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उत्तराखंड खेड़ा में अतिक्रमण मुक्त कराई गई जमीन पर नहीं मिलेगी नमाज पढ़ने की परमिशन — रुद्रपुर के महापौर विकास शर्मा बोले, नमाज के लिए मुस्लिम समाज खुद करें वैकल्पिक व्यवस्था।
रिपोर्टर अर्जुन कुमार
उत्तराखंड खेड़ा में अतिक्रमण मुक्त कराई गई जमीन पर नहीं मिलेगी नमाज पढ़ने की परमिशन — रुद्रपुर के महापौर विकास शर्मा बोले, नमाज के लिए मुस्लिम समाज खुद करें वैकल्पिक व्यवस्था।
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- उत्तराखंड खेड़ा में अतिक्रमण मुक्त कराई गई जमीन पर नहीं मिलेगी नमाज पढ़ने की परमिशन — रुद्रपुर के महापौर विकास शर्मा बोले, नमाज के लिए मुस्लिम समाज खुद करें वैकल्पिक व्यवस्था।1
- Post by शैल शक्ति1
- बिलासपुर में भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) से जुड़े किसानों ने भारत-अमेरिका व्यापार डील के विरोध में प्रदर्शन किया।मंगलवार को किसानों ने ट्रैक्टर मार्च निकालकर केंद्र सरकार से इस समझौते को तत्काल समाप्त करने की मांग की।इस दौरान प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित दो अलग-अलग ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा। बता दें कि रामपुर के बिलासपुर में मंगलवार की सुबह लगभग 11 बजे भाकियू (चढूनी) गुट के पदाधिकारी और कार्यकर्ता जिलाध्यक्ष सरदार हरदीप सिंह पड्डा के नेतृत्व में हाईवे स्थित मन्नत गार्डन पर एकत्र हुए। बड़ी संख्या में किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ पहुंचे।किसानों ने एक सभा आयोजित कर भारत-अमेरिका व्यापार डील को किसानों के हितों के विरुद्ध बताया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।दोपहर करीब 12 बजे किसान ट्रैक्टरों पर सवार होकर ट्रैक्टर मार्च के रूप में मुख्य चौराहे की ओर बढ़े जहां विरोध प्रदर्शन किया गया।इस बाद किसान तहसील भवन की ओर बढ़ने लगे जहां पूर्व विधायक संजय कपूर तमाम कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के साथ इस ट्रैक्टर मार्च में शामिल हुए और वही ट्रैक्टर मार्च के दौरान रामपुर रोड पर तहसीलदार शिवकुमार शर्मा मौकें पहुंचें और इस दौरान किसानों ने हाथों में झंडे और बैनर लेकर नारेबाजी की। मुख्य चौराहे पर पहुंचकर उन्होंने सरकार से इस डील को तुरंत रद्द करने की मांग दोहराई।जिलाध्यक्ष हरदीप सिंह पड्डा ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारतीय किसानों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस डील से विदेशी कृषि उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा,जिससे देश के किसानों को नुकसान होगा।पड्डा ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने जल्द ही इस व्यापार डील को वापस नहीं लिया, तो भारतीय किसान यूनियन बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसान अपने अधिकारों के लिए किसी भी स्तर तक संघर्ष करने को तैयार हैं।किसानों ने सरकार से ऐसी किसी भी नीति या समझौते से बचने का आग्रह किया, जिससे देश के किसानों की आजीविका प्रभावित हो।उन्होंने एकजुट होकर सरकार से किसानों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की।किसान नेताओं ने दोहराया कि यदि उनकी मांगें समय पर परी नहीं दर्द तो उन्हें बटे आंदोलन के लिए विवश होना न पड़े।4
- Post by BREAKING RV NEWS , Vimal Singh1
