*अनूपशहर: मस्तराम गंगाघाट पर बनारस शैली में भव्य महा-आरती शुरू* *अनूपशहर: मस्तराम गंगाघाट पर बनारस शैली में भव्य महा-आरती शुरू* *संवाददाता योगेंद्र प्रजापति* अनूपशहर (बुलंदशहर)। गुरूपूर्णिमा के अवसर पर मस्तराम गंगाघाट पर शनिवार को बनारस की तर्ज पर भव्य महा-आरती का आयोजन किया गया। आयोजन का उद्देश्य गंगाघाट पर आरती की परंपरा को व्यापक रूप देना और जनमानस में श्रद्धा-भक्ति का संचार करना बताया गया। आचार्य संदीप मिश्रा ने बताया कि अनूपशहर गंगाघाट पर पिछले ग्यारह वर्षों से केवल छोटी आरती होती रही। इस बार स्थानीय समाज और धार्मिक समूहों की विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया गया कि बनारस की परम्परा के अनुरूप भव्य महा-आरती प्रारम्भ की जाए। उन्होंने कहा, "विचार यही है कि लोग आरती के दर्शन करें और समझें कि यह केवल नदी नहीं, बल्कि साक्षात् मां भगवती हैं — कलियुग की प्रत्यक्ष देवी।" आचार्य मिश्रा ने आगे कहा कि महा-आरती का उद्देश्य श्रद्धा और भक्ति के साथ मां गंगा के प्रति समर्पण दिखाना है। "हम बड़ी श्रद्धा और विश्वास से इनकी आरती करते हैं ताकि उनकी कृपा बनी रहे; जैसे हमारा गंगाजल निर्मल है, वैसे ही हमारा मन भी निर्मल रहे," उन्होंने कहा। उन्होंने सभी क्षेत्रवासियों से आग्रह किया कि वे इस दिव्य घाट पर आकर आरती का लोकार्पण कर भगवती के दर्शन अवश्य करें, ताकि इससे दूर-दूर तक प्रचार-प्रसार हो और लोगों को धार्मिक सुख की अनुभूति मिले। आरती के दौरान घाट पर श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी भीड़ रही। स्थानीय भक्तों ने दीप-युक्त थाल, भजन और आरती के गीतों के साथ कार्यक्रम में भाग लिया। आयोजन समिति ने कहा कि महा-आरती अब नियमित रूप से आयोजित की जाएगी और इसका मकसद गंगाघाट को धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करना है। घाट पर व्यवस्था-परिवहन, सुरक्षा और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया। आयोजकों ने कहा कि भविष्य में और बेहतर आयोजन के लिए स्थानीय प्रशासन तथा सामाजिक संगठनों के साथ समन्वय बढ़ाया जाएगा। *मुख्य बिंदु* *अनूपशहर मस्तराम गंगाघाट पर गुरूपूर्णिमा पर बनारस शैली में महा-आरती शुरू।* *आचार्य संदीप मिश्रा ने बताया कि पिछले 11 वर्षों से छोटी आरती होती थी; अब भव्य आरती का प्रारम्भ।* *आयोजन का उद्देश्य मां गंगा को साक्षात देवी रूप में पूजना और श्रद्धा-भक्ति का प्रसार करना।* *श्रद्धालुओं ने मौजूदगी दर्ज कराई; सुरक्षा व स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया।* *महा-आरती अब नियमित रूप से आयोजित करने का प्रस्ताव।*
*अनूपशहर: मस्तराम गंगाघाट पर बनारस शैली में भव्य महा-आरती शुरू* *अनूपशहर: मस्तराम गंगाघाट पर बनारस शैली में भव्य महा-आरती शुरू* *संवाददाता योगेंद्र प्रजापति* अनूपशहर (बुलंदशहर)। गुरूपूर्णिमा के अवसर पर मस्तराम गंगाघाट पर शनिवार को बनारस की तर्ज पर भव्य महा-आरती का आयोजन किया गया। आयोजन का उद्देश्य गंगाघाट पर आरती की परंपरा को व्यापक रूप देना और जनमानस में श्रद्धा-भक्ति का संचार करना बताया गया। आचार्य संदीप मिश्रा ने बताया कि अनूपशहर गंगाघाट पर पिछले ग्यारह वर्षों से केवल छोटी आरती होती रही। इस बार स्थानीय समाज और धार्मिक समूहों की विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया गया कि बनारस की परम्परा के अनुरूप भव्य महा-आरती प्रारम्भ की जाए। उन्होंने कहा, "विचार यही है कि लोग आरती के दर्शन करें और समझें कि यह केवल नदी नहीं, बल्कि साक्षात् मां भगवती हैं — कलियुग की प्रत्यक्ष देवी।" आचार्य मिश्रा ने आगे कहा कि महा-आरती का उद्देश्य श्रद्धा और भक्ति के साथ मां गंगा के प्रति समर्पण दिखाना है। "हम बड़ी श्रद्धा और विश्वास से इनकी आरती करते हैं ताकि उनकी कृपा बनी रहे; जैसे हमारा गंगाजल निर्मल है, वैसे ही हमारा मन भी निर्मल रहे," उन्होंने कहा। उन्होंने सभी
