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सरदार सरोवर परियोजना के डूब क्षेत्र की भरपाई और विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर केंद्र सरकार की मध्यस्थता में हुए 'वन टाइम सेटलमेंट' पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस नए समझौते के अनुसार, मध्य प्रदेश को अपने भारी नुकसान का मुआवजा मिलने के बजाय खुद गुजरात को 550 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा, जबकि महाराष्ट्र को 27 करोड़ रुपये देने होंगे। मध्य प्रदेश सरकार ने डूब क्षेत्र के विस्तार और वर्तमान मूल्यों के आधार पर अपने नुकसान की भरपाई का दावा संशोधित कर 7,669 करोड़ रुपये किया था और इसे 10 फरवरी 2022 को गुजरात सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया था। इसके अलावा, विस्थापितों के उर्वरित पुनर्वास कार्यों के लिए भी गुजरात से 2,900 करोड़ रुपये की मांग की गई थी। हालांकि, 21 मार्च 2024 को गुजरात ने इस संशोधित दावे को ठुकराते हुए केवल पुराने 281.46 करोड़ रुपये के मूल दावे पर ही विचार करने की बात कही थी, जिसे मध्य प्रदेश ने नामंजूर कर दिया था। अब हुए अचानक समझौते से विस्थापितों के न्यायपूर्ण पुनर्वास की उम्मीदों पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के 1979 के प्रावधानों और सर्वोच्च अदालत के फैसलों के तहत प्रभावित राज्यों के नुकसान की भरपाई और विस्थापितों का पूर्ण पुनर्वास सुनिश्चित करना गुजरात के लिए एक कानूनी बंधन है। साल 2000 में जब बांध की ऊंचाई 90 मीटर थी, तब मुआवजा मांग 281.46 करोड़ रुपये थी। साल 2017 में बांध की ऊंचाई बढ़कर 138.68 मीटर होने से मध्य प्रदेश में डूब क्षेत्र कई गुना बढ़ गया और हजारों परिवार प्रभावित हुए। पुनर्वास के लिए 2,900 करोड़ रुपये न मिलने की स्थिति में प्रभावितों को वैकल्पिक भूमि, मकान के भूखंड और गृहनिर्माण अनुदान जैसी सुविधाएं कैसे मिलेंगी, यह एक बड़ा सवाल बन गया है। परियोजना की लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी को लेकर भी विस्थापित संगठनों ने आपत्ति जताई है। 1983 में 4,200 करोड़ रुपये आंकी गई लागत अब बढ़कर गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री सुरेश मेहता जी के अनुसार 90,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। आरोप है कि इसमें स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और पर्यटन परियोजनाओं की अनुचित लागत भी जोड़ दी गई है। इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र सरकार ने भी डूबग्रस्त वन भूमि के बदले 1,313 करोड़ रुपये और उर्वरित पुनर्वास के लिए 300 करोड़ रुपये की मांग रखी थी, जबकि बिजली उत्पादन का पूरा लाभ न मिलने पर मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की क्रमशः 900 करोड़ और 450 करोड़ रुपये की भरपाई की मांगों को भी जनवरी 2026 की बैठक में खारिज कर दिया गया। राहुल यादव, मेधा पाटकर, राजकुमार सिन्हा, गोखरू मांगल्या, शोभाराम सोलंकी और ओमप्रकाश पाटीदार जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस समझौते का विरोध करते हुए मध्य प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह राज्य और विस्थापितों के हितों के साथ समझौता न करे। उन्होंने सरकार से अपने 7,669 करोड़ रुपये के वैध मुआवजे और पुनर्वास अधिकारों के लिए सभी उपलब्ध वैधानिक तथा संवैधानिक उपायों का उपयोग करते हुए दृढ़ता से अपना पक्ष रखने की अपील की है।

14 hrs ago
user_Hemant Nagziriya
Hemant Nagziriya
News Anchor बड़वानी, बड़वानी, मध्य प्रदेश•
14 hrs ago
