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मध्य प्रदेश के पांढुर्णा जिले में स्थित प्रसिद्ध जाम सांवली हनुमान धाम में इन दिनों आस्था का अद्भुत नज़ारा देखने को मिल रहा है। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों से हजारों श्रद्धालु बजरंगबली के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में सुबह से देर शाम तक भक्तों का तांता लगा हुआ है। श्रद्धालु पूरे श्रद्धा भाव से बजरंगबली के चरणों में माथा टेककर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में खुशहाली की कामना कर रहे हैं। मंदिर परिसर 'जय श्रीराम' और 'जय बजरंगबली' के जयघोष से गूंज रहा है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है। धाम में दर्शन के लिए लंबी कतारें देखी जा रही हैं, और मंदिर प्रबंधन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा व व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं, जिससे दर्शन सुचारु रूप से संपन्न हो रहे हैं। जाम सांवली हनुमान धाम अपनी धार्मिक आस्था और चमत्कारिक मान्यताओं के कारण देशभर में प्रसिद्ध है। यही कारण है कि हर सप्ताह और विशेष अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इन दिनों उमड़ रही भक्तों की भारी भीड़ एक बार फिर इस धाम के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दर्शाती है।

2 hrs ago
user_Roshan Kapse
Roshan Kapse
पांढुर्ना, छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश•
2 hrs ago

मध्य प्रदेश के पांढुर्णा जिले में स्थित प्रसिद्ध जाम सांवली हनुमान धाम में इन दिनों आस्था का अद्भुत नज़ारा देखने को मिल रहा है। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों से हजारों श्रद्धालु बजरंगबली के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में सुबह से देर शाम तक भक्तों का तांता लगा हुआ है। श्रद्धालु पूरे श्रद्धा भाव से बजरंगबली के चरणों में माथा टेककर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में खुशहाली की कामना कर रहे हैं। मंदिर परिसर 'जय श्रीराम' और 'जय बजरंगबली' के जयघोष से गूंज रहा है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है। धाम में दर्शन के लिए लंबी कतारें देखी जा रही हैं, और मंदिर प्रबंधन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा व व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं, जिससे दर्शन सुचारु रूप से संपन्न हो रहे हैं। जाम सांवली हनुमान धाम अपनी धार्मिक आस्था और चमत्कारिक मान्यताओं के कारण देशभर में प्रसिद्ध है। यही कारण है कि हर सप्ताह और विशेष अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इन दिनों उमड़ रही भक्तों की भारी भीड़ एक बार फिर इस धाम के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दर्शाती है।

More news from Betul and nearby areas
  • मुलताई नगर पालिका ने शहर में अतिक्रमण हटाने और जल निकासी व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। यह अभियान मुख्य रूप से परेगांव रोड स्थित सुभाष वार्ड में धोपड़े के खेत से लगे क्षेत्र में किए गए अतिक्रमण को हटाने पर केंद्रित था। बारिश के मौसम को ध्यान में रखते हुए, नगर पालिका के अतिक्रमण दल ने नालों से भी अवैध कब्जे हटाए, ताकि आगामी वर्षाकाल में जलभराव की समस्या उत्पन्न न हो। इस कार्रवाई के तहत नालों की गहन साफ-सफाई भी की गई, जिससे शहर की जल निकासी प्रणाली को बेहतर और सुगम बनाया जा सके। नगर पालिका अधिकारियों ने बताया कि मानसून के दौरान शहर को जलभराव की स्थिति से बचाने के लिए इस तरह के अभियान लगातार चलाए जाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नालों पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। इस अभियान के दौरान नगर पालिका का अतिक्रमण दल तथा अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
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    मुलताई नगर पालिका ने शहर में अतिक्रमण हटाने और जल निकासी व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। यह अभियान मुख्य रूप से परेगांव रोड स्थित सुभाष वार्ड में धोपड़े के खेत से लगे क्षेत्र में किए गए अतिक्रमण को हटाने पर केंद्रित था।

