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जयपुर शहर में नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। सवारी ई-रिक्शा में धड़ल्ले से भारी सामान ढोया जा रहा है और ऊपर से क्षमता से ज़्यादा सवारी बैठाई जा रही है। यह सीधा-सीधा यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ है। जब कोई हादसा होगा तो ज़िम्मेदार कौन होगा? पुलिस प्रशासन? आरटीओ? या फिर मासूम जनता? सबसे हैरानी की बात यह है कि ना पुलिस कोई सख्त कार्रवाई करती दिख रही है और ना ही आरटीओ की ओर से कोई ठोस कदम उठाया जा रहा है। नियम केवल कागज़ों में हैं क्या? ई-रिक्शा सवारी के लिए होते हैं, माल ढोने के लिए नहीं। ओवरलोडिंग से वाहन असंतुलित हो सकता है, ब्रेक फेल हो सकते हैं और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। प्रशासन से मांग है कि तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए और शहर में नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी निर्दोष की जान खतरे में न पड़े। अब जागना होगा, वरना देर हो जाएगी। #जयपुर #ईरिक्शा #ओवरलोडिंग #सड़क_सुरक्षा #आरटीओ #पुलिस_प्रशासन #जनता_की_आवाज़ #JustJaipurLive

7 hrs ago
user_Just Jaipur Live
Just Jaipur Live
Journalist सांगानेर, जयपुर, राजस्थान•
7 hrs ago

जयपुर शहर में नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। सवारी ई-रिक्शा में धड़ल्ले से भारी सामान ढोया जा रहा है और ऊपर से क्षमता से ज़्यादा सवारी बैठाई जा रही है। यह सीधा-सीधा यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ है। जब कोई हादसा होगा तो ज़िम्मेदार कौन होगा? पुलिस प्रशासन? आरटीओ? या फिर मासूम जनता? सबसे हैरानी की बात यह है कि ना पुलिस कोई सख्त कार्रवाई करती दिख रही है और ना ही आरटीओ की ओर से कोई ठोस कदम उठाया जा रहा है। नियम केवल कागज़ों में हैं क्या? ई-रिक्शा सवारी के लिए होते हैं, माल ढोने के लिए नहीं। ओवरलोडिंग से वाहन असंतुलित हो सकता है, ब्रेक फेल हो सकते हैं और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। प्रशासन से मांग है कि तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए और शहर में नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी निर्दोष की जान खतरे में न पड़े। अब जागना होगा, वरना देर हो जाएगी। #जयपुर #ईरिक्शा #ओवरलोडिंग #सड़क_सुरक्षा #आरटीओ #पुलिस_प्रशासन #जनता_की_आवाज़ #JustJaipurLive

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  • जयपुर शहर में नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। सवारी ई-रिक्शा में धड़ल्ले से भारी सामान ढोया जा रहा है और ऊपर से क्षमता से ज़्यादा सवारी बैठाई जा रही है। यह सीधा-सीधा यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ है। जब कोई हादसा होगा तो ज़िम्मेदार कौन होगा? पुलिस प्रशासन? आरटीओ? या फिर मासूम जनता? सबसे हैरानी की बात यह है कि ना पुलिस कोई सख्त कार्रवाई करती दिख रही है और ना ही आरटीओ की ओर से कोई ठोस कदम उठाया जा रहा है। नियम केवल कागज़ों में हैं क्या? ई-रिक्शा सवारी के लिए होते हैं, माल ढोने के लिए नहीं। ओवरलोडिंग से वाहन असंतुलित हो सकता है, ब्रेक फेल हो सकते हैं और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। प्रशासन से मांग है कि तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए और शहर में नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी निर्दोष की जान खतरे में न पड़े। अब जागना होगा, वरना देर हो जाएगी। #जयपुर #ईरिक्शा #ओवरलोडिंग #सड़क_सुरक्षा #आरटीओ #पुलिस_प्रशासन #जनता_की_आवाज़ #JustJaipurLive
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    जयपुर शहर में नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है।
सवारी ई-रिक्शा में धड़ल्ले से भारी सामान ढोया जा रहा है और ऊपर से क्षमता से ज़्यादा सवारी बैठाई जा रही है। यह सीधा-सीधा यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ है।
जब कोई हादसा होगा तो ज़िम्मेदार कौन होगा?