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सरदार सरोवर परियोजना के डूब क्षेत्र की भरपाई और विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर केंद्र सरकार की मध्यस्थता में हुए 'वन टाइम सेटलमेंट' पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस नए समझौते के अनुसार, मध्य प्रदेश को अपने भारी नुकसान का मुआवजा मिलने के बजाय खुद गुजरात को 550 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा, जबकि महाराष्ट्र को 27 करोड़ रुपये देने होंगे। मध्य प्रदेश सरकार ने डूब क्षेत्र के विस्तार और वर्तमान मूल्यों के आधार पर अपने नुकसान की भरपाई का दावा संशोधित कर 7,669 करोड़ रुपये किया था और इसे 10 फरवरी 2022 को गुजरात सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया था। इसके अलावा, विस्थापितों के उर्वरित पुनर्वास कार्यों के लिए भी गुजरात से 2,900 करोड़ रुपये की मांग की गई थी। हालांकि, 21 मार्च 2024 को गुजरात ने इस संशोधित दावे को ठुकराते हुए केवल पुराने 281.46 करोड़ रुपये के मूल दावे पर ही विचार करने की बात कही थी, जिसे मध्य प्रदेश ने नामंजूर कर दिया था। अब हुए अचानक समझौते से विस्थापितों के न्यायपूर्ण पुनर्वास की उम्मीदों पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के 1979 के प्रावधानों और सर्वोच्च अदालत के फैसलों के तहत प्रभावित राज्यों के नुकसान की भरपाई और विस्थापितों का पूर्ण पुनर्वास सुनिश्चित करना गुजरात के लिए एक कानूनी बंधन है। साल 2000 में जब बांध की ऊंचाई 90 मीटर थी, तब मुआवजा मांग 281.46 करोड़ रुपये थी। साल 2017 में बांध की ऊंचाई बढ़कर 138.68 मीटर होने से मध्य

प्रदेश में डूब क्षेत्र कई गुना बढ़ गया और हजारों परिवार प्रभावित हुए। पुनर्वास के लिए 2,900 करोड़ रुपये न मिलने की स्थिति में प्रभावितों को वैकल्पिक भूमि, मकान के भूखंड और गृहनिर्माण अनुदान जैसी सुविधाएं कैसे मिलेंगी, यह एक बड़ा सवाल बन गया है। परियोजना की लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी को लेकर भी विस्थापित संगठनों ने आपत्ति जताई है। 1983 में 4,200 करोड़ रुपये आंकी गई लागत अब बढ़कर गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री सुरेश मेहता जी के अनुसार 90,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। आरोप है कि इसमें स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और पर्यटन परियोजनाओं की अनुचित लागत भी जोड़ दी गई है। इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र सरकार ने भी डूबग्रस्त वन भूमि के बदले 1,313 करोड़ रुपये और उर्वरित पुनर्वास के लिए 300 करोड़ रुपये की मांग रखी थी, जबकि बिजली उत्पादन का पूरा लाभ न मिलने पर मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की क्रमशः 900 करोड़ और 450 करोड़ रुपये की भरपाई की मांगों को भी जनवरी 2026 की बैठक में खारिज कर दिया गया। राहुल यादव, मेधा पाटकर, राजकुमार सिन्हा, गोखरू मांगल्या, शोभाराम सोलंकी और ओमप्रकाश पाटीदार जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस समझौते का विरोध करते हुए मध्य प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह राज्य और विस्थापितों के हितों के साथ समझौता न करे। उन्होंने सरकार से अपने 7,669 करोड़ रुपये के वैध मुआवजे और पुनर्वास अधिकारों के लिए सभी उपलब्ध वैधानिक तथा संवैधानिक उपायों का उपयोग करते हुए दृढ़ता से अपना पक्ष रखने की अपील की है।

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  • सरदार सरोवर परियोजना के डूब क्षेत्र की भरपाई और विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर केंद्र सरकार की मध्यस्थता में हुए 'वन टाइम सेटलमेंट' पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस नए समझौते के अनुसार, मध्य प्रदेश को अपने भारी नुकसान का मुआवजा मिलने के बजाय खुद गुजरात को 550 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा, जबकि महाराष्ट्र को 27 करोड़ रुपये देने होंगे। मध्य प्रदेश सरकार ने डूब क्षेत्र के विस्तार और वर्तमान मूल्यों के आधार पर अपने नुकसान की भरपाई का दावा संशोधित कर 7,669 करोड़ रुपये किया था और इसे 10 फरवरी 2022 को गुजरात सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया था। इसके अलावा, विस्थापितों के उर्वरित पुनर्वास कार्यों के लिए भी गुजरात से 2,900 करोड़ रुपये की मांग की गई थी। हालांकि, 21 मार्च 2024 को गुजरात ने इस संशोधित दावे को ठुकराते हुए केवल