आज दिनांक 31.03.2026 को गन्ना कृषक स्नातकोत्तर महाविद्यालय पूरनपुर में आयोजित प्रथम अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन टेक्नोलॉजिकल सत्र में बोलते हुए प्रोफेसर विपिन नीरज ने कहा कि आज शहरीकरण के प्रचलन से वृक्ष कट रहे हैं। आवासीय व्यवस्था के लिए कॉलोनी का प्रचलन बढ़ रहा है। इसीलिए जंगलों का दोहन हो रहा है। पेड़ों से ऊर्जा मिलती है।हमें आज पर्यावरण की प्रति जागरूक रहने की जरूरत है।प्रकृति की पूजा हम कर रहे हैं लेकिन फिर भी हम प्रकृति का दोहन कर रहे हैं।उन्होंने परामर्श दिया कि जब हम प्रकृति के साथ कंसर्न करेंगे उसके नजदीक जाएंगे तभी हम सस्टेनेबल विकास कर सकते हैं । टेक्निकल सेशन के चेयरपर्सन प्रोफ़ेसर वीर बहादुर महतो ने कहा कि यदि हमें संयमित जीवन जीना है तो हमें प्रकृति के साथ भी संयमित होना पड़ेगा। हमें आने वाली पीढियों के लिए प्रकृति से संतुलन बनाना होगा। अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ के कुलपति प्रोफेसर ए डी एन बाजपेई ने ऑनलाइन जुड़ कर सब को अपना आशीष प्रदान किया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर सुधीर कुमार शर्मा महाविद्यालय के अस्तित्व को स्थापित कर रहे हैं। पर्यावरण की समस्या पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आज जलवायु, कृषि या सस्टेनेबल डेवलपमेंट इन सब चीजों को एक साथ लेकर चलने की आवश्यकता है। भारत की अपनी जीवन शैली है। भारतीय ज्ञान परम्परा को अपनाना होगा जिस का सारांश परोपकार है। टेक्निकल सेशन में बोलते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर सुधीर कुमार शर्मा ने महाविद्यालय के विषय में जानकारी देते हुए कहा कि वह महाविद्यालय को केवल डिग्री प्राप्त करने का केन्द्र ना बनाकर टेक्निकल शिक्षा, विभिन्न सेमिनारों के माध्यम से छात्रों के ज्ञान की वृद्धि, रोजगार मेलो का आयोजन, उन के कौशल विकास की वृद्धि ,उनको रोजगार देने वाला बनाने के योग्य बनना चाहते हैं। अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के मुख्य विषय *भारतीय अर्थव्यवस्था में पर्यावरण वैश्विक जलवायु परिवर्तन और कृषिगत सतत् विकास* शीर्षक पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरण सुरक्षा के लिए हमें पॉजिटिव काम करना होगा। रासायनिक खादों एवं केमिकल युक्त खादो से हम भारत माता को दूषित कर रहे हैं ।हमें मात्र उत्पादन की चिंता है हमें स्वास्थ्य की चिंता नहीं है। खाद्य सुरक्षा,गरीबी उन्मूलन आदि योजनाओं पर काम करना होगा। उन्होंने परामर्श दिया कि हमें समाज के आर्थिक रूप शोषित वर्ग के लिए काम करना होगा। अरुण कुमार जी विषय विशेषज्ञ गन्ना संस्थान लखनऊ ने ऑनलाइन जुड़ कर मार्गदर्शन किया। उन्होंने जैव विविधता एवं पारस्परिक तंत्र में संबंधन में जानकारी उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि जैव विविधता का मतलब हमारे पर्यावरण में पारस्परिक तंत्र में जो जीव जंतु एवं सूक्ष्म जीवाणु है उनका संरक्षण एवं संतुलन स्थापित करना है। संतुलन का सरल अर्थ है सबसे अधिक संख्या में सूक्ष्म जीवाणु, उससे कम संख्या में पेड़ पौधे और सबसे कम संख्या में मनुष्य होना चाहिए। परन्तु आज ये संतुलन बिगड़ रहा है । अपर गन्ना आयुक्त डॉक्टर वी बी सिंह ने ऑनलाइन ने जुड़ कर मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि गन्ना कृषक स्नातकोत्तर महाविद्यालय लगातार छात्र हित में आयोजन करा रहा है। उन्होंने गन्ना विभाग के सहयोग का पूरा आश्वासन दिया। छात्र समृद्ध हो, ऐसी उनकी अभिलाषा है।उन्होंने कहा कि रासायनिक खादों का प्रयोग कम करें । जैविक खेती करें क्योंकि जैविक खेती पर्यावरण हितैषी है। प्रोफेसर मनोज कुमार मिश्रा जी ने इथोपिया से ऑनलाइन जुड़ कर मार्गदर्शन किया। उन्होंने सनातन इकोनॉमिक्स फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट विषय पर विस्तार से चर्चा करी।उन्होंने वतर्मान वैश्विक विकास परिदृश्य (Present Global deveploment scenario) पर भी चर्चा करी।