पुलिस प्रशासन? आरटीओ? या फिर मासूम जनता?
सबसे हैरानी की बात यह है कि ना पुलिस कोई सख्त कार्रवाई करती दिख रही है और ना ही आरटीओ की ओर से कोई ठोस कदम उठाया जा रहा है। नियम केवल कागज़ों में हैं क्या?
ई-रिक्शा सवारी के लिए होते हैं, माल ढोने के लिए नहीं। ओवरलोडिंग से वाहन असंतुलित हो सकता है, ब्रेक फेल हो सकते हैं और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
प्रशासन से मांग है कि तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए और शहर में नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी निर्दोष की जान खतरे में न पड़े।
अब जागना होगा, वरना देर हो जाएगी।
#जयपुर
#ईरिक्शा
#ओवरलोडिंग
#सड़क_सुरक्षा
#आरटीओ
#पुलिस_प्रशासन
#जनता_की_आवाज़
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    user_Just Jaipur Live
    Just Jaipur Live
    Journalist सांगानेर, जयपुर, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • जयपुर से खाटू श्याम बुकिंग हुई कैब में कैब ड्राइवर की हत्या उसके बुरे ड्राइवर को डिग्गी में पटक कर नाले में फेंक 7 दिन बाद मिला सब
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    जयपुर से खाटू श्याम बुकिंग हुई कैब में कैब ड्राइवर की हत्या उसके बुरे ड्राइवर को डिग्गी में पटक कर नाले में फेंक 7 दिन बाद मिला सब
    user_Hemant KUSHWAHA
    Hemant KUSHWAHA
    Photographer सांगानेर, जयपुर, राजस्थान•
    12 hrs ago
  • जयपुर । राजस्थान सरकार के बजट 2026 - 27 को लेकर गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि भाजपा को सत्ता में आए 2 साल से अधिक हो गए, राजस्थान को अब 'घोषणाओं' और 'नीतियों' के ड्राफ्ट नहीं, नतीजे चाहिए। आज विधानसभा में पेश किया गया राजस्थान बजट 2026-27 सिर्फ घोषणाओं और नीतियों के ड्रॉफ्ट का नाकाम बजट है। राजस्थान की बदहाल स्थिति, बढ़ते कर्ज़, रिकॉर्ड महंगाई, चरम पर भ्रष्टाचार, बच्चियों से दुराचार, शिक्षक भर्ती और युवाओं को नौकरी देने पर भाजपा सरकार पूरी तरह मौन रही। स्कूलों के लिए 21000 करोड़ चाहिए, लेकिन मिले सिर्फ 550 करोड़। सड़कों के बजट में ऐसी केंची चलाई है कि पिछले बजट से आधा कर दिया। किसान कल्याण बजट से गायब रहा, ERCP पर एक शब्द का वाचन तक नहीं हुआ, यमुना के पानी के लिए भी कोई बजट नहीं, और न ही पत्रकारों की कोई बात। सच्चाई ये है कि भाजपा सरकार की पिछली 26% घोषणाएं भी आज तक धरातल पर नहीं उतरीं, और इस बजट में फिर वही घोषणाएं और नीति बनाने की बातें। राजस्थान की आम जनता हाशिए पर हैं, डबल इंजन सरकार ट्रबल इंजन सरकार बन चुकी है। भाजपा की प्राथमिकता सिर्फ प्रचार व घोषणाएं हैं।
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    जयपुर । राजस्थान सरकार के बजट 2026 - 27 को लेकर गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि भाजपा को सत्ता में आए 2 साल से अधिक हो गए, राजस्थान को अब 'घोषणाओं' और 'नीतियों' के ड्राफ्ट नहीं, नतीजे चाहिए।
आज विधानसभा में पेश किया गया राजस्थान बजट 2026-27 सिर्फ घोषणाओं और नीतियों के ड्रॉफ्ट का नाकाम बजट है।
राजस्थान की बदहाल स्थिति, बढ़ते कर्ज़, रिकॉर्ड महंगाई, चरम पर भ्रष्टाचार, बच्चियों से दुराचार, शिक्षक भर्ती और युवाओं को नौकरी देने पर भाजपा सरकार पूरी तरह मौन रही। स्कूलों के लिए 21000 करोड़ चाहिए, लेकिन मिले सिर्फ 550 करोड़। सड़कों के बजट में ऐसी केंची चलाई है कि पिछले बजट से आधा कर दिया। किसान कल्याण बजट से गायब रहा, ERCP पर एक शब्द का वाचन तक नहीं हुआ, यमुना के पानी के लिए भी कोई बजट नहीं, और न ही पत्रकारों की कोई बात। 
