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Bal badhane wala tel Bal Lamba karne ka Mota karne ka kam hai
RJ Gaming
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- “बंगाल में दीदी ऐतिहासिक वोटों से जीतने जा रही हैं” ◆ Akhilesh Yadav का बड़ा बयान ◆ कहा – अगर चुनाव निष्पक्ष हुए तो ममता बनर्जी की जीत तय ◆ एग्जिट पोल के बीच सियासत गरमाई #ExitPoll #WestBengal #AkhileshYadav #Deshtak नोटः यह जानकारी वायरल रिपोर्ट्स और मीडिया सूत्रों पर आधारित है, हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं1
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- नागौर जिले के प्रसिद्ध बुटाटी धाम मंदिर परिसर में तनावपूर्ण स्थिति सामने आई है, जहां मंदिर के महिला और पुरुष सुरक्षाकर्मियों के साथ कथित रूप से मारपीट की गई। घटना के बाद मंदिर क्षेत्र में आक्रोश का माहौल बन गया है। मंदिर समिति के अनुसार, कुछ लोगों ने सुरक्षाकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए उन्हें घसीट-घसीट कर पीटा। इस दौरान महिला सुरक्षाकर्मियों के साथ भी धक्का-मुक्की और मारपीट की गई, जिसे लेकर समिति ने गंभीर चिंता जताई है। बताया जा रहा है कि यह विवाद मंदिर के आसपास अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर चल रहे तनाव के बीच हुआ। पहले से ही मंदिर समिति और कुछ दुकानदारों के बीच खींचतान चल रही थी, और अब यह मामला हिंसक रूप लेता नजर आ रहा है। मंदिर समिति ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही प्रशासन से मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की अपील की गई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। वहीं, घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित करने का प्रयास किया। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है और आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की बात कही जा रही है। घटना के बाद श्रद्धालुओं में भी डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है, जिससे मंदिर की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं।1
- आदरणीय पायलट जी को सिर्फ एक नेता के रूप में नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों लोगों की उम्मीद और विश्वास के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। एक मर्यादित सोच और सकारात्मक राजनीति हमेशा से उनकी पहचान रही है, जहाँ वे विरोधियों का भी सम्मान करते हैं। राजनीति में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन उन्हें हमेशा मर्यादित और सभ्य भाषा में ही व्यक्त किया जाना चाहिए। लोकतंत्र की मजबूती संयम, सम्मान और सकारात्मक संवाद से ही संभव है।1
- महिलाओं के मशाल जुलूस के दौरान मदन राठौड़ द्वारा महिलाओं को एक निश्चित दूरी बनाकर चलने की सलाह देना अब चर्चा का विषय बन गया है। बताया जा रहा है कि जब उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे नाराज होकर कार्यक्रम से चले गए। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां कुछ लोग इसे महिलाओं के प्रति अनावश्यक हस्तक्षेप बता रहे हैं, वहीं कई लोग इसे सुरक्षा के लिहाज से सही कदम मान रहे हैं। मशाल जुलूस जैसे आयोजनों में आग के कारण दुर्घटना की आशंका हमेशा बनी रहती है, ऐसे में दूरी बनाए रखने की सलाह को एहतियात के तौर पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आजकल आयोजनों में फोटो और सोशल मीडिया पर उपस्थिति को लेकर होड़ बढ़ गई है, जिससे कई बार सुरक्षा मानकों की अनदेखी हो जाती है। ऐसे में अगर कोई जिम्मेदार व्यक्ति सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात करता है, तो उसे सकारात्मक नजरिए से भी देखा जाना चाहिए।1
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