पुराने 281.46 करोड़ रुपये के मूल दावे पर ही विचार करने की बात कही थी, जिसे मध्य प्रदेश ने नामंजूर कर दिया था। अब हुए अचानक समझौते से विस्थापितों के न्यायपूर्ण पुनर्वास की उम्मीदों पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के 1979 के प्रावधानों और सर्वोच्च अदालत के फैसलों के तहत प्रभावित राज्यों के नुकसान की भरपाई और विस्थापितों का पूर्ण पुनर्वास सुनिश्चित करना गुजरात के लिए एक कानूनी बंधन है। साल 2000 में जब बांध की ऊंचाई 90 मीटर थी, तब मुआवजा मांग 281.46 करोड़ रुपये थी। साल 2017 में बांध की ऊंचाई बढ़कर 138.68 मीटर होने से मध्य प्रदेश में डूब क्षेत्र कई गुना बढ़ गया और हजारों परिवार प्रभावित हुए। पुनर्वास के लिए 2,900 करोड़ रुपये न मिलने की स्थिति में प्रभावितों को वैकल्पिक भूमि, मकान के भूखंड और गृहनिर्माण अनुदान जैसी सुविधाएं कैसे मिलेंगी, यह एक बड़ा सवाल बन गया है। परियोजना की लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी को लेकर भी विस्थापित संगठनों ने आपत्ति जताई है। 1983 में 4,200 करोड़ रुपये आंकी गई लागत अब बढ़कर गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री सुरेश मेहता जी के अनुसार 90,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। आरोप है कि इसमें स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और पर्यटन परियोजनाओं की अनुचित लागत भी जोड़ दी गई है। इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र सरकार ने भी डूबग्रस्त वन भूमि के बदले 1,313 करोड़ रुपये और उर्वरित पुनर्वास के लिए 300 करोड़ रुपये की मांग रखी थी, जबकि बिजली उत्पादन का पूरा लाभ न मिलने पर मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की क्रमशः 900 करोड़ और 450 करोड़ रुपये की भरपाई की मांगों को भी जनवरी 2026 की बैठक में खारिज कर दिया गया। राहुल यादव, मेधा पाटकर, राजकुमार सिन्हा, गोखरू मांगल्या, शोभाराम सोलंकी और ओमप्रकाश पाटीदार जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस समझौते का विरोध करते हुए मध्य प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह राज्य और विस्थापितों के हितों के साथ समझौता न करे। उन्होंने सरकार से अपने 7,669 करोड़ रुपये के वैध मुआवजे और पुनर्वास अधिकारों के लिए सभी उपलब्ध वैधानिक तथा संवैधानिक उपायों का उपयोग करते हुए दृढ़ता से अपना पक्ष रखने की अपील की है।
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    सरदार सरोवर परियोजना के डूब क्षेत्र की भरपाई और विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर केंद्र सरकार की मध्यस्थता में हुए 'वन टाइम सेटलमेंट' पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस नए समझौते के अनुसार, मध्य प्रदेश को अपने भारी नुकसान का मुआवजा मिलने के बजाय खुद गुजरात को 550 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा, जबकि महाराष्ट्र को 27 करोड़ रुपये देने होंगे।

मध्य प्रदेश सरकार ने डूब क्षेत्र के विस्तार और वर्तमान मूल्यों के आधार पर अपने नुकसान की भरपाई का दावा संशोधित कर 7,669 करोड़ रुपये किया था और इसे 10 फरवरी 2022 को गुजरात सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया था। इसके अलावा, विस्थापितों के उर्वरित पुनर्वास कार्यों के लिए भी गुजरात से 2,900 करोड़ रुपये की मांग की गई थी। हालांकि, 21 मार्च 2024 को गुजरात ने इस संशोधित दावे को ठुकराते हुए केवल पुराने 281.46 करोड़ रुपये के मूल दावे पर ही विचार करने की बात कही थी, जिसे मध्य प्रदेश ने नामंजूर कर दिया था। अब हुए अचानक समझौते से विस्थापितों के न्यायपूर्ण पुनर्वास की उम्मीदों पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के 1979 के प्रावधानों और सर्वोच्च अदालत के फैसलों के तहत प्रभावित राज्यों के नुकसान की भरपाई और विस्थापितों का पूर्ण पुनर्वास सुनिश्चित करना गुजरात के लिए एक कानूनी बंधन है। साल 2000 में जब बांध की ऊंचाई 90 मीटर थी, तब मुआवजा मांग 281.46 करोड़ रुपये थी। साल 2017 में बांध की ऊंचाई बढ़कर 138.68 मीटर होने से मध्य प्रदेश में डूब क्षेत्र कई गुना बढ़ गया और हजारों परिवार प्रभावित हुए। पुनर्वास के लिए 2,900 करोड़ रुपये न मिलने की स्थिति में प्रभावितों को वैकल्पिक भूमि, मकान के भूखंड और गृहनिर्माण अनुदान जैसी सुविधाएं कैसे मिलेंगी, यह एक बड़ा सवाल बन गया है।

