गोवर्धन में गुरुपूर्णिमा पर शुरू होने वाली मुड़िया महंत की शोभायात्रा और दंडवती परिक्रमा से ठीक पहले मुख्य परिक्रमा मार्ग की बदतर हालत देखकर लोगों की रूह कांप रही है। बारिश की महज एक बूंद गिरने से ही चकलेश्वर मंदिर से निकलने वाला यह पूरा मार्ग कीचड़ के दलदल में तब्दील हो गया है। देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए तैयार होने वाले इस पवित्र मार्ग पर जगह-जगह गहरे गड्ढे और गंदा पानी भरा हुआ है। बुजुर्ग माताएं, बहनें, संत और स्थानीय लोग नंगे पैर, हाथ में पूजा का सामान लिए दीवार पकड़कर अपनी जान जोखिम में डालकर निकलने को मजबूर हैं। यह वही मुख्य रास्ता है जहां से मुड़िया संत की भव्य शोभायात्रा निकलेगी और श्रद्धालु दंडवत करते हुए आगे बढ़ेंगे। स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है और उनका कहना है कि हर साल बारिश से पहले नाली-सफाई के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति की जाती है। इस बदहाली के कारण गुरुपूर्णिमा की भीड़ में कोई भी बड़ी अनहोनी हो सकती है, जिससे बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं कीचड़ में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं। इस घोर लापरवाही के बावजूद नगर पंचायत और प्रशासन अब भी मौन बैठा है। इस बदहाली को लेकर स्थानीय लोगों ने नगर पंचायत गोवर्धन और मथुरा के डीएम से तीन प्रमुख मांगें की हैं। पहली मांग के तहत 24 घंटे के भीतर चकलेश्वर से मुड़िया मंदिर तक का पूरा मार्ग तुरंत कीचड़ मुक्त किया जाए। दूसरी मांग है कि जेसीबी और पंप लगाकर जलभराव निकाला जाए और अस्थाई रूप से रास्ते पर गिट्टी डाली जाए। तीसरी मांग के अनुसार, गुरुपूर्णिमा से पहले स्थाई नाली निर्माण का टेंडर जारी कर जिम्मेदार अधिकारी की ड्यूटी लगाई जाए। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन से कड़ा सवाल पूछा गया है कि अगर उन्होंने अब भी आंखें बंद रखीं, तो श्रद्धालुओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी?
गोवर्धन में गुरुपूर्णिमा पर शुरू होने वाली मुड़िया महंत की शोभायात्रा और दंडवती परिक्रमा से ठीक पहले मुख्य परिक्रमा मार्ग की बदतर हालत देखकर लोगों की रूह कांप रही है। बारिश की महज एक बूंद गिरने से ही चकलेश्वर मंदिर से निकलने वाला यह पूरा मार्ग कीचड़ के दलदल में तब्दील हो गया है। देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए तैयार होने वाले इस पवित्र मार्ग पर जगह-जगह गहरे गड्ढे और गंदा पानी भरा हुआ है। बुजुर्ग माताएं, बहनें, संत और स्थानीय लोग नंगे पैर, हाथ में पूजा का सामान लिए दीवार पकड़कर अपनी जान जोखिम में डालकर
निकलने को मजबूर हैं। यह वही मुख्य रास्ता है जहां से मुड़िया संत की भव्य शोभायात्रा निकलेगी और श्रद्धालु दंडवत करते हुए आगे बढ़ेंगे। स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है और उनका कहना है कि हर साल बारिश से पहले नाली-सफाई के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति की जाती है। इस बदहाली के कारण गुरुपूर्णिमा की भीड़ में कोई भी बड़ी अनहोनी हो सकती है, जिससे बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं कीचड़ में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं। इस घोर लापरवाही के बावजूद नगर पंचायत और प्रशासन अब भी मौन बैठा है। इस बदहाली को लेकर स्थानीय लोगों ने
नगर पंचायत गोवर्धन और मथुरा के डीएम से तीन प्रमुख मांगें की हैं। पहली मांग के तहत 24 घंटे के भीतर चकलेश्वर से मुड़िया मंदिर तक का पूरा मार्ग तुरंत कीचड़ मुक्त किया जाए। दूसरी मांग है कि जेसीबी और पंप लगाकर जलभराव निकाला जाए और अस्थाई रूप से रास्ते पर गिट्टी डाली जाए। तीसरी मांग के अनुसार, गुरुपूर्णिमा से पहले स्थाई नाली निर्माण का टेंडर जारी कर जिम्मेदार अधिकारी की ड्यूटी लगाई जाए। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन से कड़ा सवाल पूछा गया है कि अगर उन्होंने अब भी आंखें बंद रखीं, तो श्रद्धालुओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी?
