भीतर व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे और इन्हीं निर्देशों के क्रियान्वयन का जायजा लेने वे स्वयं गांव पहुँचीं। ग्रामीणों ने बताया कि पानी की कमी के कारण उन्हें कुओं में उतरकर पानी भरना पड़ रहा था। स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन करने के बाद, कलेक्टर ने खराब पड़े बोरवेल में अपने समक्ष एक नया पंप लगवाकर उसे चालू कराया और घर-घर पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी करवाईं। उन्होंने स्वयं बोरवेल का पानी पीकर उसकी गुणवत्ता जाँची और बच्चों को भी पानी पिलाया। ग्रामीणों की सुविधा के लिए दो-दो हजार लीटर क्षमता की दो पानी टंकियां भी स्थापित की गईं और कम वोल्टेज की समस्या सामने आने पर तत्काल स्टेबलाइजर लगाने के निर्देश देकर व्यवस्था को सुचारु बनाया गया। इस दौरान उन्होंने जल जीवन मिशन के अंतर्गत किए गए कार्यों का निरीक्षण भी किया। कलेक्टर की इस मौजूदगी और त्वरित निर्णयों से गांव में उत्साह का माहौल बन गया, जहाँ ग्रामीणों ने पहली बार किसी वरिष्ठ अधिकारी को मौके पर खड़े होकर समस्या का समाधान करते देखा। ग्रामीणों को संबोधित करते हुए, कलेक्टर ने गर्मी के मौसम में पानी के सदुपयोग की अपील की और मोटर संचालन की जिम्मेदारी किसी जिम्मेदार व्यक्ति को सौंपने का सुझाव दिया ताकि पूरे गांव को समय पर पर्याप्त पानी मिल सके। निरीक्षण के दौरान, कलेक्टर ने जल संरक्षण का संदेश भी दिया। उन्होंने ग्रामीणों को सोखता टैंक निर्माण की जानकारी दी और उन्हें घरों में ऐसे टैंक बनाने के लिए प्रेरित किया, यह समझाते हुए कि इससे भूजल स्तर संरक्षित रहेगा और वर्षा जल संचयन को भी बढ़ावा मिलेगा। इस अवसर पर रामबाबू देवांगन, सुंदरलाल यादव, चेतराम अहिरवार, प्रमोद उपाध्याय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। कलेक्टर की इस पहल ने न केवल पेयजल संकट का समाधान किया, बल्कि प्रशासन और ग्रामीणों के बीच विश्वास की एक नई मिसाल भी कायम की है।
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    डिंडौरी जिले की कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने ग्राम पंचायत घुसिया माल के ढीमरटोला में पेयजल की लंबी समस्या का त्वरित समाधान कर प्रशासनिक संवेदनशीलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। यह कार्रवाई तब हुई जब कुछ दिन पूर्व ढीमरटोला के ग्रामीण पेयजल संकट को लेकर जनसुनवाई में कलेक्टर के पास पहुँचे थे। समस्या की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को दो दिनों के भीतर व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे और इन्हीं निर्देशों के क्रियान्वयन का जायजा लेने वे स्वयं गांव पहुँचीं।

ग्रामीणों ने बताया कि पानी की कमी के कारण उन्हें कुओं में उतरकर पानी भरना पड़ रहा था। स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन करने के बाद, कलेक्टर ने खराब पड़े बोरवेल में अपने समक्ष एक नया पंप लगवाकर उसे चालू कराया और घर-घर पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी करवाईं। उन्होंने स्वयं बोरवेल का पानी पीकर उसकी गुणवत्ता जाँची और बच्चों को भी पानी पिलाया। ग्रामीणों की सुविधा के लिए दो-दो हजार लीटर क्षमता की दो पानी टंकियां भी स्थापित की गईं और कम वोल्टेज की समस्या सामने आने पर तत्काल स्टेबलाइजर लगाने के निर्देश देकर व्यवस्था को सुचारु बनाया गया। इस दौरान उन्होंने जल जीवन मिशन के अंतर्गत किए गए कार्यों का निरीक्षण भी किया।