डॉक्टर सरिता द्विवेदी ने ग्रामीण और शहरी सभ्यता का संबंध में जानकारी देते आदि काल से वर्तमान समय तक की सभ्यता का विश्लेषण किया । उन्होंने कहा कि आज हम शहरी जीवन की ओर पलायन कर रहे हैं ग्रामीण संस्कृति विलुप्त हो रही हैं। उन्होंने संतुलित जीवन शैली अपनाने पर जोर दिया। डॉक्टर नरेन्द्र कुमार ने हेल्थ रिस्क एंड वेस्ट मैनेजमेंट पर जानकारी उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि वेस्ट मैनेजमेंट पर ध्यान देना आवश्यक है। क्योंकि इस का सीधा प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। हर प्रकार का वेस्ट चाहे वो इंडस्ट्रियल वेस्ट हो, या बायोगैस तो या घरेलू वेस्ट हो ___हर प्रकार का वेस्ट हमारे जीवन को प्रभावित करता है। वेस्ट के लिए लापरवाही बीमारियों को उत्पन्न करती है। प्रोफेसर अनुपम पांडेय ने ऑनलाइन जुड़ कर मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि कोरोना काल के बाद से बहुत परिवर्तन आया है । करोना के बाद से कुछ चुनौतियां सामने है कुछ अब समाधान निकल रहे हैं। टेक्निकल सेशंस समाप्त होने के पश्चात् द्वितीय सत्र में समापन समारोह सम्पन्न हुआ। समापन समारोह के अध्यक्ष प्रोफेसर बी आर कुकरेती , मुख्य अतिथि प्रोफ़ेसर सुमित्रा कुकरेती , विशिष्ट अतिथि प्रोफ़ेसर वीर बहादुर महतो एवं प्रोफेसर विनोद श्रीवास्तव ने मां सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित किया । अतिथियों को महाविद्यालय स्टॉफ द्वारा पटका उड़ाकर एवं स्मृति चिन्ह दे कर स्वागत किया गया। अतिथियों का स्वागत करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर सुधीर कुमार शर्मा ने महाविद्यालय स्थापना के उद्देश्य की जानकारी उपलब्ध कराई।साथ ही उन्होंने गन्ना कृषको को इस पवित्र अनुष्ठान के लिए कटौती एवं भूमि दान करने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। साथ ही उन्होंने युवा पीढ़ी से कहा कि उनको महाविद्यालय विकास के लिए काम करना है ।समापन समारोह की मुख्य अतिथि प्रोफ़ेसर सुमित्रा कुकरेती ने कहा पर्यावरण की समस्या से पूरा विश्व प्रभावित है। एनवायरमेंट अर्थात क्लाइमेट चेंज,ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव से विश्व जूझ रहा है। प्रत्येक वर्ष मौसम का पैटर्न बदल रहा है।क्लाइमेट चेंज, वायु प्रदूषण से जल संकट लगातार गहरा रहा है। ग्लेशियर पिघल रहे हैं। प्लास्टिक कचरा जो कि बायोडिग्रेडेबल नहीं है वो वातावर्ण को दूषित कर रहा हैं। उन्होंने कहा कि धरती हम सब की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम है ।लेकिन हमारी बढ़ती हुई इच्छा इसको दूषित कर रही है। उन्होंने परामर्श दिया कि प्रकृति से उतना ही लीजिए जितनी जरूरत है। उन्होंने अधिक से अधिक वृक्ष लगाने , नदियों को दूषित होने से बचाने और सुरक्षित रखने पर बल दिया।समापन समारोह के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर बी आर कुकरेती ने कहा कि जल जीवनदाता है । यह हमारी धरोहर है।इस का संरक्षण हमारा दायित्व है। उन्होंने अवगत कराया कि ग्लेशियर पिघल रहे हैं जो हानिकारक है। ग्लेशियर पिघलने से समुन्द्र का पानी का लेवल बढ़ेगा जिस से समुन्द्र के पास वाले देश और इलाके डूब जाएंगे। पानी की अधिकता भी नुकसानदेह है दूसरी ओर पानी की कमी भी हानिकारक है। उन्होंने कहा कि सरकार तो कम कर रही है ।हमें इकाई के रूप में इस पर काम करना होगा । हमें अपने समाज में, अपने परिवार में पर्यावरण के लिए पॉजिटिव थिंकिंग लेकर आनी होगी। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा हमें व्यक्तिगत स्तर पर करनी होगी।हमें संवेदनशीलता लानी होगी ।लोगों को समझना होगा।तब ही पर्यावरण सुरक्षित होगा। राष्ट्रगान के साथ गन्ना कृषक स्नातकोत्तर महाविद्यालय की प्रथम अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन सम्पन्न हुआ। गन्ना कृषक स्नातकोत्तर महाविद्यालय पूरनपुर में आयोजित प्रथम अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन टेक्नोलॉजिकल सत्र में बोलते हुए प्रोफेसर विपिन नीरज ने कहा कि आज शहरीकरण के प्रचलन से वृक्ष कट रहे हैं। आवासीय व्यवस्था के लिए कॉलोनी का प्रचलन बढ़ रहा है। इसीलिए जंगलों का दोहन हो रहा है। पेड़ों से ऊर्जा मिलती है।हमें आज पर्यावरण की प्रति जागरूक रहने की जरूरत है।प्रकृति की पूजा हम कर रहे हैं लेकिन फिर भी हम प्रकृति का दोहन कर रहे हैं।