निंबाहेड़ा के बिनोता कस्बे में स्थित अंबामाता पहाड़ी मार्ग पर पैंथर की लगातार गतिविधियों के चलते वन विभाग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। वन विभाग के रेंजर सुनील यादव के निर्देश पर बाड़ी वन विभाग के अधिकारी करणपाल सिंह यादव और परसराम कुमावत की देखरेख में पहाड़ी मार्ग पर चेतावनी बोर्ड स्थापित किए गए हैं। इन बोर्डों के माध्यम से स्थानीय ग्रामीणों, राहगीरों और अंबामाता मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को सतर्क रहने तथा जंगल क्षेत्र में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी गई है। वन विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि किसी को पैंथर दिखाई दे, तो उसके निकट जाने या उसे उकसाने का प्रयास न करें। इसके अतिरिक्त, विभाग ने बच्चों और मवेशियों को अकेले जंगल की ओर न भेजने की अपील की है। इस दौरान ग्रामीणों को वन्यजीवों और खुद की सुरक्षा से जुड़ी आवश्यक सावधानियों के बारे में भी जानकारी दी गई। चेतावनी बोर्ड लगाने के कार्यक्रम के समय शक्ति सिंह शक्तावत, प्रहलाद प्रजापत, भूपेंद्र सिंह शक्तावत, गोविंद कुमावत, लोकेन्द्र सिंह शक्तावत, गुड्डू बिल्लिया, महावीर सिंह शक्तावत, दशरथ सेन, बाबरू सुथार, मनोज तिवारी, राजेश आचार्य, प्रहलाद गुर्जर, शीतल लखारा, हार्दिक भीमावत, भगवान गायरी, प्रेम गायरी, कालूजी गायरी, शक्ति सिंह, केशुराम रावत, अर्जुन कुमावत, शिवलाल गायरी और भवानी गायरी समेत बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी उपस्थित थे।
निंबाहेड़ा के बिनोता कस्बे में स्थित अंबामाता पहाड़ी मार्ग पर पैंथर की लगातार गतिविधियों के चलते वन विभाग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। वन विभाग के रेंजर सुनील यादव के निर्देश पर बाड़ी वन विभाग के अधिकारी करणपाल सिंह यादव और परसराम कुमावत की देखरेख में पहाड़ी मार्ग पर चेतावनी बोर्ड स्थापित किए गए हैं। इन बोर्डों के माध्यम से स्थानीय ग्रामीणों, राहगीरों और अंबामाता मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को सतर्क रहने तथा जंगल क्षेत्र में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी गई है। वन विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि किसी को पैंथर दिखाई दे, तो उसके निकट जाने या उसे उकसाने
का प्रयास न करें। इसके अतिरिक्त, विभाग ने बच्चों और मवेशियों को अकेले जंगल की ओर न भेजने की अपील की है। इस दौरान ग्रामीणों को वन्यजीवों और खुद की सुरक्षा से जुड़ी आवश्यक सावधानियों के बारे में भी जानकारी दी गई। चेतावनी बोर्ड लगाने के कार्यक्रम के समय शक्ति सिंह शक्तावत, प्रहलाद प्रजापत, भूपेंद्र सिंह शक्तावत, गोविंद कुमावत, लोकेन्द्र सिंह शक्तावत, गुड्डू बिल्लिया, महावीर सिंह शक्तावत, दशरथ सेन, बाबरू सुथार, मनोज तिवारी, राजेश आचार्य, प्रहलाद गुर्जर, शीतल लखारा, हार्दिक भीमावत, भगवान गायरी, प्रेम गायरी, कालूजी गायरी, शक्ति सिंह, केशुराम रावत, अर्जुन कुमावत, शिवलाल गायरी और भवानी गायरी समेत बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी उपस्थित थे।
