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Jharkhand Lohra keredri mantu
Om prakash Ganjhu
Jharkhand Lohra keredri mantu
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- सौहार्द्य सेवा समिति अध्यक्ष सह शांति समिति सदस्य स झारखंड आंदोलन कारी फहिम उद्दिन अहमद उर्फ संजर मलिक एवं समाज सेवी अभिषेक कुमार ने आज नगर में कैंडल मार्च के जरिए पौता जंगल में हुए तीन एक परिवार की हत्या के विरोध में जिला प्रशासन से मांग करते हुए कहा है कि इस निर्मम कीर्तिय में शामिल वहशी दरिंदो को पकड़ कर फास्ट ट्रैक अदालत में सुनवाई कर उसी प्रकार सजा मिले जैसा उन लोगों ने क्या तथा सरकार से मांग क्या है कि सभी परिवार के सदस्यों में से एक को नौकरी एवं उचित मुआवजा तथा इस कार्य में जो भी संलिप्त हो उस पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चत की जाए सैंकड़ों लोगों ने पिड़ितो की तस्वीर ले कर न्याय की गुहार लगाते हुए नारे लगा कर विरोध दर्ज किया साथ ही पत्रकार बंधुओं के साथ हुए सेख भिखारी मैडिकल अस्पताल में दुर्व्यवहार हेतु कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इस अब चुंकी परिवार के लोग सामूहिक छमा मांग ली है अपने गलती की तो एसे में सभी को इन बातों को नंजर अंदाज करते हुए इस परिवार को न्याय दिलवाने में हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए ताकि अपने वतन हिंद की फिजा में अमन प्रेम सद्भाव कायम रहे सभी लोग एक साथ मिल जुल कर रहते हैं यही तो खुबसुरती है अपने शहर की चाह कर भी कोई गंदी सियासत से अपनी रोटी नहीं सेक सकता जनता सभी कुछ समझती है.1
- पत्रकारों से मारपीट मामले में कार्रवाई होगी: एसपी अमन कुमार1
- झुमरा दीपु चौक स्थित लकड़ी टाल के विपरीत, सहारा ऑफिस के पीछे खाली मैदान में लगातार बढ़ रही अव्यवस्था पर आखिरकार प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया। यहाँ शराबियों का अड्डा बनता जा रहा था, जहां रोज़ाना शराब की बोतलें फेंकी जा रही थीं और आसपास के लोगों में भय का माहौल बना हुआ था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन की टीम शनिवार को मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान अंचलाधिकारी रामबालक कुमार, प्रखंड विकास पदाधिकारी हारून रशीद एवं दारू थाना के एसआई मिथु मुर्मू दलबल के साथ मौजूद रहे। अधिकारियों ने साफ संदेश दिया कि सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह की हरकतें बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। स्थानीय लोगों से भी अपील की गई कि अगर कहीं ऐसी गतिविधि दिखे, तो तुरंत थाना को सूचित करें।1
- हजारीबाग: मनीष जायसवाल ने शनिवार को संसदीय समिति के दौरे से लौटने के बाद सांसद सेवा कार्यालय परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता में जिले की कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए। 🔴 कानून व्यवस्था पर तीखा हमला सांसद ने कहा कि हजारीबाग में नए पुलिस अधीक्षक के पदभार संभालने के महज 10–12 दिनों के भीतर लगातार बड़ी आपराधिक घटनाएं हुई हैं, जिससे जिले की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। उनके अनुसार अपराधियों ने नई पुलिस नेतृत्व व्यवस्था को खुली चुनौती दी है। 🔴 प्रमुख घटनाओं का उल्लेख प्रेस वार्ता में उन्होंने हालिया घटनाओं का हवाला देते हुए कहा— 22 अप्रैल: बड़कागांव के 13 माइल क्षेत्र में हाईवा वाहन को आग के हवाले कर दहशत फैलाने की कोशिश। 17–19 अप्रैल: मुफस्सिल थाना में एक दलित महिला और उसके दो वर्षीय बच्चे को 38 घंटे तक हिरासत में रखकर कथित रूप से प्रताड़ित किया गया। शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठाया। 