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kamlesh Kumar

5 hrs ago
user_Kamlesh kumar
Kamlesh kumar
Itkhori, Chatra•
5 hrs ago

kamlesh Kumar

More news from Chatra and nearby areas
  • kamlesh Kumar
    1
    kamlesh Kumar
    user_Kamlesh kumar
    Kamlesh kumar
    Itkhori, Chatra•
    5 hrs ago
  • चतरा जिले के सिंघानी गांव में ईद की खुशिया बदली मातम में महुआ चुनने के क्रम में एक महिला की हुई वज्रपात से मौत, दो अन्य हुए घायल।
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    चतरा जिले के सिंघानी गांव में ईद की खुशिया बदली मातम में 
महुआ चुनने के क्रम में एक महिला की हुई वज्रपात से मौत, दो अन्य हुए घायल।
    user_Jitendra Tiwari
    Jitendra Tiwari
    पत्रकार पथलगोरा, चतरा, झारखंड•
    4 hrs ago
  • Post by M.Haque Bharti
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    Post by M.Haque Bharti
    user_M.Haque Bharti
    M.Haque Bharti
    Social worker Katkamsandi, Hazaribagh•
    16 hrs ago
  • *नवरात्र के दूसरे दिन सर्वार्थसिद्धि योग का महासंयोग, जानें शुभ रंग, माता ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग, पूजा विधि और कथा* *धनबाद :* नवरात्रि के दूसरे दिन यानी कि चैत्र शुक्‍ल द्वितीया तिथि को माता ब्रह्मचारिणी की पूजा करने का विधान है. साथ ही साल 2026 की चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन हरे रंग के कपड़े पहनना शुभ फल देगा. साथ ही इस साल 20 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है. इस शुभ योग में किए गए काम सफल होते हैं. पूजा का ज्‍यादा फल मिलता है. 20 मार्च 2026, शुक्रवार को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के लिए 3 शुभ मुहूर्त हैं. ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04:57 बजे से सुबह 05:45 बजे तक अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:10 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक अमृत काल - दोपहर 12:11 बजे से दोपहर 01:41 बजे तक *नवरात्रि के दूसरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग* इस साल चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन 20 मार्च 2026 को सर्वार्थसिद्धि योग का अतिशुभ संयोग बन रहा है. धर्म और ज्‍योतिष में सर्वार्थसिद्धि योग को बेहत शुभ माना गया है. सर्वार्थसिद्धि योग 20 मार्च 2026 की सुबह 04:04 बजे से प्रारंभ होकर 21 मार्च 2026 के तड़के 02:27 तब रहेगा. *ब्रह्मचारिणी देवी पूजा भोग* ब्रह्मचारिणी देवी की विधि-विधान से पूजा करें. देवी का पंचामृत स्नान कराएं, फिर पीले और सफेद फूल अर्पित करें. माला पहनाएं. अक्षत, कुमकुम, सिन्दूर, अर्पित करें. साथ ही माता ब्रह्मचारिणी को उनका प्रिय भोग लगाएं. ब्रह्मचारिणी देवी को शक्‍कर बेहद प्रिय है इसलिए उनकी पूजा सात्विक चीजों फल और चीनी का भोग लगाएं. भोग लगाने के बाद चीनी ब्राह्मण को दान में दे दें. *ब्रह्मचारिणी देवी की कथा* मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं ब्रह्मचारिणी देवी. यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है. मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है. इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है. वहीं ब्रह्मचारिणी शब्‍द से अर्थ है कि तप की चारिणी यानी कठोर तप करने वाली. देवी दुर्गा का यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य है. इस देवी के दाएं हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में यह कमण्डल धारण किए हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार पूर्वजन्म में देवी मां के इस रूप ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी. इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया. एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया. पीरियड्स के किस दिन कर सकते हैं नवरात्र की पूजा, 9 दिन के दौरान आ जाए मासिकधर्म तो व्रत करें या नहीं? दूर कर लें हर कंफ्यूजन कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे. तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं. इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए. कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं. पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया. कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया. देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा- हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की. यह तुम्हीं से ही संभव थी. तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे. अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ. जल्द ही तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाने आ रहे हैं. तब देवी ने तपस्‍या खत्‍म की. मान्‍यता है कि देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से सारे कार्य सिद्ध हो जाते हैं.(डिस्क्लेमर - प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. न्यूज़ फास्ट इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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    *नवरात्र के दूसरे दिन सर्वार्थसिद्धि योग का महासंयोग, जानें शुभ रंग, माता ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग, पूजा विधि और कथा*
*धनबाद :* नवरात्रि के दूसरे दिन यानी कि चैत्र शुक्‍ल द्वितीया तिथि को माता ब्रह्मचारिणी की पूजा करने का विधान है. साथ ही साल 2026 की चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन हरे रंग के कपड़े पहनना शुभ फल देगा.
