पाकुड़ जिला वॉलीबॉल संघ ने स्थानीय रेलवे मैदान में पाकुड़ के वॉलीबॉल खेल के प्रणेता स्व. ओंकारनाथ साह की 10वीं पुण्यतिथि पर एक भव्य स्मृति वॉलीबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया। इस अवसर पर उनके समकालीन खिलाड़ी, पुराने सहयोगी और जिले के कई युवा खिलाड़ी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत स्व. ओंकारनाथ साह के चित्र पर माल्यार्पण और श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। इस दौरान उनके पुराने सहयोगियों लक्ष्मी नारायण शाह, संजय कुमार शाह और संजय कुमार ओझा ने स्व. साह के साथ बिताए संस्मरण साझा करते हुए बताया कि उन्होंने पाकुड़ में वॉलीबॉल खेल को एक नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके अथक प्रयासों के कारण जिले के कई खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर मिला, जिससे खेल जगत में पाकुड़ का नाम रोशन हुआ। इस भावनात्मक अवसर पर स्व. ओंकारनाथ साह की सुपुत्री श्रीमती दीपाली साह भी मौजूद थीं, जिन्होंने अपने पिता की खेल विरासत को आगे बढ़ाते हुए खिलाड़ियों के अभ्यास और प्रोत्साहन के लिए एक वॉलीबॉल और एक वॉलीबॉल नेट भेंट किया। उन्होंने कहा कि उनके पिता हमेशा अनुशासन, समर्पण और खेल भावना के साथ खेलने की प्रेरणा देते थे, और आज युवाओं को मैदान में खेलते देखना ही उनके लिए सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है। जिला वॉलीबॉल संघ, पाकुड़ के सचिव हिसाबी राय ने आयोजन की सफलता के लिए सभी अतिथियों, पूर्व खिलाड़ियों और युवाओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि स्व. ओंकारनाथ साह का योगदान पाकुड़ के खेल इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेगा, और संघ भविष्य में भी युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करने के लिए ऐसे आयोजन करता रहेगा। स्मृति प्रतियोगिता को देखने के लिए संजय कुमार राय, उजय राय, लाल्टू भौमिक, अविनाश पंडित, निर्भय सिंह, मिठू ठाकुर चौधरी सहित शहर के अनेक खेल प्रेमी और गणमान्य नागरिक रेलवे मैदान में उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल स्व. ओंकारनाथ साह को श्रद्धांजलि थी, बल्कि इसने जिले में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने का भी संदेश दिया।
पाकुड़ जिला वॉलीबॉल संघ ने स्थानीय रेलवे मैदान में पाकुड़ के वॉलीबॉल खेल के प्रणेता स्व. ओंकारनाथ साह की 10वीं पुण्यतिथि पर एक भव्य स्मृति वॉलीबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया। इस अवसर पर उनके समकालीन खिलाड़ी, पुराने सहयोगी और जिले के कई युवा खिलाड़ी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत स्व. ओंकारनाथ साह के चित्र पर माल्यार्पण और श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। इस दौरान उनके पुराने सहयोगियों लक्ष्मी नारायण शाह, संजय कुमार शाह और संजय कुमार ओझा ने स्व. साह के साथ बिताए संस्मरण साझा करते हुए बताया कि उन्होंने पाकुड़ में वॉलीबॉल खेल को एक नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके अथक प्रयासों के कारण जिले के कई खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर मिला, जिससे खेल जगत में पाकुड़ का नाम रोशन हुआ। इस भावनात्मक अवसर पर स्व. ओंकारनाथ साह की सुपुत्री श्रीमती दीपाली साह भी मौजूद थीं, जिन्होंने अपने पिता की खेल विरासत को आगे बढ़ाते हुए खिलाड़ियों के अभ्यास और प्रोत्साहन के लिए एक वॉलीबॉल और एक वॉलीबॉल नेट भेंट किया। उन्होंने कहा कि उनके पिता हमेशा अनुशासन, समर्पण और खेल भावना के साथ खेलने की प्रेरणा देते थे, और आज युवाओं को मैदान में खेलते देखना ही उनके लिए सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है। जिला वॉलीबॉल संघ, पाकुड़ के सचिव हिसाबी राय ने आयोजन की सफलता के लिए सभी अतिथियों, पूर्व खिलाड़ियों और युवाओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि स्व. ओंकारनाथ साह का योगदान पाकुड़ के खेल इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेगा, और संघ भविष्य में भी युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करने के लिए ऐसे आयोजन करता रहेगा। स्मृति प्रतियोगिता को देखने के लिए संजय कुमार राय, उजय राय, लाल्टू भौमिक, अविनाश पंडित, निर्भय सिंह, मिठू ठाकुर चौधरी सहित शहर के अनेक खेल प्रेमी और गणमान्य नागरिक रेलवे मैदान में उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल स्व. ओंकारनाथ साह को श्रद्धांजलि थी, बल्कि इसने जिले में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने का भी संदेश दिया।