24 अप्रैल: बरही स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र में दिनदहाड़े हथियारबंद अपराधियों द्वारा लगभग 6–7 करोड़ रुपये मूल्य की नकदी व सामान की लूट। 26 अप्रैल: केरेडारी थाना क्षेत्र में दंपति पर फायरिंग, जिसमें मंजू देवी की मौत हो गई और आरोपी फरार हैं। 27 अप्रैल: मुफस्सिल थाना क्षेत्र के पौता जंगल से तीन लापता बच्चों के शव बरामद, जबकि परिजनों ने पहले ही गुमशुदगी की सूचना दी थी। 🔴 पुलिस प्रशासन पर टिप्पणी सांसद ने कहा कि केवल वारंटियों की गिरफ्तारी से कानून व्यवस्था मजबूत नहीं होती। पुलिस की जिम्मेदारी जिले में आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पिछले एसपी का मात्र 11 महीने में तबादला क्यों किया गया, जबकि जनता उनके कार्यकाल की सराहना कर रही थी। 🔴 सरकार को चेतावनी उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में कानून व्यवस्था शामिल नहीं है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि अपराध नियंत्रण पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो भारतीय जनता पार्टी सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगी।1
- Post by DESH LIVE NEWS CHATRA1
- हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल ने शनिवार को संसदीय समिति के दौरे से लौटने के उपरांत सांसद सेवा कार्यालय परिसर में एक महत्वपूर्ण प्रेस-वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने दो प्रमुख विषयों पर बेबाकी से अपनी बात रखी। सांसद मनीष जायसवाल ने अपनी बात की शुरुआत हजारीबाग की ध्वस्त कानून व्यवस्था से करते हुए कहा कि अपराधियों ने जिले के नए पुलिस अधीक्षक का स्वागत लगातार बड़ी आपराधिक घटनाओं के साथ किया है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि नए एसपी को ज्वाइन किए महज 10-12 दिन ही हुए हैं और इस अल्प अवधि में जिस प्रकार की बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया गया है, वह अत्यंत गंभीर और सोचनीय विषय है। उन्होंने हालिया घटनाओं का विवरण देते हुए कहा कि 22 अप्रैल को बड़कागांव के 13 माइल क्षेत्र में एक हाईवा को आग के हवाले कर दहशत फैलाने की कोशिश की जो बहुत दिनों बाद ऐसी घटना हुई। बीते 17 से 19 अप्रैल के बीच मुफस्सिल थाने में एक दलित महिला और दो वर्षीय दुधमुंहे बच्चे को 38 घंटे तक हिरासत में रखकर यातनाएं दी गईं और उनकी पिटाई की गई। ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस कर्मियों ने अपने ही नए कप्तान को यह चुनौती दी है कि उनके आने के बाद भी वे ऐसी करतूतें जारी रखेंगे। इस मामले में पीड़ित द्वारा शिकायत के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सांसद मनीष जायसवाल ने बैंक डकैती की घटना पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि हजारीबाग को याद भी नहीं कि यहाँ आखिरी बार बैंक डकैती कब हुई थी, लेकिन बीते 24 अप्रैल को बरही में हथियारबंद अपराधियों ने दिनदहाड़े 'बैंक ऑफ महाराष्ट्र' में घुसकर करीब 6 से 7 करोड़ रुपये के मूल्य के सामान और कैश की लूट की और आसानी से चंपत हो गए। इसके अतिरिक्त 26 अप्रैल को केरेडारी थाना क्षेत्र में एक दंपति पर फायरिंग की गई, जिसमें राय बस्ती निवासी विकास प्रजापति की पत्नी मंजू देवी की मृत्यु हो गई और अपराधी अब तक फरार हैं। वहीं, 27 अप्रैल को मुफस्सिल थाना क्षेत्र के पौता जंगल से तीन लापता बच्चों (दो बालिका और एक बालक) के शव बरामद हुए। मृतकों के परिजनों के मुताबिक 23 अप्रैल को उनके लापता होने की लिखित सूचना मुफ्फसिल थाना को देने के बावजूद पुलिस ने कोई सक्रियता नहीं दिखाई, जिसका परिणाम अत्यंत दुखद रहा। सांसद मनीष जायसवाल ने पुलिस