- महिला दिवस पर खटीमा में मिलेट मेले की धूम, लेकिन मुख्य अतिथि महिला ब्लॉक प्रमुख ही रहीं नदारद ! खटीमा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जहाँ पूरी दुनिया नारी शक्ति का जश्न मना रही है, वहीं उत्तराखंड के खटीमा में एक अजीबोगरीब स्थिति देखने को मिली। ब्लॉक सभागार में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भव्य मिलेट मेले का आयोजन किया गया था। विडंबना देखिए, जिस कार्यक्रम की मुख्य शोभा महिला ब्लॉक प्रमुख सरिता राणा को बढ़ानी थी, वे खुद इस खास मौके पर कार्यक्रम से नदारद रहीं। मेले में सजे स्टॉल, उपस्थित महिलाएं और खाली मुख्य अतिथि की कुर्सी, खटीमा के ब्लॉक सभागार में सुबह से ही गहमागहमी रही। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में कृषि और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से मोटे अनाज यानी 'मिलेट' को बढ़ावा देने के लिए प्रदर्शनी लगाई गई थी। मेले में क्षेत्र की सैकड़ों महिलाओं ने उत्साह के साथ भाग लिया और अपनी प्रतिभा व उत्पादों का प्रदर्शन किया जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, चर्चा का विषय महिला सशक्तिकरण से हटकर ब्लॉक प्रमुख की गैर-मौजूदगी पर टिक गया। आयोजन की सूचना और निमंत्रण के बावजूद, ब्लॉक प्रमुख सरिता राणा कार्यक्रम में नहीं पहुँचीं। हालांकि, ब्लॉक प्रमुख की अनुपस्थिति के बाद भी विभागीय अधिकारियों ने कार्यक्रम को जारी रखा। मेले का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को "श्री अन्न" मिलेट की खेती और उसके पौष्टिक फायदों के प्रति जागरूक करना था। स्टॉल्स पर मांडवा, झंगोरा और अन्य स्थानीय उत्पादों के व्यंजन परोसे गए, जिन्हें लोगों ने खूब सराहा। सवाल तो अब यह उठ रहा है कि क्या यह केवल समय की कमी थी या कोई आपसी खींचतान, मीडिया द्वारा सवाल पूछे जाने पर कोई जवाब नहीं मिला।विनीता सक्सेना जिलाध्यक्ष।1
- गुरुग्राम में दिल दहलाने वाला हादसा हुआ है। यहां एक निर्माणाधीन सोसाइटी की दीवार गिरने से 6 मजदूरों की मौत हो गई है और मलबे में कई के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, हादसे के समय मजदूर दीवार के पास काम कर रहे थे। इसी दौरान दीवार जोरदार आवाज के साथ अचानक भरभरा कर गिरी। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस, प्रशासन और SDRF की टीम मौके पर पहुंच गई है। भारी मशीनों से मलबा हटाने का काम और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस मौके पर तैनात हैं। वहीं, प्रशासन हादसे के कारणों की जांच में जुटा हुआ है1
- विडियो देखें-उत्तराखंड (विधानसभा) विधानसभा सत्र में उत्तराखंड नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने बयां की सच्चाई। जब लोकतांत्रिक संस्थाओं की मर्यादाएँ टूटती हैं, जब संसदीय परंपराएँ तार-तार होने लगती हैं, तब स्वाभाविक रूप से सब्र का बाँध भी टूट जाता है। आज जो स्थिति सदन में बनी है, उसका कारण भी यही है कि माननीय सदस्यों द्वारा नियमों के तहत दी गई सूचनाओं को स्वीकार नहीं किया जा रहा है। यह पंचम विधानसभा का दसवाँ सत्र है और यदि इस बार के सत्र को भी जोड़ लिया जाए तो पिछले चार वर्षों में यह सदन कुल मिलाकर केवल 36 दिन ही चलेगा। यह स्थिति अपने आप में चिंताजनक है। विधानसभा लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण मंच है। यही वह स्थान है जहाँ जनता के प्रतिनिधि अपने क्षेत्र की समस्याओं और जनता की पीड़ा को सरकार के सामने रखते हैं। लेकिन यदि सदन इतने सीमित दिनों तक ही चलेगा तो प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चर्चा कैसे हो पाएगी? राज्य की जनता की विपक्ष से बहुत अपेक्षाएँ होती हैं। जनता चाहती है कि उनके मुद्दे इस सदन में मजबूती के साथ उठाए जाएँ। हम विपक्ष के सदस्य सीमित समय में भी पूरी जिम्मेदारी के साथ उन सभी विषयों को उठाने का प्रयास करते हैं जो हमारे संज्ञान में आते हैं और जो प्रदेश की जनता के हित से जुड़े होते हैं। लेकिन बड़े खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि राज्य की पंचम विधानसभा में संसदीय परंपराओं को बुरी तरह तोड़ा गया है और कार्य संचालन नियमावली की भी अपेक्षित परवाह नहीं की गई है। हमारी यह मांग थी कि यह सत्र कम से कम 21 दिन का होना चाहिए, ताकि महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हो सके और सरकार जनता के प्रति अपनी जवाबदेही निभा