उन्होंने परामर्श दिया कि जब हम प्रकृति के साथ कंसर्न करेंगे उसके नजदीक जाएंगे तभी हम सस्टेनेबल विकास कर सकते हैं । टेक्निकल सेशन के चेयरपर्सन प्रोफ़ेसर वीर बहादुर महतो ने कहा कि यदि हमें संयमित जीवन जीना है तो हमें प्रकृति के साथ भी संयमित होना पड़ेगा। हमें आने वाली पीढियों के लिए प्रकृति से संतुलन बनाना होगा। अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ के कुलपति प्रोफेसर ए डी एन बाजपेई ने ऑनलाइन जुड़ कर सब को अपना आशीष प्रदान किया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर सुधीर कुमार शर्मा महाविद्यालय के अस्तित्व को स्थापित कर रहे हैं। पर्यावरण की समस्या पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आज जलवायु, कृषि या सस्टेनेबल डेवलपमेंट इन सब चीजों को एक साथ लेकर चलने की आवश्यकता है। भारत की अपनी जीवन शैली है। भारतीय ज्ञान परम्परा को अपनाना होगा जिस का सारांश परोपकार है। टेक्निकल सेशन में बोलते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर सुधीर कुमार शर्मा ने महाविद्यालय के विषय में जानकारी देते हुए कहा कि वह महाविद्यालय को केवल डिग्री प्राप्त करने का केन्द्र ना बनाकर टेक्निकल शिक्षा, विभिन्न सेमिनारों के माध्यम से छात्रों के ज्ञान की वृद्धि, रोजगार मेलो का आयोजन, उन के कौशल विकास की वृद्धि ,उनको रोजगार देने वाला बनाने के योग्य बनना चाहते हैं। अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के मुख्य विषय *भारतीय अर्थव्यवस्था में पर्यावरण वैश्विक जलवायु परिवर्तन और कृषिगत सतत् विकास* शीर्षक पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरण सुरक्षा के लिए हमें पॉजिटिव काम करना होगा। रासायनिक खादों एवं केमिकल युक्त खादो से हम भारत माता को दूषित कर रहे हैं ।हमें मात्र उत्पादन की चिंता है हमें स्वास्थ्य की चिंता नहीं है। खाद्य सुरक्षा,गरीबी उन्मूलन आदि योजनाओं पर काम करना होगा। उन्होंने परामर्श दिया कि हमें समाज के आर्थिक रूप शोषित वर्ग के लिए काम करना होगा। अरुण कुमार जी विषय विशेषज्ञ गन्ना संस्थान लखनऊ ने ऑनलाइन जुड़ कर मार्गदर्शन किया। उन्होंने जैव विविधता एवं पारस्परिक तंत्र में संबंधन में जानकारी उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि जैव विविधता का मतलब हमारे पर्यावरण में पारस्परिक तंत्र में जो जीव जंतु एवं सूक्ष्म जीवाणु है उनका संरक्षण एवं संतुलन स्थापित करना है। संतुलन का सरल अर्थ है सबसे अधिक संख्या में सूक्ष्म जीवाणु, उससे कम संख्या में पेड़ पौधे और सबसे कम संख्या में मनुष्य होना चाहिए। परन्तु आज ये संतुलन बिगड़ रहा है । अपर गन्ना आयुक्त डॉक्टर वी बी सिंह ने ऑनलाइन ने जुड़ कर मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि गन्ना कृषक स्नातकोत्तर महाविद्यालय लगातार छात्र हित में आयोजन करा रहा है। उन्होंने गन्ना विभाग के सहयोग का पूरा आश्वासन दिया। छात्र समृद्ध हो, ऐसी उनकी अभिलाषा है।उन्होंने कहा कि रासायनिक खादों का प्रयोग कम करें । जैविक खेती करें क्योंकि जैविक खेती पर्यावरण हितैषी है। प्रोफेसर मनोज कुमार मिश्रा जी ने इथोपिया से ऑनलाइन जुड़ कर मार्गदर्शन किया। उन्होंने सनातन इकोनॉमिक्स फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट विषय पर विस्तार से चर्चा करी।उन्होंने वतर्मान वैश्विक विकास परिदृश्य (Present Global deveploment scenario) पर भी चर्चा करी।डॉक्टर सरिता द्विवेदी ने ग्रामीण और शहरी सभ्यता का संबंध में जानकारी देते आदि काल से वर्तमान समय तक की सभ्यता का विश्लेषण किया । उन्होंने कहा कि आज हम शहरी जीवन की ओर पलायन कर रहे हैं ग्रामीण संस्कृति विलुप्त हो रही हैं। उन्होंने संतुलित जीवन शैली अपनाने पर जोर दिया। डॉक्टर नरेन्द्र कुमार ने हेल्थ रिस्क एंड वेस्ट मैनेजमेंट पर जानकारी उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि वेस्ट मैनेजमेंट पर ध्यान देना आवश्यक है। क्योंकि इस का सीधा प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। हर प्रकार का वेस्ट चाहे वो इंडस्ट्रियल वेस्ट हो, या बायोगैस तो या घरेलू वेस्ट हो ___हर प्रकार का वेस्ट हमारे जीवन को प्रभावित करता है। वेस्ट के लिए लापरवाही बीमारियों को उत्पन्न करती है। प्रोफेसर अनुपम पांडेय ने ऑनलाइन जुड़ कर मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि कोरोना काल के बाद से बहुत परिवर्तन आया है । करोना के बाद से कुछ चुनौतियां सामने है कुछ अब समाधान निकल रहे हैं। टेक्निकल सेशंस समाप्त होने के पश्चात् द्वितीय सत्र में समापन समारोह सम्पन्न हुआ। समापन समारोह के अध्यक्ष प्रोफेसर बी आर कुकरेती , मुख्य अतिथि प्रोफ़ेसर सुमित्रा कुकरेती , विशिष्ट अतिथि प्रोफ़ेसर वीर बहादुर महतो एवं प्रोफेसर विनोद श्रीवास्तव ने मां सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित किया । अतिथियों को महाविद्यालय स्टॉफ द्वारा पटका उड़ाकर एवं स्मृति चिन्ह दे कर स्वागत किया गया। अतिथियों का स्वागत करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर सुधीर कुमार शर्मा ने महाविद्यालय स्थापना के उद्देश्य की जानकारी उपलब्ध कराई।