अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) ने राज्य कर्मचारियों की लंबित मांगों और उनके हितों की सुरक्षा के लिए एक प्रदेशव्यापी 'कर्मचारी जागृति यात्रा' की घोषणा की है। इस यात्रा का शुभारंभ जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर में पूजा-अर्चना और आशीर्वाद के साथ किया गया। महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ ने यात्रा के पीछे सरकार की कथित कर्मचारी विरोधी नीतियों, लंबित 25 सूत्री मांगों की अनदेखी और संवादहीनता को मुख्य कारण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इसके साथ ही, राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के निजीकरण की आशंकाओं को लेकर भी कर्मचारियों में व्यापक नाराजगी बढ़ रही है। राठौड़ ने बताया कि 8 जून से शुरू हुई यह यात्रा प्रदेश के सभी संभागों और जिलों में पहुंचेगी, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों को उनके अधिकारों, लंबित मांगों और संगठन की आगामी रणनीति से अवगत कराना है। महासंघ की प्रमुख मांगों में RGHS के निजीकरण का विरोध, समर्पित अवकाश का नगद भुगतान, 8, 16, 24 और 32 वर्ष पर चयनित वेतनमान, मंत्रालयिक कर्मचारियों को द्वितीय पदोन्नति पर ग्रेड पे 4200 प्रदान करना, संविदा व ठेका कर्मियों का नियमितीकरण, वेतन विसंगतियों का समाधान, और लंबित पदोन्नतियों के लिए अनुभव में दो वर्ष की अतिरिक्त छूट देना शामिल है। यात्रा के शुभारंभ पर महासंघ के कई प्रदेश पदाधिकारी और कर्मचारी प्रतिनिधि उपस्थित रहे। महासंघ ने सरकार से अपील की है कि वह कर्मचारियों की इन लंबित मांगों पर उच्चस्तरीय वार्ता कर शीघ्र समाधान निकाले।
अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) ने राज्य कर्मचारियों की लंबित मांगों और उनके हितों की सुरक्षा के लिए एक प्रदेशव्यापी 'कर्मचारी जागृति यात्रा' की घोषणा की है। इस यात्रा का शुभारंभ जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर में पूजा-अर्चना और आशीर्वाद के साथ किया गया। महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ ने यात्रा के पीछे सरकार की कथित कर्मचारी विरोधी नीतियों, लंबित 25 सूत्री मांगों की अनदेखी और संवादहीनता को मुख्य कारण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इसके साथ ही, राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के निजीकरण की आशंकाओं को लेकर भी कर्मचारियों में व्यापक नाराजगी बढ़ रही है। राठौड़ ने बताया कि 8 जून से शुरू हुई यह यात्रा प्रदेश के सभी संभागों और जिलों में पहुंचेगी, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों को उनके अधिकारों, लंबित मांगों और संगठन की आगामी रणनीति से अवगत कराना है। महासंघ की प्रमुख मांगों में RGHS के निजीकरण का विरोध, समर्पित अवकाश का नगद भुगतान, 8, 16, 24 और 32 वर्ष पर चयनित वेतनमान, मंत्रालयिक कर्मचारियों को द्वितीय पदोन्नति पर ग्रेड पे 4200 प्रदान करना, संविदा व ठेका कर्मियों का नियमितीकरण, वेतन विसंगतियों का समाधान, और लंबित पदोन्नतियों के लिए अनुभव में दो वर्ष की अतिरिक्त छूट देना शामिल है। यात्रा के शुभारंभ पर महासंघ के कई प्रदेश पदाधिकारी और कर्मचारी प्रतिनिधि उपस्थित रहे। महासंघ ने सरकार से अपील की है कि वह कर्मचारियों की इन लंबित मांगों पर उच्चस्तरीय वार्ता कर शीघ्र समाधान निकाले।