साथ ही इस साल 20 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है. इस शुभ योग में किए गए काम सफल होते हैं. पूजा का ज्‍यादा फल मिलता है.
20 मार्च 2026, शुक्रवार को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के लिए 3 शुभ मुहूर्त हैं.
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04:57 बजे से सुबह 05:45 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:10 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक
अमृत काल - दोपहर 12:11 बजे से दोपहर 01:41 बजे तक
*नवरात्रि के दूसरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग*
इस साल चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन 20 मार्च 2026 को सर्वार्थसिद्धि योग का अतिशुभ संयोग बन रहा है. धर्म और ज्‍योतिष में सर्वार्थसिद्धि योग को बेहत शुभ माना गया है. सर्वार्थसिद्धि योग 20 मार्च 2026 की सुबह 04:04 बजे से प्रारंभ होकर 21 मार्च 2026 के तड़के 02:27 तब रहेगा.
*ब्रह्मचारिणी देवी पूजा भोग*
ब्रह्मचारिणी देवी की विधि-विधान से पूजा करें. देवी का पंचामृत स्नान कराएं, फिर पीले और सफेद फूल अर्पित करें. माला पहनाएं. अक्षत, कुमकुम, सिन्दूर, अर्पित करें.
साथ ही माता ब्रह्मचारिणी को उनका प्रिय भोग लगाएं. ब्रह्मचारिणी देवी को शक्‍कर बेहद प्रिय है इसलिए उनकी पूजा सात्विक चीजों फल और चीनी का भोग लगाएं. भोग लगाने के बाद चीनी ब्राह्मण को दान में दे दें.
*ब्रह्मचारिणी देवी की कथा*
मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं ब्रह्मचारिणी देवी. यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है. मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है. इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है. वहीं ब्रह्मचारिणी शब्‍द से अर्थ है कि तप की चारिणी यानी कठोर तप करने वाली. देवी दुर्गा का यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य है. इस देवी के दाएं हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में यह कमण्डल धारण किए हैं.
पौराणिक कथाओं के अनुसार पूर्वजन्म में देवी मां के इस रूप ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी. इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया. एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया.
पीरियड्स के किस दिन कर सकते हैं नवरात्र की पूजा, 9 दिन के दौरान आ जाए मासिकधर्म तो व्रत करें या नहीं? दूर कर लें हर कंफ्यूजन
कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे. तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं. इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए. कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं. पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया.
कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया. देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा- हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की. यह तुम्हीं से ही संभव थी. तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे. अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ. जल्द ही तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाने आ रहे हैं. तब देवी ने तपस्‍या खत्‍म की. मान्‍यता है कि देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से सारे कार्य सिद्ध हो जाते हैं.(डिस्क्लेमर - प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. न्यूज़ फास्ट इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
    user_Public News JH
    Public News JH
    Local News Reporter Chisti Nagar, Hazaribagh•
    2 hrs ago
  • बैद्यनाथ धाम में भक्तों को धकेलने का वीडियो, निशिकांत दुबे ने CM सोरेन को लपेटा !
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    बैद्यनाथ धाम में भक्तों को धकेलने का वीडियो, निशिकांत दुबे ने CM सोरेन को लपेटा !
