सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए कलेक्टर ने एक विशेष पहल शुरू की है, जिसके तहत जिले में 175 कुपोषित बच्चों की पहचान की गई है। इन बच्चों के लिए एक विशेष निगरानी और सुपोषण योजना लागू की गई है, जिसकी जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को सौंपी गई है। इस पहल के अंतर्गत, कुपोषित बच्चों वाले आंगनबाड़ी केंद्रों का चिन्हांकन किया गया है और उन केंद्रों पर अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। ये अधिकारी नियमित रूप से बच्चों के स्वास्थ्य, वजन और पोषण स्तर की निगरानी करेंगे। इसके साथ ही, गृह भ्रमण कर अभिभावकों को पोषण संबंधी परामर्श भी दिया जाएगा। कलेक्टर ने सभी आवंटित आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आपको बता दें कि जिले में अब तक 72 आंगनबाड़ी केंद्र कुपोषण मुक्त घोषित किए जा चुके हैं। जिला अस्पताल सारंगढ़ में संचालित सुपोषण केंद्र भी इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पिछले दो सालों में 465 कुपोषित बच्चों को एनआरसी सेंटर में भर्ती कर उपचार और सुपोषण आहार प्रदान किया गया। जनवरी से दिसंबर 2024 तक भर्ती हुए 177 बच्चों में से 80 प्रतिशत बच्चे सामान्य श्रेणी में आए, वहीं साल 2025 में भर्ती 170 बच्चों में लगभग 83 प्रतिशत बच्चे सामान्य श्रेणी में शामिल हुए। प्रशासन का लक्ष्य लगातार निगरानी, उपचार और पोषण आहार के माध्यम से पूरे जिले को कुपोषण मुक्त बनाना है। कलेक्टर की इस शानदार पहल की चारों ओर खूब चर्चा हो रही है, जिसमें जिले को कुपोषण मुक्त बनाने की इस नई कोशिश और 175 कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन पर प्रशासनिक निगरानी रखने पर जोर दिया जा रहा है।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए कलेक्टर ने एक विशेष पहल शुरू की है, जिसके तहत जिले में 175 कुपोषित बच्चों की पहचान की गई है। इन बच्चों के लिए एक विशेष निगरानी और सुपोषण योजना लागू की गई है, जिसकी जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को सौंपी गई है। इस पहल के अंतर्गत, कुपोषित बच्चों वाले आंगनबाड़ी केंद्रों का चिन्हांकन किया गया है और उन केंद्रों पर अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। ये अधिकारी नियमित रूप से बच्चों के स्वास्थ्य, वजन और पोषण स्तर की निगरानी करेंगे। इसके साथ ही, गृह भ्रमण कर अभिभावकों को पोषण संबंधी परामर्श भी दिया जाएगा। कलेक्टर ने सभी आवंटित आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आपको बता दें कि जिले में अब तक 72 आंगनबाड़ी केंद्र कुपोषण मुक्त घोषित किए जा चुके हैं। जिला अस्पताल सारंगढ़ में संचालित सुपोषण केंद्र भी इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पिछले दो सालों में 465 कुपोषित बच्चों को एनआरसी सेंटर में भर्ती कर उपचार और सुपोषण आहार प्रदान किया गया। जनवरी से दिसंबर 2024 तक भर्ती हुए 177 बच्चों में से 80 प्रतिशत बच्चे सामान्य श्रेणी में आए, वहीं साल 2025 में भर्ती 170 बच्चों में लगभग 83 प्रतिशत बच्चे सामान्य श्रेणी में शामिल हुए। प्रशासन का लक्ष्य लगातार निगरानी, उपचार और पोषण आहार के माध्यम से पूरे जिले को कुपोषण मुक्त बनाना है। कलेक्टर की इस शानदार पहल की चारों ओर खूब चर्चा हो रही है, जिसमें जिले को कुपोषण मुक्त बनाने की इस नई कोशिश और 175 कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन पर प्रशासनिक निगरानी रखने पर जोर दिया जा रहा है।
- रायगढ़ जिले में बिरहोर समुदाय के परिवार मूलभूत सुविधाओं के अभाव में लगातार भटकने को मजबूर हैं। अपनी इन्हीं समस्याओं के समाधान और मदद की उम्मीद में, ये परिवार रायगढ़ मुख्यालय आकर कलेक्टर से मिले और अपनी स्थिति बताते हुए गुहार लगाई है।1