प्रशासन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि केवल वारंटियों को गिरफ्तार करने से कानून व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो जाती। वारंटी पकड़ना आवश्यक है, लेकिन जिले की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी पुलिस की ही है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी निरंतर यह कह रही है कि वर्तमान राज्य सरकार की प्राथमिकता में कानून व्यवस्था है ही नहीं और यहाँ कोई भी सुरक्षित नहीं है। पिछले एसपी के कार्यकाल की सराहना करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि महज 11 महीने में उनका स्थानांतरण करने के पीछे सरकार की क्या मंशा थी, इसका स्पष्टीकरण जनता को मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले एसपी के कार्यकाल की सराहना जनता कर रही है और अब तो हमसे मिलकर भी लोग ये पूछ रहे हैं आखिर इतनी जल्दी उनका ट्रांफास्ट क्यों किया गया। उन्होंने पुलिस को चेतावनी दी कि यदि वे अपने लोकप्रिय हथकंडे को छोड़कर अपराध नियंत्रण पर ध्यान केंद्रित नहीं करते, तो भाजपा सड़क पर उतरकर इसका पुरजोर विरोध करेगी। प्रेस- वार्ता के दूसरे चरण में सांसद मनीष जायसवाल ने बीते 28 अप्रैल को सदर अस्पताल में मंत्री इरफान अंसारी के समर्थकों द्वारा पत्रकार साथियों के साथ की गई गाली-गलौज, बदसलूकी और मारपीट की घटना पर गहरा खेद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ हैं और उन पर हुआ यह हमला अत्यंत जी निंदनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि आवेदन दिए जाने के बावजूद हजारीबाग पुलिस ने अब तक इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है, जो कि बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है। मनीष जायसवाल ने कहा कि मंत्री इरफान अंसारी एक सेलेक्टिव माइंडसेट के साथ हजारीबाग पहुंचे। उन्होंने सवाल किया कि बीते कुछ महीनों में हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र में हाथियों के कुचलने से दर्जनों मौतें हुई। चुरचू में एक ही दिन में आधा दर्जन लोगों की मौत हुई। अवैध खनन के कारण दर्जनों मौतें हुई, बड़कागांव के नापो में एक घटना में दो मौत, कटकमसांडी में बीते छठ महापर्व के दौरान तालाब में डूबने से चार मौत और विष्णुगढ़ में तंत्र-मंत्र के एक बच्ची की नरबलि जैसे संवेदनशील मामलों में मंत्री जी की गंभीरता क्यों नहीं दिखी? उन्होंने स्पष्ट किया कि पौता जंगल की घटना और पत्रकारों पर हमले की घटना अलग-अलग हैं, लेकिन मामले में दिशा भटकाने की कोशिश खूब हो रही है। उन्होंने कहा कि पौता जंगल से तीन शव मामले में भाजपा पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा है और उनकी प्रति संवेदना व्यक्त करता हुआ साथ ही पुलिस प्रशासन से यह मांग करता है कि इस घटना से जल्द पर्दा हटाए और दोषियों को चिन्हित कर उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करके उनपर कड़ी कानूनी कार्रवाई करे। अंत में उन्होंने हजारीबाग पुलिस से अपील की कि वे पत्रकारों के मामले में अविलंब प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करें, अन्यथा भाजपा पीड़ित पत्रकारों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करने से पीछे नहीं हटेगी। सांसद मनीष जायसवाल ने मंत्री इरफान अंसारी से भी आग्रह किया कि पत्रकार साथियों जिनसे आपके सामने बदसलूकी और मारपीट हुई उन्हें न्याय दिलाने में अपनी अहम भूमिका निभाएं और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की गरिमा और मर्यादा का ख्याल जरूर रखें ताकि वे निष्पक्ष और निर्भीक होकर जनता की आवाज बनकर अपनी सेवा समाज और राष्ट्र को दे सकें । प्रेस- वार्ता को संबोधित करते हुए