बिहार के आरा में हुआ भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला अब एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मोड़ पर आ गया है। इस एनकाउंटर की सच्चाई पर अब बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने ही सबसे बड़ा सवाल उठाया है, जिन्होंने पुलिसिया कार्रवाई को पूरी तरह कटघरे में खड़ा करते हुए इसे 'एनकाउंटर' मानने से साफ इनकार कर दिया है और इसे 'प्रथम दृष्ट्या हत्या' का मामला बताया है। अयोध्या से जारी एक वीडियो संदेश में पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि मृतक भरत तिवारी कोई पेशेवर अपराधी, डकैत, रंगदार या आतंकवादी नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह स्थानीय लोगों और जवनिया गांव के विस्थापितों की समस्याओं के लिए लड़ने वाला एक व्यक्ति था। पूर्व डीजीपी ने सोशल मीडिया पर वायरल क्लिपिंग्स का हवाला देते हुए पुलिस की थ्योरी की धज्जियां उड़ा दी हैं। पूर्व डीजीपी ने जो सवाल उठाए हैं, वे कानून व्यवस्था और पुलिस की ट्रेनिंग को शर्मसार करने वाले हैं। उन्होंने पूछा कि जब पुलिस खुद मान रही है कि भरत तिवारी मानसिक रूप से विक्षिप्त यानी इमोशनली अनबैलेंस था, तो एक बीमार व्यक्ति पर इतनी बर्बरता क्यों की गई? उनका दूसरा सवाल था कि भरत तिवारी के हाथ में जो पिस्टल थी, उसकी मारक क्षमता महज 30 मीटर होती है, जबकि पुलिस बल उससे 200 मीटर की दूरी पर था; ऐसे में पुलिस को कौन सा जानलेवा खतरा था? तीसरा और सबसे बड़ा सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि वीडियो में साफ दिख रहा है कि भरत तिवारी ने अपना हथियार फेंक दिया था, वह निहत्था हो चुका था और सरेंडर कर रहा था, तो फिर निहत्थे शख्स पर आधुनिक हथियारों से गोलियों की बौछार क्यों की गई? गुप्तेश्वर पांडेय ने साफ शब्दों में कहा है कि पुलिस को गाली देना या परेशान करना किसी की जान लेने का लाइसेंस नहीं बन जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने अपने अहंकार को चोट पहुंचने के कारण आपा खोया और एक निहत्थे की जान ले ली। उन्होंने मुख्यमंत्री और मौजूदा डीजीपी से मांग की है कि इस मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज हो, दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी हो और माननीय उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में एसआईटी जांच कराई जाए। खाकी पर लगे इस गहरे दाग के बाद अब प्रशासन क्या जवाब देगा, इस पर हमारी नजर बनी रहेगी।
बिहार के आरा में हुआ भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला अब एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मोड़ पर आ गया है। इस एनकाउंटर की सच्चाई पर अब बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने ही सबसे बड़ा सवाल उठाया है, जिन्होंने पुलिसिया कार्रवाई को पूरी तरह कटघरे में खड़ा करते हुए इसे 'एनकाउंटर' मानने से साफ इनकार कर दिया है और इसे 'प्रथम दृष्ट्या हत्या' का मामला बताया है। अयोध्या से जारी एक वीडियो संदेश में पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि मृतक भरत तिवारी कोई पेशेवर अपराधी, डकैत, रंगदार या आतंकवादी नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह स्थानीय लोगों और जवनिया गांव के विस्थापितों की समस्याओं के लिए लड़ने वाला एक व्यक्ति था। पूर्व डीजीपी ने सोशल मीडिया पर वायरल क्लिपिंग्स का हवाला देते हुए पुलिस की थ्योरी की धज्जियां उड़ा दी हैं। पूर्व डीजीपी ने जो सवाल उठाए हैं, वे कानून व्यवस्था और पुलिस की ट्रेनिंग को शर्मसार करने वाले हैं। उन्होंने पूछा कि जब पुलिस खुद मान रही है कि भरत तिवारी मानसिक रूप से विक्षिप्त यानी इमोशनली अनबैलेंस था, तो एक बीमार व्यक्ति पर इतनी बर्बरता क्यों की गई? उनका दूसरा सवाल था कि भरत तिवारी के हाथ में जो पिस्टल थी, उसकी मारक क्षमता महज 30 मीटर होती है, जबकि पुलिस बल उससे 200 मीटर की दूरी पर था; ऐसे में पुलिस को कौन सा जानलेवा खतरा था? तीसरा और सबसे बड़ा सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि वीडियो में साफ दिख रहा है कि भरत तिवारी ने अपना हथियार फेंक दिया था, वह निहत्था हो चुका था और सरेंडर कर रहा था, तो फिर निहत्थे शख्स पर आधुनिक हथियारों से गोलियों की बौछार क्यों की गई? गुप्तेश्वर पांडेय ने साफ शब्दों में कहा है कि पुलिस को गाली देना या परेशान करना किसी की जान लेने का लाइसेंस नहीं बन जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने अपने अहंकार को चोट पहुंचने के कारण आपा खोया और एक निहत्थे की जान ले ली। उन्होंने मुख्यमंत्री और मौजूदा डीजीपी से मांग की है कि इस मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज हो, दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी हो और माननीय उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में एसआईटी जांच कराई जाए। खाकी पर लगे इस गहरे दाग के बाद अब प्रशासन क्या जवाब देगा, इस पर हमारी नजर बनी रहेगी।
- महंगाई और बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों को लेकर सरकार के प्रति जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। एक राजद (RJD) समर्थक ने सरकार को मंच से जमकर घेरा और इन गंभीर समस्याओं पर अपना तीव्र आक्रोश व्यक्त किया। वायरल हो रहे एक वीडियो में, समर्थक को सरकार की नीतियों पर तीखे हमले करते हुए देखा गया है।1
- समस्तीपुर जिले के वारिसनगर प्रखंड अंतर्गत छत्नेश्वर पंचायत के नवहट्टा गांव में मंगलवार सुबह गैस सिलेंडर लीकेज होने से भीषण आग लग गई। इस हादसे में तीन परिवारों के घर समेत लाखों रुपए की संपत्ति जलकर राख हो गई, जिससे वे बेघर हो गए। हालांकि, ग्रामीणों और अग्निशमन विभाग की तत्परता से आग पर समय रहते काबू पा लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। मिली जानकारी के अनुसार, सुबह करीब नौ बजे एक घर में खाना बनाने के दौरान एचपी गैस सिलेंडर के वाल्व से गैस का रिसाव शुरू हो गया। रिसाव के कारण आग सीधे सिलेंडर के वाल्व में पकड़ गई, जिसकी गंभीरता का अंदाजा शुरुआत में परिजनों को नहीं लगा। देखते ही देखते आग ने भयंकर रूप ले लिया और खपरैल तथा फूस से बने घरों को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी तेज़ी से फैली कि कुछ ही समय में आस-पास के घर भी इसकी चपेट में आ गए। इस घटना में घर में रखे कपड़े, बर्तन, फर्नीचर, कुर्सी, टेबल, चौकी, बिजली के उपकरण, जेवर-जेवरात, नगद राशि और एक मोबाइल फोन सहित दैनिक उपयोग की सभी सामग्री पूरी तरह नष्ट हो गई। घटना की सूचना मिलते ही वारिसनगर थाना पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। दमकल कर्मियों ने ग्रामीणों के सहयोग से काफी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया। इस भीषण अग्निकांड में रामबली पासवान (पिता-स्व. ननकी पासवान), राजेश पासवान (पिता-रामबली पासवान) और मनोज पासवान (पिता-राम विनय पासवान) के घरों को भारी क्षति पहुंची है। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पीड़ित परिवारों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल उचित मुआवजा और राहत सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।1
- दरभंगा जिले के बहुअरवा में हुए एक सड़क हादसे में घायल पीड़ित और उनके परिवार से मुलाकात कर स्थिति का जायजा लिया गया। बातचीत के दौरान यह जानकारी सामने आई कि इलाज के खर्च के लिए परिवार को लगभग ₹30,000 का कर्ज लेना पड़ा है, और घायल का उपचार अभी भी जारी है। इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर वर्षों से खराब पड़ी सड़क के कारण लगातार हो रही दुर्घटनाओं, जिसमें लोग घायल हो रहे हैं और अपनी जान गँवा रहे हैं, की जिम्मेदारी किसकी है। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का ध्यान सड़क की इस बदहाली पर कब जाएगा, यह एक गंभीर चिंता का विषय है। यदि सड़क की मरम्मत समय पर नहीं हो सकती, तो कम से कम दुर्घटना पीड़ितों के लिए उचित मुआवजा और इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि उन्हें आर्थिक संकट से न जूझना पड़े। लोगों से अपील की गई है कि वे इस चाची और ऐसे सभी सड़क हादसा पीड़ित परिवारों की आवाज बनें। एक एकजुट आवाज प्रशासन और जनप्रतिनिधियों तक उनकी पीड़ा पहुंचा सकती है और न्याय की मांग को मजबूत कर सकती है। पीड़ित परिवार का एक विस्तृत इंटरव्यू वीडियो जल्द ही जारी किया जाएगा, जिसमें उनकी पूरी आपबीती साझा की जाएगी।1
