प्रयागराज जिले के कस्बा फूलपुर में तीसरी मोहर्रम की रात लगभग 9 बजे मुल्लाना से अलम का जुलूस निकाला गया। यह जुलूस कोहना मोहल्ला होते हुए कैथाना पहुंचा, जहां नौहाख्वानी और मातम किया गया। मातम के बाद जुलूस नई बस्ती पहुंचा, जहां से मिट्टी ली गई। इसके उपरांत, सभी मोहल्लों के परचम अपने-अपने स्थानों पर वापस पहुंचे और मिट्टी को इमाम चौक के बीच में रखकर फातेहा पढ़ी गई। मोहर्रमुल हराम इस्लामी इतिहास के उस दौर की याद दिलाता है जब कर्बला की धरती में इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके साथियों पर मुश्किलों का दौर अधिक सख्त होना शुरू हो गया था। यज़ीदी फौज ने इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके परिवार व साथियों को चारों ओर से घेर लिया था, जिससे कर्बला में हक़ और बातिल के बीच जंग की भूमिका तैयार हो रही थी। विशेषकर 3 मोहर्रम के दिन से ही कर्बला के मुसाफिरों की तकलीफें बढ़ने लगी थीं, लेकिन उन्होंने सत्य और न्याय के मार्ग से पीछे हटना स्वीकार नहीं किया। मोहर्रम का यह महीना हमें इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी, सब्र, इंसाफ और इंसानियत की रक्षा के लिए दी गई महान शहादत का स्मरण कराता है। यह दिन संदेश देता है कि अत्याचार और अन्याय के सामने झुकने के बजाय सत्य का साथ देना चाहिए, और कर्बला की यह महान घटना आज भी पूरी मानवता के लिए सब्र, त्याग और इंसाफ की मिसाल बनी हुई है। जुलूस के दौरान, एसीपी विवेक कुमार यादव और सौरभ पांडेय अपनी पूरी फोर्स के साथ शांतिपूर्वक जुलूस को इमामचौक तक पहुंचाने के लिए मौजूद रहे। इस जुलूस में जलालत हुसैन उर्फ शेखू, बदरुल हसन जैदी, नज़म, अब्दुल्ला मेंहदी, सभासद प्रतिनिधि मो. अरशद दानिश, जमी, खुर्शीद अकबर, मुमताज अहमद, चन्द्रू, असीम, काशिफ, नवाज़, साहिल, शारिक, आमिर महफूज़, आसिफ, मो. फुरकान, अली, अजमी, आदिल, मुजम्मिल, शारिब, गुलरेज, आकिल, सलमान, सेबू, जैद, बिलाल, अख्तर, मुस्तकीम सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कस्बे में हवेली मुल्लाना में प्रतिदिन इमाम हुसैन की शहादत की याद में मजलिसों का आयोजन किया जा रहा है।
प्रयागराज जिले के कस्बा फूलपुर में तीसरी मोहर्रम की रात लगभग 9 बजे मुल्लाना से अलम का जुलूस निकाला गया। यह जुलूस कोहना मोहल्ला होते हुए कैथाना पहुंचा, जहां नौहाख्वानी और मातम किया गया। मातम के बाद जुलूस नई बस्ती पहुंचा, जहां से मिट्टी ली गई। इसके उपरांत, सभी मोहल्लों के परचम अपने-अपने स्थानों पर वापस पहुंचे और मिट्टी को इमाम चौक के बीच में रखकर फातेहा पढ़ी गई। मोहर्रमुल हराम इस्लामी इतिहास के उस दौर की याद दिलाता है जब कर्बला की धरती में इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके साथियों पर मुश्किलों का दौर अधिक सख्त होना शुरू हो गया था। यज़ीदी फौज ने इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके परिवार व साथियों को चारों ओर से घेर लिया था, जिससे कर्बला में हक़ और बातिल के बीच जंग की भूमिका तैयार हो रही थी। विशेषकर 3 मोहर्रम के दिन से ही कर्बला के मुसाफिरों की तकलीफें बढ़ने लगी थीं, लेकिन उन्होंने सत्य और न्याय के मार्ग से पीछे हटना स्वीकार नहीं किया। मोहर्रम का यह महीना हमें इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी, सब्र, इंसाफ और इंसानियत की रक्षा के लिए दी गई महान शहादत