परियोजना की लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी को लेकर भी विस्थापित संगठनों ने आपत्ति जताई है। 1983 में 4,200 करोड़ रुपये आंकी गई लागत अब बढ़कर गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री सुरेश मेहता जी के अनुसार 90,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। आरोप है कि इसमें स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और पर्यटन परियोजनाओं की अनुचित लागत भी जोड़ दी गई है। इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र सरकार ने भी डूबग्रस्त वन भूमि के बदले 1,313 करोड़ रुपये और उर्वरित पुनर्वास के लिए 300 करोड़ रुपये की मांग रखी थी, जबकि बिजली उत्पादन का पूरा लाभ न मिलने पर मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की क्रमशः 900 करोड़ और 450 करोड़ रुपये की भरपाई की मांगों को भी जनवरी 2026 की बैठक में खारिज कर दिया गया।

राहुल यादव, मेधा पाटकर, राजकुमार सिन्हा, गोखरू मांगल्या, शोभाराम सोलंकी और ओमप्रकाश पाटीदार जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस समझौते का विरोध करते हुए मध्य प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह राज्य और विस्थापितों के हितों के साथ समझौता न करे। उन्होंने सरकार से अपने 7,669 करोड़ रुपये के वैध मुआवजे और पुनर्वास अधिकारों के लिए सभी उपलब्ध वैधानिक तथा संवैधानिक उपायों का उपयोग करते हुए दृढ़ता से अपना पक्ष रखने की अपील की है।
    user_Hemant Nagziriya
    Hemant Nagziriya
    News Anchor बड़वानी, बड़वानी, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • बड़वानी में राशन विक्रेता अपनी आर्थिक व्यवस्था बिगड़ने का हवाला देते हुए कमीशन बढ़ाने की मांग को लेकर अपनी POS मशीनें लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। राशन विक्रेताओं ने मीडिया के समक्ष एकत्र होकर अपनी इस गंभीर समस्या को सामने रखा है। विक्रेताओं का कहना है कि आर्थिक व्यवस्था बिगड़ने के कारण उनके सामने संकट खड़ा हो गया है, जिसके चलते वे अपनी मांगों को लेकर POS मशीनों के साथ सीधे कलेक्टर कार्यालय पहुंचे हैं।
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    बड़वानी में राशन विक्रेता अपनी आर्थिक व्यवस्था बिगड़ने का हवाला देते हुए कमीशन बढ़ाने की मांग को लेकर अपनी POS मशीनें लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। राशन विक्रेताओं ने मीडिया के समक्ष एकत्र होकर अपनी इस गंभीर समस्या को सामने रखा है। विक्रेताओं का कहना है कि आर्थिक व्यवस्था बिगड़ने के कारण उनके सामने संकट खड़ा हो गया है, जिसके चलते वे अपनी मांगों को लेकर POS मशीनों के साथ सीधे कलेक्टर कार्यालय पहुंचे हैं।
    user_सतीश केवट
    सतीश केवट
    Local News Reporter पानसेमल, बड़वानी, मध्य प्रदेश•
    32 min ago
  • धामनोद पुलिस ने खेत पर बने सिंचाई तालाब से 'TEXEL 7 LAYERS' कंपनी की प्लास्टिक पन्नी चोरी करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार कर दो दिन के भीतर चोरी का बड़ा खुलासा किया है। फरियादी अम्बाराम बिल्लौरे की रिपोर्ट पर धामनोद थाने में मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद पुलिस ने मुखबिर की सूचना और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर यह त्वरित कार्रवाई की है। पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से चोरी की गई 1.20 लाख रुपये कीमत की पन्नी और वारदात में इस्तेमाल की गई टाटा मैजिक गाड़ी (MP41R0963) जब्त कर ली है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में तालाबपुरा सिमराली निवासी धर्मेन्द्र डिडोंरे और थाना मानपुर के कालीकिराय निवासी मुकेश गिरवाल शामिल हैं। इस चोरी की घटना में संलिप्त अन्य आरोपियों की तलाश अभी जारी है। धामनोद थाना प्रभारी संतोष सिंह यादव ने बताया कि क्षेत्र में इन दिनों चोरी की वारदातें बढ़ी हैं और आए दिन इस प्रकार की घटनाएं होती रहती हैं। ऐसे में पुलिस द्वारा की गई इस त्वरित कार्रवाई से स्थानीय जनता के बीच कानून के प्रति विश्वास बढ़ा है।