हजारीबाग सदर विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि हजारीबाग में हाल के दिनों में घटित घटना अत्यंत दुखद और शर्मनाक है। इस पूरे मामले को जिस प्रकार से अलग-अलग रूप देकर प्रस्तुत किया जा रहा है, वह उचित नहीं है। अपराधी सिर्फ अपराधी होता है उसकी पहचान किसी भी पार्टी या विचारधारा से नहीं जोड़ी जानी चाहिए। घटना के तीन दिन बाद बच्चों का मिलना कई सवाल खड़े करता है। वहीं मुफस्सिल थाना की भूमिका भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि परिजनों के साथ जिस तरह के दुर्व्यवहार की बात सामने आई है, वह बेहद चिंताजनक है। एक जनप्रतिनिधि होने के नाते मुझे इस घटना की सूचना तक नहीं दी गई। यदि समय रहते जानकारी मिलती, तो हम भी अपने स्तर से बच्ची की तलाश में सहयोग करते और पुलिस प्रशासन पर आवश्यक दबाव बनाते। इस मामले में न्याय की मांग को लेकर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी का हजारीबाग आगमन हुआ, लेकिन इस दौरान मीडिया कर्मियों के साथ उनके द्वारा किया गया व्यवहार भी बिल्कुल अनुचित रहा, जिसकी निंदा होनी चाहिए। तीन बच्चियों से जुड़ी इस घटना की जानकारी मिलते ही मेरी टीम ने पोस्टमार्टम प्रक्रिया में सहयोग किया और परिजनों से संपर्क साधने का प्रयास किया। हालांकि जब भी उनके घर जाने की कोशिश की गई, यह जानकारी मिली कि मंत्री जी वहां मौजूद हैं या उन्हें रांची बुलाया गया है। इस कारण लगातार संपर्क में बाधा उत्पन्न होती रही। उक्त प्रेस-वार्ता में विशेषरूप से भाजपा के वरिष्ठ नेता केपी ओझा, हरीश श्रीवास्तव, जयनारायण मेहता, पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष शंकर लाल गुप्ता, सांसद प्रतिनिधि सत्येंद्र नारायण सिंह, विनोद झुनझुनवाला, अजय कुमार साहू, जीवन मेहता, द्वारिका प्रसाद सिंह उर्फ खोखा सिंह, रेणुका कुमारी, दामोदर साव, लब्बू गुप्ता, बीजेपी नेता दिनेश सिंह राठौड़, भाजपा एससी मोर्चा अध्यक्ष महेंद्र राम बिहारी, भाजयुमो अध्यक्ष राजकरण पाण्डेय, भाजपा किसान मोर्चा अध्यक्ष सह सांसद प्रतिनिधि इन्द्रनारायण कुशवाहा, भाजपा महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष मनोरमा राणा, शंकर चंद्र पाठक, नरेंद्र कुमार, विनोद ओझा, भाजपा सदर मंडल अध्यक्ष शिवपाल यादव, भाजयुमो नेता विक्रमादित्य, बलराम शर्मा, बंटी तिवारी, रामपति राम, महेंद्र महतो, विजय वर्मा, सांसद मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहें ।1
- कोडरमा में हाथियों का आतंक: ग्रामीणों ने कटैया मोड़ पर लगाया सड़क जाम1
- देशभर में पत्रकारों की सुरक्षा एक गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। सच को सामने लाने वाले पत्रकार आज खुद असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। हाल के दिनों में विभिन्न राज्यों में पत्रकारों पर हमले, धमकियां और उत्पीड़न की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारों की भूमिका बेहद अहम होती है। वे समाज की सच्चाई, भ्रष्टाचार और जनसमस्याओं को उजागर करते हैं। लेकिन इसी वजह से कई बार उन्हें दबाव, हिंसा और प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून और उसके प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत है। साथ ही प्रशासन को ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि दोषियों को सजा मिले और पत्रकार निडर होकर अपना काम कर सकें। अगर पत्रकार सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो लोकतंत्र की नींव भी कमजोर होगी। ऐसे में जरूरी है कि समाज, सरकार और प्रशासन मिलकर पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।1
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