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नागपुर में मजदूरी करने वाला सिंगोड़ी निवासी एक व्यक्ति बीते 29 जून से लापता है। इस मामले में कटंगी थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
Dev Anand
नागपुर में मजदूरी करने वाला सिंगोड़ी निवासी एक व्यक्ति बीते 29 जून से लापता है। इस मामले में कटंगी थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
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- खाद, पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के विरोध में किसान संगठनों ने एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने सरकार को इन मूल्य वृद्धियों के खिलाफ बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।1
- मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के किरनापुर स्थित भानपुर गांव में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच एक बड़ा हादसा टल गया। खेत में कृषि कार्य करने गए 16 ग्रामीण अचानक नदी-नालों का जलस्तर बढ़ जाने से बाढ़ की चपेट में आ गए थे, जिसके कारण चारों तरफ पानी भर जाने से उनका संपर्क पूरी तरह से कट गया था। घटना की खबर मिलते ही किरनापुर पुलिस और हट्टा पुलिस के साथ SDRF तथा हॉक फोर्स गोदरी की एक संयुक्त टीम ने बिना समय गंवाए बचाव अभियान शुरू किया। तेज बहाव और विषम परिस्थितियों के बावजूद, जवानों ने अद्भुत साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए सभी 16 ग्रामीणों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। उनकी त्वरित और प्रभावी कार्रवाई के कारण सभी की जान बच गई और कोई जनहानि नहीं हुई। बाढ़ में फंसे इन 16 ग्रामीणों के लिए पुलिस, SDRF और हॉक फोर्स की टीम देवदूत बनकर सामने आई।1
- छिंदवाड़ा में इन दिनों राजनीतिक माहौल 'पोस्टर वार' को लेकर गरमाया हुआ है। हाल ही में, सांसद बंटी विवेक साहू के कथित "लापता" पोस्टर वाला एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें कुछ ग्रामीण हाथों में ये पोस्टर लिए दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधायक कमलनाथ के भी कथित "लापता" पोस्टर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने थे, जिससे छिंदवाड़ा में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा काफी तेज हो गई है। इस वायरल वीडियो को लेकर राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि, इस वीडियो की सत्यता एवं इसकी परिस्थितियों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकती है। चाहे इसे राजनीति की सामान्य प्रतिस्पर्धा मानें या फिर किसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा, यह तय है कि इस 'पोस्टर वार' ने छिंदवाड़ा के सियासी माहौल को और अधिक गरमा दिया है।1
- मध्य प्रदेश में एक सेवानिवृत्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के करोड़पति होने का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यह जानकारी आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा की गई छापामार कार्रवाई के दौरान सामने आई है। छापे के समय, EOW के अधिकारियों ने सेवानिवृत्त सीएमओ के पास से एक थार गाड़ी, कई मकान, विभिन्न प्लॉट और बड़ी मात्रा में सोना बरामद किया। इतनी संपत्ति देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए।1
- सिवनी में कलेक्टर नेहा मीना ने शासकीय जैविक कृषि प्रक्षेत्र भोमा कटिया का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के तहत पौधरोपण करते हुए इसे पर्यावरण और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण जनआंदोलन बताया। भ्रमण के दौरान, कलेक्टर ने बीज उत्पादन कार्यक्रम और वर्मी कम्पोस्ट इकाई का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने किसानों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया और उनसे रासायनिक खादों पर अपनी निर्भरता कम करने के साथ-साथ प्राकृतिक खेती को अपनाने का आग्रह किया। कलेक्टर मीना ने जैविक खेती के कई लाभ भी समझाए, जिनमें भूमि की उपजाऊ क्षमता का संरक्षण, फसल की गुणवत्ता में सुधार और खेती की लागत में कमी शामिल हैं। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ श्रीमती अंजली शाह और कृषि विभाग के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।1
- वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर यातायात थाना प्रभारी और उनकी टीम ने कार्रवाई करते हुए दो वाहनों पर मोटरयान अधिनियम के उल्लंघन के लिए कुल ₹20,000 का जुर्माना लगाया। इस दौरान, वाहन क्रमांक NL01 N 4949 को प्रतिबंधित क्षेत्र में मुख्य मार्ग बाधित करते हुए पाया गया, जिस पर ₹10,000 का शमन शुल्क अधिरोपित किया गया। वहीं, जांच में वाहन क्रमांक RJ06 GD 8708 प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना वैध बीमा के संचालित होता मिला, जिसके लिए उस पर भी ₹10,000 का जुर्माना लगाया गया।1
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- किरनापुर जनपद के अंतर्गत ग्राम पंचायत मौदा और कटंगी के बीच नदी पर बने उच्चस्तरीय पुल की एप्रोच सड़क पहली ही बारिश में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है। सड़क पर कई स्थानों पर स्पष्ट रूप से दरारें दिखाई दे रही हैं, जिससे इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह सड़क प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) के तहत बनाई गई थी। योजना के नियमों के अनुसार, निर्माण एजेंसी या ठेकेदार को सड़क की गुणवत्ता और रखरखाव के लिए पाँच साल की गारंटी देनी होती है। ऐसे में, पाँच साल की गारंटी के बावजूद पहली ही बारिश में सड़क का इस तरह क्षतिग्रस्त हो जाना स्थानीय लोगों के बीच गहरी चिंता और चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शुरुआती बारिश में ही सड़क में दरारें आ गई हैं, तो आगामी भारी बारिश के दौरान स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। इससे न केवल आवागमन प्रभावित होगा, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाएगा। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से सड़क की गुणवत्ता की तत्काल जांच कराने, दोषी निर्माण एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और क्षतिग्रस्त हिस्से की तुरंत मरम्मत कराने की मांग की है।3