अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान ने प्रजापति/कुम्हार समाज, जिसे वे देश का असली शिल्पकार बताते हैं, से 'भ्रम त्यागने' का आह्वान करते हुए उनके साथ हो रहे 'तीन धोखों' का खुलासा किया है। अभियान के अनुसार, पहला धोखा 'पहचान का' है, जहाँ तहसील में लेखपाल 'शिल्पकार' लिखने से मना कर 'प्रजापति' लिखवाने पर जोर देते हैं, जिससे 'शिल्पकार' शब्द पर आधारित आरक्षण के कारण नौकरी और एडमिशन के फॉर्म रद्द हो जाते हैं। दूसरा धोखा 'आरक्षण का' है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में यह समाज अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में है और कुछ जिलों में अनुसूचित जाति (SC) का प्रमाण पत्र बनता है, जबकि केंद्र में यह अनुसूचित जाति की सूची से बाहर है, जिसके चलते बच्चों को न तो OBC का पूरा हक मिल पाता है और न ही SC का। तीसरा 'हिस्सेदारी का धोखा' है, जहाँ 17 अति-पिछड़ी जातियों के लिए 7.5% आरक्षण की फाइलें सालों से धूल खा रही हैं और सरकार की घोषणाओं के बाद भी कोर्ट स्टे लगा देता है, जिससे 3 करोड़ लोग आज भी अपने हक से वंचित हैं। इन गंभीर मुद्दों के समाधान के लिए अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान ने तीन सूत्रीय 'संकल्प' लिया है। इसके तहत, हर जिले में 'शिल्पकार प्रमाण पत्र' एक जैसे नियमों के साथ बनाए जाने चाहिए, ताकि लेखपालों की मनमानी रुक सके। दूसरा संकल्प, 17 जातियों के लिए 7.5% अतिपिछड़ा कोटा को अध्यादेश लाकर तुरंत लागू करवाना है। तीसरा महत्वपूर्ण कदम कानूनी लड़ाई है, जिसके तहत प्रयागराज हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की जाएगी, जिसका आधार 'इंद्रा साहनी केस' और 'आशा राम वर्मा केस' होंगे। अभियान ने स्पष्ट किया है कि यह लड़ाई केवल प्रजापति समाज की नहीं है, बल्कि नाई, बढ़ई, लोहार, कहार, तेली और मल्लाह सहित सभी 17 जातियों की साझा लड़ाई है। संगठन का मानना है कि 'जब हम एकजुट होंगे, तभी लखनऊ-दिल्ली हिलेगा'। अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान, जिसके राष्ट्रीय संयोजक अनिल कुमार प्रजापति और IT सेल प्रभारी वैद्य देवेंद्र कुमार प्रजापति हैं, ने जनता से अपील की है कि यदि किसी को 'शिल्पकार' शब्द न लिखने से नुकसान हुआ है, तो 'जय शिल्पकार' लिखकर टिप्पणी करें ताकि उनकी IT सेल संपर्क कर सके और यह डेटा उनके 'ब्रह्मास्त्र' के रूप में काम आ सके। उन्होंने जोर देकर कहा है कि 'अधिकार मांगने से नहीं, एकजुट होकर छीनने से मिलते हैं।'
अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान ने प्रजापति/कुम्हार समाज, जिसे वे देश का असली शिल्पकार बताते हैं, से 'भ्रम त्यागने' का आह्वान करते हुए उनके साथ हो रहे 'तीन धोखों' का खुलासा किया है। अभियान के अनुसार, पहला धोखा 'पहचान का' है, जहाँ तहसील में लेखपाल 'शिल्पकार' लिखने से मना कर 'प्रजापति' लिखवाने पर जोर देते हैं, जिससे 'शिल्पकार' शब्द पर आधारित आरक्षण के कारण नौकरी और एडमिशन के फॉर्म रद्द हो जाते हैं। दूसरा धोखा 'आरक्षण का' है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में यह समाज अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में है और कुछ जिलों में अनुसूचित जाति (SC) का प्रमाण पत्र बनता है, जबकि केंद्र में यह अनुसूचित जाति की सूची से बाहर है, जिसके चलते बच्चों को न तो OBC का पूरा हक मिल पाता है और न ही SC का। तीसरा 'हिस्सेदारी का धोखा' है, जहाँ 17 अति-पिछड़ी जातियों के लिए 7.5% आरक्षण की फाइलें सालों से धूल खा रही हैं और सरकार की घोषणाओं के बाद भी कोर्ट स्टे लगा देता है, जिससे 3 करोड़ लोग आज भी अपने हक से वंचित हैं। इन गंभीर मुद्दों के समाधान के लिए अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान ने तीन सूत्रीय 'संकल्प' लिया है। इसके तहत, हर जिले में 'शिल्पकार प्रमाण पत्र' एक जैसे नियमों के साथ बनाए जाने चाहिए, ताकि लेखपालों की मनमानी रुक सके। दूसरा संकल्प, 17 जातियों के लिए 7.5% अतिपिछड़ा कोटा को अध्यादेश लाकर तुरंत लागू करवाना है। तीसरा महत्वपूर्ण कदम कानूनी लड़ाई है, जिसके तहत प्रयागराज हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की जाएगी, जिसका आधार 'इंद्रा साहनी केस' और 'आशा राम वर्मा केस' होंगे। अभियान ने स्पष्ट किया है कि यह लड़ाई केवल प्रजापति समाज की नहीं है, बल्कि नाई, बढ़ई, लोहार, कहार, तेली और मल्लाह सहित सभी 17 जातियों की साझा लड़ाई है। संगठन का मानना है कि 'जब हम एकजुट होंगे, तभी लखनऊ-दिल्ली हिलेगा'। अतिपिछड़ा एकीकरण महाअभियान, जिसके राष्ट्रीय संयोजक अनिल कुमार प्रजापति और IT सेल प्रभारी वैद्य देवेंद्र कुमार प्रजापति हैं, ने जनता से अपील की है कि यदि किसी को 'शिल्पकार' शब्द न लिखने से नुकसान हुआ है, तो 'जय शिल्पकार' लिखकर टिप्पणी करें ताकि उनकी IT सेल संपर्क कर सके और यह डेटा उनके 'ब्रह्मास्त्र' के रूप में काम आ सके। उन्होंने जोर देकर कहा है कि 'अधिकार मांगने से नहीं, एकजुट होकर छीनने से मिलते हैं।'