- गोवर्धन में गुरुपूर्णिमा पर शुरू होने वाली मुड़िया महंत की शोभायात्रा और दंडवती परिक्रमा से ठीक पहले मुख्य परिक्रमा मार्ग की बदतर हालत देखकर लोगों की रूह कांप रही है। बारिश की महज एक बूंद गिरने से ही चकलेश्वर मंदिर से निकलने वाला यह पूरा मार्ग कीचड़ के दलदल में तब्दील हो गया है। देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए तैयार होने वाले इस पवित्र मार्ग पर जगह-जगह गहरे गड्ढे और गंदा पानी भरा हुआ है। बुजुर्ग माताएं, बहनें, संत और स्थानीय लोग नंगे पैर, हाथ में पूजा का सामान लिए दीवार पकड़कर अपनी जान जोखिम में डालकर निकलने को मजबूर हैं। यह वही मुख्य रास्ता है जहां से मुड़िया संत की भव्य शोभायात्रा निकलेगी और श्रद्धालु दंडवत करते हुए आगे बढ़ेंगे। स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है और उनका कहना है कि हर साल बारिश से पहले नाली-सफाई के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति की जाती है। इस बदहाली के कारण गुरुपूर्णिमा की भीड़ में कोई भी बड़ी अनहोनी हो सकती है, जिससे बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं कीचड़ में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं। इस घोर लापरवाही के बावजूद नगर पंचायत और प्रशासन अब भी मौन बैठा है। इस बदहाली को लेकर स्थानीय लोगों ने नगर पंचायत गोवर्धन और मथुरा के डीएम से तीन प्रमुख मांगें की हैं। पहली मांग के तहत 24 घंटे के भीतर चकलेश्वर से मुड़िया मंदिर तक का पूरा मार्ग तुरंत कीचड़ मुक्त किया जाए। दूसरी मांग है कि जेसीबी और पंप लगाकर जलभराव निकाला जाए और अस्थाई रूप से रास्ते पर गिट्टी डाली जाए। तीसरी मांग के अनुसार, गुरुपूर्णिमा से पहले स्थाई नाली निर्माण का टेंडर जारी कर जिम्मेदार अधिकारी की ड्यूटी लगाई जाए। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन से कड़ा सवाल पूछा गया है कि अगर उन्होंने अब भी आंखें बंद रखीं, तो श्रद्धालुओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी?3
- उत्तर प्रदेश के मथुरा पुलिस लाइन में पुलिस पेंशनर्स एसोसिएशन के नए अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों का चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में आयोजित इस चुनाव की पूरी प्रक्रिया को पर्ची प्रणाली (स्लिप सिस्टम) के माध्यम से पारदर्शी तरीके से पूरा किया गया। इस चुनाव में अचल सिंह को नया अध्यक्ष चुना गया है। उनके साथ ही ब्रह्म स्वरूप को उपाध्यक्ष, सत्येंद्र यादव को महासचिव, अशोक वर्मा को प्रथम सचिव, बच्चू सिंह को द्वितीय सचिव और हीरालाल भगौर को कोषाध्यक्ष के पद पर चुना गया। पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कराए गए इस चुनाव के दौरान एएसपी आशना चौधरी, डिप्टी एसपी धर्मेंद्र सिंह, आरआई और बड़े बाबू भी उपस्थित रहे। पदभार ग्रहण करने के बाद नवनिर्वाचित अध्यक्ष अचल सिंह ने सभी पेंशनर्स साथियों के भारी सहयोग के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पूरी टीम तन-मन से पेंशनर्स की सेवा के लिए तैयार है और रिटायर्ड कर्मचारियों को आने वाली रोजमर्रा की दिक्कतों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जाएगा। उन्होंने विशेष रूप से बीमा से संबंधित समस्याओं, पीएचक्यू से जुड़ी शिकायतों, कार्यालय स्तर की परेशानियों, यात्रा भत्ता, एविडेंस क्लेम और चिकित्सा प्रतिपूर्ति के मुद्दों पर काम करने का आश्वासन दिया। अध्यक्ष ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में किसी भी पेंशनर को उनके क्लेम या कार्यालयी कामकाज में कोई भी अड़चन आने पर पूरी समिति उनके हक के लिए पूरी मुस्तैदी से काम करेगी।2
