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सहरसा जिला तिरंगा चौक के पास जो डाला है यहीं पर जाम लगता है बहुत बड़ा रोड को चौड़ा कर देना चाहिए जाम नहीं लगेगा आप लोग कमेंट कीजिए रोड चौड़ा होना चाहिए
Bihari bhai
सहरसा जिला तिरंगा चौक के पास जो डाला है यहीं पर जाम लगता है बहुत बड़ा रोड को चौड़ा कर देना चाहिए जाम नहीं लगेगा आप लोग कमेंट कीजिए रोड चौड़ा होना चाहिए
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- सहरसा जिला तिरंगा चौक के पास जो डाला है यहीं पर जाम लगता है बहुत बड़ा रोड को चौड़ा कर देना चाहिए जाम नहीं लगेगा आप लोग कमेंट कीजिए रोड चौड़ा होना चाहिए1
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- बिहार के मधेपुरा से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मॉडल सदर अस्पताल में एक गर्भवती महिला के साथ कथित दुर्व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। आरोप है कि महिला डॉक्टर ने न सिर्फ अभद्र व्यवहार किया, बल्कि निजी अस्पताल में इलाज कराने का दबाव भी बनाया। जिला प्रशासन ने मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं। मामला बिहार के मधेपुरा जिले के मॉडल अस्पताल का है, जहां इलाज कराने पहुंची एक गर्भवती महिला ने महिला डॉक्टर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महर्षि मेही नगर, वार्ड संख्या 5 निवासी प्रियंका प्रिया, जो दो माह की गर्भवती हैं, ने बताया कि पेट दर्द और सांस लेने में तकलीफ के बाद वह मॉडल सदर अस्पताल पहुंचीं। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान सुधार नहीं हुआ। जब उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर शिखा कुमारी को जानकारी दी, तो कथित तौर पर उन्हें निजी अस्पताल में जाने की सलाह दी गई। परिवार का दावा है कि जिस निजी अस्पताल का नाम लिया गया, वह अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. सचिन कुमार की पत्नी का है। विरोध करने पर कथित रूप से गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया गया। यहां तक कि मरीज का पुर्जा भी छीन लेने का आरोप है। इस दौरान का एक वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। पीड़िता का कहना है कि हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें मिशन अस्पताल ले गए, जहां समय पर इलाज मिलने से उनकी और गर्भ में पल रहे शिशु की जान बच सकी। मामले की शिकायत मिलने के बाद मधेपुरा के जिलाधिकारी अभिषेक रंजन ने दो सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है और जल्द रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। बाइट – प्रियंका प्रिया, पीड़िता: मैं दो महीने की प्रेग्नेंट हूं। मुझे बहुत दर्द हो रहा था और सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, लेकिन डॉक्टर ने ठीक से नहीं देखा। हमें निजी अस्पताल जाने को कहा गया। जब हमने मना किया तो हमारे साथ बदसलूकी की गई। अगर हम दूसरे अस्पताल नहीं जाते तो मेरी और मेरे बच्चे की जान खतरे में पड़ सकती थी।” सरकारी अस्पतालों में इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले मरीज अगर खुद को असुरक्षित महसूस करें, तो यह व्यवस्था के लिए बड़ा सवाल है। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।4
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- रेलवे यात्रियों ने भारत सरकार रेलवे विभाग से आरोप लगाया है कि आखिर क्यों बिहार में बिहार के यात्रियों के लिए ऐसे ऐसे पुराने रेलगाड़ी देते हैं जिनमें कोई मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं बताया कि शौचालय में पानी तक नहीं आता है आधा से ज्यादा बोगियों में शौचालय ख़राब है1
- सौर बाजार प्रखंड के डीलर संघ के सदस्य ने मतदान प्रक्रिया द्वारा राजदीप कुमार को अध्यक्ष पद के लिए चुनकर दिया बधाई1
- बिहार के मधेपुरा से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। 20 वर्षीय अलका कुमारी की संदिग्ध मौत की गुत्थी को पुलिस ने सुलझाने का दावा किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि हत्या किसी और ने नहीं, बल्कि उसके अपने पिता ने की। इतना ही नहीं, नवजात शिशु को एनएच–106 के पुल के नीचे फेंक दिया गया। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दरअसल बिहार के मधेपुरा जिले के उदाकिशुनगंज थाना क्षेत्र के पिपरा करौती वार्ड संख्या–02 का है। यहां 20 वर्षीय अलका कुमारी की 13 फरवरी 2026 को संदिग्ध परिस्थिति में मौत हुई थी। मृतिका के पिता के लिखित आवेदन पर उदाकिशुनगंज थाना कांड संख्या–50/2026 दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एसडीपीओ अविनाश कुमार के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस ने वैज्ञानिक, तकनीकी और मानवीय साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि अलका कुमारी की हत्या उसके ही पिता ने की थी। इतना ही नहीं, पुलिस के अनुसार मृतिका के नवजात शिशु को उसके प्रेमी के साथ मिलकर एनएच–106 पर स्थित एक पुल के नीचे फेंक दिया गया था। प्राथमिक अभियुक्त ऋषु राज उर्फ हेमराज कुमार की निशानदेही पर पुलिस ने नवजात शिशु को बरामद कर लिया। इसके बाद साक्ष्यों के आधार पर मृतिका के पिता अवधेश भारती और भाई तपेश कुमार यादव को 21 फरवरी 2026 को गिरफ्तार कर लिया गया। तीनों आरोपी पिपरा करौती वार्ड संख्या–02, थाना उदाकिशुनगंज, जिला मधेपुरा के निवासी बताए जा रहे हैं। बरामद सामग्री: घटना में प्रयुक्त एक चार पहिया वाहन एक मोबाइल फोन लाल एवं पीले रंग का थैला, जिसमें नवजात शिशु को रखा गया था पुलिस का कहना है कि मामले में अन्य संभावित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। परिवार के भीतर ही हत्या और नवजात को फेंक देने की यह घटना कई सवाल खड़े करती है। आखिर इस खौफनाक साजिश के पीछे वजह क्या थी? पुलिस अब पूरे मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है।3