- राजधानी जयपुर में सोमवार देर रात पत्रिका चौराहे के पास एक तेज रफ्तार थार की टक्कर से 25 वर्षीय फूड डिलीवरी बॉय राकेश की मौत हो गई। राकेश हाल ही में अपने परिवार के साथ जयपुर आया था और फूड डिलीवरी का काम करके जीवनयापन कर रहा था। पुलिस के अनुसार, हादसे में शामिल थार में चार युवक सवार थे, जिनमें से एक एमबीबीएस छात्र बताया जा रहा है। टक्कर इतनी भीषण थी कि राकेश ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि थार का सिर्फ अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ। मृतक अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गया है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि घटनास्थल के पास अस्पताल होने के बावजूद घायल राकेश को वहां नहीं ले जाया गया। वहीं, कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि वाहन में शराब की बोतलें और केन मौजूद थीं, जिसकी जांच पुलिस ने शुरू कर दी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर थार को जब्त कर लिया है और वाहन में सवार लोगों से पूछताछ की जा रही है। इस हादसे ने राजधानी में ओवरस्पीडिंग और लापरवाह ड्राइविंग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दुर्घटनाओं का कारण कोई विशेष वाहन नहीं, बल्कि तेज रफ्तार, यातायात नियमों की अनदेखी और गैर-जिम्मेदाराना ड्राइविंग है, जिसके लिए सख्त कार्रवाई और जागरूकता दोनों की आवश्यकता है। हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर सड़कों पर रफ्तार का यह आतंक कब थमेगा और आम लोगों की जान की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।1
- अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) ने राज्य कर्मचारियों की लंबित मांगों और उनके हितों की सुरक्षा के लिए एक प्रदेशव्यापी 'कर्मचारी जागृति यात्रा' की घोषणा की है। इस यात्रा का शुभारंभ जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर में पूजा-अर्चना और आशीर्वाद के साथ किया गया। महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ ने यात्रा के पीछे सरकार की कथित कर्मचारी विरोधी नीतियों, लंबित 25 सूत्री मांगों की अनदेखी और संवादहीनता को मुख्य कारण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इसके साथ ही, राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के निजीकरण की आशंकाओं को लेकर भी कर्मचारियों में व्यापक नाराजगी बढ़ रही है। राठौड़ ने बताया कि 8 जून से शुरू हुई यह यात्रा प्रदेश के सभी संभागों और जिलों में पहुंचेगी, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों को उनके अधिकारों, लंबित मांगों और संगठन की आगामी रणनीति से अवगत कराना है। महासंघ की प्रमुख मांगों में RGHS के निजीकरण का विरोध, समर्पित अवकाश का नगद भुगतान, 8, 16, 24 और 32 वर्ष पर चयनित वेतनमान, मंत्रालयिक कर्मचारियों को द्वितीय पदोन्नति पर ग्रेड पे 4200 प्रदान करना, संविदा व ठेका कर्मियों का नियमितीकरण, वेतन विसंगतियों का समाधान, और लंबित पदोन्नतियों के लिए अनुभव में दो वर्ष की अतिरिक्त छूट देना शामिल है। यात्रा के शुभारंभ पर महासंघ के कई प्रदेश पदाधिकारी और कर्मचारी प्रतिनिधि उपस्थित रहे। महासंघ ने सरकार से अपील की है कि वह कर्मचारियों की इन लंबित मांगों पर उच्चस्तरीय वार्ता कर शीघ्र समाधान निकाले।1
- 6 जून से 11 जून तक के लिए मौसम को लेकर एक बड़ी चेतावनी जारी की गई है। इस अवधि के दौरान सभी को विशेष रूप से सावधान रहने और सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।1