का स्मरण कराता है। यह दिन संदेश देता है कि अत्याचार और अन्याय के सामने झुकने के बजाय सत्य का साथ देना चाहिए, और कर्बला की यह महान घटना आज भी पूरी मानवता के लिए सब्र, त्याग और इंसाफ की मिसाल बनी हुई है। जुलूस के दौरान, एसीपी विवेक कुमार यादव और सौरभ पांडेय अपनी पूरी फोर्स के साथ शांतिपूर्वक जुलूस को इमामचौक तक पहुंचाने के लिए मौजूद रहे। इस जुलूस में जलालत हुसैन उर्फ शेखू, बदरुल हसन जैदी, नज़म, अब्दुल्ला मेंहदी, सभासद प्रतिनिधि मो. अरशद दानिश, जमी, खुर्शीद अकबर, मुमताज अहमद, चन्द्रू, असीम, काशिफ, नवाज़, साहिल, शारिक, आमिर महफूज़, आसिफ, मो. फुरकान, अली, अजमी, आदिल, मुजम्मिल, शारिब, गुलरेज, आकिल, सलमान, सेबू, जैद, बिलाल, अख्तर, मुस्तकीम सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कस्बे में हवेली मुल्लाना में प्रतिदिन इमाम हुसैन की शहादत की याद में मजलिसों का आयोजन किया जा रहा है।
- पूर्वा यूपी और एमपी सब एरिया, प्रयागराज न्यू कैंट की देखरेख में ऑर्डनेंस डिपो, फोर्ट, प्रयागराज के ऐतिहासिक और पवित्र 'अक्षय वट' वाटिका में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस साल की ग्लोबल थीम "स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग" पर केंद्रित इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य, अनुशासन और सद्भाव का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाइव प्रसारण वाले संबोधन से हुई, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों को प्रेरित किया। इसके बाद, फैमिली वेलफेयर की चेयरपर्सन श्रीमती अर्चना सोहल ने बहुत ही बेहतरीन और कुशलतापूर्वक योग अभ्यास कराया। सेना के जवानों और उनके परिवारों सहित 350 लोगों ने इस आयोजन में हिस्सा लिया, जहाँ उन्होंने समझा कि कैसे प्राचीन योग परंपराएं शारीरिक ऊर्जा, गतिशीलता और मानसिक स्पष्टता बनाए रखने के लिए जीवन भर चलने वाला एक महत्वपूर्ण अभ्यास हो सकती हैं। श्रीमती अर्चना के कुशल मार्गदर्शन में, लोगों ने सांस लेने की तकनीकों और शारीरिक आसनों का अभ्यास किया, जिन्हें खास तौर पर लंबे समय तक सेहत और मजबूती बनाए रखने के लिए तैयार किया गया था। इस कार्यक्रम ने न केवल समग्र स्वास्थ्य के लिए योग को एक सार्वभौमिक साधन के रूप में बढ़ावा देने के माननीय प्रधानमंत्री के विजन का सम्मान किया, बल्कि जीवन के हर चरण में सेहत और संतुलन को बढ़ावा देने के लिए सेना समुदाय की अटूट प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया। गहरे सांस्कृतिक महत्व वाले स्थान पर इस आयोजन से, ऑर्डनेंस डिपो ने सभी उपस्थित लोगों को इन स्वस्थ आदतों को अपनी दिनचर्या में शामिल करने और योग को लंबी उम्र तथा लगातार शारीरिक फिटनेस के लिए जीवन भर की प्रतिबद्धता के रूप में अपनाने के लिए सफलतापूर्वक प्रेरित किया।1
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रयागराज के नैनी स्थित सेल्फी प्वाइंट परमार्थ घाट पर एक विशेष योग कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि सरस्वती की ओर से आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने घाट पर पहुँचकर योगाभ्यास किया। योगाभ्यास के दौरान परमार्थ निकेतन ने वहाँ मौजूद लोगों को रुद्राक्ष की मालाएँ और पौधे वितरित किए। इस मौके पर सभी ने स्वच्छता का संदेश देते हुए यह संकल्प लिया कि प्रयागराज को स्वच्छ बनाने के साथ-साथ सुंदर भी बनाया जाएगा। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि हरियाली के समाप्त होने के कारण पौधे लगाना आवश्यक है और पर्यावरण को बचाए रखने के लिए पौधरोपण बहुत महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में परमार्थ निकेतन के शिष्यों ने योग के माध्यम से विभिन्न करतब दिखाए, यह दर्शाते हुए कि दवाइयों के बिना भी शरीर को कैसे स्वस्थ रखा जा सकता है। योग गुरु ने बताया कि प्रतिदिन योग करने से शरीर स्वस्थ और निरोग रहता है। इस आयोजन का उद्देश्य लोगों को योग के प्रति जागरूक करना था।4
- स्वास्थ्य, अनुशासन और सद्भाव का शानदार प्रदर्शन करते हुए, ऑर्डनेंस डिपो, फोर्ट, प्रयागराज ने पूर्वा यूपी और एमपी सब एरिया, प्रयागराज न्यू कैंट की देखरेख में ऐतिहासिक व पवित्र 'अक्षय वट' वाटिका में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया। इस वर्ष का कार्यक्रम "स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग" की वैश्विक थीम पर केंद्रित रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के लाइव प्रसारण वाले संबोधन से हुआ, जिसने सभी उपस्थित लोगों को बहुत प्रेरित किया। इसके बाद, फैमिली वेलफेयर की चेयरपर्सन श्रीमती अर्चना सोहल ने अत्यंत कुशलता और बेहतरीन ढंग से योग अभ्यास कराया। इस कार्यक्रम में सेना के जवानों और उनके परिवारों सहित कुल 350 लोगों ने हिस्सा लिया, जिन्होंने यह सीखा कि कैसे प्राचीन योग परंपराएं शारीरिक ऊर्जा, गतिशीलता और मानसिक स्पष्टता को जीवन भर बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण अभ्यास बन सकती हैं। श्रीमती अर्चना के कुशल मार्गदर्शन में, प्रतिभागियों ने सांस लेने की आवश्यक तकनीकों और शारीरिक आसनों का अभ्यास किया, जिन्हें विशेष रूप से लंबे समय तक स्वास्थ्य और मजबूती बनाए रखने के लिए डिज़ाइन किया गया था। यह आयोजन न केवल समग्र स्वास्थ्य के लिए योग को एक सार्वभौमिक साधन के रूप में बढ़ावा देने के माननीय प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण का सम्मान था, बल्कि इसने जीवन के हर चरण में सेहत और संतुलन को बढ़ावा देने के प्रति सेना समुदाय की अटूट प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया। गहरे सांस्कृतिक महत्व वाले स्थान पर इस कार्यक्रम का आयोजन करके, ऑर्डनेंस डिपो ने सभी उपस्थित लोगों को इन स्वस्थ आदतों को अपनी दिनचर्या में शामिल करने के लिए सफलतापूर्वक प्रेरित किया, ताकि वे लंबी उम्र और निरंतर शारीरिक फिटनेस के लिए योग को जीवन भर की प्रतिबद्धता के रूप में अपना सकें।4
- प्रयागराज जिले के कस्बा फूलपुर में तीसरी मोहर्रम की रात लगभग 9 बजे मुल्लाना से अलम का जुलूस निकाला गया। यह जुलूस कोहना मोहल्ला होते हुए कैथाना पहुंचा, जहां नौहाख्वानी और मातम किया गया। मातम के बाद जुलूस नई बस्ती पहुंचा, जहां से मिट्टी ली गई। इसके उपरांत, सभी मोहल्लों के परचम अपने-अपने स्थानों पर वापस पहुंचे और मिट्टी को इमाम चौक के बीच में रखकर फातेहा पढ़ी गई। मोहर्रमुल हराम इस्लामी इतिहास के उस दौर की याद दिलाता है जब कर्बला की धरती में इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके साथियों पर मुश्किलों का दौर अधिक सख्त होना शुरू हो गया था। यज़ीदी फौज ने इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके परिवार व साथियों को चारों ओर से