- झारखंड के पाकुड़ में जन्म प्रमाण पत्र के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जहाँ ग्रामीणों ने एक कैफे संचालक को रंगे हाथ पकड़ा और उसे पुलिस के हवाले कर दिया। आरोप है कि यह संचालक रामचंद्रपुर में पिछले कई महीनों से फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने का काम कर रहा था। इन जाली प्रमाण पत्रों के बदले वह ग्रामीणों से दो हजार से दस हजार रुपये तक की वसूली करता था। इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश तब हुआ जब कुछ ग्रामीण इन प्रमाण पत्रों का उपयोग कर आधार कार्ड बनवाने पहुँचे और जाँच के दौरान उनके सभी दस्तावेज फर्जी पाए गए। धोखाधड़ी का पता चलते ही, आक्रोशित ग्रामीणों ने एक जाल बिछाकर आरोपी संचालक को धर दबोचा। फिलहाल, पुलिस और अंचलाधिकारी इस पूरे मामले की गहनता से जाँच कर रहे हैं।1
- महेशपुर प्रखंड के प्रतापपुर गाँव निवासी अरुणा टुडू का शव तमिलनाडु से उनके पैतृक गाँव तक पहुँचाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, जो झामुमो केंद्रीय समिति सदस्य उपासना मरांडी के विशेष प्रयासों के कारण संभव हो पाया। दुख की इस घड़ी में, उपासना मरांडी ने शोकाकुल परिवार के साथ खड़े होकर न सिर्फ अपनी संवेदनाएँ व्यक्त कीं, बल्कि उन्हें हरसंभव सहयोग का भरोसा भी दिलाया। ग्रामीणों और परिजनों ने उनके इस सराहनीय और मानवीय कार्य के लिए आभार प्रकट किया, जिसने संवेदनशीलता की एक मिसाल कायम करते हुए मानवता की जिम्मेदारी निभाई।4
- उधवा के राधानगर थाना क्षेत्र स्थित पूर्वी उधवा पंचायत में पंचायत सचिवालय के पास उर्दू प्राथमिक विद्यालय बाबू टोला का बंद पड़ा भवन इन दिनों नशेरियों का अड्डा बन गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां प्रतिदिन दिन-रात असामाजिक तत्व जमा होते हैं और विशेषकर ब्राउन शुगर जैसे नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं। नशेड़ियों का कहना है कि यह भवन उनके लिए नशा करने की एक बहुत अच्छी जगह है, जबकि यह पंचायत सचिवालय के बगल में ही है। यह विद्यालय पूर्व की झारखंड की रघुवर सरकार के कार्यकाल के दौरान दूसरे विद्यालय में विलय कर दिया गया था, जिसके चलते सभी बच्चे और शिक्षक स्थानांतरित हो गए और विद्यालय बंद हो गया। हालांकि, चुनाव आयोग इस भवन का उपयोग विधानसभा और पंचायत चुनावों के दौरान मतदाताओं के लिए मतदान केंद्र के रूप में भी करता रहा है। ग्रामीणों ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा है कि युवा इस नशे की लत का शिकार हो रहे हैं, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन से इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई करने की मांग की है। राधानगर थाना प्रभारी अमर कुमार मिंज ने इस संबंध में बताया कि मामला उनके संज्ञान में आ गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इसकी जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।4
- बिहार और झारखंड में कचरा उठाने वाले बच्चों के जीवनयापन और उनकी दयनीय स्थिति पर सवाल उठाते हुए, एक बच्चे ने सीधे 'सिस्टम' से प्रश्न पूछा है। यह बच्चा जानना चाहता है कि क्या कचरा उठाने वाले बच्चों को शिक्षा पाने का अधिकार नहीं है और उनका जीवन यापन किस प्रकार होता है। यह मार्मिक सवाल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।1
- यह पोस्ट इस संदेश को उजागर करती है कि 'वादा नहीं, काम बोलता है'। इसमें सरकारी फंड का इंतजार किए बिना, जनता की परेशानी को दूर करने के लिए मोरंग डलवाने की चुनौती स्वीकार करने की बात कही गई है। यह कदम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान की दिशा में एक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।1
- झारखंड के साहिबगंज जिले में मदन रोड पर सड़क जाम हो गया है। इस जाम के कारण इलाके में आवागमन में परेशानी बढ़ गई है, क्योंकि यह मार्ग झारखंड राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा है।1
- न्यूरॉन शरीर की तंत्रिका तंत्र की मूल कोशिका (नर्व सेल) होती है, जो मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और नसों में पाई जाती है। इसका मुख्य कार्य शरीर के एक भाग से दूसरे भाग तक संदेश (सिग्नल) पहुँचाना है। यह सोचने, याद रखने, महसूस करने और शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। न्यूरॉन के तीन प्रमुख भाग होते हैं: डेंड्राइट, कोशिका शरीर और एक्सॉन। यदि “Niuron” शब्द से किसी दवा, ऐप या किसी अन्य चीज़ के नाम के बारे में जानकारी पूछी जा रही है, तो उसके लिए और अधिक विवरण की आवश्यकता होगी।1
- झारखंड में इस समय बारिश का मौसम चल रहा है, जिसके साथ बिजली गिरने की गतिविधियाँ भी देखी जा रही हैं।1