सीमलवाड़ा के रेवाशंकर पंड्या राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, धंबोला में मंगलवार को राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) के तत्वावधान में एक विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में सीमलवाड़ा न्यायालय के न्यायाधीश अनिल चावला ने मुख्य अतिथि के रूप में विद्यार्थियों को नशा मुक्ति, अनुशासित जीवन और शिक्षा के महत्व पर प्रेरक मार्गदर्शन दिया। अपने संबोधन में न्यायाधीश अनिल चावला ने युवा अवस्था को जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि इस दौरान लिए गए सही निर्णय पूरे भविष्य की दिशा तय करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अफीम, गांजा, चरस, गुटखा, तंबाकू, धूम्रपान और शराब सहित सभी प्रकार के नशे से दूर रहने का आह्वान किया, क्योंकि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य, परिवार, शिक्षा और भविष्य को तबाह कर देता है, और एक बार इसकी लत लग जाने पर इससे बाहर निकलना अत्यंत कठिन हो जाता है। न्यायाधीश चावला ने छात्रों को जीवन में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर पूरी लगन और मेहनत से आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने मोबाइल फोन के अनावश्यक उपयोग से बचने तथा सोशल मीडिया पर अत्यधिक समय बिताने के बजाय पढ़ाई, खेलकूद, पुस्तक अध्ययन और रचनात्मक गतिविधियों में समय देने की सलाह दी, ताकि वे सफल, आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बन सकें। न्यायाधीश चावला ने विद्यालय को केवल शिक्षा का ही नहीं, बल्कि संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण की पाठशाला भी बताया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अच्छे विचारों को अपनाकर अनुशासन, ईमानदारी और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ें, ताकि वे अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें। उन्होंने छात्रों से समाज में नशा मुक्ति, स्वच्छता, शिक्षा और सकारात्मक सोच का संदेश फैलाने का भी आग्रह किया। इस शिविर में तालुका सचिव रमणलाल डामोर, पंकज कुमार पाटीदार, न्यायालय मुंशी कमलाशंकर, पीएलवी सुरेश कुमार, हरीश, रमेश चंद्र रोत और विद्यालय के संस्था प्रधान सुनील पंड्या सहित विद्यालय स्टाफ और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने नशा मुक्त जीवन अपनाने तथा शिक्षा व सकारात्मक गतिविधियों के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का संकल्प भी लिया।
सीमलवाड़ा के रेवाशंकर पंड्या राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, धंबोला में मंगलवार को राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) के तत्वावधान में एक विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में सीमलवाड़ा न्यायालय के न्यायाधीश अनिल चावला ने मुख्य अतिथि के रूप में विद्यार्थियों को नशा मुक्ति, अनुशासित जीवन और शिक्षा के महत्व पर प्रेरक मार्गदर्शन दिया। अपने संबोधन में न्यायाधीश अनिल चावला ने युवा अवस्था को जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि इस दौरान लिए गए सही निर्णय पूरे भविष्य की दिशा तय करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अफीम, गांजा, चरस, गुटखा, तंबाकू, धूम्रपान और शराब सहित सभी प्रकार के नशे से दूर रहने का आह्वान किया, क्योंकि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य, परिवार, शिक्षा और भविष्य को तबाह कर देता है, और एक बार इसकी लत लग जाने पर इससे बाहर निकलना अत्यंत कठिन हो जाता है। न्यायाधीश चावला ने छात्रों को जीवन में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर पूरी लगन और मेहनत से आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने मोबाइल फोन के अनावश्यक उपयोग से बचने तथा सोशल मीडिया