कलेक्टर की इस मौजूदगी और त्वरित निर्णयों से गांव में उत्साह का माहौल बन गया, जहाँ ग्रामीणों ने पहली बार किसी वरिष्ठ अधिकारी को मौके पर खड़े होकर समस्या का समाधान करते देखा। ग्रामीणों को संबोधित करते हुए, कलेक्टर ने गर्मी के मौसम में पानी के सदुपयोग की अपील की और मोटर संचालन की जिम्मेदारी किसी जिम्मेदार व्यक्ति को सौंपने का सुझाव दिया ताकि पूरे गांव को समय पर पर्याप्त पानी मिल सके।

निरीक्षण के दौरान, कलेक्टर ने जल संरक्षण का संदेश भी दिया। उन्होंने ग्रामीणों को सोखता टैंक निर्माण की जानकारी दी और उन्हें घरों में ऐसे टैंक बनाने के लिए प्रेरित किया, यह समझाते हुए कि इससे भूजल स्तर संरक्षित रहेगा और वर्षा जल संचयन को भी बढ़ावा मिलेगा। इस अवसर पर रामबाबू देवांगन, सुंदरलाल यादव, चेतराम अहिरवार, प्रमोद उपाध्याय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। कलेक्टर की इस पहल ने न केवल पेयजल संकट का समाधान किया, बल्कि प्रशासन और ग्रामीणों के बीच विश्वास की एक नई मिसाल भी कायम की है।
    user_वाइस ऑफ़ राइट्स न्यूज चैनल
    वाइस ऑफ़ राइट्स न्यूज चैनल
    डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • राजधानी रायपुर के टिकरापारा थाना क्षेत्र में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। यह युवक संतोषी नगर चौक में अवैध रूप से धारदार चाकू लहराकर लोगों को डरा-धमका रहा था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से लोहे का धारदार चाकू भी बरामद किया है। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि संतोषी नगर चौक से भाठागांव जाने वाले मार्ग के पास एक युवक हाथ में धारदार चाकू लेकर राहगीरों को भयभीत कर रहा है। सूचना मिलते ही थाना टिकरापारा प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार मरई के नेतृत्व में एक पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी को पकड़ने का प्रयास किया। आरोपी ने हालांकि बचने की कोशिश की, लेकिन पुलिस टीम ने मशक्कत के बाद उसे अवैध हथियार सहित गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान थलेन्द्र साहू (20 वर्ष), निवासी ग्राम सरवदा, चौकी बिरेंझर, थाना कुरूद, जिला धमतरी के रूप में हुई है। आरोपी के खिलाफ थाना टिकरापारा में अपराध क्रमांक 465/2026 के तहत धारा 25 और 27 आर्म्स एक्ट के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। उल्लेखनीय है कि पुलिस उपायुक्त (वेस्ट जोन) संदीप पटेल, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राहुल देव शर्मा और सहायक पुलिस आयुक्त नवनीत पाटित के निर्देश पर शहर में चाकूबाजी और अवैध हथियारों पर अंकुश लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
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    राजधानी रायपुर के टिकरापारा थाना क्षेत्र में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। यह युवक संतोषी नगर चौक में अवैध रूप से धारदार चाकू लहराकर लोगों को डरा-धमका रहा था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से लोहे का धारदार चाकू भी बरामद किया है।

पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि संतोषी नगर चौक से भाठागांव जाने वाले मार्ग के पास एक युवक हाथ में धारदार चाकू लेकर राहगीरों को भयभीत कर रहा है। सूचना मिलते ही थाना टिकरापारा प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार मरई के नेतृत्व में एक पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी को पकड़ने का प्रयास किया। आरोपी ने हालांकि बचने की कोशिश की, लेकिन पुलिस टीम ने मशक्कत के बाद उसे अवैध हथियार सहित गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान थलेन्द्र साहू (20 वर्ष), निवासी ग्राम सरवदा, चौकी बिरेंझर, थाना कुरूद, जिला धमतरी के रूप में हुई है। आरोपी के खिलाफ थाना टिकरापारा में अपराध क्रमांक 465/2026 के तहत धारा 25 और 27 आर्म्स एक्ट के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।