साथ ही उन्होंने गन्ना कृषको को इस पवित्र अनुष्ठान के लिए कटौती एवं भूमि दान करने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। साथ ही उन्होंने युवा पीढ़ी से कहा कि उनको महाविद्यालय विकास के लिए काम करना है ।समापन समारोह की मुख्य अतिथि प्रोफ़ेसर सुमित्रा कुकरेती ने कहा पर्यावरण की समस्या से पूरा विश्व प्रभावित है। एनवायरमेंट अर्थात क्लाइमेट चेंज,ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव से विश्व जूझ रहा है। प्रत्येक वर्ष मौसम का पैटर्न बदल रहा है।क्लाइमेट चेंज, वायु प्रदूषण से जल संकट लगातार गहरा रहा है। ग्लेशियर पिघल रहे हैं। प्लास्टिक कचरा जो कि बायोडिग्रेडेबल नहीं है वो वातावर्ण को दूषित कर रहा हैं। उन्होंने कहा कि धरती हम सब की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम है ।लेकिन हमारी बढ़ती हुई इच्छा इसको दूषित कर रही है। उन्होंने परामर्श दिया कि प्रकृति से उतना ही लीजिए जितनी जरूरत है। उन्होंने अधिक से अधिक वृक्ष लगाने , नदियों को दूषित होने से बचाने और सुरक्षित रखने पर बल दिया।समापन समारोह के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर बी आर कुकरेती ने कहा कि जल जीवनदाता है । यह हमारी धरोहर है।इस का संरक्षण हमारा दायित्व है। उन्होंने अवगत कराया कि ग्लेशियर पिघल रहे हैं जो हानिकारक है। ग्लेशियर पिघलने से समुन्द्र का पानी का लेवल बढ़ेगा जिस से समुन्द्र के पास वाले देश और इलाके डूब जाएंगे। पानी की अधिकता भी नुकसानदेह है दूसरी ओर पानी की कमी भी हानिकारक है। उन्होंने कहा कि सरकार तो कम कर रही है ।हमें इकाई के रूप में इस पर काम करना होगा । हमें अपने समाज में, अपने परिवार में पर्यावरण के लिए पॉजिटिव थिंकिंग लेकर आनी होगी। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा हमें व्यक्तिगत स्तर पर करनी होगी।हमें संवेदनशीलता लानी होगी ।लोगों को समझना होगा।तब ही पर्यावरण सुरक्षित होगा। राष्ट्रगान के साथ गन्ना कृषक स्नातकोत्तर महाविद्यालय की प्रथम अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन सम्पन्न हुआ।
आज दिनांक 31.03.2026 को गन्ना कृषक स्नातकोत्तर महाविद्यालय पूरनपुर में आयोजित प्रथम अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन टेक्नोलॉजिकल सत्र में बोलते हुए प्रोफेसर विपिन नीरज ने कहा कि आज शहरीकरण के प्रचलन से वृक्ष कट रहे हैं। आवासीय व्यवस्था के लिए कॉलोनी का प्रचलन बढ़ रहा है। इसीलिए जंगलों का दोहन हो रहा है। पेड़ों से ऊर्जा मिलती है।हमें आज पर्यावरण की प्रति जागरूक रहने की जरूरत है।प्रकृति की पूजा हम कर रहे हैं लेकिन फिर भी हम प्रकृति का दोहन कर रहे हैं।उन्होंने परामर्श दिया कि जब हम प्रकृति के साथ कंसर्न करेंगे उसके नजदीक जाएंगे तभी हम सस्टेनेबल विकास कर सकते हैं । टेक्निकल सेशन के चेयरपर्सन प्रोफ़ेसर वीर बहादुर महतो ने कहा कि यदि हमें संयमित जीवन जीना है तो हमें प्रकृति के साथ भी संयमित होना पड़ेगा। हमें आने वाली पीढियों के लिए प्रकृति से संतुलन बनाना होगा। अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ के कुलपति प्रोफेसर ए डी एन बाजपेई ने ऑनलाइन जुड़ कर सब को अपना आशीष प्रदान किया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर सुधीर कुमार शर्मा महाविद्यालय के अस्तित्व को स्थापित कर रहे हैं। पर्यावरण की समस्या पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आज जलवायु, कृषि या सस्टेनेबल डेवलपमेंट इन सब चीजों को एक साथ लेकर चलने की आवश्यकता है। भारत की अपनी जीवन शैली है। भारतीय ज्ञान परम्परा को अपनाना होगा जिस का सारांश परोपकार है। टेक्निकल सेशन में बोलते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर सुधीर कुमार शर्मा ने महाविद्यालय के विषय में जानकारी देते हुए कहा कि वह महाविद्यालय को केवल डिग्री प्राप्त करने का केन्द्र ना बनाकर टेक्निकल शिक्षा, विभिन्न सेमिनारों के माध्यम से छात्रों के ज्ञान की वृद्धि, रोजगार मेलो का आयोजन, उन के कौशल विकास की वृद्धि ,उनको रोजगार देने वाला बनाने के योग्य बनना चाहते हैं। अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के मुख्य विषय *भारतीय अर्थव्यवस्था में पर्यावरण वैश्विक जलवायु परिवर्तन और कृषिगत सतत् विकास* शीर्षक पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरण सुरक्षा के लिए हमें पॉजिटिव काम करना होगा। रासायनिक खादों एवं केमिकल युक्त खादो से हम भारत माता को दूषित कर रहे हैं ।