पर अत्यधिक समय बिताने के बजाय पढ़ाई, खेलकूद, पुस्तक अध्ययन और रचनात्मक गतिविधियों में समय देने की सलाह दी, ताकि वे सफल, आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बन सकें। न्यायाधीश चावला ने विद्यालय को केवल शिक्षा का ही नहीं, बल्कि संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण की पाठशाला भी बताया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अच्छे विचारों को अपनाकर अनुशासन, ईमानदारी और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ें, ताकि वे अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें। उन्होंने छात्रों से समाज में नशा मुक्ति, स्वच्छता, शिक्षा और सकारात्मक सोच का संदेश फैलाने का भी आग्रह किया। इस शिविर में तालुका सचिव रमणलाल डामोर, पंकज कुमार पाटीदार, न्यायालय मुंशी कमलाशंकर, पीएलवी सुरेश कुमार, हरीश, रमेश चंद्र रोत और विद्यालय के संस्था प्रधान सुनील पंड्या सहित विद्यालय स्टाफ और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने नशा मुक्त जीवन अपनाने तथा शिक्षा व सकारात्मक गतिविधियों के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का संकल्प भी लिया।
- शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देते हुए, आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और स्थानीय विधायक गणेश घोगरा ने डूंगरपुर जिले की ग्राम पंचायत खेमारू में एक नवनिर्मित आधुनिक पुस्तकालय भवन का लोकार्पण किया। इस भवन का निर्माण स्थानीय विधायक विकास मद से ₹50 लाख की लागत से किया गया है। इस अवसर पर उप जिला प्रमुख सुरता परमार, डूंगरपुर प्रधान केवलराम कोटेड, उप प्रधान गुलाबसिंह चौहान, जिला परिषद सदस्य गुलशन मनात, ब्लॉक अध्यक्ष लक्ष्मण साद, आदिवासी कांग्रेस के जिला अध्यक्ष देवशंकर ननोमा, पंचायत समिति सदस्य और मंडल अध्यक्ष ईश्वर कलासुआ, खेमारू सरपंच नाथूलाल कटारा, पूर्व जिला परिषद सदस्य बालकृष्ण परमार, पूर्व सरपंच और वरिष्ठ कांग्रेस नेता राधेश्याम खराड़ी, तथा कांग्रेस प्रवक्ता लालशंकर कटारा, बाबूलाल कटारा, लक्ष्मण कटारा, रामा भाई बरांडा, चेतनलाल, हाँजा कटारा, शंकर कटारा, भगवान अहारी सहित खेमारू, भटवाड़ा, शंभू बहादुर शंकर नाथु, रामजी, गडामोरिया और पिपलादा जैसे विभिन्न गांवों के ग्रामीणजन उपस्थित रहे।4
- डूंगरपुर विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत साबली में आयोजित एक ग्रामीण सेवा शिविर में, दिव्यांग कांतिलाल वागात को आवागमन की वर्षों पुरानी समस्या से बड़ी राहत मिली है। भाजपा नेता बंशीलाल कटारा की सक्रिय पहल के बाद समाज कल्याण विभाग ने मौके पर ही उन्हें ट्राई साइकिल उपलब्ध कराई, जिससे कांतिलाल के चेहरे पर खुशी लौट आई। यह घटना राज्य सरकार द्वारा आयोजित ग्रामीण सेवा शिविरों की प्रभावशीलता का एक उदाहरण है, जो आमजन की समस्याओं के त्वरित और संवेदनशील समाधान का एक प्रभावी माध्यम साबित हो रहे हैं। शिविर के दौरान, दिव्यांग कांतिलाल वागात ने अपनी शारीरिक अक्षमता और आवाजाही में आने वाली परेशानियों के बारे में अधिकारियों को अवगत कराया था। शिविर में मौजूद भाजपा नेता एवं पूर्व विधानसभा प्रत्याशी बंशीलाल कटारा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जिला समाज कल्याण अधिकारी से संपर्क किया और उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत कराया। कटारा की पहल पर विभाग ने आवश्यक कागजी प्रक्रिया को तत्काल पूरा किया और कांतिलाल को एक नई दिव्यांग ट्राई साइकिल सुपुर्द कर दी। कांतिलाल वागात पहले से ही दिव्यांग पेंशन योजना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत निःशुल्क राशन, आयुष्मान भारत योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना जैसी कई सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं, और अब ट्राई साइकिल मिल जाने