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हजारीबाग में यातायात पुलिस ने एक विशेष अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान, बिना हेलमेट वाहन चलाने वाले चालकों को चेतावनी दी गई।
झारखण्ड न्यूज हजारीबाग
हजारीबाग में यातायात पुलिस ने एक विशेष अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान, बिना हेलमेट वाहन चलाने वाले चालकों को चेतावनी दी गई।
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- पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार वृद्धि के विरोध में हजारीबाग में जिला कांग्रेस कमेटी ने स्थानीय पेट्रोल पंपों के पास एक हस्ताक्षर अभियान चलाया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व करते हुए पूर्व मंत्री सह जिला अध्यक्ष जय प्रकाश भाई पटेल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पेट्रोल-डीजल की महंगाई से आम जनता त्रस्त है, जबकि केंद्र की भाजपा सरकार मस्त है। पटेल ने बताया कि पिछले 12 दिनों के भीतर पेट्रोल-डीजल के मूल्यों में चौथी बार भारी वृद्धि की गई है। 25 मई से लागू हुई नई दरों के तहत देश भर में पेट्रोल ₹2.61 और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा हो गया है, जिसका असर झारखंड में भी देखा जा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार पर महंगाई के मामले में हद पार करने और किश्तों में मूल्य बढ़ाकर जनता की जेब पर डाका डालने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी दोहराया कि कांग्रेस जनता के हक की इस लड़ाई में हमेशा उनके साथ थी, साथ है और सदा साथ रहेगी। इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष भीम कुमार, प्रदेश कॉर्डिनेटर बिनोद कुशवाह, प्रदेश सचिव रेणू कुशवाहा, प्रदेश संयुक्त सचिव डॉ. प्रकाश कुमार, पूर्व अध्यक्ष विजय कुमार यादव, पूर्व प्रदेश सचिव बिनोद सिंह, शशि मोहन सिंह, जिला कांग्रेस के मीडिया अध्यक्ष निसार खान, वरिष्ठ कांग्रेसी वीरेंद्र कुमार सिंह, राजू चौरसिया, कैलाश पति देव, मकसूद आलम, कजरू साव, रघु जायसवाल, लाल बिहारी सिंह, दिलीप कुमार रवि, परवेज अहमद, गुड्डू सिंह, बाबर अंसारी, शिव नंदन साहू, कोमल कुमारी, दिलदार अंसारी, तारिक रजा, सलीम रजा, विजय कुमार सिंह, सद्रुल होदा, अनिल कुमार भुइयां, बाबू खान, सैयद अशरफ अली, गुरु प्रसाद साव, मुस्ताक अंसारी, अजय गुप्ता, ज्ञानी प्रसाद मेहता, मोहम्मद रब्बानी, रिंकू कुमार, मजहरुल इस्लाम, जुबैर खान, अधिवक्ता मोहम्मद वारिस, इजहार हुसैन, शब्बीर अहमद सहित सैकड़ों कांग्रेसी कार्यकर्ता उपस्थित थे।1
- मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने गए एक भाई और बहन के साथ मुखिया के परिवार द्वारा बदसलुकी की गई है।1
- झारखंड के हजारीबाग में मुखिया पर गंभीर आरोप लगने से हड़कंप मच गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर 'पंचायत राज' बनाम 'दबंग राज' को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यह पूरा विवाद एक मृत्यु प्रमाण पत्र को लेकर शुरू हुआ है। आरोपों के अनुसार, मुखिया पर हिंसा करने का आरोप है, जिसके कारण पीड़ित को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है।1
- हजारीबाग में यातायात पुलिस ने एक विशेष अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान, बिना हेलमेट वाहन चलाने वाले चालकों को चेतावनी दी गई।1
- ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (AIDSO) की झारखंड राज्य कमेटी के नेतृत्व में राज्य के विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों कॉलेज और यूनिवर्सिटी के छात्र प्रतिनिधियों ने रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से कर्तव्य भवन तक एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा। यह उग्र प्रदर्शन राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत विश्वविद्यालयों में लागू किए जा रहे 'क्लस्टर सिस्टम' और पुनर्गठन के नाम पर शिक्षकों के पदों को सरेंडर करने के तानाशाही फैसले के खिलाफ आयोजित किया गया था। इस प्रदर्शन के दौरान राज्य अध्यक्ष समर महतो ने सरकार की इस नीति से छात्रों, विशेषकर ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्र-छात्राओं के भविष्य पर पड़ने वाले विनाशकारी प्रभावों को