    user_News Xpose ( Jishan Raj)
    News Xpose ( Jishan Raj)
    Press Azad Mahalla, Hazaribagh•
    2 hrs ago
  • -- मस्जिदों में उमड़ी नमाजियों की भीड़, अमन-चैन और खुशहाली के लिए मांगी गई दुआएं -- अलविदा जुमा आत्ममंथन, इंसानियत और एकता का है पैगाम: चीफ काजी मुफ्ती अब्दुल जलील  --- रमजान हमें सब्र, त्याग और इंसानियत का पाठ सिखाता है: चीफ काजी एदार-ए-शरिया हजारीबाग  --- हजारीबाग। पवित्र रमजान महीने के आखिरी शुक्रवार ‘अलविदा जुमा’ के अवसर पर हजारीबाग शहर में धार्मिक आस्था और भाईचारे का अद्भुत नजारा देखने को मिला। इस वर्ष अलविदा जुमा के साथ ही रमजान का अंतिम दिन होने से इसका महत्व और भी बढ़ गया। शहर की प्रमुख मस्जिदों में नमाजियों की भारी भीड़ उमड़ी, जहां लोगों ने पूरे श्रद्धा भाव से नमाज अदा कर अल्लाह से अमन, शांति और तरक्की की दुआ मांगी। शहर के विभिन्न इलाकों की मस्जिदों में विशेष नमाज का आयोजन किया गया। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ‘जुमात-उल-विदा’ की मुबारकबाद दी। इस अवसर पर मुस्लिम धर्मावलंबियों में खास उत्साह देखने को मिला और पूरे दिन इबादत का सिलसिला जारी रहा। धार्मिक विद्वानों ने अपने संदेश में कहा कि रमजान आत्मशुद्धि, संयम और इंसानियत का महीना है, जो हमें जरूरतमंदों की मदद करने और भाईचारे को बढ़ावा देने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी से समाज में प्रेम और सौहार्द बनाए रखने की अपील की। गौरतलब है कि इस बार वर्षों बाद ऐसा संयोग बना है जब अलविदा जुमा और रमजान का आखिरी दिन एक ही दिन पड़ा। वहीं, मुल्क भर में ईद-उल-फितर का त्योहार 21 मार्च को मनाया जाएगा, जिसकी तैयारियां भी हजारीबाग शहर में जोरों पर हैं। बाजारों में खरीदारी को लेकर चहल-पहल बढ़ गई है और लोग अपने-अपने घरों में ईद की तैयारियों में जुटे हैं। अलविदा जुमा के मौके पर शहरवासियों ने एक-दूसरे को मुबारकबाद देते हुए देश और समाज की तरक्की एवं खुशहाली की दुआएं मांगी। हजारीबाग शहर की जामा मस्जिद में एदार-ए-शरिया हजारीबाग के चीफ काजी सह जामा मस्जिद के खतीब व इमाम मुफ्ती अब्दुल जलील सादी ने अलविदा जुम्मा की नमाज पढ़ाई। इस मौके पर उन्होंने अपने व्याख्यान में कहा कि अलविदा जुमा हमें आत्ममंथन का अवसर देता है, यह दिन केवल इबादत का नहीं, बल्कि अपने अंदर झांकने और अपनी कमियों को सुधारने का भी है। उन्होंने कहा कि रमजान हमें सब्र, त्याग और इंसानियत का पाठ सिखाता है। जरूरतमंदों की मदद करना, गरीबों के साथ खड़ा होना और समाज में भाईचारा कायम रखना ही इस महीने का असली मकसद है। उन्होंने लोगों से अपील की कि रमजान के बाद भी इन नेकियों को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाएं और समाज में अमन व मोहब्बत का पैगाम फैलाएं। इस तरह अलविदा जुमा ने हजारीबाग में न केवल इबादत की रौनक बिखेरी, बल्कि एकता, भाईचारे और इंसानियत का मजबूत संदेश भी दिया। रमजान के अंतिम दिन और जुम्मा तुल विदा के मुबारक मौके पर जुम्मा तुल विदा की नमाज अदा करने वाले 06 साल के नन्हे रोजेदार मोहम्मद कोनैन रजा ने दिल को छू लेने वाली बेहद रूहानी अंदाज में कहा कि हम लोगों पर अल्लाह का एहसान और करम है कि आज हम लोग रमजान महीने की अलविदा जुम्मा की नमाज अदा कर रहे हैं और इंशाल्लाह ईद की नमाज भी हम लोग अदा करेंगे और सभी से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद पेश करेंगे। जुम्मा-तुल-विदा के इस मुबारक मौके पर शहर की जामा मस्जिद सहित मस्जिद सुल्तान-उल-हिंद (पगमिल), मस्जिद इब्न-ए-रशीद (लोहसिंघना), हाशमिया कॉलोनी की मस्जिद ए हाशमी, नूरी मस्जिद लोहसिंघना, मस्जिद -ए- आयशा पगमिल (नसीम कॉलोनी), मस्जिद आला हज़रत हाशमिया कालोनी पगमिल, मस्जिद -ए- अरक़म अंसार नगर पगमिल, अजमेरी मस्जिद चिश्तिया मोहल्ला, अल मतीन मस्जिद कल्लू चौक, मदीना मस्जिद ग्वालटोली चौक, गौसिया मस्जिद मिल्लत कालोनी, गौसिया मस्जिद लाखे, मस्जिद -ए- गौसिया गुलशन -ए- बगदाद मंडई कलां, छोटी मस्जिद मंडई कलां, जामा मस्जिद मंडई कलां, मस्जिद -ए- हेरा