इंदौर के मोती तबेला चौराहे स्थित संत गाडगे बाबा धर्मशाला में बिहार के धोबी नेता और विधायक श्याम रजक के अभिनंदन कार्यक्रम को लेकर तीखे सवाल उठाए गए हैं। स्वतंत्र पत्रकार राजेंद्र मालवीय ने आरोप लगाया है कि 29 जून को रात्रि 8 बजे आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता अभियान के जनक संत गाडगे बाबा के मंदिर में उनका घोर अपमान किया गया। मालवीय के अनुसार, संत गाडगे बाबा के मंदिर में न तो 'हाल' में कोई 'गोला' जलाया गया, न गुरुदेव को पुष्प माला पहनाई गई और न ही प्रसाद चढ़ाया गया। यह स्थिति केवल संत गाडगे बाबा के मंदिर तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि स्वयं सिद्ध भगवान बालेश्वर महादेव और राधा कृष्ण मंदिर में भी न हार चढ़ाया गया और न ही प्रसाद अर्पित किया गया, जिसे 'गुरुदेव का अपमान' बताया गया है। उन्होंने धर्मशाला के आयोजकों, शकुंतला बड़े और प्रकाश सिंगोदिया पर, जो इस धर्मशाळा का संचालन करते हैं, दुकान और धर्मशाला के किराए का आनंद लेने के बावजूद समाज को कोई हिसाब न देने का आरोप लगाया। साथ ही, देश के धोबी समाज के सबसे बड़े नेता और बिहार के पूर्व मंत्री व वर्तमान विधायक श्याम रजक पर भी निशाना साधते हुए कहा गया कि वे पुष्प माला के स्वागत में चूर थे, जबकि उन्हें एक संत का अपमान नहीं करना चाहिए था। यह पूरी घटना 'जय गाडगे जय त्रिलोकी नाथ' के नारों के साथ खत्म हुई, जो इस अपमान के प्रति आक्रोश को दर्शाता है।
इंदौर के मोती तबेला चौराहे स्थित संत गाडगे बाबा धर्मशाला में बिहार के धोबी नेता और विधायक श्याम रजक के अभिनंदन कार्यक्रम को लेकर तीखे सवाल उठाए गए हैं। स्वतंत्र पत्रकार राजेंद्र मालवीय ने आरोप लगाया है कि 29 जून को रात्रि 8 बजे आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता अभियान के जनक संत गाडगे बाबा के मंदिर में उनका घोर अपमान किया गया। मालवीय के अनुसार, संत गाडगे बाबा के मंदिर में न तो 'हाल' में कोई 'गोला' जलाया गया, न गुरुदेव को पुष्प माला पहनाई गई और न ही प्रसाद चढ़ाया गया। यह स्थिति केवल संत गाडगे बाबा के मंदिर तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि स्वयं सिद्ध भगवान बालेश्वर महादेव और राधा कृष्ण मंदिर में भी न हार चढ़ाया गया और न ही प्रसाद अर्पित किया गया, जिसे 'गुरुदेव का अपमान' बताया गया है। उन्होंने धर्मशाला के आयोजकों, शकुंतला बड़े और प्रकाश सिंगोदिया पर, जो इस धर्मशाळा का संचालन करते हैं, दुकान और धर्मशाला के किराए का आनंद लेने के बावजूद समाज को कोई हिसाब न देने का आरोप लगाया। साथ ही, देश के धोबी समाज के सबसे बड़े नेता और बिहार के पूर्व मंत्री व वर्तमान विधायक श्याम रजक पर भी निशाना साधते हुए कहा गया कि वे पुष्प माला के स्वागत में चूर थे, जबकि उन्हें एक संत का अपमान नहीं करना चाहिए था। यह पूरी घटना 'जय गाडगे जय त्रिलोकी नाथ' के नारों के साथ खत्म हुई, जो इस अपमान के प्रति आक्रोश को दर्शाता है।
- दिल्ली-नोएडा क्षेत्र में मजदूरों ने अपने अधिकारों की मांग को लेकर एक बड़ा आंदोलन छेड़ा है। प्रदर्शनकारी मजदूरों का साफ संदेश है कि जो भी उनके हित में काम करेगा, वही देश में शासन करेगा। उनका कहना है कि वे धन-दौलत, चांदी या सोना नहीं मांगते, बल्कि केवल अपना हक चाहते हैं। इस व्यापक विरोध प्रदर्शन के कारण सेक्टर 13 से लेकर सेक्टर 24 तक की सभी फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं।1