- धरियावद के वजपुरा ग्राम पंचायत स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, राठौड़ो का सेमलिया की सरकारी भूमि पर वर्षों से चल रहे अतिक्रमण को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश भड़क उठा है। ग्रामीणों, अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन समिति ने जिला कलेक्टर प्रतापगढ़ को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर तीन कार्यदिवस के भीतर अतिक्रमण हटाने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में विद्यालय भूमि को अतिक्रमण मुक्त नहीं किया गया, तो वे लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से धरना, तालाबंदी और उग्र जनआंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। ग्रामीणों के अनुसार, विद्यालय के नाम दर्ज खाता संख्या 127, खसरा संख्या 73/7 और खाता संख्या 126, खसरा संख्या 73/5 की लगभग 0.7894 हेक्टेयर सरकारी भूमि पर लंबे समय से अवैध कब्जा है। इस मामले में विद्यालय प्रबंधन समिति द्वारा 7 अक्टूबर 2025 को प्रस्ताव पारित कर प्रधानाध्यापक के जरिए उपखण्ड अधिकारी को पत्र भेजा गया था। इससे पहले सितंबर 2025 और 26 दिसंबर 2025 को भी शिकायतें और ज्ञापन सौंपकर दो बार रिमाइंडर दिए गए थे, लेकिन प्रशासन ने अब तक न तो जमीन का सीमांकन किया और न ही अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई की है। प्रशासनिक उदासीनता के कारण स्कूल के मासूम बच्चों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। विद्यालय के चार कमरे पूरी तरह जर्जर और अनुपयोगी हो चुके हैं, जिससे वर्तमान में कक्षा 1 से 8 तक के सभी बच्चों को मात्र दो कमरों में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। इस वजह से हर समय किसी बड़े हादसे का खतरा बना रहता है। इसके अलावा, पर्याप्त सरकारी भूमि होने के बावजूद अतिक्रमण के कारण विद्यालय में खेल का मैदान तक उपलब्ध नहीं है, जिससे बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित हो रहा है। प्रशासन स्कूल में कम नामांकन का हवाला देकर इसे माध्यमिक स्तर पर प्रमोट करने से इनकार करता है, जबकि वास्तविकता यह है कि मूलभूत सुविधाओं और खेल मैदान के अभाव के कारण अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला दूसरे स्कूलों में करवाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जब भी कोई इस सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की आवाज उठाता है, तो कुछ अतिक्रमणकारी उन्हें खुलेआम धमकियां देकर भय का माहौल बनाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला केवल सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे का नहीं, बल्कि बच्चों के शिक्षा के अधिकार (अनुच्छेद 21-ए), सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने के अधिकार, मानवाधिकारों, बाल अधिकारों तथा सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है। ज्ञापन के जरिए जिला प्रशासन से तत्काल पुलिस जाब्ते की मौजूदगी में जमीन का सीमांकन कर अतिक्रमण हटाने, दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने, शिकायतकर्ताओं को सुरक्षा देने, स्कूल की चारदीवारी व नए भवन का निर्माण करने और लंबे समय से कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर विभागीय जांच की मांग की गई है।4
- चित्तौड़गढ़ से तीन बेहद प्रेरणादायक तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्होंने पूरे जिले का गौरव बढ़ाया है। इन प्रेरक तस्वीरों में स्वास्थ्य सेवा, गौसेवा और मेवाड़ की बेटी द्वारा जिले का मान बढ़ाए जाने की कहानी शामिल है, जो हर किसी को प्रेरित कर रही है।1