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    धामनोद पुलिस ने खेत पर बने सिंचाई तालाब से 'TEXEL 7 LAYERS' कंपनी की प्लास्टिक पन्नी चोरी करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार कर दो दिन के भीतर चोरी का बड़ा खुलासा किया है। फरियादी अम्बाराम बिल्लौरे की रिपोर्ट पर धामनोद थाने में मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद पुलिस ने मुखबिर की सूचना और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर यह त्वरित कार्रवाई की है।

पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से चोरी की गई 1.20 लाख रुपये कीमत की पन्नी और वारदात में इस्तेमाल की गई टाटा मैजिक गाड़ी (MP41R0963) जब्त कर ली है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में तालाबपुरा सिमराली निवासी धर्मेन्द्र डिडोंरे और थाना मानपुर के कालीकिराय निवासी मुकेश गिरवाल शामिल हैं। इस चोरी की घटना में संलिप्त अन्य आरोपियों की तलाश अभी जारी है।

धामनोद थाना प्रभारी संतोष सिंह यादव ने बताया कि क्षेत्र में इन दिनों चोरी की वारदातें बढ़ी हैं और आए दिन इस प्रकार की घटनाएं होती रहती हैं। ऐसे में पुलिस द्वारा की गई इस त्वरित कार्रवाई से स्थानीय जनता के बीच कानून के प्रति विश्वास बढ़ा है।
    user_Jagannath yadav
    Jagannath yadav
    धरमपुरी, धार, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • धार के युवाओं द्वारा प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी दो दिवसीय भव्य शिवगंगा कावड़ यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। आगामी 2 और 3 अगस्त को निकलने वाली इस भव्य यात्रा के पोस्टर का विमोचन मांडू स्थित चतुर्भुज राम मंदिर में श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर डॉ नरसिंह दास जी महाराज द्वारा किया गया। इस वर्ष यह यात्रा संस्कृति और प्राकृतिक संरक्षण के मुख्य उद्देश्य के साथ सैकड़ों युवाओं के सहयोग से अपनी भव्यता के साथ निकाली जाएगी। पोस्टर विमोचन के अवसर पर महामंडलेश्वर डॉ नरसिंह दास जी महाराज ने संदेश दिया कि हमें सामाजिक समरसता, हिंदुत्व, संस्कृति और प्रकृति के संरक्षण के साथ-साथ जन कल्याण की भावना को ध्यान में रखकर देव कार्य करना चाहिए। इस दौरान विहिप धार जिला उपाध्यक्ष जगदीश कांकरवाल, कृतक गायकवाड, जतिन मौर्य, अक्षय काकरवाल, देव मौर्य, अक्षत त्रिवेदी, वंश वासुनिया, संयम खोड़े, ऋषभ भाटिया, विधान, सचिन, शरण पुष्पेंद्र, सोहन मौर्य, सचिन सिंदुरिया, अंकित देवड़ा, धीरज मोर्य, प्रणव मौर्य, सौरभ शरण, कुलदीप और शिवगंगा कांवड़ यात्रा समिति के सभी कार्यकर्ता एवं सदस्य उपस्थित रहे। यात्रा के संबंध में राहुल सेन मांडव (मोबाइल नंबर 9669141814) द्वारा जानकारी साझा की गई है।
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    धार के युवाओं द्वारा प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी दो दिवसीय भव्य शिवगंगा कावड़ यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। आगामी 2 और 3 अगस्त को निकलने वाली इस भव्य यात्रा के पोस्टर का विमोचन मांडू स्थित चतुर्भुज राम मंदिर में श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर डॉ नरसिंह दास जी महाराज द्वारा किया गया। इस वर्ष यह यात्रा संस्कृति और प्राकृतिक संरक्षण के मुख्य उद्देश्य के साथ सैकड़ों युवाओं के सहयोग से अपनी भव्यता के साथ निकाली जाएगी।

