क्षमा मांगना एवं क्षमा करना सबसे बड़ा आत्मशुद्धि का मार्ग: मनक मुनि भिवानी। हालुवास गेट स्थित जैन मुनि आश्रम में सयंम, तप, त्याग, जप, भावना, भक्ति एवं क्षमा के लिए गत 8 से 15 सितम्बर तक पर्युषण महापर्व मनाया जा रहा हैं, जो प्रतिदिन शाम 4 बजे से 5 बजे तक जैन मुनि आश्रम में पूज्य गुरूजी मनक मुनि महाराज के सान्निध्य में मनाया जा रहा हैं। जैन मुनि मनक कुमार महाराज ने बताया कि जैन धर्म का महान पर्व पर्वाधिराज पर्युषण आत्म शुद्धि, मन शुद्धि, शरीर शुद्धि एवं व्यवहार शुद्धि का पर्व है, ये जन-जन के उत्थान, अपनी वृत्तियों एवं आदतों को सुधारने का पर्व हैं। मनक मुनि महाराज ने कहा कि पर्युषण सयंम, तप व त्याग का विशेष महापर्व हैं। क्षमा करना और क्षमा मांगना सबसे बड़ा धर्म एवं आत्म शुद्धि का मार्ग हैं, जिसके माध्यम से मित्रता, परिवार, समाज व देश टूटने से बच सकते हैं। मनक मुनि महाराज ने कहा कि हर व्यक्ति जाने अनजाने में गलती करता हैं और किसी न किसी का उसको दोष लगता हैं, इसी से आपसी द्वेष, ईर्ष्या, मनमुटाव पैदा होते हैं। मनक मुनि महाराज ने कहा कि मनुष्य की प्रवृति हैं कि वह दूसरे की तरफ अंगुली करके उसकी कमियां ढूंढता एवं बताता हैं, जबकि मनुष्य अपनी अंतर आत्मा की तरफ नहीं झांकता और खुद की कमियों को छिपाकर खुद को सर्वोपरि मानता हैं, जबकि दूसरे की तरफ अंगुली करके कमिया गिनाने वाले को सोचना चाहिए कि सामने वाले की तरफ एक अंगुली हैं और आपकी तरफ तो चार अंगुलियां हैं, फिर खुद की कमियों की तरफ क्यों नहीं देख रहा। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में इस पर्व को सबसे बड़ा माना हैं और क्षमा करने एवं क्षमा मांगने को प्रमुखता दी गई हैं। उन्होंने कहा कि क्षमता करने एवं क्षमा मांगने से मित्रता, परिवार, समाज व देश टूटने से बच सकते हैं, जब मनुष्य दूसरों की कमियां ढूंढने की बजाय खुद की कमियां देखना शुरू कर देगा तो विश्व में शांति हो जाएगी और सब प्यार, प्रेम एवं मित्रता से रहेंगे। वहीं 15 सितम्बर को संवत्सरी का दिन आत्मालोचन, क्षमा व मैत्री के रूप में मनाया जाएगा। डॉ. उषा जैन ने कहा कि भगवान महाबीर ने राजमहलों की सुख सुविधाएं छोड़कर जनकल्याण के लिए कठोर साधना एवं तपस्या का मार्ग अपनाया। साढ़े बारह वर्षों की साधना एवं तपस्या में अनेक कष्ट सहनकर ज्ञान प्राप्त किया। भगवान महाबीर ने जनजीवन के उत्थान के लिए अंहिसा, समता एवं क्षमा का उपदेश दिया। इस अवसर पर राकेश कटारिया, नीलम जैन, श्यामलाल, आनंद बासिया, रामबाबू जैन, सतीश जैन, नरेश लहरिया, मदन जैन, अनिल नाहटा, प्रवीन, सज्जन कुमार, रमेश जैन, प्रकाश गर्ग, सुरेश, केशव जैन, राजीव जैन, ओमप्रकाश जैन,मोहनलाल अग्रवाल, उर्मिला जैन, मनदीप गोदारा, सन्मति, मोहित, राजू, राजबाला, कोमल पटवा, रेखा, ईशा, कांता, मीना, उमा, ललिता व राजेश जैन आदि मौजूद रहे।