क्षेत्रवासियों से आग्रह किया कि वे इस दिव्य घाट पर आकर आरती का लोकार्पण कर भगवती के दर्शन अवश्य करें, ताकि इससे दूर-दूर तक प्रचार-प्रसार हो और लोगों को धार्मिक सुख की अनुभूति मिले। आरती के दौरान घाट पर श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी भीड़ रही। स्थानीय भक्तों ने दीप-युक्त थाल, भजन और आरती के गीतों के साथ कार्यक्रम में भाग लिया। आयोजन समिति ने कहा कि महा-आरती अब नियमित रूप से आयोजित की जाएगी और इसका मकसद गंगाघाट को धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करना है। घाट पर व्यवस्था-परिवहन, सुरक्षा और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया। आयोजकों ने कहा कि भविष्य में और बेहतर आयोजन के लिए स्थानीय प्रशासन तथा सामाजिक संगठनों के साथ समन्वय बढ़ाया जाएगा। *मुख्य बिंदु* *अनूपशहर मस्तराम गंगाघाट पर गुरूपूर्णिमा पर बनारस शैली में महा-आरती शुरू।* *आचार्य संदीप मिश्रा ने बताया कि पिछले 11 वर्षों से छोटी आरती होती थी; अब भव्य आरती का प्रारम्भ।* *आयोजन का उद्देश्य मां गंगा को साक्षात देवी रूप में पूजना और श्रद्धा-भक्ति का प्रसार करना।* *श्रद्धालुओं ने मौजूदगी दर्ज कराई; सुरक्षा व स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया।* *महा-आरती अब नियमित रूप से आयोजित करने का प्रस्ताव।*
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- जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे उन्हें दुख पहुंचा। उन्होंने कहा कि ऐसे गुमराह बच्चों को सजा देने के बजाय माफ कर सही राह दिखाने की जरूरत है। मैं बच्चों को माफ करना चाहता हूं: पीएम मोदी *अनिल कुमार गुप्ता दिल्ली* प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे उन्हें दुख पहुंचा है। अगस्त 01, नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे उन्हें दुख पहुंचा। उन्होंने कहा कि ऐसे गुमराह बच्चों को सजा देने के बजाय माफ कर सही राह दिखाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने शुक्रवार देर रात इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि समाज में व्याप्त आक्रोश को वह समझते हैं, लेकिन यह समय गुमराह बच्चों को अपनाने और उनका मार्गदर्शन करने का है। उन्होंने कहा कि नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान कुछ शरारती बच्चों ने उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ गंदी गालियों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि सभ्य समाज में इस तरह की भाषा स्वीकार्य नहीं है और गालियां किसी समस्या का समाधान नहीं हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें इस बात की भी चिंता है कि हमारी बेटियों द्वारा इस तरह की अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने इसे सांस्कृतिक दृष्टि से चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि लोगों से गलतियां हो जाती हैं और बचपन में सुधार की हमेशा गुंजाइश रहती है। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे बच्चों को दंडित करने के बजाय उन्हें सही दिशा दिखाने का प्रयास करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि दांत गलती से जीभ को काट ले, तो दांत नहीं तोड़ा जाता क्योंकि दोनों अपने ही हैं। उन्होंने कहा कि उसी तरह बच्चे भी समाज के अपने हैं और उन्हें छोड़ना नहीं, बल्कि संभालना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन बच्चों को सजा देने या अदालतों के चक्कर कटवाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। समाज को क्षमा और सुधार के रास्ते पर चलना चाहिए। युवा प्रदर्शनकारियों से प्रधानमंत्री ने देश के विकास में भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि वे नई बातें सीखें, अपनी गलतियों से सबक लें और आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि देश आगे बढ़ रहा है। आप भी आगे बढ़ें, आप भी उन्नति करें। मैं आपके लिए जीता हूं और आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए काम करता हूं। आइए, हम सब मिलकर देश को आगे बढ़ाएं।1
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