घेर लिया था, जिससे कर्बला में हक़ और बातिल के बीच जंग की भूमिका तैयार हो रही थी। विशेषकर 3 मोहर्रम के दिन से ही कर्बला के मुसाफिरों की तकलीफें बढ़ने लगी थीं, लेकिन उन्होंने सत्य और न्याय के मार्ग से पीछे हटना स्वीकार नहीं किया। मोहर्रम का यह महीना हमें इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी, सब्र, इंसाफ और इंसानियत की रक्षा के लिए दी गई महान शहादत का स्मरण कराता है। यह दिन संदेश देता है कि अत्याचार और अन्याय के सामने झुकने के बजाय सत्य का साथ देना चाहिए, और कर्बला की यह महान घटना आज भी पूरी मानवता के लिए सब्र, त्याग और इंसाफ की मिसाल बनी हुई है। जुलूस के दौरान, एसीपी विवेक कुमार यादव और सौरभ पांडेय अपनी पूरी फोर्स के साथ शांतिपूर्वक जुलूस को इमामचौक तक पहुंचाने के लिए मौजूद रहे। इस जुलूस में जलालत हुसैन उर्फ शेखू, बदरुल हसन जैदी, नज़म, अब्दुल्ला मेंहदी, सभासद प्रतिनिधि मो. अरशद दानिश, जमी, खुर्शीद अकबर, मुमताज अहमद, चन्द्रू, असीम, काशिफ, नवाज़, साहिल, शारिक, आमिर महफूज़, आसिफ, मो. फुरकान, अली, अजमी, आदिल, मुजम्मिल, शारिब, गुलरेज, आकिल, सलमान, सेबू, जैद, बिलाल, अख्तर, मुस्तकीम सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कस्बे में हवेली मुल्लाना में प्रतिदिन इमाम हुसैन की शहादत की याद में मजलिसों का आयोजन किया जा रहा है।1
- प्रयागराज में प्रशासन की वादाखिलाफी को लेकर ग्रामीणों में गहरा गुस्सा देखा जा रहा है, जिसके चलते भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने 'करो या मरो' का रास्ता अपनाने की चेतावनी दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने उनसे किए गए वादों को पूरा नहीं किया है। यह गुस्सा बारा विधायक और एसडीएम द्वारा दिए गए आश्वासनों के बावजूद सड़क न बनने के कारण फूटा है। ग्रामीणों का कहना है कि एक सरकारी चकमार्ग पर दबंगों ने कब्जा कर लिया है, जिसके कारण उन्हें परेशानी हो रही है। अपनी मांगें पूरी न होने की सूरत में, एक बुजुर्ग ग्रामीण ने आत्मदाह करने की चेतावनी भी दी है, जिससे स्थिति की गंभीरता और बढ़ गई है।1
- लखनऊ में NEET-UG की पुनर्परीक्षा (री-एग्जाम) का आयोजन 75 केंद्रों पर किया जा रहा है, जिसमें 35,594 से अधिक अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं। इस दौरान परीक्षा की शुचिता और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। परीक्षा केंद्रों के अंदर और बाहर पुलिस बल के साथ एक त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा तैनात किया गया है। इसके साथ ही, केंद्रों के आसपास धारा 144 लागू कर दी गई है और 50 मीटर तक पार्किंग पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।1
- महाराष्ट्र के यशवाड़ी देवस्थान में हनुमान मंदिर के हॉल की निर्माणाधीन छत गिरने से एक भीषण हादसा हो गया। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 अन्य घायल हो गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल पहुँचाया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मंदिर के ठीक सामने एक सभा मंडप का निर्माण कार्य चल रहा था। यह हादसा दोपहर के समय हुआ, जब लोग प्रसाद ले रहे थे और अचानक मंदिर की छत का ढाँचा और पत्थर भरभराकर गिर पड़े। यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है।1
