रक्षाबंधन के अवसर पर लोमस ऋषि पहाड़ पर लगेगा भव्य मेला रजौली पूर्वी पंचायत में स्थित लोमस ऋषि पहाड़ पौराणिक होने के साथ-साथ आस्था का है महत्वपूर्ण केंद्र फोरलेन सड़क पर सिमरकोल से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है लोमस ऋषि पहाड़ रजौली। प्रफुल्ल कुमार सुमन भाई-बहन का त्यौहार रक्षाबंधन के पावन अवसर पर शुक्रवार को रजौली के सुप्रसिद्ध रजौली पूर्वी पंचायत के सरमसपुर गांव में स्थित लोमस ऋषि पहाड़ पर भव्य मेला लगेगा। मेले में बच्चों के लिए कई तरह के छोटे-छोटे झूले भी लगेंगे। आपको बता दें कि रजौली सप्तऋषियों की भूमि है। सप्तऋषियों की भूमि में एक है रामायण सर्किट से जुड़े लोमस ऋषि पहाड़। जो रजौली प्रखंड के रजौली पूर्वी पंचायत के सरमसपुर गांव में स्थित है। लोमस ऋषि पहाड़ पौराणिक होने के साथ-साथ यह लोगों की आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। यह पहाड़ लोमस ऋषि के अलावा याज्ञवल्क्य ऋषि के आश्रम के लिए भी प्रसिद्ध है। इस पहाड़ पर भगवान शिव की एक मंदिर भी स्थित है। भाई-बहन का त्यौहार रक्षाबंधन के अवसर पर सदियों से प्रत्येक वर्ष लोमस ऋषि पहाड़ पर भव्य मेला का आयोजन होता चला आ रहा है। इस भव्य मेले में दर्जनों प्रकार के खाने-पीने, श्रृंगार और पूजन सामग्री की अस्थाई दुकानें लगती है। रक्षाबंधन के अवसर पर लोमस ऋषि पहाड़ पर स्थित लोमस ऋषि बाबा, याज्ञवल्क्य ऋषि आश्रम एवं भगवान शिव की मंदिर है। जहां हजारों श्रद्धालुओं के द्वारा रक्षाबंधन के अवसर पर ध्वजा-पताका लगाकर उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। इस भव्य मेले में हजारों श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए एवं घूमने के लिए लोमस ऋषि पहाड़ पहुंचते हैं। भगवान शिव एवं याज्ञवल्क्य ऋषि आश्रम का दर्शन करने के लिए श्रद्धालु 125 सीढ़ियां चढ़कर पहुंचते हैं। 125 सीढ़ियां चढ़ने के बाद लोमस ऋषि बाबा का दर्शन के लिए श्रद्धालु पहाड़ की चोटी पर पहुंचकर लोमस ऋषि बाबा का पूजा-अर्चना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मान्यताएं हैं कि जो श्रद्धालु लोमस ऋषि बाबा का सच्चे मन से पूजा-अर्चना करते हैं उन सबकी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। पौराणिक, पुरातात्विक और ऐतिहासिक धरोहर के रूप में विख्यात रजौली का लोमस ऋषि पर्वत रामायण काल के सप्तऋषियों की साधना स्थली माना जाता है। कैसे पहुंचेंगे आप रजौली स्थित लोमस ऋषि पहाड़ फोरलेन सड़क पर सिमरकोल से 3 किलोमीटर की दूरी पर सरमसपुर गांव के पास स्थित यह क्षेत्र लोमस ऋषि के अलावा याज्ञवल्क्य ऋषि के आश्रम के लिए भी प्रसिद्ध रहा है। सप्तऋषि पहाड़ियों के बीच प्रकृति की गोद में बसे रजौली की धरती पर रजौली प्रखंड की रजौली पूर्वी पंचायत में स्थित लोमस ऋषि पहाड़ के पौराणिक होने के साथ-साथ यह लोगों के आस्था का केंद्र भी है।