बारिश के मौसम को ध्यान में रखते हुए, नगर पालिका के अतिक्रमण दल ने नालों से भी अवैध कब्जे हटाए, ताकि आगामी वर्षाकाल में जलभराव की समस्या उत्पन्न न हो। इस कार्रवाई के तहत नालों की गहन साफ-सफाई भी की गई, जिससे शहर की जल निकासी प्रणाली को बेहतर और सुगम बनाया जा सके।

नगर पालिका अधिकारियों ने बताया कि मानसून के दौरान शहर को जलभराव की स्थिति से बचाने के लिए इस तरह के अभियान लगातार चलाए जाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नालों पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। इस अभियान के दौरान नगर पालिका का अतिक्रमण दल तथा अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
    user_M. Afsar khan
    M. Afsar khan
    Local News Reporter Multai, Betul•
    6 hrs ago
  • दशकों पहले छिंदवाड़ा जिला, जिसे कोयले के कारण 'हीरे के नाम' से पहचाना जाता था और जहाँ परासिया, जमाई तथा दमोह जैसे विभिन्न विकासखंडों में कई खदानें संचालित होने से रोजगार एवं व्यापार में खासी रौनक थी, वहाँ अब हालात बदल गए हैं। बीते लगभग 15 वर्षों से प्रशासन द्वारा लगातार खदानें बंद की जा रही हैं, जिससे स्थानीय व्यापार और शिक्षित बेरोजगारों के लिए रोजगार की कमी एक बड़ी चिंता का विषय बन गई है। मध्य भारत के इस जिले में, खासकर परासिया-पेंच और कन्हान क्षेत्र में, कभी कई भूमिगत और ओपन कास्ट कोयला खदानें थीं। ये खदानें धीरे-धीरे अपने अंतिम चरण में पहुँच गई हैं और नियमित कामगार भी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इसी वजह से क्षेत्र के कई पढ़े-लिखे बेरोजगार युवक काम की तलाश में बड़े शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। क्षेत्र के पूर्व विधायक और वर्तमान विधायक लगातार कोयला मंत्रालय को पत्र लिखकर एवं उच्च अधिकारियों से मिलकर नई खदानें खोलने का अनुरोध कर रहे हैं, ताकि स्थानीय व्यापार को फिर से फायदा मिल सके। जानकारी के अनुसार, बीते कई वर्षों से कोयला मंत्रालय के स्पष्ट निर्देशों के तहत कई क्षेत्र निजी सेक्टर में चले गए हैं, और वर्ष 2004 के बाद से कोयला कामगारों को मिलने वाली पेंशन की सुविधा भी बंद कर दी गई है। पेंच और कन्हान क्षेत्र की पुरानी रौनक अब पूरी तरह खत्म हो गई है, जिससे कोयलांचल क्षेत्र का अस्तित्व ही अंतिम चरण में पहुँच गया है, जहाँ काम के अभाव के कारण व्यापार में लगातार गिरावट आ रही है।
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    दशकों पहले छिंदवाड़ा जिला, जिसे कोयले के कारण 'हीरे के नाम' से पहचाना जाता था और जहाँ परासिया, जमाई तथा दमोह जैसे विभिन्न विकासखंडों में कई खदानें संचालित होने से रोजगार एवं व्यापार में खासी रौनक थी, वहाँ अब हालात बदल गए हैं। बीते लगभग 15 वर्षों से प्रशासन द्वारा लगातार खदानें बंद की जा रही हैं, जिससे स्थानीय व्यापार और शिक्षित बेरोजगारों के लिए रोजगार की कमी एक बड़ी चिंता का विषय बन गई है।

मध्य भारत के इस जिले में, खासकर परासिया-पेंच और कन्हान क्षेत्र में, कभी कई भूमिगत और ओपन कास्ट कोयला खदानें थीं। ये खदानें धीरे-धीरे अपने अंतिम चरण में पहुँच गई हैं और नियमित कामगार भी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इसी वजह से क्षेत्र के कई पढ़े-लिखे बेरोजगार युवक काम की तलाश में बड़े शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।