क्षमा मांगना एवं क्षमा करना सबसे बड़ा आत्मशुद्धि का मार्ग: मनक मुनि भिवानी। हालुवास गेट स्थित जैन मुनि आश्रम में सयंम, तप, त्याग, जप, भावना, भक्ति एवं क्षमा के लिए गत 8 से 15 सितम्बर तक पर्युषण महापर्व मनाया जा रहा हैं, जो प्रतिदिन शाम 4 बजे से 5 बजे तक जैन मुनि आश्रम में पूज्य गुरूजी मनक मुनि महाराज के सान्निध्य में मनाया जा रहा हैं। जैन मुनि मनक कुमार महाराज ने बताया कि जैन धर्म का महान पर्व पर्वाधिराज पर्युषण आत्म शुद्धि, मन शुद्धि, शरीर शुद्धि एवं व्यवहार शुद्धि का पर्व है, ये जन-जन के उत्थान, अपनी वृत्तियों एवं आदतों को सुधारने का पर्व हैं। मनक मुनि महाराज ने कहा कि पर्युषण सयंम, तप व त्याग का विशेष महापर्व हैं। क्षमा करना और क्षमा मांगना सबसे बड़ा धर्म एवं आत्म शुद्धि का मार्ग हैं, जिसके माध्यम से मित्रता, परिवार, समाज व देश टूटने से बच सकते हैं। मनक मुनि महाराज ने कहा कि हर व्यक्ति जाने अनजाने में गलती करता हैं और किसी न किसी का उसको दोष लगता हैं, इसी से आपसी द्वेष, ईर्ष्या, मनमुटाव पैदा होते हैं। मनक मुनि महाराज ने कहा कि मनुष्य की प्रवृति हैं कि वह दूसरे की तरफ अंगुली करके उसकी कमियां ढूंढता एवं बताता हैं, जबकि मनुष्य अपनी अंतर आत्मा की तरफ नहीं झांकता और खुद की कमियों को छिपाकर खुद को सर्वोपरि मानता हैं, जबकि दूसरे की तरफ अंगुली करके कमिया गिनाने वाले को सोचना चाहिए कि सामने वाले की तरफ एक अंगुली हैं और आपकी तरफ तो चार अंगुलियां हैं, फिर खुद की कमियों की तरफ क्यों नहीं देख रहा। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में इस पर्व को सबसे बड़ा माना हैं और क्षमा करने एवं क्षमा मांगने को प्रमुखता दी गई हैं। उन्होंने कहा कि क्षमता करने एवं क्षमा मांगने से मित्रता, परिवार, समाज व देश टूटने से बच सकते हैं, जब मनुष्य दूसरों की कमियां ढूंढने की बजाय खुद की कमियां देखना शुरू कर देगा तो विश्व में शांति हो जाएगी और सब प्यार, प्रेम एवं मित्रता से रहेंगे। वहीं 15 सितम्बर को संवत्सरी का दिन आत्मालोचन, क्षमा व मैत्री के रूप में मनाया जाएगा। डॉ. उषा जैन ने कहा कि भगवान महाबीर ने राजमहलों की सुख सुविधाएं छोड़कर जनकल्याण के लिए कठोर साधना एवं तपस्या का मार्ग अपनाया। साढ़े बारह वर्षों की साधना एवं तपस्या में अनेक कष्ट सहनकर ज्ञान प्राप्त किया। भगवान महाबीर ने जनजीवन के उत्थान के लिए अंहिसा, समता एवं क्षमा का उपदेश दिया। इस अवसर पर राकेश कटारिया, नीलम जैन, श्यामलाल, आनंद बासिया, रामबाबू जैन, सतीश जैन, नरेश लहरिया, मदन जैन, अनिल नाहटा, प्रवीन, सज्जन कुमार, रमेश जैन, प्रकाश गर्ग, सुरेश, केशव जैन, राजीव जैन, ओमप्रकाश जैन,मोहनलाल अग्रवाल, उर्मिला जैन, मनदीप गोदारा, सन्मति, मोहित, राजू, राजबाला, कोमल पटवा, रेखा, ईशा, कांता, मीना, उमा, ललिता व राजेश जैन आदि मौजूद रहे।
- #क्या शानदार लोकेसन है #एक तरफ सुनहरा आसमान #दूसरी तरफ छाये काले बदरा #क्या शानदार लोकेसन है #एक तरफ सुनहरा आसमान #दूसरी तरफ छाये काले बदरा1
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