- चित्तौड़गढ़ की बढ़वाई पंचायत से जुड़े एक मामले में, एक साल पहले स्वीकृत हुए 24 फीट के रास्ते पर तहसील के तहसीलदार और पटवारी द्वारा कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। इससे ग्रामीणों के आने-जाने में भारी तकलीफ हो रही है और वे काफी परेशान हैं। खास तौर पर बारिश के मौसम में स्थिति बदतर हो जाती है, जब इस मार्ग पर बाइक या फोर-व्हीलर ले जाने का कोई रास्ता नहीं बचता है। किसी भी आपातकालीन स्थिति में ग्रामीणों को मजबूरन यहां से पैदल ही जाना पड़ता है। ग्रामीणों का आम रास्ता विधायक (MLA) फंड से बने 'मामादेव बंध' के कारण बंद हो गया है। यह बांध 1 करोड़ 50 हजार की लागत से स्वीकृत हुआ था, जिससे ग्रामीणों को कोई फायदा होने के बजाय उनका रास्ता ही बंद हो गया है। बांध निर्माण के समय ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया था कि उन्हें आने-जाने का रास्ता दिया जाएगा, लेकिन उन्हें कोई रास्ता नहीं दिया गया। जब ग्रामीणों ने इस बारे में ठेकेदार से बात की, तो उसने साफ कह दिया कि आगे से जो निर्देश आया है, वह वही करेगा। स्थानीय लोगों ने अपनी तरफ से बहुत कोशिश की, लेकिन आज दिन तक उनकी इस समस्या पर किसी ने कोई सुनवाई नहीं की है।4
- निम्बाहेड़ा के कोतवाली पुलिस थाने में तैनात सीआई रामसुमेर मीणा का चयन एसीबी यानी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में हुआ है। उनके इस चयन से विभागीय क्षेत्र में चर्चाएं हैं।1
- नीमच जिले के निवासियों ने महामंडलेश्वर स्वामी कलां सानंद जी महाराज के नगर आगमन पर उनका भव्य और ऐतिहासिक स्वागत किया। महाराज के आगमन के अवसर पर स्थानीय वासियों में खासा उत्साह देखा गया।1
- चित्तौड़गढ़ के आकाशवाणी चौराहा, गांधी नगर स्थित आयुष हॉस्पिटल में श्वास, दमा और अस्थमा जैसी बीमारियों का सफल इलाज किया जा रहा है। अस्पताल की ओर से इन रोगों के उपचार का दावा किया गया है और मरीज स्वयं अपने सफल इलाज का अनुभव साझा कर रहे हैं।1
- प्रतापगढ़ के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय अरनोद में शनिवार को राजस्थान सरकार के 'हरियालो राजस्थान' अभियान के तहत वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में स्कूल के छात्र-छात्राओं ने बड़े ही उत्साह के साथ हिस्सा लिया और परिसर में छायादार एवं औषधीय पौधे लगाए। पौधे लगाने के साथ ही बच्चों ने उनकी नियमित देखभाल और सुरक्षा करने का भी संकल्प लिया। इस अभियान में विद्यालय के शिक्षकों ने भी बढ़-चढ़कर अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के प्रधानाचार्य श्याम लाल गायरी ने बताया कि पिछले दो वर्षों में विद्यार्थियों द्वारा लगाए गए 95 प्रतिशत पौधे आज भी सुरक्षित और जीवित हैं। उन्होंने इसे बच्चों की लगन, मेहनत और जिम्मेदारी का सुखद परिणाम बताया। इस दौरान सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों ने मिलकर पर्यावरण संरक्षण तथा 'हरियालो राजस्थान' अभियान को पूरी तरह सफल बनाने का अपना संकल्प फिर से दोहराया।4
- प्रतापगढ़ जिले के धरियावद स्थित ग्राम पंचायत वालीसीमा में राजस्थान सरकार के जन कल्याण (ग्रामीण सेवा) शिविर 2026 का आयोजन किया गया। इस शिविर के दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं को सुना और कई मामलों का मौके पर ही समाधान सुनिश्चित किया। राजस्व, पंचायती राज, सामाजिक न्याय, कृषि, चिकित्सा, विद्युत और जलदाय विभाग के अधिकारियों ने आमजन को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी और पात्र लाभार्थियों को इन योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया पूरी की। ग्रामीणों ने नामांतरण, मूल निवास, जाति प्रमाण पत्र, पेंशन और कृषि कार्यों से संबंधित अपने आवेदन प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किए। राज्य सरकार के इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पंचायत मुख्यालयों पर ही एक स्थान पर अनेक सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना है, और प्रशासन ने ग्रामीणों से अधिक से अधिक संख्या में इन शिविरों का लाभ उठाने की अपील की है।1