हमें मात्र उत्पादन की चिंता है हमें स्वास्थ्य की चिंता नहीं है। खाद्य सुरक्षा,गरीबी उन्मूलन आदि योजनाओं पर काम करना होगा। उन्होंने परामर्श दिया कि हमें समाज के आर्थिक रूप शोषित वर्ग के लिए काम करना होगा। अरुण कुमार जी विषय विशेषज्ञ गन्ना संस्थान लखनऊ ने ऑनलाइन जुड़ कर मार्गदर्शन किया। उन्होंने जैव विविधता एवं पारस्परिक तंत्र में संबंधन में जानकारी उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि जैव विविधता का मतलब हमारे पर्यावरण में पारस्परिक तंत्र में जो जीव जंतु एवं सूक्ष्म जीवाणु है उनका संरक्षण एवं संतुलन स्थापित करना है। संतुलन का सरल अर्थ है सबसे अधिक संख्या में सूक्ष्म जीवाणु, उससे कम संख्या में पेड़ पौधे और सबसे कम संख्या में मनुष्य होना चाहिए। परन्तु आज ये संतुलन बिगड़ रहा है । अपर गन्ना आयुक्त डॉक्टर वी बी सिंह ने ऑनलाइन ने जुड़ कर मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि गन्ना कृषक स्नातकोत्तर महाविद्यालय लगातार छात्र हित में आयोजन करा रहा है। उन्होंने गन्ना विभाग के सहयोग का पूरा आश्वासन दिया। छात्र समृद्ध हो, ऐसी उनकी अभिलाषा है।उन्होंने कहा कि रासायनिक खादों का प्रयोग कम करें । जैविक खेती करें क्योंकि जैविक खेती पर्यावरण हितैषी है। प्रोफेसर मनोज कुमार मिश्रा जी ने इथोपिया से ऑनलाइन जुड़ कर मार्गदर्शन किया। उन्होंने सनातन इकोनॉमिक्स फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट विषय पर विस्तार से चर्चा करी।उन्होंने वतर्मान वैश्विक विकास परिदृश्य (Present Global deveploment scenario) पर भी चर्चा करी।डॉक्टर सरिता द्विवेदी ने ग्रामीण और शहरी सभ्यता का संबंध में जानकारी देते आदि काल से वर्तमान समय तक की सभ्यता का विश्लेषण किया । उन्होंने कहा कि आज हम शहरी जीवन की ओर पलायन कर रहे हैं ग्रामीण संस्कृति विलुप्त हो रही हैं। उन्होंने संतुलित जीवन शैली अपनाने पर जोर दिया। डॉक्टर नरेन्द्र कुमार ने हेल्थ रिस्क एंड वेस्ट मैनेजमेंट पर जानकारी उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि वेस्ट मैनेजमेंट पर ध्यान देना आवश्यक है। क्योंकि इस का सीधा प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। हर प्रकार का वेस्ट चाहे वो इंडस्ट्रियल वेस्ट हो, या बायोगैस तो या घरेलू वेस्ट हो ___हर प्रकार का वेस्ट हमारे जीवन को प्रभावित करता है। वेस्ट के लिए लापरवाही बीमारियों को उत्पन्न करती है। प्रोफेसर अनुपम पांडेय ने ऑनलाइन जुड़ कर मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि कोरोना काल के बाद से बहुत परिवर्तन आया है । करोना के बाद से कुछ चुनौतियां सामने है कुछ अब 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गहरा रहा है। ग्लेशियर पिघल रहे हैं। प्लास्टिक कचरा जो कि बायोडिग्रेडेबल नहीं है वो वातावर्ण को दूषित कर रहा हैं। उन्होंने कहा कि धरती हम सब की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम है ।लेकिन हमारी बढ़ती हुई इच्छा इसको दूषित कर रही है। उन्होंने परामर्श दिया कि प्रकृति से उतना ही लीजिए जितनी जरूरत है। उन्होंने अधिक से अधिक वृक्ष लगाने , नदियों को दूषित होने से बचाने और सुरक्षित रखने पर बल दिया।समापन समारोह के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर बी आर कुकरेती ने कहा कि जल जीवनदाता है । यह हमारी धरोहर है।इस का संरक्षण हमारा दायित्व है। उन्होंने अवगत कराया कि ग्लेशियर पिघल रहे हैं जो हानिकारक है। ग्लेशियर पिघलने से समुन्द्र का पानी का लेवल बढ़ेगा जिस से समुन्द्र के पास वाले देश और इलाके डूब जाएंगे। पानी की अधिकता भी नुकसानदेह है दूसरी ओर पानी की कमी भी हानिकारक है। उन्होंने कहा कि सरकार तो कम कर रही है ।हमें इकाई के रूप में इस पर काम करना होगा । हमें अपने समाज में, अपने परिवार में पर्यावरण के लिए पॉजिटिव थिंकिंग लेकर आनी होगी। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा हमें व्यक्तिगत स्तर पर करनी होगी।