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मोहर्रम की सातवीं पर, बांदा शहर में अकीदतमंद लोगों ने गम के माहौल के बीच विभिन्न इमामबाड़ों से नेजे सवारियां निकालीं। इस दौरान शहर भर में भक्तिभाव और शोक का माहौल बना रहा।
Surash Sahu
मोहर्रम की सातवीं पर, बांदा शहर में अकीदतमंद लोगों ने गम के माहौल के बीच विभिन्न इमामबाड़ों से नेजे सवारियां निकालीं। इस दौरान शहर भर में भक्तिभाव और शोक का माहौल बना रहा।
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- बांदा में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सेंट मेरीज कॉलेज परिसर में एक भव्य सामूहिक योग कार्यक्रम का उत्साहपूर्वक आयोजन किया गया। इस गरिमामय आयोजन में प्रदेश सरकार के मंत्री रामकेश निषाद, जिला प्रशासन के अधिकारी, छात्र-छात्राएं, महिलाएं और बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए, जिन्होंने एक साथ योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संदेश दिया। सुबह की ताजगी के बीच हुए इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य योग को जीवनशैली का हिस्सा बनाना था, जहाँ सैकड़ों लोगों ने एक साथ योगाभ्यास कर स्वस्थ रहने का संकल्प लिया। मंत्री रामकेश निषाद ने स्वयं भी योग के विभिन्न आसनों का अभ्यास किया और कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम ही नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पूरी दुनिया का भारत की इस प्राचीन परंपरा को अपनाना देश के लिए गौरव का विषय है। इस योग शिविर में छात्र-छात्राओं और महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही। प्रशिक्षकों के निर्देशन में सभी प्रतिभागियों ने विभिन्न योगासन और प्राणायाम का अभ्यास किया तथा नियमित रूप से योग करने का संकल्प लिया, जिससे बांदा में 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस उत्साह और संकल्प के साथ संपन्न हुआ।1
- मौदहा में राम मंदिर दान पेटिका से जुड़े मामले को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यकर्ताओं ने थाने चौराहा पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस सांकेतिक विरोध के तहत, कार्यकर्ताओं ने भिक्षा मांगकर ₹420 जुटाए, जिससे उन्होंने अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान, आप कार्यकर्ताओं ने 'चंदा चोरों गद्दी छोड़ो' के नारे लगाए। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की मांग उठाई, जिससे सच्चाई सामने आ सके।1
- बाँदा जिले के मरका स्थित यमुना नदी पुल से एक पति-पत्नी ने नदी में छलांग लगा दी। इस घटना में पत्नी की मौत हो गई, जबकि पति को मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।1
- सोमवार सुबह हमीरपुर जिला अस्पताल परिसर स्थित महिला शौचालय में एक नवजात शिशु का शव मिलने से पूरे अस्पताल में हड़कंप मच गया। इस घटना के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया और तत्काल सदर कोतवाली पुलिस को इसकी सूचना दी गई। दरअसल, सुबह सफाई के लिए पहुंची एक महिला सफाईकर्मी ने शौचालय में नवजात के शव को देखा। सूचना मिलते ही सदर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हाउस की मोर्चरी में रखवा दिया, जिसके बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. अलका शुक्ला ने बताया कि महिला सफाईकर्मी द्वारा उन्हें सुबह करीब आठ बजे शव मिलने की जानकारी दी गई थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रात 10 बजे तक ड्यूटी पर तैनात चिकित्सकों द्वारा की गई जांच के दौरान शौचालय में कोई संदिग्ध वस्तु या गतिविधि नहीं पाई गई थी। सीएमओ के अनुसार, रात तीन बजे तक के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा चुकी है, जिसमें कोई संदिग्ध व्यक्ति नजर नहीं आया है, और इसके बाद के फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। डॉ. शुक्ला ने आश्वासन दिया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त, अस्पताल के सुरक्षा कर्मियों को आने-जाने वाले लोगों और उनके सामान की सघन जांच करने के निर्देश भी दिए गए हैं। फिलहाल, पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है और शौचालय के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर शव वहां तक पहुंचाने वाले व्यक्ति की पहचान करने तथा घटना की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।1
- उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के ऐला गांव में एक सफाई कर्मचारी से जुड़ी शिकायत सामने आई है। यह शिकायत ग्राम ऐला से संबंधित है।1
- माहे मोहर्रम की सातवीं तारीख पर मंगलवार को बांदा शहर में अलम का कदीमी मातमी जुलूस पूरे अकीदत और एहतराम के साथ निकाला गया। पूर्वी कोठी स्थित इमामबारगाह से शुरू हुए इस जुलूस में सैकड़ों अकीदतमंदों ने 'या हुसैन' के नारे लगाते हुए हजरत इमाम हुसैन और शोहदाए करबला को खिराजे अकीदत पेश की। इस दौरान इमामबाड़े से मातमी ढोल-ताशे के बीच नेजे भी उठाए गए। जुलूस से पहले पूर्वी कोठी और डिग्गी चौराहा इमामबारगाह में मजलिस का आयोजन हुआ, जिसे गाजीपुर से आए मौलाना सैयद हैदर करबलाई ने संबोधित किया। उन्होंने करबला के वाकये पर रोशनी डालते हुए बताया कि सातवीं मोहर्रम से यजीदी फौज ने नहरे फुरात पर पहरा लगाकर इमाम हुसैन, उनके साथियों और मासूम बच्चों के लिए पानी बंद कर दिया था। इसके बावजूद इमाम हुसैन ने सब्र, इंसाफ और इंसानियत का रास्ता नहीं छोड़ा और करबला के मैदान में शहादत पेश कर दुनिया को हक और सत्य के लिए संघर्ष का संदेश दिया। मजलिस के बाद अलमों का कदीमी जुलूस बरामद हुआ, जिसमें रजा मेहदी, हसन अख्तर, अली जहीर, शजरुल हसन और हसन रजा एडवोकेट ने दर्दभरे मरसिए पेश किए, जिससे अकीदतमंदों की आंखें नम हो गईं। अंजुमन अब्बासिया के साहिबे बयाज शमसुल हसन रिजवी द्वारा नौहा पेश किए जाने पर मातमदारों ने सीनाजनी कर शोहदाए करबला को याद किया। यह जुलूस पद्माकर चौराहा, जीजीआईसी, बाकरगंज, छावनी चौराहा, गूलरनाका, अमर टॉकीज, जामा मस्जिद, गोल कोठी और अलीगंज सहित शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा। छावनी चौराहे पर झांसी से आए मौलाना फरमान अली आब्दी ने इमाम हुसैन के संदेश को अमन, भाईचारे, इंसाफ और मानवता का प्रतीक बताते हुए लोगों से उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया। अलीगंज इमामबारगाह में मगरिब की नमाज के बाद भी एक मजलिस हुई, जिसके बाद जुलूस पुनः विभिन्न मार्गों से होता हुआ पूर्वी कोठी इमामबारगाह पहुंचकर संपन्न हुआ। जुलूस के समापन के उपरांत नज़रे हजरत अब्बास का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की। इस पूरे आयोजन के दौरान जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे और भारी पुलिस बल जुलूस के साथ तैनात रहा। आयोजन समिति की ओर से शोएब रिजवी ने शांतिपूर्ण और सफल आयोजन में सहयोग के लिए पुलिस एवं प्रशासन का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर अली इमाम आब्दी, मिर्जा यावर हुसैन एडवोकेट, आगा अंसार, मजहर हुसैन, अंसार हुसैन, जफर रजा, असगर रजा, वसीम हैदर, शमीम हैदर, साजिद हुसैन, अहमद रजा, हैदर शिकोह एडवोकेट, मोहसिन रजा एडवोकेट, अली मंजर एडवोकेट सहित सैकड़ों अकीदतमंद मौजूद रहे।4
- शहर क्षेत्र में नशीले पदार्थों के विरुद्ध एक सघन चेकिंग और जागरूकता अभियान संचालित किया गया। इस अभियान का संचालन थाना एएचटी, एसजेपीयू, चाइल्ड हेल्प लाइन और ग्रामीण स्वावलंबन समिति की एक संयुक्त टीम द्वारा किया गया।1
- हमीरपुर जिले के मौदहा स्थित मोहल्ला तरौस कम्हरिया में आलमगीर द्वारा तैयार की गई एक भव्य ताजिया लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस आकर्षक ताजिया के निर्माण में कारीगर को लगभग दो वर्ष का समय लगा और इसकी लागत करीब पांच लाख रुपये बताई जा रही है। आलमगीर ने बताया कि ताजिया को पारंपरिक कला और बारीक कारीगरी का उपयोग करके तैयार किया गया है। इसकी खूबसूरती और विशेष डिजाइन को देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। मोहल्ले के लोगों ने कारीगर की कड़ी मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए इस ताजिया को क्षेत्र की एक विशेष पहचान करार दिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इसकी नक्काशी और सजावट में विशेष ध्यान दिया गया है, जिसके कारण यह लोगों के बीच चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है।2
- Post by Jitendra kumar कोरी2