सच्चाई ये है कि भाजपा सरकार की पिछली 26% घोषणाएं भी आज तक धरातल पर नहीं उतरीं, और इस बजट में फिर वही घोषणाएं और नीति बनाने की बातें।
राजस्थान की आम जनता हाशिए पर हैं, डबल इंजन सरकार ट्रबल इंजन सरकार बन चुकी है। भाजपा की प्राथमिकता सिर्फ प्रचार व घोषणाएं हैं।
    user_Neha Chaturvedi
    Neha Chaturvedi
    Local News Reporter Aandhi, Jaipur•
    54 min ago
  • जयपुर। राजस्थान सरकार द्वारा पेश किए गए बजट से प्रदेश के लाखों कर्मचारियों में भारी नाराज़गी देखने को मिल रही है। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ ने बजट को कर्मचारी विरोधी बताते हुए सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। राठौड़ ने कहा कि बजट पूर्व मुख्यमंत्री के साथ हुई वार्ता में कर्मचारियों की जिन मांगों पर सकारात्मक संकेत दिए गए थे, उनका बजट में कहीं भी उल्लेख नहीं किया गया। इससे प्रदेश के लगभग 8 लाख कर्मचारियों में गहरा रोष और निराशा है। निराशा के प्रमुख कारण वेतन विसंगति, पदोन्नति और भत्तों जैसी मूल मांगों पर बजट पूरी तरह मौन नई कमेटी गठन की घोषणा को कर्मचारियों ने समय टालने की रणनीति बताया बजट भाषण में कर्मचारी संवर्ग का उल्लेख तक नहीं, जिसे अपमानजनक बताया गया महासंघ कार्यालय में आयोजित बैठक में विभिन्न संवर्गों के प्रदेशाध्यक्षों और पदाधिकारियों ने बजट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। सभी ने एक स्वर में इसे कर्मचारियों के हितों की अनदेखी बताया। महासंघ की चेतावनी प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा, “हम मुख्यमंत्री से मांग करते हैं कि वे इस स्थिति का संज्ञान लें और शीघ्र द्विपक्षीय वार्ता कर कर्मचारियों की जायज मांगों का ठोस समाधान करें। यदि मांगों का जल्द निराकरण नहीं हुआ तो महासंघ आंदोलन के लिए मजबूर होगा।”
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    जयपुर।
राजस्थान सरकार द्वारा पेश किए गए बजट से प्रदेश के लाखों कर्मचारियों में भारी नाराज़गी देखने को मिल रही है। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ ने बजट को कर्मचारी विरोधी बताते हुए सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है।
राठौड़ ने कहा कि बजट पूर्व मुख्यमंत्री के साथ हुई वार्ता में कर्मचारियों की जिन मांगों पर सकारात्मक संकेत दिए गए थे, उनका बजट में कहीं भी उल्लेख नहीं किया गया। इससे प्रदेश के लगभग 8 लाख कर्मचारियों में गहरा रोष और निराशा है।
निराशा के प्रमुख कारण
वेतन विसंगति, पदोन्नति और भत्तों जैसी मूल मांगों पर बजट पूरी तरह मौन
नई कमेटी गठन की घोषणा को कर्मचारियों ने समय टालने की रणनीति बताया
बजट भाषण में कर्मचारी संवर्ग का उल्लेख तक नहीं, जिसे अपमानजनक बताया गया
महासंघ कार्यालय में आयोजित बैठक में विभिन्न संवर्गों के प्रदेशाध्यक्षों और पदाधिकारियों ने बजट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। सभी ने एक स्वर में इसे कर्मचारियों के हितों की अनदेखी बताया।
महासंघ की चेतावनी
प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा,
“हम मुख्यमंत्री से मांग करते हैं कि वे इस स्थिति का संज्ञान लें और शीघ्र द्विपक्षीय वार्ता कर कर्मचारियों की जायज मांगों का ठोस समाधान करें। यदि मांगों का जल्द निराकरण नहीं हुआ तो महासंघ आंदोलन के लिए मजबूर होगा।”
    user_Isha sharma
    Isha sharma
    Jaipur, Rajasthan•
    1 hr ago
  • गंगापुर सिटी में अरावली संरक्षण यात्रा का भव्य स्वागत युवा संवाद में ‘जंगल-जमीन-जल’ बचाने का आह्वान सरकार की विस्थापन नीति पर वक्ताओं का तीखा हमला आदिवासी-किसान-मजदूर एकजुट होने का संकल्प अरावली बचाने की सामूहिक शपथ के साथ कार्यक्रम संपन्न
