चित्तौड़गढ़ की बढ़वाई पंचायत से जुड़े एक मामले में, एक साल पहले स्वीकृत हुए 24 फीट के रास्ते पर तहसील के तहसीलदार और पटवारी द्वारा कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। इससे ग्रामीणों के आने-जाने में भारी तकलीफ हो रही है और वे काफी परेशान हैं। खास तौर पर बारिश के मौसम में स्थिति बदतर हो जाती है, जब इस मार्ग पर बाइक या फोर-व्हीलर ले जाने का कोई रास्ता नहीं बचता है। किसी भी आपातकालीन स्थिति में ग्रामीणों को मजबूरन यहां से पैदल ही जाना पड़ता है। ग्रामीणों का आम रास्ता विधायक (MLA) फंड से बने 'मामादेव बंध' के कारण बंद हो गया है। यह बांध 1 करोड़ 50 हजार की लागत से स्वीकृत हुआ था, जिससे ग्रामीणों को कोई फायदा होने के बजाय उनका रास्ता ही बंद हो गया है। बांध निर्माण के समय ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया था कि उन्हें आने-जाने का रास्ता दिया जाएगा, लेकिन उन्हें कोई रास्ता नहीं दिया गया। जब ग्रामीणों ने इस बारे में ठेकेदार से बात की, तो उसने साफ कह दिया कि आगे से जो निर्देश आया है, वह वही करेगा। स्थानीय लोगों ने अपनी तरफ से बहुत कोशिश की, लेकिन आज दिन तक उनकी इस समस्या पर किसी ने कोई सुनवाई नहीं की है।
चित्तौड़गढ़ की बढ़वाई पंचायत से जुड़े एक मामले में, एक साल पहले स्वीकृत हुए 24 फीट के रास्ते पर तहसील के तहसीलदार और पटवारी द्वारा कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। इससे ग्रामीणों के आने-जाने में भारी तकलीफ हो रही है और वे काफी परेशान हैं। खास तौर पर बारिश के
मौसम में स्थिति बदतर हो जाती है, जब इस मार्ग पर बाइक या फोर-व्हीलर ले जाने का कोई रास्ता नहीं बचता है। किसी भी आपातकालीन स्थिति में ग्रामीणों को मजबूरन यहां से पैदल ही जाना पड़ता है। ग्रामीणों का आम रास्ता विधायक (MLA) फंड से बने 'मामादेव बंध' के कारण बंद
हो गया है। यह बांध 1 करोड़ 50 हजार की लागत से स्वीकृत हुआ था, जिससे ग्रामीणों को कोई फायदा होने के बजाय उनका रास्ता ही बंद हो गया है। बांध निर्माण के समय ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया था कि उन्हें आने-जाने का रास्ता दिया जाएगा, लेकिन उन्हें कोई रास्ता नहीं
दिया गया। जब ग्रामीणों ने इस बारे में ठेकेदार से बात की, तो उसने साफ कह दिया कि आगे से जो निर्देश आया है, वह वही करेगा। स्थानीय लोगों ने अपनी तरफ से बहुत कोशिश की, लेकिन आज दिन तक उनकी इस समस्या पर किसी ने कोई सुनवाई नहीं की है।
- चित्तौड़गढ़ से तीन बेहद प्रेरणादायक तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्होंने पूरे जिले का गौरव बढ़ाया है। इन प्रेरक तस्वीरों में स्वास्थ्य सेवा, गौसेवा और मेवाड़ की बेटी द्वारा जिले का मान बढ़ाए जाने की कहानी शामिल है, जो हर किसी को प्रेरित कर रही है।1
- चित्तौड़गढ़ की बढ़वाई पंचायत से जुड़े एक मामले में, एक साल पहले स्वीकृत हुए 24 फीट के रास्ते पर तहसील के तहसीलदार और पटवारी द्वारा कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। इससे ग्रामीणों के आने-जाने में भारी तकलीफ हो रही है और वे काफी परेशान हैं। खास तौर पर बारिश के मौसम में स्थिति बदतर हो जाती है, जब इस मार्ग पर बाइक या फोर-व्हीलर ले जाने का कोई रास्ता नहीं बचता है। किसी भी आपातकालीन स्थिति में ग्रामीणों को मजबूरन यहां से पैदल ही जाना पड़ता है। ग्रामीणों का आम रास्ता विधायक (MLA) फंड से बने 'मामादेव बंध' के कारण बंद हो गया है। यह बांध 1 करोड़ 50 हजार की लागत से स्वीकृत हुआ था, जिससे ग्रामीणों को कोई फायदा होने के बजाय उनका रास्ता ही बंद हो गया है। बांध निर्माण के समय ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया था कि उन्हें आने-जाने का रास्ता दिया जाएगा, लेकिन उन्हें कोई रास्ता नहीं दिया गया। जब ग्रामीणों ने इस बारे में ठेकेदार से बात की, तो उसने साफ कह दिया कि आगे से जो निर्देश आया है, वह वही करेगा। स्थानीय लोगों ने अपनी तरफ से बहुत कोशिश की, लेकिन आज दिन तक उनकी इस समस्या पर किसी ने कोई सुनवाई नहीं की है।4