पोस्टर विमोचन के अवसर पर महामंडलेश्वर डॉ नरसिंह दास जी महाराज ने संदेश दिया कि हमें सामाजिक समरसता, हिंदुत्व, संस्कृति और प्रकृति के संरक्षण के साथ-साथ जन कल्याण की भावना को ध्यान में रखकर देव कार्य करना चाहिए। इस दौरान विहिप धार जिला उपाध्यक्ष जगदीश कांकरवाल, कृतक गायकवाड, जतिन मौर्य, अक्षय काकरवाल, देव मौर्य, अक्षत त्रिवेदी, वंश वासुनिया, संयम खोड़े, ऋषभ भाटिया, विधान, सचिन, शरण पुष्पेंद्र, सोहन मौर्य, सचिन सिंदुरिया, अंकित देवड़ा, धीरज मोर्य, प्रणव मौर्य, सौरभ शरण, कुलदीप और शिवगंगा कांवड़ यात्रा समिति के सभी कार्यकर्ता एवं सदस्य उपस्थित रहे। यात्रा के संबंध में राहुल सेन मांडव (मोबाइल नंबर 9669141814) द्वारा जानकारी साझा की गई है।
    user_राहुल सेन मांडव
    राहुल सेन मांडव
    Barber Dhar, Madhya Pradesh•
    3 hrs ago
  • खरगोन के चैनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत डुडवे फाल्या, बाजार खोदरा चिरिया में एक अंधे कत्ल का सनसनीखेज खुलासा हुआ है, जहां पत्नी ही अपने पति की हत्यारिन निकली। 10 जुलाई को हुई इस वारदात में पत्नी रूमलीबाई ने अपने ही घर में पति ईडा डुडवे के सिर पर धारदार कुल्हाड़ी से वार कर उनकी हत्या कर दी थी। पुलिस की जांच के बाद इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझ गई है और आरोपी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस जांच और पूछताछ में आरोपी पत्नी रूमलीबाई ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसने बताया कि उसका पति ईडा शराब के नशे में आए दिन उसके साथ मारपीट करता था और उसे मायके या किसी रिश्तेदारी में जाने से रोकता था। इसी लंबे समय से चले आ रहे विवाद और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर उसने घर में रखी कुल्हाड़ी से पति के सिर पर वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया। चैनपुर थाना पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी को बरामद कर आरोपी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है।
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    खरगोन के चैनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत डुडवे फाल्या, बाजार खोदरा चिरिया में एक अंधे कत्ल का सनसनीखेज खुलासा हुआ है, जहां पत्नी ही अपने पति की हत्यारिन निकली। 10 जुलाई को हुई इस वारदात में पत्नी रूमलीबाई ने अपने ही घर में पति ईडा डुडवे के सिर पर धारदार कुल्हाड़ी से वार कर उनकी हत्या कर दी थी। पुलिस की जांच के बाद इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझ गई है और आरोपी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

पुलिस जांच और पूछताछ में आरोपी पत्नी रूमलीबाई ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसने बताया कि उसका पति ईडा शराब के नशे में आए दिन उसके साथ मारपीट करता था और उसे मायके या किसी रिश्तेदारी में जाने से रोकता था। इसी लंबे समय से चले आ रहे विवाद और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर उसने घर में रखी कुल्हाड़ी से पति के सिर पर वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया। चैनपुर थाना पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी को बरामद कर आरोपी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है।
    user_Praveen pal
    Praveen pal
    Press advisory खरगोन, खरगोन, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • बड़वानी जिले के राजपुर में एक अज्ञात वाहन एक बाइक चालक को करीब 30 फीट तक अपने साथ ले गया, जिससे बाइक चालक की मौत हो गई। इस हादसे के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
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    बड़वानी जिले के राजपुर में एक अज्ञात वाहन एक बाइक चालक को करीब 30 फीट तक अपने साथ ले गया, जिससे बाइक चालक की मौत हो गई। इस हादसे के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
    user_Allrounder Rahul Gupta
    Allrounder Rahul Gupta
    पत्रकार राजपुर, बड़वानी, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
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