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ऐतिहासिक महत्व वाला नाम ll प्रतापगढ़ जिले के रानीगंज क्षेत्रवक "अजगरा" अशोक श्रीवास्तव अमेठी ll प्रतापगढ़ के रानीगंज क्षेत्र का “अजगरा” – नाम के पीछे की विस्तृत ऐतिहासिक-पौराणिक कथा उत्तर प्रदेश के Pratapgarh जिले में स्थित 14 किमी पश्चिम में वाराणसी लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित एक अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक स्थान है, जिसे लोग "अजगरा" के नाम से जानते हैं। यह स्थान केवल एक गाँव या भूभाग नहीं है, बल्कि इसके साथ जुड़ी हुई पौराणिक कथाएँ, ऐतिहासिक प्रमाण और लोकमान्यताएँ इसे एक विशेष पहचान देती हैं। स्थानीय लोगों की मान्यता के अनुसार इस स्थान का नाम “अजगरा” पड़ने के पीछे एक रोचक कथा और कई ऐतिहासिक घटनाएँ जुड़ी हुई हैं। प्राचीन मान्यता है कि इंद्रासन प्राप्त राजा नहुष ऋषि अगस्त्य के श्राप से अजगर सर्प बनकर यहां गिरे थे एवं द्वापर युग के अंतिम समय में वनवासी पांडवों में श्रेष्ठ युधिष्ठिर के दर्शन से उन्हें मोक्ष मिला था। उस समय ये जंगल ही था। धीरे धीरे आबादी बसती चली गई और नाम " अजगर से अजगरा" पड़ गया l कथाओं के अनुसार अब आगे का विस्तृत वर्णन...... बहुत प्राचीन समय में यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ था। चारों ओर ऊँचे-ऊँचे वृक्ष, झाड़ियाँ और प्राकृतिक जलस्रोत थे। उस समय यह स्थान साधु-संतों और ऋषि-मुनियों की तपोभूमि माना जाता था। जंगल के बीच एक विशाल और अत्यंत प्राचीन वृक्ष खड़ा था। उसकी जड़ें इतनी फैली हुई थीं कि दूर से देखने पर ऐसा लगता था मानो कोई विशाल अजगर जमीन पर फैला हुआ हो। उसी वृक्ष के नीचे एक गहरा और स्वच्छ जलकुंड भी था, जिसका पानी हमेशा भरा रहता था। लोककथाओं के अनुसार, जब Yudhishthira अपने भाइयों Bhima, Arjuna, Nakula और Sahadeva के साथ वनवास के समय इस क्षेत्र से होकर गुजर रहे थे, तब वे इस जंगल में पहुँचे। लंबे सफर और भीषण गर्मी के कारण सभी को तीव्र प्यास लगी थी। तभी उन्हें उस विशाल वृक्ष के नीचे एक जलकुंड दिखाई दिया। सबसे पहले नकुल उस कुंड की ओर पानी पीने के लिए बढ़े। तभी एक अदृश्य आवाज़ सुनाई दी — “हे वीर! इस जल को पीने से पहले मेरे प्रश्नों का उत्तर दो, अन्यथा तुम संकट में पड़ जाओगे।” लेकिन प्यास से व्याकुल नकुल ने उस चेतावनी की परवाह नहीं की और पानी पी लिया। जैसे ही उन्होंने पानी पिया, वे तुरंत मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़े। इसके बाद सहदेव, फिर अर्जुन और अंत में भीम भी वहाँ पहुँचे। उन्होंने भी वही चेतावनी सुनी, लेकिन अपने भाइयों को अचेत देखकर वे घबरा गए और बिना उत्तर दिए पानी पी लिया। परिणामस्वरूप वे भी मूर्छित होकर गिर पड़े। कुछ समय बाद जब Yudhishthira वहाँ पहुँचे तो उन्होंने अपने चारों भाइयों को भूमि पर अचेत अवस्था में देखा। वे बहुत दुखी हुए। तभी वही दिव्य आवाज़ फिर गूँजी। वह एक यक्ष की आवाज़ थी, जिसने युधिष्ठिर को बताया कि यह जलकुंड उसके अधिकार में है और बिना अनुमति पानी पीने के कारण उनके भाई मूर्छित हो गए हैं। यक्ष ने युधिष्ठिर से कई गूढ़ और दार्शनिक प्रश्न पूछे — धर्म, जीवन, सत्य और मानवता से जुड़े प्रश्न। युधिष्ठिर ने अत्यंत धैर्य और बुद्धिमत्ता से उन सभी प्रश्नों के उत्तर दिए। उनके उत्तरों से प्रसन्न होकर यक्ष ने उन्हें वरदान दिया और उनके सभी भाइयों को पुनः जीवन प्रदान कर दिया। दूसरे कथक के अनुसार जिस वृक्ष के नीचे यह घटना हुई थी, उसकी जड़ें और उसका आकार इतना विशाल था कि लोग उसे “अजगर जैसा वृक्ष” कहते थे। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि उस क्षेत्र में वास्तव में एक बहुत बड़ा अजगर रहता था, जो उस जलकुंड और जंगल का रक्षक माना जाता था। इसी कारण लोगों ने उस स्थान को “अजगर वाला स्थान” कहना शुरू कर दिया। समय के साथ-साथ यह शब्द बदलकर “अजगरा” बन गया। यही नाम धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र की पहचान बन गया। समय बीतता गया, जंगल धीरे-धीरे कम होते गए और वहाँ बस्ती बसने लगी। लेकिन उस स्थान की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता लोगों की स्मृतियों में बनी रही। बाद में जब इस क्षेत्र में खुदाई और खोजबीन हुई तो यहाँ से कई प्राचीन अवशेष प्राप्त हुए। इनमें पत्थर की मूर्तियाँ, मिट्टी के बर्तन, प्राचीन सिक्के और ब्राह्मी लिपि के शिलालेख शामिल हैं। इन अवशेषों से इतिहासकारों ने यह निष्कर्ष निकाला कि यह क्षेत्र बहुत प्राचीन सभ्यता का केंद्र रहा होगा। कुछ विद्वानों के अनुसार यहाँ दूसरी या तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के अवशेष भी मिले हैं, जो इस स्थान की ऐतिहासिक महत्ता को और मजबूत करते हैं। आज भी अजगरा में कई प्राचीन धार्मिक स्थल मौजूद हैं। यहाँ अजगरा बाबा की प्राचीन प्रतिमा और पंचमुखी विश्वकर्मा की मूर्ति स्थापित है, जिन्हें स्थानीय लोग अत्यंत श्रद्धा से पूजते हैं। समय-समय पर यहाँ धार्मिक आयोजन और मेले भी लगते हैं, जिनमें दूर-दूर से श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। इस प्रकार अजगरा का नाम केवल एक शब्द नहीं, बल्कि पौराणिक कथा, ऐतिहासिक प्रमाण और लोकविश्वास का संगम है। पांडवों की कथा, यक्ष के प्रश्न, विशाल वृक्ष और अजगर की लोकमान्यता—इन सभी ने मिलकर इस स्थान को एक विशिष्ट पहचान दी है। आज भी जब लोग प्रतापगढ़ के इस क्षेत्र का नाम लेते हैं, तो उनके मन में उस प्राचीन कथा और इस ऐतिहासिक भूमि की छवि जीवित हो उठती है। इसलिए अजगरा केवल एक भूगोल नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और संस्कृति की जीवंत विरासत है।

8 hrs ago
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Distt Coresspondent NATION ONE tv
Corresspondant Amethi, Uttar Pradesh•
8 hrs ago

ऐतिहासिक महत्व वाला नाम ll प्रतापगढ़ जिले के रानीगंज क्षेत्रवक "अजगरा" अशोक श्रीवास्तव अमेठी ll प्रतापगढ़ के रानीगंज क्षेत्र का “अजगरा” – नाम के पीछे की विस्तृत ऐतिहासिक-पौराणिक कथा उत्तर प्रदेश के Pratapgarh जिले में स्थित 14 किमी पश्चिम में वाराणसी लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित एक अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक स्थान है, जिसे लोग "अजगरा" के नाम से जानते हैं। यह स्थान केवल एक गाँव या भूभाग नहीं है, बल्कि इसके साथ जुड़ी हुई पौराणिक कथाएँ, ऐतिहासिक प्रमाण और लोकमान्यताएँ इसे एक विशेष पहचान देती हैं। स्थानीय लोगों की मान्यता के अनुसार इस स्थान का नाम “अजगरा” पड़ने के पीछे एक रोचक कथा और कई ऐतिहासिक घटनाएँ जुड़ी हुई हैं। प्राचीन मान्यता है कि इंद्रासन प्राप्त राजा नहुष ऋषि अगस्त्य के श्राप से अजगर सर्प बनकर यहां गिरे थे एवं द्वापर युग के अंतिम समय में वनवासी पांडवों में श्रेष्ठ युधिष्ठिर के दर्शन से उन्हें मोक्ष मिला था। उस समय ये जंगल ही था। धीरे धीरे आबादी बसती चली गई और नाम " अजगर से अजगरा" पड़ गया l कथाओं के अनुसार अब आगे का विस्तृत वर्णन...... बहुत प्राचीन समय में यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ था। चारों ओर ऊँचे-ऊँचे वृक्ष, झाड़ियाँ और प्राकृतिक जलस्रोत थे। उस समय यह स्थान साधु-संतों और ऋषि-मुनियों की तपोभूमि माना जाता था। जंगल के बीच एक

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विशाल और अत्यंत प्राचीन वृक्ष खड़ा था। उसकी जड़ें इतनी फैली हुई थीं कि दूर से देखने पर ऐसा लगता था मानो कोई विशाल अजगर जमीन पर फैला हुआ हो। उसी वृक्ष के नीचे एक गहरा और स्वच्छ जलकुंड भी था, जिसका पानी हमेशा भरा रहता था। लोककथाओं के अनुसार, जब Yudhishthira अपने भाइयों Bhima, Arjuna, Nakula और Sahadeva के साथ वनवास के समय इस क्षेत्र से होकर गुजर रहे थे, तब वे इस जंगल में पहुँचे। लंबे सफर और भीषण गर्मी के कारण सभी को तीव्र प्यास लगी थी। तभी उन्हें उस विशाल वृक्ष के