कोलघट्टी, मस्जिद -ए- अक्सा फिरदौस कॉलोनी कोलघट्टी, नूरा मस्जिद, सरदार चौक मस्जिद, बड़ी बाज़ार ईदगाह मस्जिद, एक नंबर टाउन मस्जिद बड़ी बाजार, मस्जिद -ए- ताज-उश-शरीया खिरगांव, खिरगांव जामा मस्जिद, खानकाह मस्जिद हबीबी नगर खिरगांव, नवाबगंज मस्जिद इंद्रपुरी, औलिया मस्जिद तकिया शरीफ नवाबगंज, कचहरी मस्जिद डिस्ट्रिक्ट बोर्ड चौक, मस्जिद -ए- उमर रोमी, मटवारी मस्जिद, पेलावल जामा मस्जिद पेलावल शरीफ, मस्जिद -ए- इब्राहीमी पेलावल शरीफ, मस्जिद -ए- मोहसिन आज़ाद नगर पेलावल शरीफ, मस्जिद -ए- अंबिया गदोखर रोड पेलावल शरीफ, मदनी मस्जिद मदरसा हुसैनिया पेलावल शरीफ, आशिक -ए- रसूल मस्जिद रहमत नगर पेलावल शरीफ, मोती मस्जिद अमृत नगर, रजा मस्जिद सिल्वार, जामा मस्जिद बहेरी, ओरिया मस्जिद ओरिया, जामा मस्जिद कुद, इमाम -ए- आज़म मस्जिद मसरातु, मस्जिद -ए- रजा जामा मस्जिद पसई, नूरी जामा मस्जिद हरहद, नूरी जामा मस्जिद गदोखर, मस्जिद गौसिया हुसैनी मोहल्ला गदोखर, मस्जिद -ए- बेलाली बलियंद सहित शहर और आसपास की सभी मस्जिदों में नमाज अदा की गई।
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मस्जिदों में उमड़ी नमाजियों की भीड़, अमन-चैन और खुशहाली के लिए मांगी गई दुआएं
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अलविदा जुमा आत्ममंथन, इंसानियत और एकता का है पैगाम: चीफ काजी मुफ्ती अब्दुल जलील 
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रमजान हमें सब्र, त्याग और इंसानियत का पाठ सिखाता है: चीफ काजी एदार-ए-शरिया हजारीबाग 
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हजारीबाग। पवित्र रमजान महीने के आखिरी शुक्रवार ‘अलविदा जुमा’ के अवसर पर हजारीबाग शहर में धार्मिक आस्था और भाईचारे का अद्भुत नजारा देखने को मिला। इस वर्ष अलविदा जुमा के साथ ही रमजान का अंतिम दिन होने से इसका महत्व और भी बढ़ गया। शहर की प्रमुख मस्जिदों में नमाजियों की भारी भीड़ उमड़ी, जहां लोगों ने पूरे श्रद्धा भाव से नमाज अदा कर अल्लाह से अमन, शांति और तरक्की की दुआ मांगी। शहर के विभिन्न इलाकों की मस्जिदों में विशेष नमाज का आयोजन किया गया। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ‘जुमात-उल-विदा’ की मुबारकबाद दी। इस अवसर पर मुस्लिम धर्मावलंबियों में खास उत्साह देखने को मिला और पूरे दिन इबादत का सिलसिला जारी रहा। धार्मिक विद्वानों ने अपने संदेश में कहा कि रमजान आत्मशुद्धि, संयम और इंसानियत का महीना है, जो हमें जरूरतमंदों की मदद करने और भाईचारे को बढ़ावा देने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी से समाज में प्रेम और सौहार्द बनाए रखने की अपील की। गौरतलब है कि इस बार वर्षों बाद ऐसा संयोग बना है जब अलविदा जुमा और रमजान का आखिरी दिन एक ही दिन पड़ा। वहीं, मुल्क भर में ईद-उल-फितर का त्योहार 21 मार्च को मनाया जाएगा, जिसकी तैयारियां भी हजारीबाग शहर में जोरों पर हैं। बाजारों में खरीदारी को लेकर चहल-पहल बढ़ गई है और लोग अपने-अपने घरों में ईद की तैयारियों में जुटे हैं। अलविदा जुमा के मौके पर शहरवासियों ने एक-दूसरे को मुबारकबाद देते हुए देश और समाज की तरक्की एवं खुशहाली की दुआएं मांगी। हजारीबाग शहर की जामा मस्जिद में एदार-ए-शरिया हजारीबाग के चीफ काजी सह जामा मस्जिद के खतीब व इमाम मुफ्ती अब्दुल जलील सादी ने अलविदा जुम्मा की नमाज पढ़ाई। इस मौके पर उन्होंने अपने व्याख्यान में कहा कि अलविदा जुमा हमें आत्ममंथन का अवसर देता है, यह दिन केवल इबादत का नहीं, बल्कि अपने अंदर झांकने और अपनी कमियों को सुधारने का भी है। उन्होंने कहा कि रमजान हमें सब्र, त्याग और इंसानियत का पाठ सिखाता है। जरूरतमंदों की मदद करना, गरीबों के साथ खड़ा होना और समाज में भाईचारा कायम रखना ही इस महीने का असली मकसद है। उन्होंने लोगों से अपील की कि रमजान के बाद भी इन नेकियों को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाएं और समाज में अमन व मोहब्बत का पैगाम फैलाएं। इस तरह अलविदा जुमा ने हजारीबाग में न केवल इबादत की रौनक बिखेरी, बल्कि एकता, भाईचारे और इंसानियत का मजबूत संदेश भी दिया।