- टैक्सी चालकों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं, एक ओर जहाँ उन पर गाड़ी की किस्तें, इंश्योरेंस, परमिट, फिटनेस, डीजल-पेट्रोल जैसे बढ़ते खर्चों का बोझ है, वहीं दूसरी ओर मामूली गलतियों पर ₹5000 के भारी चालानों से उनकी परेशानियाँ और बढ़ गई हैं। चालकों का कहना है कि न तो सरकार और न ही बड़ी कंपनियाँ उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुन रही हैं। दिन-रात मेहनत करके अपने परिवार का पालन-पोषण करने वाले ये टैक्सी चालक आज गहरे आर्थिक दबाव में हैं। आरटीओ प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई ने उनकी परेशानियों को और भी बढ़ा दिया है, जिससे उनकी कमाई लगातार घट रही है और खर्चे बढ़ते जा रहे हैं। इस गंभीर स्थिति में, टैक्सी ड्राइवर यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर वे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए कहाँ जाएँ। वे संबंधित विभागों और सरकार से अपनी मुश्किलों पर ध्यान देने की अपील कर रहे हैं, क्योंकि टैक्सी चालक केवल ड्राइवर नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की रोजी-रोटी का सहारा हैं, और उनकी समस्याओं का समाधान उतना ही महत्वपूर्ण है।1
- मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल स्थित आईसीयू में शॉर्ट सर्किट के कारण अचानक भीषण आग लग गई। इस भीषण हादसे में झुलसने और दम घुटने से 10 लोगों की मौत होने की खबर है, हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी तक 5 मौतों की ही पुष्टि की गई है। इसके अतिरिक्त, 15 से अधिक लोग गंभीर रूप से जख्मी बताए जा रहे हैं। घटना के तुरंत बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मरीजों को आपात स्थिति में दूसरे अस्पतालों में स्थानांतरित करना पड़ा ताकि उनकी जान बचाई जा सके। इस दर्दनाक मुजफ्फरपुर आईसीयू अग्निकांड के बाद 'जिम्मेवार कौन?' यह सवाल उठ रहा है, और पूछा जा रहा है कि क्या इसके लिए 'वो 10000' जिम्मेदार हैं या सरकार।1
- राजस्थान में सड़कों की खराब हालत को लेकर एक मंत्रीजी ने अजीबोगरीब बयान दिया है। उनके अनुसार, राज्य में खराब सड़कों की समस्या का समाधान 'अंतरराष्ट्रीय स्तर' पर किया जाएगा। मंत्रीजी ने इसके पीछे तर्क दिया है कि पूरे राजस्थान में सड़कों से संबंधित कार्य 'अंतरराष्ट्रीय समस्या' के कारण लंबित पड़े हैं। इस बयान पर आश्चर्य और हैरानी व्यक्त की गई है।1
- जयपुर के रामगंज क्षेत्र में चीता वालों का मोहल्ला में निर्माण के दौरान एक ओर झुकी हुई छह मंजिला इमारत को नगर निगम प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। इमारत के गिरने के साथ ही एक जोरदार धमाका हुआ, जिससे आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया। यह इमारत चौकड़ी रामचंद्रजी क्षेत्र के जगन्नाथ शाह के रास्ते में स्थित थी और निर्माण कार्य के दौरान इसके कुछ पिलर क्षतिग्रस्त हो गए थे। इसी के परिणामस्वरूप, 9 मई को पूरी इमारत एक तरफ झुक गई थी। इसके बाद, निगम की टीम ने बिल्डिंग को खाली करवाया था, और विशेषज्ञों की जांच में भवन को असुरक्षित पाए जाने के बाद इसे गिराने का निर्णय लिया गया। बिल्डिंग गिराने से पहले, प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे, जिसमें बिल्डिंग के आसपास के रास्तों को बंद करना और बैरिकेडिंग कर लोगों की आवाजाही रोकना शामिल था। आसपास के 10 से 15 मकानों को खाली कराकर वहां रहने वाले लोगों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया गया था और लाइट भी बंद कर दी गई थी। इस दौरान रामगंज थाना पुलिस बल तैनात रहा। नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि बिल्डिंग गिराने की यह प्रक्रिया पूरी सावधानी और तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी में की गई, जिसमें आसपास की इमारतों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया।1
- संसद में राहुल गांधी को बोलने से मना कर दिया गया है। इस घटना को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह कार्रवाई सही थी।1