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    गंगापुर सिटी में अरावली संरक्षण यात्रा का भव्य स्वागत
युवा संवाद में ‘जंगल-जमीन-जल’ बचाने का आह्वान
सरकार की विस्थापन नीति पर वक्ताओं का तीखा हमला
आदिवासी-किसान-मजदूर एकजुट होने का संकल्प
अरावली बचाने की सामूहिक शपथ के साथ कार्यक्रम संपन्न
    user_तीसरी आंख न्यूज पोर्टल हरिओम श
    तीसरी आंख न्यूज पोर्टल हरिओम श
    Media company आंधी, जयपुर, राजस्थान•
    1 hr ago
  • बजट के बाद डोटासरा और बालमुकुंद आचार्य के बीच मजाकिया चर्चा....
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    बजट के बाद डोटासरा और बालमुकुंद आचार्य के बीच मजाकिया चर्चा....
    user_पुरुषोत्तम तिवाड़ी
    पुरुषोत्तम तिवाड़ी
    रिपोर्टर जयपुर, जयपुर, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • shyam baba ke payre darshan jisne kiye uska shyam baba rakhe shyam jai shree shyam....
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    shyam baba ke payre darshan jisne kiye uska shyam baba rakhe shyam jai shree shyam....
    user_Nainesh Jain
    Nainesh Jain
    Jaipur, Rajasthan•
    4 hrs ago
  • जयपुर। विमुक्त घुमंतू एवं अर्द्ध घुमंतू (DNT) जनजातियों ने अपने संवैधानिक अधिकारों को लेकर 21 सूत्रीय ज्ञापन जारी करते हुए विधानसभा घेराव का ऐलान किया है। समुदाय के प्रतिनिधियों का कहना है कि आजादी के 78 वर्ष बाद भी DNT समाज को संविधान में पृथक आरक्षण नहीं मिला है, जबकि विभिन्न आयोगों ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। समाज के नेताओं ने बताया कि बालकृष्ण रेनके आयोग और दादा इदाते आयोग की रिपोर्ट लंबे समय से लंबित है। उनका दावा है कि देश में DNT समुदाय की आबादी 30 करोड़ से अधिक है, जबकि राजस्थान में यह संख्या एक करोड़ से अधिक है, जो कुल आबादी का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा है। इसके बावजूद समुदाय आज भी आरक्षण और मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। 10% अलग संवैधानिक आरक्षण की मांग ज्ञापन में DNT समुदाय के लिए 10 प्रतिशत सुरक्षित अलग संवैधानिक आरक्षण की प्रमुख मांग की गई है। साथ ही आगामी बजट में 500 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान, अलग मंत्रालय का गठन और DNT कल्याण बोर्ड को संवैधानिक दर्जा देने की मांग भी शामिल है। भूमि, आवास और शिक्षा पर जोर समुदाय ने केंद्र व राज्य स्तर पर विशेष आवास योजना, किसानों को 25 बीघा निःशुल्क कृषि भूमि आवंटन, बालिकाओं के लिए जयपुर में छात्रावास निर्माण तथा पाठ्यक्रम में DNT समाज के इतिहास और संस्कृति को शामिल करने की मांग की है। कला, लोक संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए विश्वविद्यालय स्थापना तथा विशेष समिति गठित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। महिलाओं व पशुपालकों के लिए विशेष नीति ज्ञापन में महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु विशेष योजना और पशुपालक DNT जनजातियों के लिए अलग चरवाहा नीति बनाने की मांग की गई है। कानूनी और प्रशासनिक मांगें समुदाय ने 7 नवंबर 2025 को पाली जिले के बालराई में हुए आंदोलन से जुड़े मुकदमों को वापस लेने, DNT अत्याचार अधिनियम बनाने, टीएसपी क्षेत्र में 10% आरक्षण लागू करने तथा विभिन्न भर्तियों की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। साथ ही 31 अगस्त को “विमुक्त घुमंतू अर्द्ध घुमंतू स्वाभिमान मुक्ति दिवस” पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने और विश्वकर्मा जयंती पर सार्वजनिक अवकाश की भी मांग की गई है। नामों की विसंगतियों पर कमेटी गठन की मांग ज्ञापन में विभिन्न जनजातियों के नामों में विसंगतियों को दूर करने और 1964 की सूची में संशोधन हेतु केंद्र व राज्य सरकार द्वारा उच्च स्तरीय समिति गठित करने की मांग की गई है। DNT समुदाय ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो राज्यव्यापी आंदोलन तेज किया जाएगा। समुदाय ने सभी वर्गों से समर्थन की अपील करते हुए विधानसभा घेराव में शामिल होने का आह्वान किया है।