से उनका दैनिक जीवन और आवागमन और भी आसान हो जाएगा। इस अवसर पर, भाजपा नेता बंशीलाल कटारा ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार की स्पष्ट मंशा है कि हर पात्र व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर पहुँचे। उन्होंने जोर दिया कि ग्रामीण सेवा शिविर इसी उद्देश्य को साकार कर रहे हैं, जहाँ सभी विभाग एक ही छत के नीचे बैठकर आमजन की समस्याओं का ऑन-स्पॉट निपटारा कर रहे हैं, जिससे समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सुशासन पहुँचाया जा सके। ग्रामीणों ने भी एक ही स्थान पर विभिन्न विभागों की सेवाएँ मिलने और समस्याओं के तुरंत समाधान को लेकर राज्य सरकार की इस पहल की जमकर सराहना की, उनका कहना था कि इन शिविरों के कारण उन्हें दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिली है।1
- सरोदा चौखला के कटकेश्वर महादेव मंदिर हॉल में यादव समाज द्वारा एक ऐतिहासिक मार्गदर्शन सेमिनार और महिला सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक संगठन और युवाओं के भविष्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श करना था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ज्ञान ज्योति सेवा संस्थान, उदयपुर के संस्थापक राहुल मेघवाल ने अपने संबोधन में कहा कि "शिक्षा ही समाज परिवर्तन का सबसे बड़ा हथियार है"। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि वे अपनी बेटियों को IAS और RAS सहित अन्य उच्च प्रशासनिक सेवाओं के लिए तैयार करें। इस अवसर पर मूकनायक राजस्थान के संपादक रामलाल यादव ने वैज्ञानिक सोच, तर्क आधारित शिक्षा और महापुरुषों के आदर्शों का अनुसरण करने का संदेश दिया। इस सम्मेलन में समाज के वरिष्ठजन, शिक्षाविद, महिला प्रतिनिधि, युवा और सैकड़ों समाजजन उपस्थित रहे। यह विशेष रिपोर्ट सम्मेलन के प्रेरणादायक भाषणों, प्रमुख संदेशों और समाज के उज्ज्वल भविष्य के संकल्प को दर्शाती है।1
- कुशलगढ़ नगर से लगभग पाँच किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत भीमपुरा स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय इन दिनों गंभीर अव्यवस्थाओं के बीच संचालित हो रहा है। लगभग 300 से अधिक विद्यार्थियों वाले इस विद्यालय में शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह से भगवान भरोसे चल रही है। विद्यालय परिसर में अध्यापन के लिए केवल पाँच कक्ष उपलब्ध हैं, जिनमें से सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने दो कक्षों को जर्जर और अनुपयोगी घोषित कर उन्हें ध्वस्त करने के आदेश जारी किए हैं। ऐसे में बचे हुए कमरों में शिक्षण कार्य चलाना एक मजबूरी बन गया है। स्थिति यह है कि एक कमरे में संस्था प्रधान और शिक्षकों का कार्यालय संचालित होता है, जबकि कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को एक ही कमरे में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। विद्यालय परिसर में बने पार्किंग शेड के नीचे अस्थायी रूप से कक्षाएं लगाई जाती हैं। वहीं, कक्षा 9 से 12वीं तक के विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए विद्यालय से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित पंचायत भवन तक जाना पड़ता है, जिससे बरसात के मौसम में उन्हें और शिक्षकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है और जान जोखिम में डालकर शिक्षण कार्य करना पड़ता है। कार्यवाहक संस्था प्रधान मांगी बहन डामोर ने बताया कि विद्यालय में कुल 14 पद स्वीकृत हैं, जिनमें छह द्वितीय श्रेणी अध्यापक, पाँच तृतीय श्रेणी अध्यापक, एक संस्था प्रधान, एक कनिष्ठ लिपिक और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का पद शामिल है। वर्तमान में केवल तीन द्वितीय श्रेणी और तीन तृतीय श्रेणी अध्यापक ही कार्यरत हैं। कनिष्ठ लिपिक एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद रिक्त होने के कारण विद्यालय का प्रशासनिक कार्य और रखरखाव गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। अध्यापकों शंकरलाल मईड़ा और कमलेश कटीजा ने बताया कि कक्षों के निर्माण और रिक्त पदों को भरने के लिए कई बार विभागीय अधिकारियों को पत्र लिखकर सूचित किया गया है, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षण में शिक्षकों को अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय की एक और बड़ी समस्या मोबाइल नेटवर्क का अभाव है, जिसके कारण परिसर में किसी भी मोबाइल कंपनी का नेटवर्क नहीं आता। इससे ऑनलाइन पोर्टल, शाला दर्पण और अन्य विभागीय कार्यों के लिए शिक्षकों को या तो कुशलगढ़ जाना पड़ता है या लगभग दो किलोमीटर दूर पहाड़ी पर चढ़कर नेटवर्क तलाशना पड़ता है। ग्रामीणों और विद्यालय परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन, शिक्षा विभाग और राज्य सरकार ने समय रहते विद्यालय भवन निर्माण, रिक्त पदों की पूर्ति और मूलभूत सुविधाओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले समय में सैकड़ों विद्यार्थियों की शिक्षा और सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन, शिक्षा विभाग और राजस्थान सरकार से तत्काल नए कक्षों के निर्माण, पर्याप्त स्टाफ की नियुक्ति और विद्यालय की आधारभूत समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग की है।2
- राज्य सरकार के ग्रामीण सेवा शिविर के तहत गड़ापट्टापीठ में आयोजित शिविर ग्रामीणों के लिए राहत और सुविधा का केंद्र साबित हुआ। जिला कलेक्टर देशलदान की उपस्थिति में विभिन्न विभागों ने एक ही स्थान पर लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ प्रदान किया। इस शिविर में बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों के कार्यों का मौके पर ही त्वरित निस्तारण किया गया, जिससे उन्हें बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। शिविर की एक प्रमुख विशेषता यह रही कि पात्र नागरिकों के जन्म प्रमाण पत्र हाथों-हाथ तैयार करके वितरित किए गए। इसके अतिरिक्त, छात्र-छात्राओं और अन्य पात्र लाभार्थियों के रोडवेज पास भी मौके पर ही बनाकर सौंपे गए। भूमि संबंधी प्रकरणों को भी शीघ्रता से निपटाते हुए कई लाभार्थियों को तत्काल भूमि पट्टे प्रदान किए गए। विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने सामाजिक सुरक्षा, राजस्व, पंचायत, शिक्षा और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़े आवेदनों का भी समाधान किया और पात्र व्यक्तियों को योजनाओं का लाभ दिलवाया। जिला कलेक्टर देशलदान ने शिविर का निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति को पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से योजनाओं का लाभ सुनिश्चित हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे शिविरों का मुख्य उद्देश्य आमजन को सरकारी सेवाएं उनके गांव में ही उपलब्ध कराना और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करना है। इस अवसर पर विकास अधिकारी ललित उपाध्याय, तहसीलदार राजेश मीणा, भाजपा मंडल अध्यक्ष परेश पाटीदार, जगदीश पंड्या सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।1
- डूंगरपुर में जिला परिवहन विभाग ने मंगलवार को स्कूल वाहनों की सुरक्षा और फिटनेस सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक विशेष जांच अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान कई स्कूल बसों और अन्य वाहनों में गंभीर कमियां पाई गईं, जिसके परिणामस्वरूप विभाग ने कुल 11 वाहनों के चालान काटे और नियमों का सख्ती से पालन करने की कड़ी चेतावनी दी। जांच में सामने आया कि कई वाहन बिना फिटनेस प्रमाण पत्र के ही चल रहे थे। एक निजी जीप को तो स्कूल वाहन के लिए बिना किसी परमिट के ही स्कूली बच्चों को ले जाते