नीचे एक जलकुंड दिखाई दिया। सबसे पहले नकुल उस कुंड की ओर पानी पीने के लिए बढ़े। तभी एक अदृश्य आवाज़ सुनाई दी — “हे वीर! इस जल को पीने से पहले मेरे प्रश्नों का उत्तर दो, अन्यथा तुम संकट में पड़ जाओगे।” लेकिन प्यास से व्याकुल नकुल ने उस चेतावनी की परवाह नहीं की और पानी पी लिया। जैसे ही उन्होंने पानी पिया, वे तुरंत मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़े। इसके बाद सहदेव, फिर अर्जुन और अंत में भीम भी वहाँ पहुँचे। उन्होंने भी वही चेतावनी सुनी, लेकिन अपने भाइयों को अचेत देखकर वे घबरा गए और बिना उत्तर दिए पानी पी लिया। परिणामस्वरूप वे भी मूर्छित होकर गिर पड़े। कुछ समय बाद जब Yudhishthira वहाँ पहुँचे तो उन्होंने

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अपने चारों भाइयों को भूमि पर अचेत अवस्था में देखा। वे बहुत दुखी हुए। तभी वही दिव्य आवाज़ फिर गूँजी। वह एक यक्ष की आवाज़ थी, जिसने युधिष्ठिर को बताया कि यह जलकुंड उसके अधिकार में है और बिना अनुमति पानी पीने के कारण उनके भाई मूर्छित हो गए हैं। यक्ष ने युधिष्ठिर से कई गूढ़ और दार्शनिक प्रश्न पूछे — धर्म, जीवन, सत्य और मानवता से जुड़े प्रश्न। युधिष्ठिर ने अत्यंत धैर्य और बुद्धिमत्ता से उन सभी प्रश्नों के उत्तर दिए। उनके उत्तरों से प्रसन्न होकर यक्ष ने उन्हें वरदान दिया और उनके सभी भाइयों को पुनः जीवन प्रदान कर दिया। दूसरे कथक के अनुसार जिस वृक्ष के नीचे यह घटना हुई थी, उसकी जड़ें और उसका आकार इतना विशाल था कि लोग उसे “अजगर जैसा वृक्ष” कहते थे। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि उस क्षेत्र में वास्तव में एक बहुत बड़ा अजगर रहता था, जो उस जलकुंड और जंगल का रक्षक माना जाता था। इसी कारण लोगों ने उस स्थान को “अजगर वाला स्थान” कहना शुरू कर दिया। समय के साथ-साथ यह शब्द बदलकर “अजगरा” बन गया। यही नाम धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र की पहचान बन गया। समय बीतता गया, जंगल धीरे-धीरे कम होते गए और वहाँ बस्ती बसने लगी। लेकिन उस स्थान की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता लोगों की स्मृतियों में बनी

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रही। बाद में जब इस क्षेत्र में खुदाई और खोजबीन हुई तो यहाँ से कई प्राचीन अवशेष प्राप्त हुए। इनमें पत्थर की मूर्तियाँ, मिट्टी के बर्तन, प्राचीन सिक्के और ब्राह्मी लिपि के शिलालेख शामिल हैं। इन अवशेषों से इतिहासकारों ने यह निष्कर्ष निकाला कि यह क्षेत्र बहुत प्राचीन सभ्यता का केंद्र रहा होगा। कुछ विद्वानों के अनुसार यहाँ दूसरी या तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के अवशेष भी मिले हैं, जो इस स्थान की ऐतिहासिक महत्ता को और मजबूत करते हैं। आज भी अजगरा में कई प्राचीन धार्मिक स्थल मौजूद हैं। यहाँ अजगरा बाबा की प्राचीन प्रतिमा और पंचमुखी विश्वकर्मा की मूर्ति स्थापित है, जिन्हें स्थानीय लोग अत्यंत श्रद्धा से पूजते हैं। समय-समय पर यहाँ धार्मिक आयोजन और मेले भी लगते हैं, जिनमें दूर-दूर से श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। इस प्रकार अजगरा का नाम केवल एक शब्द नहीं, बल्कि पौराणिक कथा, ऐतिहासिक प्रमाण और लोकविश्वास का संगम है। पांडवों की कथा, यक्ष के प्रश्न, विशाल वृक्ष और अजगर की लोकमान्यता—इन सभी ने मिलकर इस स्थान को एक विशिष्ट पहचान दी है। आज भी जब लोग प्रतापगढ़ के इस क्षेत्र का नाम लेते हैं, तो उनके मन में उस प्राचीन कथा और इस ऐतिहासिक भूमि की छवि जीवित हो उठती है। इसलिए अजगरा केवल एक भूगोल नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और संस्कृति की जीवंत विरासत है।

