नीमच जिले की रामपुरा तहसील स्थित ग्राम पंचायत दुधलाई में मनरेगा के तहत हुए वृक्षारोपण कार्य में गंभीर अनियमितताएँ सामने आई हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, मार्च 2024 से जुलाई 2025 तक 448 दिनों तक काम चला दिखाया गया है, जिस पर लगभग 1.07 लाख रुपये का भुगतान भी हो चुका है। हालांकि, ग्राम पड़दा के सामाजिक कार्यकर्ता शंकर लाल धनगर ने 11 जून 2026 को मौके पर निरीक्षण किया और पाया कि 'पतवारी के पास' वाली भूमि पर न तो कोई नया गड्ढा था, न नए पौधे और न ही सुरक्षा बाड़; वहाँ केवल 8-10 वर्ष पुराने कुछ सूखे पेड़ थे जो निजी भूमि पर स्थित थे। सरकारी एमआईएस पोर्टल से निकाले गए मस्टर रोल क्रमांक 341 से 348 में कार्यस्थल स्पष्ट रूप से "पतवारी के पास, ग्राम दुधलाई" दर्ज है, जहाँ 448 मानव दिवस सृजित किए गए और प्रतिदिन 20-25 मजदूर उपस्थित दर्शाए गए। लेकिन, जब यह अनियमितता उजागर हुई, तो ग्राम पंचायत के सरपंच पति और सचिव ने अपना बयान बदल दिया। उन्होंने दावा किया कि वृक्षारोपण का कार्य 'पतवारी के पास' नहीं, बल्कि किसी 'दूसरी जगह' कराया गया था, जिससे ऑनलाइन सरकारी दस्तावेज में दर्ज स्थल और उनके मौखिक बयान में सीधा विरोधाभास पैदा हो गया। धनगर का आरोप है कि यह सब शासन के पैसे को हड़पने के लिए झूठ पर झूठ बोला जा रहा है, जिसमें फर्जी हाजिरी, एनएमएमएस ऐप पर फर्जी जियो-टैग्ड फोटो और माप पुस्तिका क्रमांक 306633 में बिना मापे एंट्री करना शामिल है, और अब पकड़े जाने पर कार्यस्थल ही बदलने का प्रयास किया जा रहा है। शंकर लाल धनगर ने 11 जून 2026 को इस पूरे मामले की लिखित शिकायत कलेक्टर नीमच, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत नीमच और मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत मनासा को दी थी, जिसमें मस्टर रोल की प्रति, मौके की फोटो और ऑनलाइन मास्टर का प्रिंटआउट भी संलग्न था। हालांकि, शिकायत प्रस्तुत किए चार दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन द्वारा न तो कोई जांच दल गठित किया गया है और न ही जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है। प्रशासन से सवाल पूछे जा रहे हैं कि ऑनलाइन रिकॉर्ड में कार्यस्थल अलग होने पर सरपंच 'दूसरी जगह' का दावा क्यों कर रहे हैं, यदि कार्य अन्यत्र हुआ तो उस स्थल की नाप पुस्तिका, मस्टर रोल और जियो-टैग फोटो कहाँ हैं, 448 दिन और ₹1.07 लाख खर्च के बाद भी परिसंपत्ति रजिस्टर में एक भी पौधा क्यों दर्ज नहीं है, और सरकारी दस्तावेज से भिन्न बयान देकर भुगतान लेना किस श्रेणी का अपराध है। स्पष्ट है कि मनरेगा का उद्देश्य, ग्रामीणों को रोजगार और गाँव को हरियाली देना, इस मामले में पूरा नहीं हुआ, बल्कि केवल सरकारी खजाने पर डाका डाला गया।
नीमच जिले की रामपुरा तहसील स्थित ग्राम पंचायत दुधलाई में मनरेगा के तहत हुए वृक्षारोपण कार्य में गंभीर अनियमितताएँ सामने आई हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, मार्च 2024 से जुलाई 2025 तक 448 दिनों तक काम चला दिखाया गया है, जिस पर लगभग 1.07 लाख रुपये का भुगतान भी हो चुका है। हालांकि, ग्राम पड़दा के सामाजिक कार्यकर्ता शंकर लाल धनगर ने 11 जून 2026 को मौके पर निरीक्षण किया और पाया कि 'पतवारी के पास' वाली भूमि पर न तो कोई नया गड्ढा था, न नए पौधे और न ही सुरक्षा बाड़; वहाँ केवल 8-10 वर्ष पुराने कुछ सूखे पेड़ थे जो निजी भूमि पर स्थित थे। सरकारी