रक्षाबंधन के अवसर पर लोमस ऋषि पहाड़ पर लगेगा भव्य मेला रजौली पूर्वी पंचायत में स्थित लोमस ऋषि पहाड़ पौराणिक होने के साथ-साथ आस्था का है महत्वपूर्ण केंद्र फोरलेन सड़क पर सिमरकोल से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है लोमस ऋषि पहाड़ रजौली। प्रफुल्ल कुमार सुमन भाई-बहन का त्यौहार रक्षाबंधन के पावन अवसर पर शुक्रवार को रजौली के सुप्रसिद्ध रजौली पूर्वी पंचायत के सरमसपुर गांव में स्थित लोमस ऋषि पहाड़ पर भव्य मेला लगेगा। मेले में बच्चों के लिए कई तरह के छोटे-छोटे झूले भी लगेंगे। आपको बता दें कि रजौली सप्तऋषियों की भूमि है। सप्तऋषियों की भूमि में एक है रामायण सर्किट से जुड़े लोमस ऋषि पहाड़। जो रजौली प्रखंड के रजौली पूर्वी पंचायत के सरमसपुर गांव में स्थित है। लोमस ऋषि पहाड़ पौराणिक होने के साथ-साथ यह लोगों की आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। यह पहाड़ लोमस ऋषि के अलावा याज्ञवल्क्य ऋषि के आश्रम के लिए भी प्रसिद्ध है। इस पहाड़ पर भगवान शिव की एक मंदिर भी स्थित है। भाई-बहन का त्यौहार रक्षाबंधन के अवसर पर सदियों से प्रत्येक वर्ष लोमस ऋषि पहाड़ पर भव्य मेला का आयोजन होता चला आ रहा है। इस भव्य मेले में दर्जनों प्रकार के खाने-पीने, श्रृंगार और पूजन सामग्री की अस्थाई दुकानें लगती है। रक्षाबंधन के अवसर पर लोमस ऋषि पहाड़ पर
स्थित लोमस ऋषि बाबा, याज्ञवल्क्य ऋषि आश्रम एवं भगवान शिव की मंदिर है। जहां हजारों श्रद्धालुओं के द्वारा रक्षाबंधन के अवसर पर ध्वजा-पताका लगाकर उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। इस भव्य मेले में हजारों श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए एवं घूमने के लिए लोमस ऋषि पहाड़ पहुंचते हैं। भगवान शिव एवं याज्ञवल्क्य ऋषि आश्रम का दर्शन करने के लिए श्रद्धालु 125 सीढ़ियां चढ़कर पहुंचते हैं। 125 सीढ़ियां चढ़ने के बाद लोमस ऋषि बाबा का दर्शन के लिए श्रद्धालु पहाड़ की चोटी पर पहुंचकर लोमस ऋषि बाबा का पूजा-अर्चना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मान्यताएं हैं कि जो श्रद्धालु लोमस ऋषि बाबा का सच्चे मन से पूजा-अर्चना करते हैं उन सबकी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। पौराणिक, पुरातात्विक और ऐतिहासिक धरोहर के रूप में विख्यात रजौली का लोमस ऋषि पर्वत रामायण काल के सप्तऋषियों की साधना स्थली माना जाता है। कैसे पहुंचेंगे आप रजौली स्थित लोमस ऋषि पहाड़ फोरलेन सड़क पर सिमरकोल से 3 किलोमीटर की दूरी पर सरमसपुर गांव के पास स्थित यह क्षेत्र लोमस ऋषि के अलावा याज्ञवल्क्य ऋषि के आश्रम के लिए भी प्रसिद्ध रहा है। सप्तऋषि पहाड़ियों के बीच प्रकृति की गोद में बसे रजौली की धरती पर रजौली प्रखंड की रजौली पूर्वी पंचायत में स्थित लोमस ऋषि पहाड़ के पौराणिक होने के साथ-साथ यह लोगों के आस्था का केंद्र भी है।
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