उल्लेखनीय है कि पुलिस उपायुक्त (वेस्ट जोन) संदीप पटेल, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राहुल देव शर्मा और सहायक पुलिस आयुक्त नवनीत पाटित के निर्देश पर शहर में चाकूबाजी और अवैध हथियारों पर अंकुश लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
    user_PRINSU PANDEY
    PRINSU PANDEY
    Newspaper publisher Raipur, Chhattisgarh•
    2 hrs ago
  • रायपुर पुलिस ने वन विभाग में नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक युवक से ₹11 लाख की ठगी करने वाले आरोपी दीपराज गायकरवाड़ को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने स्वयं को वन विभाग का कर्मचारी बताकर धोखाधड़ी की। प्रार्थी ने थाना सरस्वती नगर में शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपी दीपराज गायकरवाड़ ने वर्ष 2023 की वन विभाग भर्ती प्रक्रिया का हवाला देते हुए उसे वनरक्षक पद पर सीधी भर्ती कराने का भरोसा दिलाया। आरोपी ने फर्जी नियुक्ति पत्र और हस्ताक्षरित आदेश की प्रति भी उपलब्ध कराई, जिससे युवक उसके झांसे में आ गया। शिकायत के अनुसार, 11 जून 2025 से 28 मई 2026 के बीच आरोपी ने ऑनलाइन और नकद माध्यम से अलग-अलग किश्तों में कुल ₹11 लाख प्राप्त किए। बाद में जब प्रार्थी ने नियुक्ति आदेश की सत्यता जांचने के लिए वन विभाग कार्यालय से संपर्क किया, तो उसे पता चला कि दस्तावेज फर्जी थे और उसके साथ धोखाधड़ी की गई है। पैसे वापस मांगने पर आरोपी ने देने से साफ इनकार कर दिया था। पीड़ित की रिपोर्ट पर, पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) के निर्देश पर थाना सरस्वती नगर पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपी की तलाश में विभिन्न स्थानों पर दबिश दी। पूछताछ के दौरान आरोपी दीपराज गायकरवाड़ ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 108/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 336(3), 338 और 341(2) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तार आरोपी का नाम दीपराज गायकरवाड़ है, जो कृष्णराव गायकरवाड़ का पुत्र और 34 वर्ष का निवासी रायपुर है। पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपी के विरुद्ध पूर्व में भी एक आपराधिक मामला दर्ज है। इस मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।
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    रायपुर पुलिस ने वन विभाग में नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक युवक से ₹11 लाख की ठगी करने वाले आरोपी दीपराज गायकरवाड़ को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने स्वयं को वन विभाग का कर्मचारी बताकर धोखाधड़ी की।

प्रार्थी ने थाना सरस्वती नगर में शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपी दीपराज गायकरवाड़ ने वर्ष 2023 की वन विभाग भर्ती प्रक्रिया का हवाला देते हुए उसे वनरक्षक पद पर सीधी भर्ती कराने का भरोसा दिलाया। आरोपी ने फर्जी नियुक्ति पत्र और हस्ताक्षरित आदेश की प्रति भी उपलब्ध कराई, जिससे युवक उसके झांसे में आ गया। शिकायत के अनुसार, 11 जून 2025 से 28 मई 2026 के बीच आरोपी ने ऑनलाइन और नकद माध्यम से अलग-अलग किश्तों में कुल ₹11 लाख प्राप्त किए। बाद में जब प्रार्थी ने नियुक्ति आदेश की सत्यता जांचने के लिए वन विभाग कार्यालय से संपर्क किया, तो उसे पता चला कि दस्तावेज फर्जी थे और उसके साथ धोखाधड़ी की गई है। पैसे वापस मांगने पर आरोपी ने देने से साफ इनकार कर दिया था।

पीड़ित की रिपोर्ट पर, पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) के निर्देश पर थाना सरस्वती नगर पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपी की तलाश में विभिन्न स्थानों पर दबिश दी। पूछताछ के दौरान आरोपी दीपराज गायकरवाड़ ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 108/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 336(3), 338 और 341(2) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है।

गिरफ्तार आरोपी का नाम दीपराज गायकरवाड़ है, जो कृष्णराव गायकरवाड़ का पुत्र और 34 वर्ष का निवासी रायपुर है। पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपी के विरुद्ध पूर्व में भी एक आपराधिक मामला दर्ज है। इस मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।
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    PRINSU PANDEY
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