- मोहर्रम के अशरे की चौथी तारीख पर प्रयागराज में जगह-जगह अकीदत और गमगीन माहौल में मजलिसें आयोजित की गईं और जुलूस निकाले गए। शाहगंज पानदरीबा स्थित इमामबाड़ा सफदर अली बेग में चौथी मजलिस के बाद हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के वफादार घोड़े ज़ुलजनाह की शबीह निकाली गई। इस अवसर पर सफेद चादर को लाल रंग से खून आलूदा कर उसपर गुलाब व चमेली के फूलों से सजाया गया। मिर्ज़ा चंगेज़ व मिर्ज़ा जहांगीर ने मर्सिया पढ़ा, जबकि मौलाना आमिरुर रिज़वी साहब क़िब्ला ने इमाम हुसैन और अन्य शहीदों की शहादत का ज़िक्र किया। अन्जुमन अब्बासिया के नौहाख्वानो डॉ अबरार, फ़ैज़ जाफरी, सादिक़ और हुसैन मेंहदी मोनू ने पुरदर्द नौहा पढ़ा। इसी क्रम में रानी मण्डी, चक ज़ीरो रोड, बख्शी बाज़ार, रानीमंडी, करैली करैलाबाग़, शाहगंज, दरियाबाद, रौशनबाग़ सहित अन्य मोहल्लों में चौथी मोहर्रम पर मजलिसें हुईं, जहाँ करबला के शहीदों को खेराजे अक़ीदत पेश की गई। दरियाबाद स्थित असग़र मंज़िल में हसन नक़वी द्वारा आयोजित अशरे की चौथी मजलिस को भी मौलाना सैय्यद आमिरुर रिज़वी ने खिताब किया और शबीहे ज़ुलजनाह की जियारत कराई गई। शादाब हुसैन की मार्मिक सवारी सुनकर लोगों की आंखें नम हो गईं, और अन्जुमन नक़विया रजिस्टर्ड ने नौहों व मातम से माहौल को ग़मगीन कर दिया। इस आयोजन में हसन नक़वी, रौनकों सफीपुरी, शफक़त अब्बास पाशा और सैय्यद मोहम्मद अस्करी सहित कई लोग शामिल रहे। दरियाबाद में इमामबाड़ा स्व. सैय्यद मुज़फ्फर हुसैन से चार मोहर्रम का क़दीमी जुलूस भी अक़ीदत व ऐहतेराम के साथ निकाला गया। यह जुलूस कमाल खां के टेकरे से होता हुआ मस्जिद इमाम ए रज़ा पर ठहरने के बाद दरगाह हज़रत अब्बास पर पहुंचकर सम्पन्न हुआ। जुलूस से पहले ज़ाकिरे अहलेबैत अशरफ अब्बास खां ने मजलिस को खिताब किया। इस जुलूस में अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया बख्शी बाज़ार और अन्जुमन मोहाफिज़े अज़ा क़दीम के नौहाख्वानो ने पुरदर्द नौहा पढ़ते हुए शिरकत की, और हज़रत अली अकबर के ताबूत की शबीह व अलम भी साथ-साथ रहे। अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के प्रवक्ता सैय्यद मोहम्मद अस्करी के मुताबिक़, पांचवीं मोहर्रम शुक्रवार को भी कई कार्यक्रम होंगे। दिन में दो बजे पान दरीबा स्थित इमामबाड़ा सफदर अली बेग की पांचवीं मजलिस में अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया नौहा व मातम का नज़राना पेश करेगी। इससे पहले, दिन में 11 बजे चक ज़ीरो रोड स्थित इमामबाड़ा डिप्यूटी ज़ाहिद हुसैन में मौलाना सैय्यद ज़मीर हैदर रिज़वी साहब क़िब्ला की तक़रीर के बाद अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया नौहा और मातम का पुरसा पेश करेगी। शाम पांच बजे सब्ज़ी मंडी स्थित हैदर अली क्रिकेटर के अज़ाखाने पर मजलिस के बाद अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया बख्शी बाज़ार नौहा व मातम का नज़राना पेश करेगी। दरियाबाद पठनवल्ली स्थित इमामबाड़ा अबुल हसन, जहाँ ग़दर के समय से मजलिस क़ायम है, वहाँ अशरे की पांचवीं मजलिस शुक्रवार को रात्रि आठ बजे होगी, जिसे खतीब ए अहलेबैत रज़ा हसनैन एडवोकेट खिताब करेंगे। इस मजलिस के बाद शबीह ए ज़ुलजनाह निकाला जाएगा, और अन्जुमन हाशिमया के नौहाख्वानो के नौहों की प्रस्तुति के बाद अन्जुमन के सदस्यों द्वारा तेज़ धार की छूरीयों से लैस ज़ंजीरों का मातम भी किया जाएगा।1