- समस्तीपुर में ड्यूटी से वापस लौट रही एक महिला कर्मी के साथ लूट की घटना सामने आई है। महिला ने तीन युवकों पर उससे दस हज़ार रुपये छीनने और छेड़छाड़ करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में पीड़ित महिला ने स्थानीय थाना में एक आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराई है।1
- बिहार के समस्तीपुर जिले के मथुरापुर घाट से जारी एक वीडियो में क्षेत्र में भीषण गर्मी की स्थिति पर प्रकाश डाला गया है। बताया गया है कि तेज धूप और गर्म हवाओं का प्रकोप इतना अधिक है कि इससे जनजीवन काफी प्रभावित हो रहा है। इस अत्यधिक गर्मी के कारण लोगों को अपने रोजगार से जुड़े किसी भी कार्य को करने में, साथ ही घरों के रोजमर्रा के कामों को निपटाने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।1
- मुजफ्फरपुर में उस समय हड़कंप मच गया जब एक फर्नीचर दुकान के कमरे से एक मजदूर का शव बरामद किया गया। इस घटना के बाद, पुलिस तुरंत मामले की जांच में जुट गई है।1
- समस्तीपुर के ताजपुर क्षेत्र में, 20 जून 2026 को ऐपवा और भाकपा माले के नेतृत्व में फतेहपुर पंचायत भवन पर एक प्रतिरोध मार्च निकालकर सभा का आयोजन किया गया। यह प्रदर्शन महिला थाना कांड संख्या 61/26 से जुड़े फतेहपुर नाबालिग दुष्कर्म मामले के आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने विशेष रूप से 'सरकारी दल से जुड़े रसूखदार आरोपी' की अविलंब गिरफ्तारी और पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग की। सभा को संबोधित करते हुए, भाकपा माले प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म जैसी गंभीर घटना के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी न होने पर पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने पीड़ित परिवार को न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया। भाकपा माले प्रखंड कमिटी सदस्य ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह ने आरोपी को बचाने की 'साजिश बंद करने' की मांग की, वहीं प्रभात रंजन गुप्ता ने पीड़ित के परिवार को डराने, धमकाने और 'मैनेज कराने' में लगे लोगों को चिन्हित कर कार्रवाई की मांग की। इस दौरान भाकपा माले और ऐपवा के कई सदस्य, जिनमें सुरेंद्र प्रसाद सिंह, ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, प्रभात रंजन गुप्ता, मनोज कुमार सिंह, सूर्यदेव प्रसाद सिंह, लाला प्रसाद सिंह, सोनिया देवी, सुलेखा कुमारी, धनवंती देवी, जागेश्वरी देवी, विमला देवी, उषा देवी, और सामाजिक कार्यकर्ता बलराम सिंह कुशवाहा व सूरज कुमार शामिल थे, बड़ी संख्या में महिला-पुरुषों और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ उपस्थित थे। वक्ताओं ने फतेहपुर और आसपास के ग्रामीणों से 22 जून को ताजपुर कर्बला पोखर से निकलने वाले जुलूस तथा ताजपुर थाना घेराव कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शामिल होकर उसे सफल बनाने की अपील की। उन्होंने जोर देकर कहा कि आरोपी की गिरफ्तारी और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए जनदबाव बनाना आवश्यक है। प्रतिरोध मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने नाबालिग दुष्कर्म कांड के आरोपी की गिरफ्तारी और पीड़िता के परिवार की सुरक्षा की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी भी की।1
- मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर स्थित राघोपुर में एक जमीनी विवाद ने हिंसक रूप ले लिया है। इस विवाद के दौरान एक व्यक्ति को गोली मार दी गई, जिससे उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।1