हुए पाया गया। इसके अतिरिक्त, कुछ बसों में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चे बैठाए गए थे, और कई वाहन चालकों व परिचालकों ने अपनी निर्धारित वर्दी नहीं पहनी थी। परिवहन निरीक्षक सुरेंद्र सिंह चौहान के नेतृत्व में टीम ने शहर के सदर थाना चौराहा और महाराणा प्रताप सर्किल सहित विभिन्न स्थानों पर यह जांच की। इस दौरान, दो बसों में परिचालक नदारद मिले, जिससे बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए। वैन और ऑटो जैसे अन्य वाहनों में भी बच्चों को ले जाने के मामले सामने आए, जिनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की गई। जिला परिवहन अधिकारी मनीष माथुर ने स्पष्ट किया कि यह विशेष अभियान स्कूली वाहनों की सुरक्षा और फिटनेस सुनिश्चित करने के लिए लगातार चलाया जा रहा है। उन्होंने सभी वाहन चालकों को सुरक्षा संबंधी नियमों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं ताकि बच्चों की यात्रा सुरक्षित रहे।2
- आवाज़ TV 3 इंडिया न्यूज़ की एक विशेष ग्राउंड रिपोर्ट ने राजस्थान के बाड़मेर जिले के रामसर क्षेत्र की सियाणी-खेजड़िया नाड़ी पंचायत स्थित मेघवाल बाहुल्य ढाणियों की वास्तविक और चिंताजनक तस्वीर उजागर की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, आज़ादी के 79 वर्षों के बाद भी, इन क्षेत्रों में निवास करने वाले हजारों परिवार पक्की सड़क, सुरक्षित पेयजल, परिवहन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जैसी अत्यंत मूलभूत सुविधाओं से पूरी तरह वंचित हैं। रिपोर्ट में सामने आया है कि छोटे-छोटे बच्चे प्रतिदिन 14 किलोमीटर तक पैदल चलकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। इस गंभीर स्थिति के कारण, अनेक बच्चे और विशेषकर बालिकाएँ, अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ने पर विवश हैं। आवाज़ TV 3 इंडिया न्यूज़ ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट के माध्यम से संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21A और 46 का हवाला देते हुए सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से इन अभावों को लेकर जवाबदेह सवाल पूछे हैं। चैनल ने स्पष्ट किया है कि इस पड़ताल का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष या राजनीतिक दल का विरोध करना नहीं है। बल्कि, इसका मुख्य लक्ष्य संविधान के अनुरूप सभी के लिए समान विकास और सामाजिक न्याय की मांग को प्रमुखता से सामने लाना है। आवाज़ TV 3 इंडिया न्यूज़ ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है कि वह जनहित के मुद्दों को लगातार उठाता रहेगा और देश के अंतिम व्यक्ति की आवाज़ को शासन-प्रशासन तक पहुँचाने का प्रयास करेगा।2
- सीमलवाड़ा पंचायत समिति के जलाप गांव में मुख्य सड़क के किनारे मिट्टी डाल दिए जाने के कारण बरसात के पानी की निकासी नहीं हो पा रही है, जिससे सड़क पर तालाब जैसी स्थिति बन गई है। पानी लंबे समय तक जमा रहने के कारण राहगीरों, वाहन चालकों और ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या हर वर्ष बरसात के मौसम में सामने आती है, लेकिन अब तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है। सड़क के दोनों ओर उचित जल निकासी व्यवस्था न होने से बारिश का पानी सड़क पर ही भर जाता है, जिससे दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने का खतरा बना रहता है और पैदल आने-जाने वाले लोगों को भी पानी के बीच से गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि यह मुख्य मार्ग होने के कारण दिनभर लोगों और वाहनों की आवाजाही रहती है, और पानी भरे रहने से दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मौके का निरीक्षण कर सड़क किनारे उचित नालियां या पानी निकासी की व्यवस्था कराई जाए, ताकि हर साल होने वाली इस परेशानी से स्थायी राहत मिल सके।1