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • सुल्तानपुर में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत नगर कोतवाली पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में थाना कोतवाली नगर पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए वांछित अभियुक्त सचिन अग्रहरि पुत्र सन्तराम अग्रहरि, निवासी वार्ड नंबर 10 रामनगर दियरा रोड, थाना लम्भुआ को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार अभियुक्त के खिलाफ मु0अ0स0 0141/26 में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज था और वह काफी समय से फरार चल रहा था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी को आवश्यक कानूनी कार्रवाई करते हुए माननीय न्यायालय में पेश कर दिया, जहां से आगे की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
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    सुल्तानपुर में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत नगर कोतवाली पुलिस को बड़ी सफलता मिली है।
पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में थाना कोतवाली नगर पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए वांछित अभियुक्त सचिन अग्रहरि पुत्र सन्तराम अग्रहरि, निवासी वार्ड नंबर 10 रामनगर दियरा रोड, थाना लम्भुआ को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार अभियुक्त के खिलाफ मु0अ0स0 0141/26 में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज था और वह काफी समय से फरार चल रहा था।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी को आवश्यक कानूनी कार्रवाई करते हुए माननीय न्यायालय में पेश कर दिया, जहां से आगे की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
    user_Kamalpresh Kamal tiwari
    Kamalpresh Kamal tiwari
    सुल्तानपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • प्रतापगढ़ सदर विधानसभा के कंधई बाजार में मामूली विवाद के मामले में दो वैश्य व्यापारियों के साथ पुलिस हिरासत में हुई कथित पिटाई को लेकर व्यापारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। पिछले तीन दिनों से सदर विधायक राजेंद्र मौर्य से कोई सहयोग न मिलने के कारण आक्रोशित व्यापारियों ने सैकड़ों की संख्या में बाइक रैली निकालकर सदर विधायक के आवास के सामने प्रदर्शन किया और सदर विधायक मुर्दाबाद, राजेंद्र मौर्य मुर्दाबाद के नारे लगाए।
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    प्रतापगढ़ सदर विधानसभा के कंधई बाजार में मामूली विवाद के मामले में दो वैश्य व्यापारियों के साथ पुलिस हिरासत में हुई कथित पिटाई को लेकर व्यापारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
पिछले तीन दिनों से सदर विधायक राजेंद्र मौर्य से कोई सहयोग न मिलने के कारण आक्रोशित व्यापारियों ने सैकड़ों की संख्या में बाइक रैली निकालकर सदर विधायक के आवास के सामने प्रदर्शन किया और सदर विधायक मुर्दाबाद, राजेंद्र मौर्य मुर्दाबाद के नारे लगाए।
    user_Omprakash प्रजापति
    Omprakash प्रजापति
    Voice of people प्रतापगढ़, प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • Post by Raju.u.p.44
    1
    Post by Raju.u.p.44
    user_Raju.u.p.44
    Raju.u.p.44
    सुल्तानपुर, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    10 hrs ago
  • थाना दिलीपपुर क्षेत्रान्तर्गत ग्राम सभा चौखड़ा के पास में एक व्यक्ति की गोली लगने से मृत्यु की सूचना पर स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही कार्यवाही के सम्बन्ध में क्षेत्राधिकारी पट्टी मनोज कुमार सिंह रघुवंशी ने क्या कहा देखें।
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    थाना दिलीपपुर क्षेत्रान्तर्गत ग्राम सभा चौखड़ा के पास में एक व्यक्ति की गोली लगने से मृत्यु की सूचना पर स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही कार्यवाही के सम्बन्ध में क्षेत्राधिकारी पट्टी मनोज कुमार सिंह रघुवंशी ने क्या कहा देखें।
    user_VBed Vyas
    VBed Vyas
    Lawyer प्रतापगढ़, प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश•