क्षेत्र के पूर्व विधायक और वर्तमान विधायक लगातार कोयला मंत्रालय को पत्र लिखकर एवं उच्च अधिकारियों से मिलकर नई खदानें खोलने का अनुरोध कर रहे हैं, ताकि स्थानीय व्यापार को फिर से फायदा मिल सके। जानकारी के अनुसार, बीते कई वर्षों से कोयला मंत्रालय के स्पष्ट निर्देशों के तहत कई क्षेत्र निजी सेक्टर में चले गए हैं, और वर्ष 2004 के बाद से कोयला कामगारों को मिलने वाली पेंशन की सुविधा भी बंद कर दी गई है। पेंच और कन्हान क्षेत्र की पुरानी रौनक अब पूरी तरह खत्म हो गई है, जिससे कोयलांचल क्षेत्र का अस्तित्व ही अंतिम चरण में पहुँच गया है, जहाँ काम के अभाव के कारण व्यापार में लगातार गिरावट आ रही है।
    user_Ranjeet Dehariya
    Ranjeet Dehariya
    Voice of people छिंदवाड़ा नगर, छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • छिंदवाड़ा जिले में SafeClick2_0 पहल के तहत एक विशेष कार्यक्रम 'एक शाम साहस और समर्पण के नाम' का आयोजन किया गया। इस अवसर पर Cyber Safe Dance प्रस्तुत किए गए, साइबर जागरूकता से संबंधित संदेश प्रसारित किए गए और समाजसेवियों का सम्मान भी किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य एक सुरक्षित डिजिटल भारत के निर्माण का संकल्प लेना था।
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    छिंदवाड़ा जिले में SafeClick2_0 पहल के तहत एक विशेष कार्यक्रम 'एक शाम साहस और समर्पण के नाम' का आयोजन किया गया। इस अवसर पर Cyber Safe Dance प्रस्तुत किए गए, साइबर जागरूकता से संबंधित संदेश प्रसारित किए गए और समाजसेवियों का सम्मान भी किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य एक सुरक्षित डिजिटल भारत के निर्माण का संकल्प लेना था।
    user_यश भारत
    यश भारत
    Local News Reporter छिंदवाड़ा नगर, छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • Post by Namdev gujre Khabar bhart news
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    Post by Namdev gujre Khabar bhart news
    user_Namdev gujre Khabar bhart news
    Namdev gujre Khabar bhart news
    घोड़ा डोंगरी, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • बड़गांव गांव का कच्चा रास्ता बारिश के कारण ग्रामीणों और छात्र-छात्राओं के लिए गंभीर परेशानी का सबब बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के 75 वर्ष से अधिक होने के बावजूद भी यह सड़क नहीं बन पाई है, जिसके चलते उन्हें लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और वे बेहाल हैं। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत धूड़ियानई के सरपंच और सचिव पर इस समस्या पर कोई ध्यान न देने का आरोप लगाया है, और उनसे जल्द से जल्द इस रास्ते का निराकरण करने का निवेदन किया है।