- मथुरा के बीएसए कॉलेज रोड पर आवास विकास द्वारा सीलिंग की कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई के बाद से क्षेत्र के कोचिंग संचालकों में हड़कंप मच गया है।1
- उत्तर प्रदेश के महावन तहसील पर बुधवार को भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) द्वारा प्रदर्शन किया गया। यह धरना प्रदर्शन भारत सरकार द्वारा अमेरिका के साथ फ्री ट्रेड समझौते को तत्काल रद्द करने के संबंध में किया गया था। भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार (फ्री ट्रेड डील) के विरोध में भाकियू चढ़ूनी द्वारा ज्ञापन दिया गया है।1
- मथुरा में ऑटो और ई-रिक्शा चालकों ने अपनी समस्याओं को लेकर आवाज बुलंद की है। अपनी समस्याओं के समाधान के लिए चालकों ने अब सीधे मंत्री तक अपनी गुहार पहुंचाई है।1
- 15 जुलाई 2026 को वृंदावन के प्रेम मंदिर में रिमझिम बारिश के बीच दर्शन का एक अद्भुत नज़ारा देखने को मिला। इस बारिश की वजह से यहाँ का मौसम बेहद सुहाना हो गया है और मंदिर की सुंदरता में चार चाँद लग गए हैं। राधे-राधे!1
- Post by RPR NEWS TV1
- पुष्टिमार्ग संप्रदाय के प्रसिद्ध मंदिर ठाकुर द्वारकाधीश में भव्य रथयात्रा महोत्सव का अत्यंत हर्षोल्लास के साथ आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर ठाकुर राजाधिराज ने रथ में विराजमान होकर मंदिर प्रांगण में भ्रमण किया और अपने भक्तों को दर्शन दिए। मंदिर के विधि एवं मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी एडवोकेट ने बताया कि यह भव्य आयोजन मंदिर के गोस्वामी श्री श्री 108 डॉ. वागीश कुमार जी महाराज तृतीय पीठाधीश्वर की आज्ञा और गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। महोत्सव के दौरान ठाकुर जी के दर्शनों के लिए विशेष समय सारणी तय की गई थी। प्रातः काल में मंगला और श्रृंगार के दर्शन आम दर्शनार्थियों के लिए खोले गए, जबकि रथयात्रा के विशेष दर्शनों की पहली झांकी सुबह 10:00 बजे खुली। इसके बाद दूसरी, तीसरी और चौथी झांकी दोपहर 1:30 बजे से 2:30 बजे तक खुली रही। दोपहर की सभी सेवा प्रणालियों के बाद, सायंकाल 4:30 बजे से 5:00 बजे तक शयन के विशेष दर्शन हुए, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शामिल होकर पुण्य लाभ कमाया। इस दिव्य महोत्सव का सीधा संबंध जगन्नाथ पुरी से है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज ही के दिन भगवान श्री कृष्ण, अपने बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा जी के साथ जगन्नाथ पुरी में नगर भ्रमण पर निकलते हैं। इस रथयात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भगवान का यह रथ पूरी तरह शुद्ध लकड़ी से निर्मित होता है, जिसमें लोहे की एक भी कील का उपयोग नहीं किया जाता और पूरा रथ केवल लकड़ी के जोड़ों से ही तैयार होता है। सनातन परंपरा के इस अटूट विश्वास के बीच कि 'जगन्नाथ के भात को जगत पसारे हाथ', जगन्नाथ जी को जहां चावल का भोग लगता है, वहीं पुष्टिमार्ग संप्रदाय में ठाकुर जी को आज आम, जामुन और घोड़े के लिए चने की दाल का प्रसाद अर्पित किया गया।4