- इंदौर के ऐतिहासिक कर्बला मेले से शिक्षा का एक विशेष संदेश दिया गया, जिसके तहत नूर एजुकेशन संस्था मुस्लिम समाज के बच्चों को उच्च शिक्षा और बेहतर करियर के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से एक करियर गाइडेंस सेमिनार आयोजित कर रही है। यह कार्यक्रम 5 जुलाई को इंदौर के खजराना में होगा। संस्था के शादाब खान ने बताया कि इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य बच्चों और उनके अभिभावकों को उच्च शिक्षा, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर के उपलब्ध बेहतर अवसरों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करना है। उन्होंने समाज के सभी लोगों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों के साथ इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर इसका लाभ उठाएं। इस अवसर पर, कर्बला कमेटी के अध्यक्ष हामिद नियारगर और जिला वक्फ कमेटी के अध्यक्ष रेहान शेख सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी शिक्षा को समाज की प्रगति का सबसे सशक्त माध्यम बताते हुए लोगों से बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान देने की अपील की। इसके साथ ही, 'एक पेड़ अपने बुजुर्गों के नाम' अभियान के तहत पौधारोपण का संदेश भी दिया गया।1
- इंदौर पुलिस ने एक कार्रवाई के दौरान चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों के पास से अवैध शराब, ई-सिगरेट और चाकू बरामद किए गए हैं।1
- गांधीनगर थाना क्षेत्र में आठ बहनों ने शिकायत की है कि एक लंबे समय से चले आ रहे जमीन विवाद में न्यायालय का फैसला उनके पक्ष में आने के बावजूद उन्हें अपने हिस्से का कब्जा नहीं मिल रहा है। बहनों का दावा है कि उन्होंने न्यायालय के निर्णय के बाद अपने हिस्से की जमीन संबंधित पक्ष को देने का फैसला किया था, जिसमें मंजू सोनकर के हिस्से को अलग रखते हुए केवल अपने हिस्से का कब्जा दिलाने की प्रक्रिया चल रही थी। हालांकि, आरोप है कि सीमांकन की प्रक्रिया के दौरान मंजू सोनकर मौके पर पहुंचीं और लगाए गए पोल उखाड़ दिए। इतना ही नहीं, उन्होंने बहनों के साथ अभद्र व्यवहार किया और यह कहते हुए कब्जा नहीं होने देने की बात कही। परिवार ने बताया कि यह जमीन विवाद कई वर्षों से जारी है और वे वर्ष 2017 में भी प्रशासन तथा पुलिस से शिकायत कर चुके हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, उनकी 70 वर्षीय मां पिछले दस वर्षों से बिस्तर पर हैं और यह कृषि भूमि ही उनके जीवन-यापन का मुख्य साधन है। परिवार ने प्रशासन से सुरक्षा उपलब्ध कराने और मामले की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है। फिलहाल गांधीनगर थाना पुलिस ने इन बहनों की शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि आरोपों की पुष्टि पुलिस का पक्ष और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगी।1
- इंदौर के राऊ विधानसभा क्षेत्र में बिहाड़िया फाटा से ग्राम बिहाड़िया तक सड़क की बदहाली को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। दस साल से केवल मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति होने का आरोप लगाते हुए, ग्रामीणों ने एक नई सीसी रोड के निर्माण की मांग को लेकर विधायक मधु वर्मा को ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले दस वर्षों से सड़क की मरम्मत गुणवत्ता-विहीन तरीके से की जा रही है, जिसके कारण बारिश के मौसम में यह सड़क हादसों का सबब बन जाती है। जगह-जगह गहरे गड्ढे और जलभराव से आवागमन बेहद मुश्किल हो गया है। इस बदहाल सड़क के चलते स्कूली बच्चों, किसानों, महिलाओं और यहां तक कि मरीजों को भी आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि जहां आसपास के क्षेत्रों में लगातार विकास हो रहा है और नई-नई सीसी सड़कें बन रही हैं, वहीं बिहाड़िया मार्ग अब भी बदहाल स्थिति में है, जिससे यहां की जनता विकास से वंचित महसूस कर रही है। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा है कि "अब हमें आश्वासन नहीं, बल्कि एक नई सीसी रोड चाहिए।" उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब पड़ोस में नई सड़कें बन सकती हैं, तो बिहाड़िया की जनता को विकास से आखिर क्यों दूर रखा जा रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नई सीसी रोड का निर्माण शुरू नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका सीधा नारा है, "अब मरम्मत नहीं... बिहाड़िया को चाहिए नई सीसी रोड!"1
- कांग्रेस के AICC एक्स-सर्विसमैन विभाग के चेयरमैन कर्नल रोहित चौधरी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर 'ऑपरेशन सिंदूर' से संबंधित जानकारी को लेकर सदन में गलत बयान देने का गंभीर आरोप लगाया है। कर्नल चौधरी ने दावा किया है कि रक्षा मंत्री ने संसद में बताया था कि 'ऑपरेशन सिंदूर' में किसी भी सैनिक को कोई क्षति नहीं हुई, जबकि सच्चाई इसके विपरीत है। कर्नल चौधरी के अनुसार, 'ऑपरेशन सिंदूर' मिशन में कुल 6 जवान शहीद हुए थे। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया है कि सरकार आखिर इन शहीद जवानों को सम्मान क्यों नहीं दे रही है। इस बड़े खुलासे के बाद, सरकार पर शहीदों का अपमान करने का आरोप लगाया गया है।1
- इंदौर में मेट्रो सेवा का संचालन शुरू हो गया है। यह मेट्रो गांधीनगर से रेडिसन चौराहे तक चल रही है, जिसका मार्ग उज्जैन रोड इंदौर पर है। हालांकि, मेट्रो शुरू होने के बावजूद इसमें सवारियों की कमी देखी जा रही है। यह भी बताया गया है कि जब तक मेट्रो के ट्रैक का विस्तार नहीं होता है, तब तक सवारियों की यह कमी बनी रहेगी।1
- इंदौर के मोती तबेला चौराहे स्थित संत गाडगे बाबा धर्मशाला में बिहार के धोबी नेता और विधायक श्याम रजक के अभिनंदन कार्यक्रम को लेकर तीखे सवाल उठाए गए हैं। स्वतंत्र पत्रकार राजेंद्र मालवीय ने आरोप लगाया है कि 29 जून को रात्रि 8 बजे आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता अभियान के जनक संत गाडगे बाबा के मंदिर में उनका घोर अपमान किया गया। मालवीय के अनुसार, संत गाडगे बाबा के मंदिर में न तो 'हाल' में कोई 'गोला' जलाया गया, न गुरुदेव को पुष्प माला पहनाई गई और न ही प्रसाद चढ़ाया गया। यह स्थिति केवल संत गाडगे बाबा के मंदिर तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि स्वयं सिद्ध भगवान बालेश्वर महादेव और राधा कृष्ण मंदिर में भी न हार चढ़ाया गया और न ही प्रसाद अर्पित किया गया, जिसे 'गुरुदेव का अपमान' बताया गया है। उन्होंने धर्मशाला के आयोजकों, शकुंतला बड़े और प्रकाश सिंगोदिया पर, जो इस धर्मशाळा का संचालन करते हैं, दुकान और धर्मशाला के किराए का आनंद लेने के बावजूद समाज को कोई हिसाब न देने का आरोप लगाया। साथ ही, देश के धोबी समाज के सबसे बड़े नेता और बिहार के पूर्व मंत्री व वर्तमान विधायक श्याम रजक पर भी निशाना साधते हुए कहा गया कि वे पुष्प माला के स्वागत में चूर थे, जबकि उन्हें एक संत का अपमान नहीं करना चाहिए था। यह पूरी घटना 'जय गाडगे जय त्रिलोकी नाथ' के नारों के साथ खत्म हुई, जो इस अपमान के प्रति आक्रोश को दर्शाता है।1