रमजान के अंतिम दिन और जुम्मा तुल विदा के मुबारक मौके पर जुम्मा तुल विदा की नमाज अदा करने वाले 06 साल के नन्हे रोजेदार मोहम्मद कोनैन रजा ने दिल को छू लेने वाली बेहद रूहानी अंदाज में कहा कि हम लोगों पर अल्लाह का एहसान और करम है कि आज हम लोग रमजान महीने की अलविदा जुम्मा की नमाज अदा कर रहे हैं और इंशाल्लाह ईद की नमाज भी हम लोग अदा करेंगे और सभी से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद पेश करेंगे।
जुम्मा-तुल-विदा के इस मुबारक मौके पर शहर की जामा मस्जिद सहित मस्जिद सुल्तान-उल-हिंद (पगमिल), मस्जिद इब्न-ए-रशीद (लोहसिंघना), हाशमिया कॉलोनी की मस्जिद ए हाशमी, नूरी मस्जिद लोहसिंघना, मस्जिद -ए- आयशा पगमिल (नसीम कॉलोनी), मस्जिद आला हज़रत हाशमिया कालोनी पगमिल, मस्जिद -ए- अरक़म अंसार नगर पगमिल, अजमेरी मस्जिद चिश्तिया मोहल्ला, अल मतीन मस्जिद कल्लू चौक, मदीना मस्जिद ग्वालटोली चौक, गौसिया मस्जिद मिल्लत कालोनी, गौसिया मस्जिद लाखे, मस्जिद -ए- गौसिया गुलशन -ए- बगदाद मंडई कलां, छोटी मस्जिद मंडई कलां, जामा मस्जिद मंडई कलां, मस्जिद -ए- हेरा कोलघट्टी, मस्जिद -ए- अक्सा फिरदौस कॉलोनी कोलघट्टी, नूरा मस्जिद, सरदार चौक मस्जिद, बड़ी बाज़ार ईदगाह मस्जिद, एक नंबर टाउन मस्जिद बड़ी बाजार, मस्जिद -ए- ताज-उश-शरीया खिरगांव, खिरगांव जामा मस्जिद, खानकाह मस्जिद हबीबी नगर खिरगांव, नवाबगंज मस्जिद इंद्रपुरी, औलिया मस्जिद तकिया शरीफ नवाबगंज, कचहरी मस्जिद डिस्ट्रिक्ट बोर्ड चौक, मस्जिद -ए- उमर रोमी, मटवारी मस्जिद, पेलावल जामा मस्जिद पेलावल शरीफ, मस्जिद -ए- इब्राहीमी पेलावल शरीफ,
मस्जिद -ए- मोहसिन आज़ाद नगर पेलावल शरीफ, मस्जिद -ए- अंबिया गदोखर रोड पेलावल शरीफ, मदनी मस्जिद मदरसा हुसैनिया पेलावल शरीफ, आशिक -ए- रसूल मस्जिद रहमत नगर पेलावल शरीफ, मोती मस्जिद अमृत नगर, रजा मस्जिद सिल्वार, जामा मस्जिद बहेरी, ओरिया मस्जिद ओरिया, जामा मस्जिद कुद, इमाम -ए- आज़म मस्जिद मसरातु, मस्जिद -ए- रजा जामा मस्जिद पसई, नूरी जामा मस्जिद हरहद, नूरी जामा मस्जिद गदोखर, मस्जिद गौसिया हुसैनी मोहल्ला गदोखर, मस्जिद -ए- बेलाली बलियंद सहित शहर और आसपास की सभी मस्जिदों में नमाज अदा की गई।
    user_Ejaj Alam
    Ejaj Alam
    Press हजारीबाग, हजारीबाग, झारखंड•
    2 hrs ago
  • लोकतंत्र की आवाज़ निशांत तिवारी प्रभारी झारखंड चतरा (झारखंड):-चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड अंतर्गत डुमरी कला पंचायत के ग्राम बेला में बीते कई महीनों से क्रेशर एवं माइंस संचालकों द्वारा की जा रही अनियंत्रित और भयावह ब्लास्टिंग ने आम जनजीवन को गहरे संकट में डाल दिया है। आज दिनांक 20 मार्च 2026 को हुए एक अत्यंत खतरनाक और जोरदार विस्फोट (ब्लास्ट) ने पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। यह घटना कोई एक दिन की नहीं, बल्कि लगातार हो रही अवैध गतिविधियों का परिणाम है, जिससे ग्राम बेला के सैकड़ों परिवार भय, असुरक्षा और प्रशासनिक उपेक्षा के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं। आज हुए इस भीषण ब्लास्टिंग के कारण ग्राम बेला निवासी श्री उमेश कुमार यादव के कच्चे (मिट्टी के) घर को गंभीर क्षति पहुँची है। उनके घर की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं, जिससे उनका परिवार खुले आसमान के नीचे जीवन जीने को विवश हो सकता है। इतना ही नहीं, विस्फोट के कारण पत्थरों के बड़े-बड़े टुकड़े उछलकर उनके घर के आंगन और छत पर गिरे, जिससे जान-माल की भारी क्षति होते-होते बची। यदि यह पत्थर सीधे घर के अंदर गिरते, तो किसी भी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता था। स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विस्फोट के पहले डुमरी कला पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि जो स्वयं को संचालनकर्ता के रूप में प्रस्तुत करते हैं,ग्राम बेला में घुसकर आए और उमेश यादव के परिवार सहित अन्य ग्रामीणों को धमकी भरे लहजे में घर खाली करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि "ब्लास्ट होने वाला है, तुम लोग घर से बाहर निकल जाओ। अगर घर दब गया या कोई नुकसान हुआ तो इसकी जिम्मेदारी हम लोग नहीं लेंगे।" यह कथन न केवल अमानवीय है, बल्कि यह दर्शाता है कि किस प्रकार प्रशासनिक संरक्षण में अवैध खनन और ब्लास्टिंग को खुलेआम अंजाम दिया जा रहा है। एक ओर ग्रामीणों की सुरक्षा की कोई चिंता नहीं, वहीं दूसरी ओर अधिक से अधिक पत्थर निकालकर मुनाफा कमाने की होड़ ने मानव जीवन को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार, यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार इसी प्रकार की ब्लास्टिंग की गई है, जिससे घरों में दरारें पड़ चुकी हैं, दीवारें कमजोर हो गई हैं और लोग मानसिक तनाव में जी रहे हैं। बच्चों में भय और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, जैसे दस्त (डायरिया) जैसी बीमारियाँ भी बढ़ने लगी हैं, जो इस प्रदूषित और असुरक्षित वातावरण का परिणाम है। ग्राम बेला के गरीब और असहाय ग्रामीणों ने कई बार इसका विरोध किया, लेकिन हर बार उन्हें दबाने और शांत कराने का प्रयास किया गया। मौके पर कुछ तथाकथित "मैनेजिंग करने वाले लोग" पहुँचते हैं और मामले को दबाने का प्रयास करते हैं, जिससे सच्चाई सामने नहीं आ पाती। यह पूरी व्यवस्था एक संगठित तरीके से काम कर रही है, जिसमें स्थानीय प्रभावशाली लोग, क्रेशर संचालक और माइंस संचालक शामिल हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि डुमरी कला पंचायत के ही निवासी श्री श्रीराम पांडेय जी द्वारा इस गंभीर मुद्दे को लेकर कई बार लिखित आवेदन जिला प्रशासन, उपायुक्त (डीसी) तथा संबंधित पदाधिकारियों को दिए जा चुके हैं। ईमेल के माध्यम से भी लगातार शिकायतें भेजी गई हैं, लेकिन अब तक किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। यह प्रशासनिक उदासीनता और निष्क्रियता को उजागर करता है, जो सीधे-सीधे आम जनता के जीवन को खतरे में डाल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि मुखिया प्रतिनिधि द्वारा खुलेआम यह कहा जाता है कि "जो करना है कर लो, जो उखाड़ना है उखाड़ लो, यहां ब्लास्टिंग होगा और तुम लोगों को कहीं और जाना है तो जाओ, हमें कोई फर्क नहीं पड़ता।" यह बयान न केवल कानून व्यवस्था को चुनौती देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि उन्हें किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई का भय नहीं है। यह पूरा मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है— क्या इन क्रेशर और माइंस संचालकों के पास वैध लाइसेंस और पर्यावरणीय अनुमति (Environment Clearance) है? क्या ब्लास्टिंग के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है? क्या स्थानीय प्रशासन और खनन विभाग इस अवैध गतिविधि से अनभिज्ञ है या जानबूझकर आंखें मूंदे हुए है? क्या ग्रामीणों के जीवन और संपत्ति की कोई कीमत नहीं है? यह स्पष्ट है कि ग्राम बेला और डुमरी कला पंचायत में जो कुछ भी हो रहा है, वह पूरी तरह से कानून और मानवाधिकारों का उल्लंघन है। भारत के संविधान में प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित जीवन जीने का अधिकार दिया गया है, लेकिन यहां के ग्रामीणों को यह मूल अधिकार भी नहीं मिल पा रहा है। अतः इस प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से हम जिला प्रशासन, राज्य सरकार तथा संबंधित विभागों से निम्नलिखित मांगें करते हैं— 1. ग्राम बेला में चल रहे सभी अवैध क्रेशर और माइंस संचालन की तत्काल उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। 2. ब्लास्टिंग की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए जब तक कि सभी सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित न हो जाए। 3. जिन अधिकारियों ने अब तक शिकायतों पर कार्रवाई नहीं की, उनके खिलाफ भी विभागीय जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए। 4. प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा (compensation) दिया जाए और उनके घरों की मरम्मत या पुनर्निर्माण कराया जाए। 5. ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थायी समाधान निकाला जाए। 6. दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। यदि शीघ्र ही इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो ग्राम बेला और आसपास के ग्रामीण व्यापक जन आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। यह केवल एक गांव की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र में फैल रही अवैध खनन माफिया की समस्या है, जो धीरे-धीरे ग्रामीण जीवन, पर्यावरण और सामाजिक व्यवस्था को नष्ट कर रही है। आज जरूरत है कि प्रशासन जागे, कानून का पालन सुनिश्चित करे और गरीब एवं असहाय जनता को न्याय दिलाए।
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    लोकतंत्र की आवाज़
निशांत तिवारी
प्रभारी झारखंड 
चतरा (झारखंड):-चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड अंतर्गत डुमरी कला पंचायत के ग्राम बेला में बीते कई महीनों से क्रेशर एवं माइंस संचालकों द्वारा की जा रही अनियंत्रित और भयावह ब्लास्टिंग ने आम जनजीवन को गहरे संकट में डाल दिया है। आज दिनांक 20 मार्च 2026 को हुए एक अत्यंत खतरनाक और जोरदार विस्फोट (ब्लास्ट) ने पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। यह घटना कोई एक दिन की नहीं, बल्कि लगातार हो रही अवैध गतिविधियों का परिणाम है, जिससे ग्राम बेला के सैकड़ों परिवार भय, असुरक्षा और प्रशासनिक उपेक्षा के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं।
आज हुए इस भीषण ब्लास्टिंग के कारण ग्राम बेला निवासी श्री उमेश कुमार यादव के कच्चे (मिट्टी के) घर को गंभीर क्षति पहुँची है। उनके घर की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं, जिससे उनका परिवार खुले आसमान के नीचे जीवन जीने को विवश हो सकता है। इतना ही नहीं, विस्फोट के कारण पत्थरों के बड़े-बड़े टुकड़े उछलकर उनके घर के आंगन और छत पर गिरे, जिससे जान-माल की भारी क्षति होते-होते बची। यदि यह पत्थर सीधे घर के अंदर गिरते, तो किसी भी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता था।
स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विस्फोट के पहले डुमरी कला पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि जो स्वयं को संचालनकर्ता के रूप में प्रस्तुत करते हैं,ग्राम बेला में घुसकर आए और उमेश यादव के परिवार सहित अन्य ग्रामीणों को धमकी भरे लहजे में घर खाली करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि "ब्लास्ट होने वाला है, तुम लोग घर से बाहर निकल जाओ। अगर घर दब गया या कोई नुकसान हुआ तो इसकी जिम्मेदारी हम लोग नहीं लेंगे।"
यह कथन न केवल अमानवीय है, बल्कि यह दर्शाता है कि किस प्रकार प्रशासनिक संरक्षण में अवैध खनन और ब्लास्टिंग को खुलेआम अंजाम दिया जा रहा है। एक ओर ग्रामीणों की सुरक्षा की कोई चिंता नहीं, वहीं दूसरी ओर अधिक से अधिक पत्थर निकालकर मुनाफा कमाने की होड़ ने मानव जीवन को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है।
ग्रामीणों के अनुसार, यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार इसी प्रकार की ब्लास्टिंग की गई है, जिससे घरों में दरारें पड़ चुकी हैं, दीवारें कमजोर हो गई हैं और लोग मानसिक तनाव में जी रहे हैं। बच्चों में भय और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, जैसे दस्त (डायरिया) जैसी बीमारियाँ भी बढ़ने लगी हैं, जो इस प्रदूषित और असुरक्षित वातावरण का परिणाम है।