हमें संवेदनशीलता लानी होगी ।लोगों को समझना होगा।तब ही पर्यावरण सुरक्षित होगा। राष्ट्रगान के साथ गन्ना कृषक स्नातकोत्तर महाविद्यालय की प्रथम अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन सम्पन्न हुआ। गन्ना कृषक स्नातकोत्तर महाविद्यालय पूरनपुर में आयोजित प्रथम अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन टेक्नोलॉजिकल सत्र में बोलते हुए प्रोफेसर विपिन नीरज ने कहा कि आज शहरीकरण के प्रचलन से वृक्ष कट रहे हैं। आवासीय व्यवस्था के लिए कॉलोनी का प्रचलन बढ़ रहा है। इसीलिए जंगलों का दोहन हो रहा है। पेड़ों से ऊर्जा मिलती है।हमें आज पर्यावरण की प्रति जागरूक रहने की जरूरत है।प्रकृति की पूजा हम कर रहे हैं लेकिन फिर भी हम प्रकृति का दोहन कर रहे हैं।उन्होंने परामर्श दिया कि जब हम प्रकृति के साथ कंसर्न करेंगे उसके नजदीक जाएंगे तभी हम सस्टेनेबल विकास कर सकते हैं । टेक्निकल सेशन के चेयरपर्सन प्रोफ़ेसर वीर बहादुर महतो ने कहा कि यदि हमें संयमित जीवन जीना है तो हमें प्रकृति के साथ भी संयमित होना पड़ेगा। हमें आने वाली पीढियों के लिए प्रकृति से संतुलन बनाना होगा। अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ के कुलपति प्रोफेसर ए डी एन बाजपेई ने ऑनलाइन जुड़ कर सब को अपना आशीष प्रदान किया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर सुधीर कुमार शर्मा महाविद्यालय के अस्तित्व को स्थापित कर रहे हैं। पर्यावरण की समस्या पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आज जलवायु, कृषि या सस्टेनेबल डेवलपमेंट इन सब चीजों को एक साथ लेकर चलने की आवश्यकता है। भारत की अपनी जीवन शैली है। भारतीय ज्ञान परम्परा को अपनाना होगा जिस का सारांश परोपकार है। टेक्निकल सेशन में बोलते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर सुधीर कुमार शर्मा ने महाविद्यालय के विषय में जानकारी देते हुए कहा कि वह महाविद्यालय को केवल डिग्री प्राप्त करने का केन्द्र ना बनाकर टेक्निकल शिक्षा, विभिन्न सेमिनारों के माध्यम से छात्रों के ज्ञान की वृद्धि, रोजगार मेलो का आयोजन, उन के कौशल विकास की वृद्धि ,उनको रोजगार देने वाला बनाने के योग्य बनना चाहते हैं। अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के मुख्य विषय *भारतीय अर्थव्यवस्था में पर्यावरण वैश्विक जलवायु परिवर्तन और कृषिगत सतत् विकास* शीर्षक पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरण सुरक्षा के लिए हमें पॉजिटिव काम करना होगा। रासायनिक खादों एवं केमिकल युक्त खादो से हम भारत माता को दूषित कर रहे हैं ।हमें मात्र उत्पादन की चिंता है हमें स्वास्थ्य की चिंता नहीं है। खाद्य सुरक्षा,गरीबी उन्मूलन आदि योजनाओं पर काम करना होगा। उन्होंने परामर्श दिया कि हमें समाज के आर्थिक रूप शोषित वर्ग के लिए काम करना होगा। अरुण कुमार जी विषय विशेषज्ञ गन्ना संस्थान लखनऊ ने ऑनलाइन जुड़ कर मार्गदर्शन किया। उन्होंने जैव विविधता एवं पारस्परिक तंत्र में संबंधन में जानकारी उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि जैव विविधता का मतलब हमारे पर्यावरण में पारस्परिक तंत्र में जो जीव जंतु एवं सूक्ष्म जीवाणु है उनका संरक्षण एवं संतुलन स्थापित करना है। संतुलन का सरल अर्थ है सबसे अधिक संख्या में सूक्ष्म जीवाणु, उससे कम संख्या में पेड़ पौधे और सबसे कम संख्या में मनुष्य होना चाहिए। परन्तु आज ये संतुलन बिगड़ रहा है । अपर गन्ना आयुक्त डॉक्टर वी बी सिंह ने ऑनलाइन ने जुड़ कर मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि गन्ना कृषक स्नातकोत्तर महाविद्यालय लगातार छात्र हित में आयोजन करा रहा है। उन्होंने गन्ना विभाग के सहयोग का पूरा आश्वासन दिया। छात्र समृद्ध हो, ऐसी उनकी अभिलाषा है।उन्होंने कहा कि रासायनिक खादों का प्रयोग कम करें । जैविक खेती करें क्योंकि जैविक खेती पर्यावरण हितैषी है। प्रोफेसर मनोज कुमार मिश्रा जी ने इथोपिया से ऑनलाइन जुड़ कर मार्गदर्शन किया। उन्होंने सनातन इकोनॉमिक्स फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट विषय पर विस्तार से चर्चा करी।उन्होंने वतर्मान वैश्विक विकास परिदृश्य (Present Global deveploment scenario) पर भी चर्चा करी।