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    बड़गांव गांव का कच्चा रास्ता बारिश के कारण ग्रामीणों और छात्र-छात्राओं के लिए गंभीर परेशानी का सबब बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के 75 वर्ष से अधिक होने के बावजूद भी यह सड़क नहीं बन पाई है, जिसके चलते उन्हें लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और वे बेहाल हैं। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत धूड़ियानई के सरपंच और सचिव पर इस समस्या पर कोई ध्यान न देने का आरोप लगाया है, और उनसे जल्द से जल्द इस रास्ते का निराकरण करने का निवेदन किया है।
    user_SUNIL MARSKOLE
    SUNIL MARSKOLE
    Gourmet Grocery Shop भैंसदेही, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए ड्रेस कोड के तौर पर साड़ी अनिवार्य कर दी है, लेकिन भैंसदेही के पलासपानी पंचायत के जामुडोल गांव में आंगनबाड़ी के पास अपना कोई भवन नहीं है। नए सरकारी आदेश के तहत, ग्रामीण क्षेत्रों में 1 किलोमीटर के दायरे में जहां आंगनबाड़ी भवन नहीं है या क्षतिग्रस्त है, वहाँ उसे सरकारी स्कूल में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, जामुडोल की प्राथमिक शाला में केवल एक कमरा है, जिसमें कक्षा 1, 2 और 3 के बच्चे एक साथ पढ़ाई करते हैं। जगह की कमी के कारण पूरे बारह महीने बच्चों को बरामदे में बैठकर पढ़ना पड़ता है, जो मानसून के मौसम में पूरी तरह से खुला रहता है। ऐसी स्थिति में, आंगनबाड़ी के बच्चों को स्कूल में स्थानांतरित करने के आदेश पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि जब स्कूल के अपने बच्चे ही भारी बारिश में बरामदे में भीगने को मजबूर हैं, तो 3 से 6 साल के मासूम आंगनबाड़ी बच्चे कहाँ और कैसे बैठेंगे, यह एक बड़ी चिंता का विषय है। अभिभावकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सबसे बड़ी चिंता बच्चों की सुरक्षा को लेकर है। भवन और जगह की कमी के कारण जामुडोल में आंगनबाड़ी अपने तय समय पर संचालित नहीं हो पा रही है। जानकारी के अनुसार, आंगनबाड़ी के बच्चों को दोपहर 1 बजे ही छुट्टी दे दी जाती है, जिसके बाद कार्यकर्ता और सहायिका दोनों घर में विश्राम करती हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ड्रेस कोड को अनिवार्य करने से पहले बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना आवश्यक है। वे मांग करते हैं कि जामुडोल में आंगनबाड़ी भवन का निर्माण शीघ्र कराया जाए, या जब तक भवन नहीं बनता, तब तक बच्चों के लिए कोई सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, क्योंकि बारिश के मौसम में छोटे बच्चों को खुले बरामदे में बैठाना बिल्कुल भी उचित नहीं है।
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    सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए ड्रेस कोड के तौर पर साड़ी अनिवार्य कर दी है, लेकिन भैंसदेही के पलासपानी पंचायत के जामुडोल गांव में आंगनबाड़ी के पास अपना कोई भवन नहीं है। नए सरकारी आदेश के तहत, ग्रामीण क्षेत्रों में 1 किलोमीटर के दायरे में जहां आंगनबाड़ी भवन नहीं है या क्षतिग्रस्त है, वहाँ उसे सरकारी स्कूल में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया है।