    10 hrs ago
  • मौरावां सुगमेश्वर मंदिर में धूमधाम से हुआ होली मिलन समारोह भक्तों ने गुलाल लगाकर दी शुभकामनाएं खबरें उत्तर प्रदेश को #khabreinuttarpradeshki khabrein Uttar Pradesh ki
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    मौरावां सुगमेश्वर मंदिर में धूमधाम से हुआ होली मिलन समारोह भक्तों ने गुलाल लगाकर दी शुभकामनाएं
खबरें उत्तर प्रदेश को
#khabreinuttarpradeshki
khabrein Uttar Pradesh ki
    user_KHABREIN UTTAR PRADESH KI
    KHABREIN UTTAR PRADESH KI
    Newspaper publisher Sultanpur, Uttar Pradesh•
    10 hrs ago
  • पट्टी कोतवाली क्षेत्र के नांदी गांव में एक विधवा महिला के साथ मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़िता ने पड़ोसियों पर गाली-गलौज और मारपीट का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी है। घटना के बाद महिला में दहशत का माहौल है। नांदी गांव निवासी विधवा दुर्गावती देवी ने कोतवाली पट्टी में दी गई तहरीर में बताया कि सात मार्च की रात करीब आठ बजे पड़ोस में रहने वाले कुछ लोग उसकी बेटियों के साथ गाली-गलौज करने लगे। जब उसने इसका विरोध किया और उन्हें ऐसा करने से मना किया, तो आरोपियों ने आक्रोशित होकर उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। मारपीट में दुर्गावती देवी को चोटें आईं। घटना के बाद पीड़िता किसी तरह कोतवाली पट्टी पहुंची और आरोपियों के खिलाफ नामजद तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने तहरीर प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं घटना के बाद से पीड़िता और उसके परिवार में भय का माहौल बना हुआ है।
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    पट्टी कोतवाली क्षेत्र के नांदी गांव में एक विधवा महिला के साथ मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़िता ने पड़ोसियों पर गाली-गलौज और मारपीट का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी है। घटना के बाद महिला में दहशत का माहौल है।
नांदी गांव निवासी विधवा दुर्गावती देवी ने कोतवाली पट्टी में दी गई तहरीर में बताया कि सात मार्च की रात करीब आठ बजे पड़ोस में रहने वाले कुछ लोग उसकी बेटियों के साथ गाली-गलौज करने लगे। जब उसने इसका विरोध किया और उन्हें ऐसा करने से मना किया, तो आरोपियों ने आक्रोशित होकर उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। मारपीट में दुर्गावती देवी को चोटें आईं।
घटना के बाद पीड़िता किसी तरह कोतवाली पट्टी पहुंची और आरोपियों के खिलाफ नामजद तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने तहरीर प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं घटना के बाद से पीड़िता और उसके परिवार में भय का माहौल बना हुआ है।
    user_Amit Rekha News New
    Amit Rekha News New
    Lawyer पट्टी, प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश•
    29 min ago
  • खबर यूपी के अमेठी से है जहां अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर पुलिस कार्यालय सभागार गौरीगंज में एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन वामा सारथी पुलिस फैमिली वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में किया गया, जिसमें पुलिस परिवार के मेधावी बच्चों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम एसपी अमेठी सरवणन टी. के निर्देश पर पुलिस कार्यालय सभागार में आयोजित हुआ। इस अवसर पर सीओ पुलिस लाइन्स श्वेताभ भास्कर मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान सीओ ने पढ़ाई और विभिन्न खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पुलिस परिवार के प्रतिभाशाली बच्चों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया। सम्मान पाकर बच्चों और उनके अभिभावकों में खुशी का माहौल देखने को मिला। इस मौके पर सीओ श्वेताभ भास्कर ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अनुशासन, परिश्रम और सकारात्मक सोच बेहद जरूरी है। उन्होंने बच्चों को समय का सदुपयोग करने, नियमित अध्ययन करने और अपने लक्ष्य को स्पष्ट रखते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने यह भी कहा कि केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों और नैतिक मूल्यों का भी जीवन में विशेष महत्व होता है। इन सभी क्षेत्रों में संतुलन बनाकर ही व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास कर सकता है। कार्यक्रम के अंत में सभी मेधावी बच्चों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी गईं और विश्वास जताया गया कि ये बच्चे भविष्य में समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। इस अवसर पर प्रतिसार निरीक्षक अमेठी सहित पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी व कर्मचारी भी मौजूद रहे।
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    खबर यूपी के अमेठी से है जहां अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर पुलिस कार्यालय सभागार गौरीगंज में एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन वामा सारथी पुलिस फैमिली वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में किया गया, जिसमें पुलिस परिवार के मेधावी बच्चों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम एसपी अमेठी सरवणन टी. के निर्देश पर पुलिस कार्यालय सभागार में आयोजित हुआ। इस अवसर पर सीओ पुलिस लाइन्स श्वेताभ भास्कर मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान सीओ ने पढ़ाई और विभिन्न खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पुलिस परिवार के प्रतिभाशाली बच्चों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया। सम्मान पाकर बच्चों और उनके अभिभावकों में खुशी का माहौल देखने को मिला।
इस मौके पर सीओ श्वेताभ भास्कर ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अनुशासन, परिश्रम और सकारात्मक सोच बेहद जरूरी है। उन्होंने बच्चों को समय का सदुपयोग करने, नियमित अध्ययन करने और अपने लक्ष्य को स्पष्ट रखते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों और नैतिक मूल्यों का भी जीवन में विशेष महत्व होता है। इन सभी क्षेत्रों में संतुलन बनाकर ही व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास कर सकता है।
कार्यक्रम के अंत में सभी मेधावी बच्चों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी गईं और विश्वास जताया गया कि ये बच्चे भविष्य में समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
इस अवसर पर प्रतिसार निरीक्षक अमेठी सहित पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी व कर्मचारी भी मौजूद रहे।
    user_Distt Coresspondent NATION ONE tv
    Distt Coresspondent NATION ONE tv
    Corresspondant Amethi, Uttar Pradesh•
    8 hrs ago
  • होली मिलन समारोह में शामिल हुए विधायक अनिल सिंह** #उन्नाव खबरें उत्तर प्रदेश की khabrein Uttar Pradesh ki
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    होली मिलन समारोह में शामिल हुए विधायक अनिल सिंह** #उन्नाव 
खबरें उत्तर प्रदेश की
khabrein Uttar Pradesh ki
    user_KHABREIN UTTAR PRADESH KI
    KHABREIN UTTAR PRADESH KI
    Newspaper publisher Sultanpur, Uttar Pradesh•
    12 hrs ago
  • प्रतापगढ़ में स्थित कंधई थाना बना पाठ शाला किसी व्यक्ति द्वारा दी गई बीडीओ
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    प्रतापगढ़ में स्थित कंधई थाना बना पाठ शाला किसी व्यक्ति द्वारा दी गई बीडीओ
    user_Omprakash प्रजापति
    Omprakash प्रजापति
    Voice of people प्रतापगढ़, प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश•
    12 hrs ago
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