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kamlesh Kumar
Kamlesh Kumar
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- Post by Kamlesh Kumar1
- 02 ब्रेकिंग न्यूज़ | सिंगरौली, मध्य प्रदेश* *नगर निगम के* *राजस्वअधिकारी का कथित रिश्वत वीडियो वायरल।* *सोशल मीडिया पर सामने* *आए वीडियो से मचा हड़कंप प्रशासनिक अमले में बढ़ी हलचल, जांच की मांग तेज पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठे बड़े सवाल।*1
- एनसीएल दुधीचुआ परियोजना में निजी लोगों के शोषण का आरोप, मारपीट की घटनाओं से बढ़ा आक्रोश1
- मोरवा में कोयला खनन से बढ़ता प्रदूषण, प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग कोयला खदानों से उड़ने वाली धूल और बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण मोरवा क्षेत्र के लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। विस्थापन से पूर्व ही यहां के नागरिक सांस संबंधी रोग, आंखों में जलन, त्वचा संक्रमण और हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। लगातार बढ़ते PM2.5 और PM10 कणों के कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खतरनाक स्तर तक पहुंच रहा है, जिससे दमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों के संक्रमण और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों बढ़ी हैं। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस पार्टी के वन एवं पर्यावरण प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव अभ्युदय सिंह (डैनी) ने प्रशासन से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कोयला खनन क्षेत्रों में धूल नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग तो किया जा रहा है, लेकिन निर्धारित मानकों का पालन नहीं हो रहा है, जिससे अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आ रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि खदान क्षेत्रों में एटोमाइज्ड वॉटर मिस्ट या फॉग कैनन का उपयोग सही तकनीकी मानकों के अनुरूप किया जाए। फॉग कैनन को 45 डिग्री के कोण पर स्थापित कर उच्च दबाव के साथ बारीक पानी की बूंदों का छिड़काव किया जाना चाहिए, ताकि धूल के महीन कणों को प्रभावी ढंग से जमीन पर बैठाया जा सके। इसके अलावा खदान और ट्रांसपोर्ट मार्गों पर एंटी-स्मॉग गन की नियमित तैनाती सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कच्ची सड़कों और कोयला भंडारण स्थलों पर पर्यावरण अनुकूल रासायनिक धूल अवरोधकों का प्रयोग किया जाना चाहिए, जिससे धूल उड़ने से रोकी जा सके। खदान क्षेत्रों के आसपास घनी हरित पट्टी विकसित कर प्राकृतिक फिल्टर तैयार करने की आवश्यकता है, जो हवा की गति को कम कर धूल कणों को रोकने में सहायक हो सकती है। अभ्युदय सिंह ने प्रशासन से मांग की कि प्रदूषण के स्तर की नियमित मॉनिटरिंग कर पारदर्शी तरीके से AQI रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर लोगों की जांच और उपचार की व्यवस्था की जाए। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में जनस्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन और खनन कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे वैज्ञानिक और तकनीकी उपायों को गंभीरता से लागू कर क्षेत्र को प्रदूषण से राहत दिलाएं।2
- सिंगरौली। जियावन थाना क्षेत्र अंतर्गत एक नाबालिग किशोरी के साथ दुष्कर्म की गंभीर घटना सामने आई है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस हरकत में आई और मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।1
- करने आया हूं हम1
- Post by Buro chief Sonbhadra Kameshwar Buro Chief1
- परीक्षा देकर लौट रहे 12वीं के छात्र को सुहिरा में बाइक ने मारी टक्कर, हादसे से मची अफरा-तफरी1