ग्राम बेला के गरीब और असहाय ग्रामीणों ने कई बार इसका विरोध किया, लेकिन हर बार उन्हें दबाने और शांत कराने का प्रयास किया गया। मौके पर कुछ तथाकथित "मैनेजिंग करने वाले लोग" पहुँचते हैं और मामले को दबाने का प्रयास करते हैं, जिससे सच्चाई सामने नहीं आ पाती। यह पूरी व्यवस्था एक संगठित तरीके से काम कर रही है, जिसमें स्थानीय प्रभावशाली लोग, क्रेशर संचालक और माइंस संचालक शामिल हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि डुमरी कला पंचायत के ही निवासी श्री श्रीराम पांडेय जी द्वारा इस गंभीर मुद्दे को लेकर कई बार लिखित आवेदन जिला प्रशासन, उपायुक्त (डीसी) तथा संबंधित पदाधिकारियों को दिए जा चुके हैं। ईमेल के माध्यम से भी लगातार शिकायतें भेजी गई हैं, लेकिन अब तक किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। यह प्रशासनिक उदासीनता और निष्क्रियता को उजागर करता है, जो सीधे-सीधे आम जनता के जीवन को खतरे में डाल रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि मुखिया प्रतिनिधि द्वारा खुलेआम यह कहा जाता है कि "जो करना है कर लो, जो उखाड़ना है उखाड़ लो, यहां ब्लास्टिंग होगा और तुम लोगों को कहीं और जाना है तो जाओ, हमें कोई फर्क नहीं पड़ता।" यह बयान न केवल कानून व्यवस्था को चुनौती देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि उन्हें किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई का भय नहीं है।
यह पूरा मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है—
क्या इन क्रेशर और माइंस संचालकों के पास वैध लाइसेंस और पर्यावरणीय अनुमति (Environment Clearance) है?
क्या ब्लास्टिंग के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है?
क्या स्थानीय प्रशासन और खनन विभाग इस अवैध गतिविधि से अनभिज्ञ है या जानबूझकर आंखें मूंदे हुए है?
क्या ग्रामीणों के जीवन और संपत्ति की कोई कीमत नहीं है?
यह स्पष्ट है कि ग्राम बेला और डुमरी कला पंचायत में जो कुछ भी हो रहा है, वह पूरी तरह से कानून और मानवाधिकारों का उल्लंघन है। भारत के संविधान में प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित जीवन जीने का अधिकार दिया गया है, लेकिन यहां के ग्रामीणों को यह मूल अधिकार भी नहीं मिल पा रहा है।
अतः इस प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से हम जिला प्रशासन, राज्य सरकार तथा संबंधित विभागों से निम्नलिखित मांगें करते हैं—
1. ग्राम बेला में चल रहे सभी अवैध क्रेशर और माइंस संचालन की तत्काल उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
2. ब्लास्टिंग की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए जब तक कि सभी सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित न हो जाए।
3. जिन अधिकारियों ने अब तक शिकायतों पर कार्रवाई नहीं की, उनके खिलाफ भी विभागीय जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए।
4. प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा (compensation) दिया जाए और उनके घरों की मरम्मत या पुनर्निर्माण कराया जाए।
5. ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थायी समाधान निकाला जाए।
6. दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए।
यदि शीघ्र ही इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो ग्राम बेला और आसपास के ग्रामीण व्यापक जन आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
यह केवल एक गांव की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र में फैल रही अवैध खनन माफिया की समस्या है, जो धीरे-धीरे ग्रामीण जीवन, पर्यावरण और सामाजिक व्यवस्था को नष्ट कर रही है। आज जरूरत है कि प्रशासन जागे, कानून का पालन सुनिश्चित करे और गरीब एवं असहाय जनता को न्याय दिलाए।
    user_Nishant Tiwari
    Nishant Tiwari
    Local News Reporter शालिग्राम राम नारायणपुर (हंटरगंज), चतरा, झारखंड•
    6 hrs ago
  • चतरा जिले के पत्थलगड्डा प्रखंड के मेराल पंचायत के जेहरा गांव में हुए वज्रपात से दो सगी बहनों की हुई मौत, पति भी गंभीर रूप से हुआ घायल। गांव में मातम का माहौल।
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    चतरा जिले के पत्थलगड्डा प्रखंड के मेराल पंचायत के जेहरा गांव में हुए वज्रपात से दो सगी बहनों की हुई मौत, पति भी गंभीर रूप से हुआ घायल। गांव में मातम का माहौल।
    user_Jitendra Tiwari
    Jitendra Tiwari
    पत्रकार पथलगोरा, चतरा, झारखंड•
    4 hrs ago
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