एमआईएस पोर्टल से निकाले गए मस्टर रोल क्रमांक 341 से 348 में कार्यस्थल स्पष्ट रूप से "पतवारी के पास, ग्राम दुधलाई" दर्ज है, जहाँ 448 मानव दिवस सृजित किए गए और प्रतिदिन 20-25 मजदूर उपस्थित दर्शाए गए। लेकिन, जब यह अनियमितता उजागर हुई, तो ग्राम पंचायत के सरपंच पति और सचिव ने अपना बयान बदल दिया। उन्होंने दावा किया कि वृक्षारोपण का कार्य 'पतवारी के पास' नहीं, बल्कि किसी 'दूसरी जगह' कराया गया था, जिससे ऑनलाइन सरकारी दस्तावेज में दर्ज स्थल और उनके मौखिक बयान में सीधा विरोधाभास पैदा हो गया। धनगर का आरोप है कि यह सब शासन के पैसे को हड़पने के लिए झूठ पर झूठ बोला जा रहा है, जिसमें फर्जी हाजिरी, एनएमएमएस ऐप पर फर्जी जियो-टैग्ड फोटो और माप पुस्तिका क्रमांक 306633 में बिना मापे एंट्री करना शामिल है, और अब पकड़े जाने पर कार्यस्थल ही बदलने का प्रयास किया जा रहा है। शंकर लाल धनगर ने 11 जून 2026 को इस पूरे मामले की लिखित शिकायत कलेक्टर नीमच, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत नीमच और मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत मनासा को दी थी, जिसमें मस्टर रोल की प्रति, मौके की फोटो और ऑनलाइन मास्टर का प्रिंटआउट भी संलग्न था। हालांकि, शिकायत प्रस्तुत किए चार दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन द्वारा न तो कोई जांच दल गठित किया गया है और न ही जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है। प्रशासन से सवाल पूछे जा रहे हैं कि ऑनलाइन रिकॉर्ड में कार्यस्थल अलग होने पर सरपंच 'दूसरी जगह' का दावा क्यों कर रहे हैं, यदि कार्य अन्यत्र हुआ तो उस स्थल की नाप पुस्तिका, मस्टर रोल और जियो-टैग फोटो कहाँ हैं, 448 दिन और ₹1.07 लाख खर्च के बाद भी परिसंपत्ति रजिस्टर में एक भी पौधा क्यों दर्ज नहीं है, और सरकारी दस्तावेज से भिन्न बयान देकर भुगतान लेना किस श्रेणी का अपराध है। स्पष्ट है कि मनरेगा का उद्देश्य, ग्रामीणों को रोजगार और गाँव को हरियाली देना, इस मामले में पूरा नहीं हुआ, बल्कि केवल सरकारी खजाने पर डाका डाला गया।
- मध्य प्रदेश से मिली एक खास रिपोर्ट के अनुसार, एक 8 साल के बच्चे ने अटूट विश्वास व्यक्त करते हुए कहा है कि अगर भगवान पर सच्चा और अटूट विश्वास हो, तो उन्हें केवल 1 रुपये में भी पाया जा सकता है। बच्चे ने अपनी इस बात के साथ यह प्रश्न भी उठाया कि लोग इस पर विश्वास करेंगे या नहीं।1
- अनीता के पति दिनेश बिश्नोई ने अपने गहरे दुख को व्यक्त किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें इस कानून पर कोई विश्वास नहीं है, और उनका मानना है कि ऐसे व्यक्तियों को केवल भगवान ही उचित सज़ा दे सकते हैं। दिनेश बिश्नोई का दृढ़ विश्वास है कि 'भगवान के घर देर हो सकती है, लेकिन अंधेर नहीं', जो न्याय के प्रति उनकी गहरी आस्था को दर्शाता है, भले ही वे वर्तमान कानूनी व्यवस्था से निराश हों।1
- रामप्रसाद धनगर गुर्जर की खास खबर के अनुसार, चंदवास में श्री राघव शरण जी महाराज द्वारा श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है।1
- लोगों से अपने बच्चों को टोमेटो केचप से बचाने का आग्रह किया गया है, क्योंकि इसमें मौजूद सोडियम बेंजोएट और विटामिन C मिलकर 'कैंसर बनाने की मशीन' का काम करते हैं। इस गंभीर स्वास्थ्य मुद्दे पर सरकार और FSSAI पर पूरी तरह से मौन रहने का आरोप लगाया गया है। पोस्ट में नागरिकों से अपील की गई है कि वे जागें, अपने स्वास्थ्य का स्वयं ध्यान रखें और इस खतरे के खिलाफ आवाज़ उठाएँ। चेतावनी दी गई है कि जब तक भारत में खाद्य को एक अपराध नहीं माना जाएगा, तब तक 'फ़ूड माफ़िया' हमारी सेहत के साथ खिलवाड़ करते रहेंगे।1