डॉक्टर सरिता द्विवेदी ने ग्रामीण और शहरी सभ्यता का संबंध में जानकारी देते आदि काल से वर्तमान समय तक की सभ्यता का विश्लेषण किया । उन्होंने कहा कि आज हम शहरी जीवन की ओर पलायन कर रहे हैं ग्रामीण संस्कृति विलुप्त हो रही हैं। उन्होंने संतुलित जीवन शैली अपनाने पर जोर दिया। डॉक्टर नरेन्द्र कुमार ने हेल्थ रिस्क एंड वेस्ट मैनेजमेंट पर जानकारी उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि वेस्ट मैनेजमेंट पर ध्यान देना आवश्यक है। क्योंकि इस का सीधा प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। हर प्रकार का वेस्ट चाहे वो इंडस्ट्रियल वेस्ट हो, या बायोगैस तो या घरेलू वेस्ट हो ___हर प्रकार का वेस्ट हमारे जीवन को प्रभावित करता है। वेस्ट के लिए लापरवाही बीमारियों को उत्पन्न करती है। प्रोफेसर अनुपम पांडेय ने ऑनलाइन जुड़ कर मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि कोरोना काल के बाद से बहुत परिवर्तन आया है । करोना के बाद से कुछ चुनौतियां सामने है कुछ अब समाधान निकल रहे हैं। टेक्निकल सेशंस समाप्त होने के पश्चात् द्वितीय सत्र में समापन समारोह सम्पन्न हुआ। समापन समारोह के अध्यक्ष प्रोफेसर बी आर कुकरेती , मुख्य अतिथि प्रोफ़ेसर सुमित्रा कुकरेती , विशिष्ट अतिथि प्रोफ़ेसर वीर बहादुर महतो एवं प्रोफेसर विनोद श्रीवास्तव ने मां सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित किया । अतिथियों को महाविद्यालय स्टॉफ द्वारा पटका उड़ाकर एवं स्मृति चिन्ह दे कर स्वागत किया गया। अतिथियों का स्वागत करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर सुधीर कुमार शर्मा ने महाविद्यालय स्थापना के उद्देश्य की जानकारी उपलब्ध कराई।साथ ही उन्होंने गन्ना कृषको को इस पवित्र अनुष्ठान के लिए कटौती एवं भूमि दान करने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। साथ ही उन्होंने युवा पीढ़ी से कहा कि उनको महाविद्यालय विकास के लिए काम करना है ।समापन समारोह की मुख्य अतिथि प्रोफ़ेसर सुमित्रा कुकरेती ने कहा पर्यावरण की समस्या से पूरा विश्व प्रभावित है। एनवायरमेंट अर्थात क्लाइमेट चेंज,ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव से विश्व जूझ रहा है। प्रत्येक वर्ष मौसम का पैटर्न बदल रहा है।क्लाइमेट चेंज, वायु प्रदूषण से जल संकट लगातार गहरा रहा है। ग्लेशियर पिघल रहे हैं। प्लास्टिक कचरा जो कि बायोडिग्रेडेबल नहीं है वो वातावर्ण को दूषित कर रहा हैं। उन्होंने कहा कि धरती हम सब की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम है ।लेकिन हमारी बढ़ती हुई इच्छा इसको दूषित कर रही है। उन्होंने परामर्श दिया कि प्रकृति से उतना ही लीजिए जितनी जरूरत है। उन्होंने अधिक से अधिक वृक्ष लगाने , नदियों को दूषित होने से बचाने और सुरक्षित रखने पर बल दिया।समापन समारोह के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर बी आर कुकरेती ने कहा कि जल जीवनदाता है । यह हमारी धरोहर है।इस का संरक्षण हमारा दायित्व है। उन्होंने अवगत कराया कि ग्लेशियर पिघल रहे हैं जो हानिकारक है। ग्लेशियर पिघलने से समुन्द्र का पानी का लेवल बढ़ेगा जिस से समुन्द्र के पास वाले देश और इलाके डूब जाएंगे। पानी की अधिकता भी नुकसानदेह है दूसरी ओर पानी की कमी भी हानिकारक है। उन्होंने कहा कि सरकार तो कम कर रही है ।हमें इकाई के रूप में इस पर काम करना होगा । हमें अपने समाज में, अपने परिवार में पर्यावरण के लिए पॉजिटिव थिंकिंग लेकर आनी होगी। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा हमें व्यक्तिगत स्तर पर करनी होगी।हमें संवेदनशीलता लानी होगी ।लोगों को समझना होगा।तब ही पर्यावरण सुरक्षित होगा। राष्ट्रगान के साथ गन्ना कृषक स्नातकोत्तर महाविद्यालय की प्रथम अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन सम्पन्न हुआ।
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- CM योगी की मां पर आपत्तिजनक टिप्पणी, मौलाना अब्दुल्ला सलीम गिरफ्तार उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने सोमवार देर शाम बिहार के पूर्णिया जिले से मौलाना अब्दुल्ला सलीम को गिरफ्तार कर लिया. मूल रूप से अररिया के रहने वाले मौलाना ने एक धार्मिक सभा में गौकशी कानूनों पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मां और गौमाता के प्रति अभद्र टिप्पणी की थी.1