- संतकबीरनगर में एक महिला पत्रकार के साथ कथित दुर्व्यवहार और उनके पत्रकारिता कार्य में बाधा डालने के गंभीर मामले में राष्ट्रीय पत्रकार एकता संघ और प्रेस क्लब उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों ने उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग, लखनऊ में शिकायत दर्ज कराई है। संगठनों ने इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है। राष्ट्रीय पत्रकार एकता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल सिंह और राष्ट्रीय संगठन मंत्री करिश्मा राव एडवोकेट द्वारा भेजे गए शिकायत पत्र के अनुसार, यह घटना 21 जून 2026 को तहसील धनघटा में आयोजित जनसुनवाई/तहसील दिवस कार्यक्रम के दौरान हुई। इसमें पत्रकार विंध्यवासिनी यादव जनहित से जुड़े विषयों की कवरेज कर रही थीं। आरोप है कि इसी दौरान एसडीएम धनघटा रविकांत चौबे ने महिला पत्रकार को वीडियो बनाने से रोका और उनके पत्रकारिता कार्य में बाधा उत्पन्न की। शिकायत पत्र में यह भी कहा गया है कि वार्ता के दौरान संबंधित अधिकारी ने केवल 'चुनिंदा बड़े समाचार पत्रों' को मान्यता देने जैसी टिप्पणी की, जिससे पत्रकारों के सम्मान और समान अधिकारों पर सवाल खड़े होते हैं। संगठनों का तर्क है कि जनसुनवाई और तहसील समाधान दिवस जैसे कार्यक्रम सार्वजनिक हित और पारदर्शिता से संबंधित होते हैं, और इनकी कवरेज करना पत्रकारों का अधिकार व दायित्व है। पत्र में इस प्रकार के व्यवहार को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और स्वतंत्र पत्रकारिता की भावना के विपरीत बताते हुए, भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) का उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि पत्रकारों के साथ उनके संस्थान के आधार पर भेदभाव करना उचित नहीं है। राज्य महिला आयोग से मांग की गई है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। संगठनों ने महिला पत्रकार विंध्यवासिनी यादव के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार की जांच करने और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही, महिला पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्र रूप से कार्य करने के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की भी मांग की गई है। संघ ने विश्वास जताया है कि महिला आयोग इस मामले का संज्ञान लेकर न्यायोचित कार्रवाई करेगा।1
- संतकबीरनगर जनपद में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आर्ट ऑफ लिविंग के तत्वावधान में विभिन्न सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों में योग कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। भारत सरकार द्वारा निर्धारित योग प्रोटोकॉल के अनुसार आयोजित इन कार्यक्रमों में न्यायिक अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, बंदियों तथा आम नागरिकों सहित बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की और नियमित योग को जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। जिला न्यायालय परिसर में आयोजित योग कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जहाँ आर्ट ऑफ लिविंग के प्रशिक्षक अमित जैन एवं स्वयंसेवक शिवम गुप्ता के निर्देशन में जिला जज रणधीर सिंह, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कृष्ण कुमार, अन्य न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं तथा विधि के छात्रों सहित सौ से अधिक लोगों ने सामूहिक योगाभ्यास किया। इस अवसर पर जिला जज रणधीर सिंह ने योग को शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन का प्रभावी माध्यम बताया, जबकि अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कृष्ण कुमार ने स्वस्थ एवं संतुलित जीवन के लिए नियमित योग की आवश्यकता पर बल दिया और इस वर्ष की थीम "स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग" को समय की आवश्यकता करार दिया। मगहर स्थित कबीर चौरा में वन विभाग द्वारा आयोजित योग कार्यक्रम भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना, जहाँ प्रभागीय वन अधिकारी हरिकेश नारायण यादव सहित वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रशिक्षक सुनील गुप्ता एवं रोहन गुप्ता के निर्देशन में योगाभ्यास किया। योगाभ्यास के बाद गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के मार्गदर्शन में सामूहिक ध्यान भी कराया गया, और कार्यक्रम के समापन पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधरोपण भी किया गया। इसी कड़ी में, जिला कारागार में विनीत चड्ढा एवं राजन गुप्ता ने लगभग 200 बंदियों को योग एवं प्राणायाम का अभ्यास कराया, वहीं महिला कारागार में रीतू जैन एवं नमिता चड्ढा ने करीब 30 महिला बंदियों को योग के विभिन्न अभ्यास कराते हुए तनावमुक्त जीवन के लिए योग का महत्व समझाया। इसके अतिरिक्त, महुली स्थित श्रीजा मैरिज हॉल में छोटेलाल वर्मा के नेतृत्व में लगभग 50 लोगों ने योगाभ्यास किया, जिसमें भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष जगदंबा प्रसाद श्रीवास्तव सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। आर्ट ऑफ लिविंग के योगाचार्यों ने योग को स्वस्थ, संतुलित और तनावमुक्त जीवन की आधारशिला बताते हुए जनपदवासियों से प्रतिदिन योग एवं ध्यान को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर जिलेभर में आयोजित इन कार्यक्रमों ने स्वास्थ्य, आध्यात्मिक चेतना और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी संदेश दिया।4
- संतकबीरनगर के खलीलाबाद कोतवाली क्षेत्र में एक भूमि विवाद ने गंभीर मोड़ ले लिया है, जहाँ ग्राम देवरिया गंगा निवासी प्रदीप गुप्ता ने अपनी खरीदी गई जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया है। प्रदीप गुप्ता के अनुसार, कुछ लोगों ने उनकी जमीन की पक्की बाउंड्री को तोड़कर उस पर कब्जा कर लिया है। पीड़ित ने इस मामले की शिकायत पुलिस से करते हुए न्याय की गुहार लगाई है। प्रदीप गुप्ता ने बताया कि उन्होंने करीब दस वर्ष पूर्व यह भूमि क्रय की थी, जिसकी पैमाइश और सीमाएं स्पष्ट रूप से निर्धारित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी जमीन पर बनी पक्की बाउंड्री को क्षतिग्रस्त कर अवैध कब्जा किया गया। इस घटना की सूचना तुरंत डायल-112 पर दी गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुँची। पीड़ित का दावा है कि मौके पर जानकारी करने पर पता चला कि कथित रूप से ओम बस सर्विस से जुड़े आनंद यादव और प्रदीप यादव द्वारा यह अवैध कब्जा किया गया है। इस गंभीर आरोप के बाद प्रदीप गुप्ता ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। भूमि कब्जे के इस आरोप ने पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है, और अब लोगों की निगाहें पुलिस तथा प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।1
- संतकबीरनगर जिले के बखिरा थाना पुलिस ने बभनी चौराहे पर हुई एक युवक की धारदार हथियार से हत्या के सनसनीखेज मामले का खुलासा करते हुए तीन वांछित अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने यह कार्रवाई 24 घंटे के भीतर की, जिसमें नासिर, निरहू उर्फ साकिर अली और जैगम उर्फ अजमल हुसैन को अलग-अलग स्थानों से दबोचा गया। यह अभियान पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन और क्षेत्राधिकारी मेंहदावल सर्वदवन सिंह के निकट पर्यवेक्षण में चलाया गया। पुलिस के अनुसार, 19 जून 2026 को कोलकी चमरसन निवासी इंद्रेश ने बखिरा थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उनके 30 वर्षीय पुत्र आनंद की बभनी चौराहे पर जातिसूचक गालियां देते हुए धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी गई। इस मामले में बखिरा थाने में मुकदमा संख्या 245/2026 दर्ज किया गया था, जिसमें SC/ST एक्ट समेत गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की गई। बाद में, पुलिस ने मामले में धारा 3(5) बीएनएस की भी बढ़ोतरी की। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में नासिर और निरहू उर्फ साकिर अली कुसम्हामाफी के निवासी हैं, जबकि जैगम उर्फ अजमल हुसैन जीवधरा का रहने वाला है। घटना की गंभीरता को देखते हुए, अपर पुलिस महानिदेशक गोरखपुर जोन, पुलिस उपमहानिरीक्षक बस्ती परिक्षेत्र, जिलाधिकारी संतकबीरनगर और पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर ने मौके का निरीक्षण भी किया था। पुलिस ने दावा किया है कि घटना में शामिल मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले के सफल अनावरण की दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई की गई है।1
- पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीणा के निर्देश पर, आगामी मोहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के उद्देश्य से, थानाध्यक्ष महुली दुर्गेश कुमार पांडे ने पुलिस बल के साथ थाना क्षेत्र में संध्याकालीन पैदल गश्त की। इस दौरान ताजिया जुलूस मार्ग का सघनता से भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया गया। गश्त के दौरान, पुलिस टीम ने जुलूस मार्ग पर पड़ने वाले संवेदनशील स्थलों, प्रमुख चौराहों और भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों का विशेष तौर पर मुआयना किया। साथ ही, मार्ग में पड़ने वाले विद्युत तारों, अवरोधों और अन्य संभावित जोखिम वाले स्थानों का भी परीक्षण किया गया, जिसकी जानकारी संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के लिए तुरंत दी गई। थानाध्यक्ष ने ताजियेदारों, संभ्रांत नागरिकों और स्थानीय लोगों से सीधा संवाद स्थापित कर उनसे पर्व को शांति, सौहार्द और आपसी भाईचारे के माहौल में मनाने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस किसी भी अफवाह, भ्रामक सूचना या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाले कृत्यों के प्रति पूरी तरह सतर्क है और ऐसे तत्वों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है। पैदल गश्त के माध्यम से आमजन को सुरक्षा का एहसास दिलाया गया और उनसे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति, वस्तु या गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देने का आग्रह किया गया। पुलिस सोशल मीडिया पर भी लगातार निगरानी रख रही है, ताकि अफवाहों और भ्रामक प्रचार-प्रसार पर प्रभावी ढंग से नियंत्रण पाया जा सके। थानाध्यक्ष दुर्गेश कुमार पांडे ने संदेश दिया कि मोहर्रम का पर्व शांति, अनुशासन और आपसी सौहार्द का प्रतीक है, और सभी नागरिक प्रशासन एवं पुलिस का सहयोग करते हुए इस पर्व को शांतिपूर्ण एवं गरिमामय ढंग से संपन्न कराएं। महुली पुलिस ने "सुरक्षित पर्व, शांतिपूर्ण आयोजन एवं सौहार्दपूर्ण समाज" का संकल्प लिया है।4
- राष्ट्रवादी और अखिलेश सिंह के पक्ष में ज़ोरदार नारे लगाए गए, जिनमें उनके प्रति प्रबल समर्थन व्यक्त किया गया।1
- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित एक सामूहिक योग कार्यक्रम के दौरान योगाभ्यास किया।1
- संतकबीरनगर जनपद न्यायालय परिसर में रविवार को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सामूहिक योगाभ्यास एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष रणधीर सिंह ने की, जिसमें न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। इस दौरान जनपद न्यायाधीश रणधीर सिंह ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए योग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति, आत्मिक संतुलन और एक सकारात्मक जीवनशैली का आधार भी है। उन्होंने उपस्थित सभी लोगों से योग को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सुनील कुमार सिंह और अपर जिला जज (पॉक्सो एक्ट) कृष्ण कुमार ने भी योग के नियमित अभ्यास को स्वस्थ, तनावमुक्त और अनुशासित जीवन की कुंजी बताया। कार्यक्रम में आर्ट ऑफ लिविंग के प्रशिक्षक अमित जैन ने प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास कराया, साथ ही उनके स्वास्थ्य संबंधी लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस आयोजन में न्यायिक अधिकारी अशोक कसौधन, लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के चीफ अन्जय कुमार श्रीवास्तव, केंद्रीय नाजिर बृजेश सिंह, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के लिपिक रामभवन एवं जयशंकर प्रसाद, विभिन्न विधि महाविद्यालयों के इंटर्न छात्र-छात्राएं, बृजेश यादव, मनोज गुप्ता, पैनल अधिवक्ता, पीएलवी और न्यायालय के अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन स्वस्थ जीवन, सकारात्मक सोच और नियमित योगाभ्यास को अपनाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ, जिसने सभी को योग के प्रति प्रेरित किया।1