सके। लेकिन सरकार न केवल इस मांग को स्वीकार नहीं कर रही है, बल्कि उल्टा ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सदन की कार्यवाही को भी नियमानुसार संचालित नहीं किया जा रहा है। विधानसभा की अपनी परंपराएँ और मर्यादाएँ होती हैं। इन परंपराओं के अंतर्गत नेता प्रतिपक्ष के कुछ परंपरागत विशेषाधिकार भी होते हैं। सदन की यह परंपरा रही है कि जब नेता प्रतिपक्ष अपनी बात रखते हैं तो उन्हें पूरा अवसर दिया जाता है। यहाँ तक कि विधानसभा अध्यक्ष भी सामान्यतः उन्हें बीच में नहीं टोकते, क्योंकि यह पद केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे विपक्ष की आवाज का प्रतिनिधित्व करता है। दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष भी सदन की मर्यादा और अपनी सीमाओं का पूरा ध्यान रखते हैं। लेकिन अत्यंत दुर्भाग्य की बात है कि माननीय विधानसभा अध्यक्ष जी के मुख से एक बार भी “माननीय नेता प्रतिपक्ष” शब्द नहीं निकला। यह स्थिति केवल शब्दों का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह सदन की परंपराओं और लोकतांत्रिक मर्यादाओं से जुड़ा हुआ विषय है। आज तक किसी भी विधानसभा अध्यक्ष ने अध्यक्ष के आसन पर बैठकर इस प्रकार का व्यवहार नहीं किया है। अध्यक्ष का पद अत्यंत गरिमामय और निष्पक्ष माना जाता है, और उसी भावना के साथ इस पद से अपेक्षा की जाती है कि वह पूरे सदन को समान रूप से सम्मान दे। हम सभी इस सदन की गरिमा और संसदीय शालीनता को बनाए रखने में विश्वास रखते हैं। लेकिन यदि संसदीय परंपराएँ लगातार टूटेंगी, यदि नियमों की अनदेखी होगी और यदि विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास किया जाएगा, तो फिर हमें भी इन परंपराओं की रक्षा के लिए मजबूर होकर अपनी आवाज और अधिक मजबूती से उठानी पड़ेगी। क्योंकि जब संसदीय परंपराएँ टूटती हैं, तो उन्हें बचाने और उनकी रक्षा करने की जिम्मेदारी भी हम सभी जनप्रतिनिधियों की ही होती है।1
- रुद्रपुर में ठगी की एक चौंकाने वाली वारदात सामने आई है, जहां ठगों ने एक बुजुर्ग महिला को सम्मोहित कर करीब 15 लाख रुपये के सोने के आभूषण ठग लिए। यह घटना कोतवाली क्षेत्र की शांति विहार कॉलोनी में रविवार दोपहर हुई, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया।जानकारी के अनुसार शांति विहार कॉलोनी निवासी बुजुर्ग महिला रजनी गर्ग बाजार जाने के लिए घर से निकली थीं। जब वह रेलवे क्रॉसिंग मोड़ के पास पहुंचीं तो एक युवक ने उनसे किसी बाबा का नाम लेकर पता पूछा। महिला ने रास्ता बताया और आगे बढ़ने लगीं, तभी कुछ दूरी पर दो अन्य व्यक्ति, जो नकाब और हेलमेट पहने हुए थे, उनसे बातचीत करने लगे।आरोपियों ने महिला को बताया कि उनके परिवार पर बुरा साया है और इसी वजह से घर में परेशानियां चल रही हैं। बातचीत के दौरान ठगों ने महिला को इस तरह अपने प्रभाव में ले लिया कि उनकी सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित हो गई और वह उनके कहे अनुसार काम करने लगीं।इसके बाद महिला उनके कहने पर अपने घर गई और अलमारी का लॉकर खोलकर करीब 12 से 13 तोले सोने के आभूषण निकालकर आरोपियों को दे दिए। ठगों ने आभूषणों को सफेद कागज में लपेटकर एक पोटली बनाकर महिला को दे दी और भगवान का नाम लेते हुए पीछे मुड़कर न देखने और रास्ते में पोटली न खोलने की हिदायत दी।डरी हुई महिला घर पहुंची और पोटली को मंदिर में रख दिया। कुछ देर बाद शक होने पर जब उन्होंने पोटली खोली तो उसके अंदर आभूषणों की जगह पत्थर मिले। इसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने परिजनों को घटना की जानकारी दी।सूचना मिलने के बाद रुद्रपुर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। सी ओ प्रशांत कुमार ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर आरोपियों की तलाश की जा रही है। जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। ,प्रशांत कुमार सीओ सिटी रूद्रपुर1