- *पीलीभीत शूटिंग प्रतियोगिता में एक ही परिवार का दबदबा, माता-पिता और बेटे ने जीते पदक* पीलीभीत: जनपद में आयोजित शूटिंग प्रतियोगिता में एक ही परिवार ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। PWD विभाग में तैनात जूनियर इंजीनियर पवन कुमार सिंह ने ऑफिसर्स कैटेगरी में तीसरा स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। वहीं उनकी पत्नी संगीता सिंह ने 12 बोर ट्रैप शूटिंग की महिला वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान प्राप्त किया। परिवार की इस उपलब्धि को और खास बनाते हुए उनके पुत्र अर्नव सिंह ने 12 बोर ट्रैप शूटिंग जूनियर कैटेगरी में प्रथम स्थान हासिल कर परिवार का नाम रोशन किया। एक ही परिवार के तीन सदस्यों द्वारा अलग-अलग वर्गों में पदक जीतना प्रतियोगिता का प्रमुख आकर्षण रहा। पवन कुमार सिंह ने बताया कि उनका पूरा परिवार आउटडोर खेलों में सक्रिय रहता है। उनका मानना है कि मोबाइल का कम इस्तेमाल और खेलों में नियमित भागीदारी ही उनकी सफलता का राज है।1
- Post by Journalist Amit Dixit1
- Post by यूपी समाचार1
- पीलीभीत बहेड़ी संसदीय क्षेत्र की जनता के लिए पांचो विधानसभा क्षेत्र बहेड़ी पीलीभीत पूरनपुर बरखेड़ा बीसलपुर में दर्जनों सड़कों की स्वीकृत कराकर धन भी जारी कराने का बड़ा कार्य पीलीभीत के जनप्रिय सांसद एवं भारत सरकार में केंद्रीय मंत्री आदरणीय श्री जितिन प्रसाद जी के द्वारा कराया गया है विकास की बड़ी सौगात देने के लिए हम सब आदरणीय श्री जितिन प्रसाद जी का आभार व्यक्त करते हैं4
- ग्राम पचपेडापुखा के प्राथमिक विधालय में बार्षिकोत्सव एव विदाई समारोह का आयोजन किया गया वही कक्षा 5 पास छात्र छात्राओं को विधालय से विदाई दी गई वही स्कूली छात्र छात्राओ ने सबसे पहले दीप प्रज्वलित कर माता सरस्वती की वंदना की वही प्राथमिक विधालय जनपद पीलीभीत के ग्राम पचपेडापुखा में कक्षा 5पास उत्तीर्ण छात्र छात्राओं का विदाई समारोह का आयोजन किया गया इस शुभ अबसर पर ग्राम प्रधान पूरन लाल. एस एम सी अध्यक्ष मुकेश कुमार और विधालय के प्रधानाध्यापक रतनलाल. सहायक. अध्यापक जय प्रकाश वर्मा. अध्यापक दिनेश कुमार. राधेश्याम और सेवा राम आंगनबाड़ी कार्यकत्री गीता देवी . आंगनवाड़ी सीमा देवी . और हेमवती एव अभिभावको मे सरस्वती देवी और सभी ग्राम वासी आदि मौजूद रहे वही कक्षा 5पास उत्तीर्ण छात्र छात्राओं. जिसमे अर्चना. हिमाशी. प्रिया. सतेंद्रकुमार. योगेंद्र पाल. पवन. अंकित आदि छात्र छात्रऐ उपस्थित रहे वही छोटे छोटे स्कूली बच्चों ने सस्कृति प्रोग्राम में भी भाग लिया वही ग्राम प्रधान पूरनलाल और प्रधानाध्यापक रतनलाल ने छात्र छात्राओं को पुरस्कार दे कर समानित किया और पाँच पास छात्र छात्राओं को विधालय से विदाई दी और उज्जवल भविष्य की कामना की पढ़ी-लिखी बिटिया घर की रोशनी1
- पीलीभीत /नई दिल्ली: चुनावी दौर में राजनीतिक दलों द्वारा किए जाने वाले लोकलुभावन वादों और 'मुफ्त की रेवड़ी' संस्कृति पर अमृतलाल जी ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि चुनाव से ठीक पहले सत्ताधारी दलों द्वारा किए जाने वाले अनगिनत वादे न केवल चुनाव की निष्पक्षता को भंग करते हैं, बल्कि विपक्षी दलों के लिए समान अवसर (Level Playing Field) को भी समाप्त कर देते हैं। विकास कार्यों पर पड़ रहा है बुरा असर अमृतलाल जी ने कर्नाटक, हिमाचल, दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन मुफ्त की घोषणाओं के कारण जीतने के बाद सरकारों के लिए प्रशासन चलाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि स्थिति इतनी गंभीर है कि राज्यों के पास विकास कार्यों के लिए बजट नहीं बचा है और कर्मचारियों को वेतन देने तक में परेशानी आ रही है। सुप्रीम कोर्ट से तत्काल रोक की मांग उन्होंने माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) से अपील की है कि: चुनाव से पूर्व राजनीतिक दलों द्वारा की जाने वाली लोकलुभावन घोषणाओं पर तत्काल संज्ञान लिया जाए। निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए ऐसी प्रथाओं पर कानूनी रोक लगाई जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि चुनावी वादों का बोझ भविष्य में राज्य की अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे को न बिगाड़े। "चाहे पक्ष हो या विपक्ष, किसी को इस बात की चिंता नहीं है कि इन वादों का राज्य की वित्तीय स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ेगा। अब समय आ गया है कि सुप्रीम कोर्ट इस प्रथा को बंद करने के लिए कड़े कदम उठाए।" — अमृतलाल1