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    जयपुर।
विमुक्त घुमंतू एवं अर्द्ध घुमंतू (DNT) जनजातियों ने अपने संवैधानिक अधिकारों को लेकर 21 सूत्रीय ज्ञापन जारी करते हुए विधानसभा घेराव का ऐलान किया है। समुदाय के प्रतिनिधियों का कहना है कि आजादी के 78 वर्ष बाद भी DNT समाज को संविधान में पृथक आरक्षण नहीं मिला है, जबकि विभिन्न आयोगों ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी।
समाज के नेताओं ने बताया कि बालकृष्ण रेनके आयोग और दादा इदाते आयोग की रिपोर्ट लंबे समय से लंबित है। उनका दावा है कि देश में DNT समुदाय की आबादी 30 करोड़ से अधिक है, जबकि राजस्थान में यह संख्या एक करोड़ से अधिक है, जो कुल आबादी का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा है। इसके बावजूद समुदाय आज भी आरक्षण और मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।
10% अलग संवैधानिक आरक्षण की मांग
ज्ञापन में DNT समुदाय के लिए 10 प्रतिशत सुरक्षित अलग संवैधानिक आरक्षण की प्रमुख मांग की गई है। साथ ही आगामी बजट में 500 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान, अलग मंत्रालय का गठन और DNT कल्याण बोर्ड को संवैधानिक दर्जा देने की मांग भी शामिल है।
भूमि, आवास और शिक्षा पर जोर
समुदाय ने केंद्र व राज्य स्तर पर विशेष आवास योजना, किसानों को 25 बीघा निःशुल्क कृषि भूमि आवंटन, बालिकाओं के लिए जयपुर में छात्रावास निर्माण तथा पाठ्यक्रम में DNT समाज के इतिहास और संस्कृति को शामिल करने की मांग की है। कला, लोक संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए विश्वविद्यालय स्थापना तथा विशेष समिति गठित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
महिलाओं व पशुपालकों के लिए विशेष नीति
ज्ञापन में महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु विशेष योजना और पशुपालक DNT जनजातियों के लिए अलग चरवाहा नीति बनाने की मांग की गई है।
कानूनी और प्रशासनिक मांगें
समुदाय ने 7 नवंबर 2025 को पाली जिले के बालराई में हुए आंदोलन से जुड़े मुकदमों को वापस लेने, DNT अत्याचार अधिनियम बनाने, टीएसपी क्षेत्र में 10% आरक्षण लागू करने तथा विभिन्न भर्तियों की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। साथ ही 31 अगस्त को “विमुक्त घुमंतू अर्द्ध घुमंतू स्वाभिमान मुक्ति दिवस” पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने और विश्वकर्मा जयंती पर सार्वजनिक अवकाश की भी मांग की गई है।
नामों की विसंगतियों पर कमेटी गठन की मांग
ज्ञापन में विभिन्न जनजातियों के नामों में विसंगतियों को दूर करने और 1964 की सूची में संशोधन हेतु केंद्र व राज्य सरकार द्वारा उच्च स्तरीय समिति गठित करने की मांग की गई है।
DNT समुदाय ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो राज्यव्यापी आंदोलन तेज किया जाएगा। समुदाय ने सभी वर्गों से समर्थन की अपील करते हुए विधानसभा घेराव में शामिल होने का आह्वान किया है।
    user_Isha sharma
    Isha sharma
    Jaipur, Rajasthan•
    1 hr ago
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