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पुरुषोत्तम मास, जिसे मणि-मास भी कहा जाता है, के शुभ अवसर पर भक्तगणों ने श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना और हवन किया। यह धार्मिक आयोजन मंदिर प्रधान मोहिंदर सिंह डोगरा जी और समस्त निहाल विहार कमेटी के सौजन्य से संपन्न हुआ।
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पुरुषोत्तम मास, जिसे मणि-मास भी कहा जाता है, के शुभ अवसर पर भक्तगणों ने श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना और हवन किया। यह धार्मिक आयोजन मंदिर प्रधान मोहिंदर सिंह डोगरा जी और समस्त निहाल विहार कमेटी के सौजन्य से संपन्न हुआ।
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- जापान ने 20 साल के अंतराल के बाद भारतीय आमों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे जापान के लोग अब मुंह में घुल जाने वाले भारतीय आमों का स्वाद नहीं चख पाएंगे। इस प्रतिबंध का मुख्य कारण यह है कि इस साल की शुरुआत में किए गए निरीक्षण के दौरान जापान के क्वारंटाइन अधिकारियों ने भारतीय उपचार सुविधाओं में कीट नियंत्रण प्रक्रियाओं में कुछ खामियाँ पाई थीं। इस निर्णय से अल्फोंसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसी भारतीय आमों की प्रीमियम किस्में प्रभावित हुई हैं। जापान द्वारा भारतीय आमों पर यह प्रतिबंध पिछले दो दशकों में पहली बार लगाया गया है। इससे पहले, जापान ने फल मक्खी के खतरे के कारण भारतीय आमों पर प्रतिबंध लगाया था, जिसे भारत द्वारा अपने उपचार प्रोटोकॉल को मजबूत करने के बाद 2006 में हटा दिया गया था। अब, जापानी अधिकारियों ने एक बार फिर इस बात पर चिंता जताई है कि क्या भारतीय आमों की खेप देश के सख्त पौध स्वास्थ्य मानकों को पूरा कर रही है, क्योंकि जापान फल मक्खियों जैसे आक्रामक कीटों के लिए शून्य सहिष्णुता की नीति का पालन करता है, जिन्हें घरेलू कृषि के लिए एक बड़ा खतरा माना जाता है। निर्यात के हर सीजन से पहले, जापान आमों की जांच के लिए अपने क्वारंटाइन अधिकारियों को भारत के वाष्प ताप उपचार (वीएचटी) केंद्रों पर भेजता है। इन केंद्रों पर आमों को निर्यात से पहले कीटाणुरहित किया जाता है। वीएचटी एक गैर-रासायनिक प्रक्रिया है, जिसमें कीटों और फलों के कीड़ों के लार्वा को मारने के लिए आमों को नियंत्रित गर्म और आर्द्र हवा के संपर्क में रखा जाता है। यह भारत-जापान निर्यात समझौते के तहत एक बहुत ही ज़रूरी काम है।1
- भगवंत मान ने एक स्पष्ट संदेश दिया है, जिसमें उन्होंने दृढ़ता से कहा है कि वे चुनौतियों से बिल्कुल नहीं रुकेंगे। उन्होंने अपनी बात को एक मुहावरे के साथ समझाया, यह ज़ोर देते हुए कि "कुछ तिनके टूटने से झाड़ू की ताकत कम नहीं होती"।1
- भदोही जिले से आई एक खबर के मुताबिक, पंचदेव पांडे ने अपने विपक्षी हर कुंवर पांडे और उनके पुत्रों रोहित पांडे, राहुल पांडे, तथा लवकुश पांडे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पंचदेव पांडे ने बताया कि इन लोगों ने एक 'नाजायज गोल' बनाकर खुद को 'बैंक समूह का मैनेजर' दर्शाया और ₹4,65,000 लोगों को दिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब लोगों को उनका पैसा नहीं मिला, तो राहुल पांडे ने गाली-गलौज की और फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी देते हुए उनसे (पंचदेव पांडे से) ब्याज सहित ₹13,74,000 की अवैध वसूली की। शिकायतकर्ता के मुताबिक, अब आरोपी ₹3,00,000 की और मांग कर रहे हैं। जब पंचदेव पांडे ने यह पैसा देने से इनकार किया, तो हर कुंवर और राहुल पांडे ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। राहुल पांडे ने दावा किया कि वे थाने के मुखबिर हैं और उन्होंने कई लोगों को फर्जी मुकदमों में फंसाया है, और अब शिकायतकर्ता को भी फंसा देंगे। उन्होंने पंचदेव पांडे को कई फर्जी मुकदमों में गवाह बनाकर झूठी गवाही देने के लिए भी धमकाया, जिसके बारे में पंचदेव पांडे को कोई जानकारी नहीं है। पंचदेव पांडे ने बताया कि राहुल पांडे उन्हें लगातार जान से मारने की धमकी देते रहते हैं, और आज भी उन्हें रोककर धमकी दी गई कि उनका हाथ हर जगह तक है और पुलिस या प्रशासन उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। इस गंभीर स्थिति के मद्देनजर, पंचदेव पांडे ने पुलिस अधीक्षक महोदय से अनुरोध किया है कि ऐसे 'भ्रष्ट मुखबिर' की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जो मुखबिरी की आड़ में पुलिस और प्रशासन को बदनाम कर रहे हैं और जनता का शोषण कर रहे हैं। उन्होंने दोषी पाए जाने पर वैधानिक कार्रवाई और न्याय की मांग की है।1
- सुवेंदु अधिकारी ने अपना वादा 7 दिन के भीतर पूरा करके दिखाया है। इस उपलब्धि पर गृहमंत्री अमित शाह ने उन्हें शुभकामनाएं दीं और कहा कि सुवेंदु अधिकारी ने जो कहा था, उसे उन्होंने 7 दिन में करके दिखा दिया।1
- पहलवान विनेश फोगाट ने दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित किए जा रहे एशियन गेम्स 2026 के चयन ट्रायल्स में हिस्सा लिया है। यह ट्रायल्स एशियाई खेलों के लिए टीम का चयन करने के उद्देश्य से हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कल ही विनेश फोगाट को इन चयन ट्रायल्स में भाग लेने की अनुमति दी थी, जिसके बाद अब वह ट्रायल्स के माध्यम से एशियन गेम्स की टीम में जगह बनाने का प्रयास करेंगी।1
- एक गरीब व्यक्ति की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करने की कोशिश करने वालों को अब भारी कीमत चुकानी पड़ी है। इस मामले में प्रशासन द्वारा सीधे तौर पर बुलडोजर की कार्रवाई की गई है।1
- आम जनता में सरकारी अधिकारियों के रवैये को लेकर गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया है। यह आरोप लगाया गया है कि ये सरकारी कर्मचारी केवल अपने निजी फायदे को प्राथमिकता देते हैं और जनता की भलाई या समस्याओं से उन्हें कोई सरोकार नहीं है। पोस्ट में कड़े शब्दों में कहा गया है कि उनके लिए 'जनता भाड़ में जाए'। इस गंभीर टिप्पणी में यह भी कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति मेहनत करके अपना गुजारा चला रहा है, तो उसे भी जीने नहीं दिया जा रहा है, जिससे सरकारी तंत्र की मनमानी और असंवेदनशीलता उजागर होती है।1