- चित्तौड़गढ़ शहर में हुई बारिश के बाद कलेक्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर सड़क पर हुए जलभराव ने आमजन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जिला प्रशासन के प्रमुख कार्यालयों के बाहर ही पानी जमा होने से लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि संबंधित विभागों की अनदेखी और उचित जल निकासी व्यवस्था के अभाव में यह समस्या बार-बार सामने आती है। कार्यालयों में विभिन्न कार्यों से आने वाले ग्रामीणों, महिलाओं, बुजुर्गों और कर्मचारियों को पानी से भरे रास्ते से गुजरना पड़ रहा है, वहीं कई स्थानों पर सड़क और नालियों का अंतर दिखाई नहीं देने से दुर्घटना की आशंका भी बनी हुई है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासनिक मुख्यालय के बाहर ही ऐसे हालात हैं तो शहर के अन्य क्षेत्रों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। नागरिकों ने संबंधित विभागों से तत्काल जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा स्थायी समाधान के लिए आवश्यक निर्माण एवं मरम्मत कार्य कराने की मांग की है। उनका यह भी कहना है कि बरसात का मौसम अभी शुरू ही हुआ है और यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो आगामी दिनों में समस्या और गंभीर हो सकती है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से जनता की परेशानी को देखते हुए मौके का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने का आग्रह किया है, ताकि आमजन को राहत मिल सके और भविष्य में इस प्रकार की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।1
- चामटी खेड़ा और दिवाकर नगर क्षेत्र में एक पेड़ गिरने से मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया है, जिसके कारण बिजली आपूर्ति भी ठप पड़ गई है। इसी क्रम में, विदुषी बिल्लू को महिला जिलाध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया गया है। दूसरी ओर, माहेश्वरी समाज में होने वाले आगामी चुनावों की तैयारियां भी तेजी से चल रही हैं।1
- भाजपा पिछड़ा मोर्चा के जिलाध्यक्ष समरथ बागवान का नीमच जिले के कुशाभाऊ ठाकरे मंडल में भव्य स्वागत किया गया। यह विशेष स्वागत उनके गांव-गांव जाकर किए गए दौरे के उपरांत हुआ। इस आयोजन की जानकारी भविष्य न्यूज़ 24 द्वारा दी गई है।1
- रतलाम में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कोर्ट चौराहे पर प्रदर्शन करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला जलाया। इस दौरान प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर लोकतंत्र की हत्या करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।1
- चित्तौड़ के बेगूं में स्वराज ट्रैक्टर कंपनी द्वारा एक टेस्ट कैंप का आयोजन किया गया था। इस कैंप में महिंद्रा का एक, स्वराज के दो, मैसी का एक और सोनालिका का एक ट्रैक्टर सहित कई अन्य कंपनियों के ट्रैक्टरों ने भाग लिया। इस टेस्ट की खास बात यह थी कि खेत वाली ज़मीन का चुनाव भी स्वराज कंपनी ने ही किया था। हालांकि, स्वराज कंपनी के दोनों ट्रैक्टरों का प्रदर्शन अच्छा नहीं देखा गया, और अंततः महिंद्रा ट्रैक्टर ने बाजी मार ली।1