- चित्तौड़गढ़ के आकाशवाणी चौराहा, गांधी नगर स्थित आयुष हॉस्पिटल में श्वास, दमा और अस्थमा जैसी बीमारियों का सफल इलाज किया जा रहा है। अस्पताल की ओर से इन रोगों के उपचार का दावा किया गया है और मरीज स्वयं अपने सफल इलाज का अनुभव साझा कर रहे हैं।1
- निम्बाहेड़ा के कोतवाली पुलिस थाने में तैनात सीआई रामसुमेर मीणा का चयन एसीबी यानी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में हुआ है। उनके इस चयन से विभागीय क्षेत्र में चर्चाएं हैं।1
- भीलवाड़ा के शाहपुरा में प्रसिद्ध धार्मिक स्थल चलानिया भैरुनाथ मार्ग की सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। शाहपुरा से चलानिया तक के रास्ते में जगह-जगह बड़े-बड़े खड्डे हो गए हैं और सड़क की साइडें भी खराब हो चुकी हैं। इस वजह से यहां दूर-दराज से दर्शन और पेशी के लिए आने वाले यात्रियों को, विशेषकर शनिवार और रविवार को, भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यहां आने-जाने के लिए पर्याप्त परिवहन साधनों की भी भारी कमी है। शनिवार की रात और रविवार की सुबह केवल गिने-चुने ऑटो रिक्शा ही चलते हैं। सवारी मिलने पर ये ऑटो चालक रास्ते में आने वाले एक-दो गांवों का किराया भी चलानिया के हिसाब से ही वसूलते हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ती है। ग्रामीणों ने इस क्षतिग्रस्त सड़क को जल्द से जल्द ठीक करने की मांग की है। चलानिया भैरुनाथ के पास सड़क के किनारों पर पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण वाहनों को मोड़ने और साइड लेने में बेहद दिक्कत होती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस समस्या पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया, तो यहां कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।4
- भीलवाड़ा जिले में मानसून के सक्रिय होने के बावजूद अपेक्षित वर्षा न होने के कारण पतंजलि परिवार द्वारा शनिवार को पर्जन्य एवं वरुण यज्ञ का आयोजन किया गया। विजय सिंह पथिक नगर स्थित बड़े पार्क में चल रही नि:शुल्क योग कक्षा के दौरान यह यज्ञ संपन्न हुआ, जिसमें योग साधकों ने वर्षा के देवता इंद्र एवं वरुण देव को प्रसन्न करने के लिए वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां दीं। महिला पतंजलि योग समिति की जिला प्रभारी नीरा मेहता के मुख्य आतिथ्य और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ओ.पी. आगाल की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में भारत स्वाभिमान न्यास के जिला प्रभारी एवं मुख्य योग शिक्षक प्रेम शंकर जोशी ने यज्ञ की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सनातन परंपरा के अनुसार यज्ञ की आहुतियों का धुआं वातावरण में सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करता है और वर्षा के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाता है। साथ ही, उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टि से भी यज्ञ को वातावरण की शुद्धि में सहायक बताया। इस धार्मिक आयोजन में रेखा आगाल, शोभा जागेटिया, लीला पंचोली, संतोष वर्मा, कौशल्या पोरवाल, सुशीला बाहेती, सुनीता अग्रवाल, मंजू दाधीच, तारा, किरण श्याम नानी, नरेंद्र वर्मा, ओ.पी. जागेटिया, रमेश बांगड़ और जटाशंकर खटवा सहित अनेक योग साधकों ने विधि-विधान से भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं ने अच्छी वर्षा, भरपूर अन्न, जल की उपलब्धता और समस्त प्राणियों के कल्याण की प्रार्थना की, जिसके बाद शांति पाठ के साथ यज्ञ का समापन हुआ।3
- नीमच जिले के निवासियों ने महामंडलेश्वर स्वामी कलां सानंद जी महाराज के नगर आगमन पर उनका भव्य और ऐतिहासिक स्वागत किया। महाराज के आगमन के अवसर पर स्थानीय वासियों में खासा उत्साह देखा गया।1
- चित्तौड़गढ़ के एक होमगार्ड जवान ने अपनी कड़ी मेहनत और पाई-पाई जोड़कर आखिरकार अपने सपनों का घर तैयार कर लिया है। इस उपलब्धि के बाद जवान ने अपने पूरे परिवार के साथ हर्षोल्लास के माहौल में नए घर में गृह प्रवेश किया। इस अवसर पर उनके परिवार में खुशी का माहौल है।1