हालांकि, जामुडोल की प्राथमिक शाला में केवल एक कमरा है, जिसमें कक्षा 1, 2 और 3 के बच्चे एक साथ पढ़ाई करते हैं। जगह की कमी के कारण पूरे बारह महीने बच्चों को बरामदे में बैठकर पढ़ना पड़ता है, जो मानसून के मौसम में पूरी तरह से खुला रहता है। ऐसी स्थिति में, आंगनबाड़ी के बच्चों को स्कूल में स्थानांतरित करने के आदेश पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि जब स्कूल के अपने बच्चे ही भारी बारिश में बरामदे में भीगने को मजबूर हैं, तो 3 से 6 साल के मासूम आंगनबाड़ी बच्चे कहाँ और कैसे बैठेंगे, यह एक बड़ी चिंता का विषय है। अभिभावकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सबसे बड़ी चिंता बच्चों की सुरक्षा को लेकर है।

भवन और जगह की कमी के कारण जामुडोल में आंगनबाड़ी अपने तय समय पर संचालित नहीं हो पा रही है। जानकारी के अनुसार, आंगनबाड़ी के बच्चों को दोपहर 1 बजे ही छुट्टी दे दी जाती है, जिसके बाद कार्यकर्ता और सहायिका दोनों घर में विश्राम करती हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ड्रेस कोड को अनिवार्य करने से पहले बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना आवश्यक है। वे मांग करते हैं कि जामुडोल में आंगनबाड़ी भवन का निर्माण शीघ्र कराया जाए, या जब तक भवन नहीं बनता, तब तक बच्चों के लिए कोई सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, क्योंकि बारिश के मौसम में छोटे बच्चों को खुले बरामदे में बैठाना बिल्कुल भी उचित नहीं है।
    user_भैंसदेही संवाददाता
    भैंसदेही संवाददाता
    Local News Reporter भैंसदेही, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • दिनांक 06/07/2026, सोमवार को आसरा की रसोई ने हर माह की तरह इस बार भी विक्षिप्त एवं असहाय व्यक्तियों के लिए भोजन की व्यवस्था की। यह सेवा माननीयो के द्वारा संचालित की गई, जिसमें जरूरतमंदों को भोजन कराया गया।
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    दिनांक 06/07/2026, सोमवार को आसरा की रसोई ने हर माह की तरह इस बार भी विक्षिप्त एवं असहाय व्यक्तियों के लिए भोजन की व्यवस्था की। यह सेवा माननीयो के द्वारा संचालित की गई, जिसमें जरूरतमंदों को भोजन कराया गया।
    user_बिहारीलाल सोनी
    बिहारीलाल सोनी
    पत्रकार कुरई, सिवनी, मध्य प्रदेश•
    56 min ago
  • कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना की अध्यक्षता में मंगलवार को केवलारी में एक विशेष जनसुनवाई का आयोजन किया जाएगा।
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    कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना की अध्यक्षता में मंगलवार को केवलारी में एक विशेष जनसुनवाई का आयोजन किया जाएगा।
    user_Devendra thakur
    Devendra thakur
    Salesperson सिवनी, सिवनी, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • मनोहर अग्रवाल की रिपोर्ट के अनुसार, खेड़ीसावलीगढ़ परतवाड़ा मार्ग पर हनुमान गुफा मंदिर के पास एक जानलेवा गड्ढा बन गया है। खेड़ी परतवाड़ा स्टेट हाइवे 43 पर, खेड़ीसावलीगढ़ से लगभग 4 किलोमीटर दूर, हनुमान गुफा मंदिर के निकट मुख्य मार्ग की पटरी पर बरसात के कारण अचानक यह बड़ा गड्ढा हो गया है। यह गड्ढा आने-जाने वाले वाहनों के लिए गंभीर खतरे का सबब बना हुआ है, जिससे लोगों की जान जोखिम में है। इस मार्ग की हालत पहले से ही जर्जर बताई गई है। सड़क मरम्मत का कार्य मध्यप्रदेश सड़क विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी है, लेकिन सड़क निर्माण की स्वीकृति मिलने के कारण मौजूदा सड़क की मरम्मत की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। प्राधिकरण की इस घोर अनदेखी से स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी है, क्योंकि वे अपनी जान जोखिम में डालकर इस खतरनाक मार्ग पर यात्रा करने को मजबूर हैं।
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    मनोहर अग्रवाल की रिपोर्ट के अनुसार, खेड़ीसावलीगढ़ परतवाड़ा मार्ग पर हनुमान गुफा मंदिर के पास एक जानलेवा गड्ढा बन गया है। खेड़ी परतवाड़ा स्टेट हाइवे 43 पर, खेड़ीसावलीगढ़ से लगभग 4 किलोमीटर दूर, हनुमान गुफा मंदिर के निकट मुख्य मार्ग की पटरी पर बरसात के कारण अचानक यह बड़ा गड्ढा हो गया है। यह गड्ढा आने-जाने वाले वाहनों के लिए गंभीर खतरे का सबब बना हुआ है, जिससे लोगों की जान जोखिम में है।

इस मार्ग की हालत पहले से ही जर्जर बताई गई है। सड़क मरम्मत का कार्य मध्यप्रदेश सड़क विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी है, लेकिन सड़क निर्माण की स्वीकृति मिलने के कारण मौजूदा सड़क की मरम्मत की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। प्राधिकरण की इस घोर अनदेखी से स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी है, क्योंकि वे अपनी जान जोखिम में डालकर इस खतरनाक मार्ग पर यात्रा करने को मजबूर हैं।
    user_Manohar agrval Agrawal
    Manohar agrval Agrawal
    Photographer बैतूल, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
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