- जांजगीर जिले के नैला स्थित एक खाद भंडार से कृषि विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 1013 बोरी खाद जब्त की है। इस कार्रवाई के तहत खाद की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। दुकान के निरीक्षण के दौरान खाद भंडार में कई अन्य कमियां भी पाई गईं।1
- कोरबा जिले के बारपाली में एक सरपंच के घर लाखों रुपये की चोरी का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद, स्थानीय लोगों द्वारा चोरों को जल्द से जल्द पकड़ने की मांग की जा रही है।1
- बिलासपुर जिले में बारिश की गतिविधियां बढ़ने के साथ ही खरीफ सीजन में धान की बोनी और रोपाई का काम तेजी से चल रहा है। इस स्थिति को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर ने किसानों के लिए मौसम आधारित कृषि सलाह जारी की है। केंद्र ने किसानों को प्रमाणित और उन्नत किस्म के धान के बीजों का उपयोग करने, बीजोपचार अपनाने तथा संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करते हुए वैज्ञानिक तरीके से खेती करने की सिफारिश की है। कृषि विज्ञान केंद्र ने विशेष रूप से इंद्रावती धान, एमटीयू-1153, विक्रम टीसीआर और छत्तीसगढ़ धान-1919 जैसी उन्नत एवं प्रमाणित किस्मों के बीजों के इस्तेमाल की सलाह दी है। सीधी बोनी करने वाले किसानों के लिए प्रति हेक्टेयर 50 किलोग्राम बीज का उपयोग करने, 20 सेंटीमीटर की कतार दूरी रखने और 3 से 4 सेंटीमीटर की गहराई पर बुवाई करने की अनुशंसा की गई है, जिससे पौधों का समान विकास होता है और फसल प्रबंधन आसान हो जाता है। रोपाई विधि अपनाने वाले किसानों को 20 से 21 दिन की स्वस्थ पौध का उपयोग करने तथा 20x10 सेंटीमीटर की दूरी पर प्रति स्थान 2 से 3 पौधे लगाने का सुझाव दिया गया है। इसके अतिरिक्त, नर्सरी की उचित देखभाल, समय पर रोपाई पूरी करने और खेत में जल निकासी की समुचित व्यवस्था बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। केंद्र ने किसानों को बुवाई से पहले बीजोपचार अनिवार्य रूप से करने, समय पर खरपतवार नियंत्रण करने और अनुशंसित मात्रा में नत्रजन, स्फुर एवं पोटाश का संतुलित उपयोग करने की भी सलाह दी है ताकि फसल की अच्छी बढ़वार सुनिश्चित हो सके और अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में जिले में घने बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। ऐसे में किसानों को इस अनुकूल मौसम का लाभ उठाकर धान की बोनी एवं रोपाई का कार्य समय पर पूरा करने की सलाह दी गई है। साथ ही, कीटनाशकों का छिड़काव केवल मौसम साफ रहने पर ही करने और खेतों की नियमित निगरानी रखने की अपील भी की गई है।1
- सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में स्कूली वाहनों की जाँच का अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में वाहन चालकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे नशे की हालत में गाड़ी न चलाएँ। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि इस आदेश का उल्लंघन करने वाले ड्राइवरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।1
- जैजैपुर पुलिस ने महिला संबंधी अपराध पर त्वरित कार्रवाई करते हुए, बंधक बनाकर सामूहिक दुष्कर्म करने वाले आरोपियों को मात्र चार घंटे के भीतर गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है। पुलिस की इस फुर्तीली कार्यवाही की जानकारी मिली है।1
- छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के कसडोल स्थित तुरतुरिया में, तेज बहाव के बीच सैकड़ों लोग फंस गए हैं।1