प्रमुखता से रेखांकित किया। प्रदर्शनकारियों ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि क्लस्टर सिस्टम से कॉलेजों को चुनिंदा विषयों या संकायों तक सीमित कर दिया जाएगा, जिससे पारंपरिक विषयों की पढ़ाई संकुचित होगी और छात्र अपनी रुचि के विषय पढ़ने से वंचित रह जाएंगे। इस नीति का एक गंभीर पहलू छात्राओं की सुरक्षा पर संकट है, क्योंकि उन्हें दूर के कॉलेजों में भटकना पड़ेगा, जिससे सुरक्षा चिंताओं के कारण ड्रॉप-आउट दर बढ़ने की आशंका है। छात्रों को अपनी डिग्री पूरी करने के लिए एक ही दिन में कई किलोमीटर दूर स्थित अलग-अलग कॉलेजों के चक्कर लगाने पड़ेंगे, जिससे समय, पैसा और मानसिक-शारीरिक मशक्कत बढ़ेगी। इससे ग्रामीण, आदिवासी और आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों के लिए सरकारी शिक्षा की पहुंच मुश्किल हो जाएगी, जिसका सीधा फायदा निजी कॉलेजों को मिलेगा। संगठन ने यह भी बताया कि पुनर्गठन के नाम पर शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पदों को सरेंडर करने का सरकारी प्रस्ताव छात्र-विरोधी है, क्योंकि शिक्षकों के अभाव में शिक्षा की गुणवत्ता पूरी तरह चरमरा जाएगी। AIDSO की मुख्य मांगों में विश्वविद्यालयों में थोपे जा रहे अव्यवहारिक क्लस्टर सिस्टम को तुरंत वापस लेना, शिक्षकों और कर्मचारियों के पदों को सरेंडर करने की प्रक्रिया पर रोक लगाकर खाली पदों पर स्थायी बहाली करना, और शिक्षा के व्यवसायीकरण व निजीकरण को बढ़ावा देने वाली नीतियों को बंद कर सरकारी शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना शामिल है। समारोह के अंत में छात्र प्रतिनिधियों ने साफ चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस छात्र-विरोधी नीति को तुरंत वापस नहीं लिया और उनकी जायज मांगों को अनसुना किया, तो आने वाले दिनों में पूरे झारखंड के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में तालाबंदी की जाएगी और इस आंदोलन को एक उग्र जन-आंदोलन का रूप दिया जाएगा। संगठन की उपाध्यक्ष रिंकी बांसरियार ने भी निर्णय वापस न लेने पर सड़कों पर जोरदार आंदोलन और विश्वविद्यालय में तालाबंदी की बात दोहराई, साथ ही राजपाल भवन में हजारों छात्रों के विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी।3
- रामगढ़ में छावनी परिषद द्वारा फुटपाथ दुकानों पर बुलडोजर से बड़ी कार्रवाई की गई है। इस अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत बुलडोजर चलाए जाने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।1
- हजारीबाग यूथ विंग ने भीषण गर्मी के दौरान तपती धूप में लोगों को पानी पिलाकर मानव सेवा का एक सराहनीय कार्य किया है। उनके इस प्रयास की पूरे क्षेत्र में खूब चर्चा हो रही है, जिससे यह घटना लोगों के बीच बातचीत का मुख्य विषय बनी हुई है।1
- रांची के बिरसा मुंडा स्टेडियम में आयोजित 29वीं नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन चैंपियनशिप 2026 में देशभर के खिलाड़ियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान समाजसेवी, शांति समिति सदस्य और झारखंड आंदोलनकारी फहीम उद्दीन अहमद उर्फ संजर मलिक भी कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने खिलाड़ियों से मुलाकात कर उन्हें गुलदस्ता भेंट किया और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। संजर मलिक ने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि देश का तिरंगा दुनिया में ऊंचा करने के लिए युवाओं को लगातार मेहनत करनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गांव और गरीब परिवारों में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं, लेकिन उन्हें सही मंच और अवसर नहीं मिल पाते। संजर मलिक ने ऐसे खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से अपील की कि खेल प्रतिभाओं को केवल प्रभावशाली लोगों तक ही सीमित न रखा जाए, बल्कि ईमानदारी से मेहनत करने वाले खिलाड़ियों को भी आगे आने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने खेल प्रेमियों और आम लोगों से भी आग्रह किया कि वे नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को समर्थन दें और उनकी आवाज बनें, ताकि आने वाले समय में झारखंड की धरती से निकले खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकें।1