कैमूर जिले में शुक्रवार को 'अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस' के अवसर पर बाल श्रम जैसी सामाजिक कुप्रथा को जड़ से मिटाने के उद्देश्य से विभिन्न जागरूकता और संकल्प कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग, कैमूर के तत्वावधान में आयोजित इन कार्यक्रमों के माध्यम से आम जनता को बाल श्रम के खिलाफ जागरूक रहने का संदेश दिया गया। इन आयोजनों की शुरुआत इटाधी स्थित संयुक्त श्रम भवन में हुई, जहाँ श्रम अधीक्षक, सभी श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी और कार्यालय कर्मियों सहित उपस्थित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने बाल श्रम के विरुद्ध खड़े होने की सामूहिक शपथ ली। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद, जिले के सुदूर क्षेत्रों में बाल श्रम के खिलाफ व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए एक जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया, जो पूरे कैमूर जिले में घूम-घूम कर लोगों को बाल श्रम न कराने और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रेरित करेगा। जागरूकता अभियान के तहत भेकास स्थित महिला आई.टी.आई. में एक चित्रकारी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसकी मूल थीम इस वर्ष की अंतर्राष्ट्रीय थीम 'बाल श्रम को लाल कार्ड' रखी गई थी। छात्राओं ने अपनी कला के माध्यम से बाल श्रम के दर्द और बच्चों के सुनहरे भविष्य की आवश्यकता को बेहद खूबसूरती से दर्शाया। केवल आयोजनों तक सीमित न रहकर, विभाग ने धरातल पर भी सक्रियता दिखाई; श्रम प्रवर्तन पदाधिकारियों की टीमों ने नवरंगराय एग्रो, यश लक्ष्मी इकोपैक और पतंजलि बिस्किट फैक्ट्री जैसे जिले के प्रमुख प्रतिष्ठानों और कारखानों का औचक दौरा किया। अधिकारियों ने नियोक्ताओं और श्रमिकों को बाल श्रम कानून की कड़ाई से जानकारी दी और परिसरों में बाल मजदूरों को न रखने की सख्त हिदायत दी। दिन का मुख्य और समापन कार्यक्रम लिच्छवी भवन में आयोजित हुआ, जहाँ श्रम अधीक्षक श्री चंदन कुमार ने उपस्थित सभी पदाधिकारियों, प्रबुद्ध नागरिकों और सहभागियों को बाल श्रम के उन्मूलन के लिए एकजुट होने की अपील की। उन्होंने सभी को सामूहिक रूप से फिर से शपथ दिलाई कि वे न तो बाल श्रम करेंगे और न ही अपने आस-पास ऐसा होने देंगे। श्रम विभाग ने आम जनता को सचेत करते हुए यह भी बताया है कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी तरह का कार्य करवाना पूर्णतः प्रतिबंधित है, और 14 से 18 वर्ष के किशोरों से जोखिम भरा कार्य करवाना एक संज्ञेय अपराध है। कानून का उल्लंघन करने वाले को 2 वर्ष तक का कारावास और 50 हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों भुगतना पड़ सकता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि कहीं भी बाल श्रम दिखे, तो तुरंत इसकी सूचना श्रम विभाग को दें।
कैमूर जिले में शुक्रवार को 'अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस' के अवसर पर बाल श्रम जैसी सामाजिक कुप्रथा को जड़ से मिटाने के उद्देश्य से विभिन्न जागरूकता और संकल्प कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग, कैमूर के तत्वावधान में आयोजित इन कार्यक्रमों के माध्यम से आम जनता को बाल श्रम के खिलाफ जागरूक रहने का संदेश दिया गया। इन आयोजनों की शुरुआत इटाधी स्थित संयुक्त श्रम भवन में हुई, जहाँ श्रम अधीक्षक, सभी श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी और कार्यालय कर्मियों सहित उपस्थित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने बाल श्रम के विरुद्ध खड़े होने की सामूहिक शपथ ली। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद, जिले के सुदूर क्षेत्रों में बाल श्रम के खिलाफ व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए एक जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया, जो पूरे कैमूर जिले में घूम-घूम कर लोगों को बाल श्रम न कराने और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रेरित करेगा। जागरूकता अभियान के तहत भेकास स्थित महिला आई.टी.आई. में एक चित्रकारी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसकी मूल थीम इस वर्ष की अंतर्राष्ट्रीय थीम 'बाल श्रम को लाल कार्ड' रखी गई थी। छात्राओं ने अपनी कला के माध्यम से बाल श्रम के दर्द और बच्चों के सुनहरे भविष्य की आवश्यकता को बेहद खूबसूरती से दर्शाया। केवल आयोजनों तक सीमित न रहकर, विभाग ने धरातल पर भी सक्रियता दिखाई; श्रम प्रवर्तन पदाधिकारियों की टीमों ने नवरंगराय एग्रो, यश लक्ष्मी इकोपैक और पतंजलि बिस्किट फैक्ट्री जैसे जिले के प्रमुख प्रतिष्ठानों और कारखानों का औचक दौरा किया। अधिकारियों ने नियोक्ताओं और श्रमिकों को बाल श्रम कानून की कड़ाई से जानकारी दी और परिसरों में बाल मजदूरों को न रखने की सख्त हिदायत दी। दिन का मुख्य और समापन कार्यक्रम लिच्छवी भवन में आयोजित हुआ, जहाँ श्रम अधीक्षक श्री चंदन कुमार ने उपस्थित सभी पदाधिकारियों, प्रबुद्ध नागरिकों और सहभागियों को बाल श्रम के उन्मूलन के लिए एकजुट होने की अपील की। उन्होंने सभी को सामूहिक रूप से फिर से शपथ दिलाई कि वे न तो बाल श्रम करेंगे और न ही अपने आस-पास ऐसा होने देंगे। श्रम विभाग ने आम जनता को सचेत करते हुए यह भी बताया है कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी तरह का कार्य करवाना पूर्णतः प्रतिबंधित है, और 14 से 18 वर्ष के किशोरों से जोखिम भरा कार्य करवाना एक संज्ञेय अपराध है। कानून का उल्लंघन करने वाले को 2 वर्ष तक का कारावास और 50 हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों भुगतना पड़ सकता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि कहीं भी बाल श्रम दिखे, तो तुरंत इसकी सूचना श्रम विभाग को दें।
- User6359Chand, Kaimur (Bhabua)😤2 days ago
- 12 re re 32Mohania, Kaimur (Bhabua)😂2 days ago
- संत रामपाल जी महाराज के पास ऐसा ज्ञान है जो स्वयं गीता दाता को भी नतमस्तक होने पर विवश कर देता है। यह इसलिए संभव है क्योंकि संत रामपाल जी महाराज तत्वदर्शी हैं।1
- कैमूर जिले के मोहनियां शहर में बेखौफ अपराधियों ने एक बार फिर पुलिसिया इकबाल को चुनौती देते हुए एक बड़ी वारदात को अंजाम दिया है। रविवार दोपहर करीब 3:30 बजे, मोहनियां-आरा रोड स्थित एक आभूषण दुकान में तीन हथियारबंद अपराधियों ने दिनदहाड़े लगभग 25 लाख रुपये के सोने-चांदी के आभूषण और 50 हजार रुपये नकद लूट लिए। इस दुस्साहसिक घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और स्थानीय व्यवसायियों में भारी दहशत का माहौल है। मिली जानकारी के अनुसार, काले रंग की अपाची मोटरसाइकिल पर सवार होकर आए तीन अपराधी सीधे दुकान के अंदर घुसे और कट्टे के बल पर दुकानदार को बंधक बना लिया। उन्होंने दुकानदार को आतंकित करते हुए दुकान में रखे लगभग 25 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण और काउंटर में रखे लगभग 45 से 50 हजार रुपये नकद समेट लिए। यह पूरी वारदात महज कुछ ही मिनटों में अंजाम देकर अपराधी हथियार लहराते हुए मौके से फरार हो गए। पीड़ित दुकानदार ने बताया कि अपराधी पूरी तैयारी के साथ आए थे और आते ही उन्होंने कट्टा तान दिया, जिससे संभलने का मौका ही नहीं मिला। वारदात के तुरंत बाद पीड़ित व्यवसायी ने डायल 112 पर पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। घटना की गंभीरता को देखते हुए कैमूर के पुलिस अधीक्षक हरिमोहन शुक्ला स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे और मामले का जायजा लिया। एसपी ने अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई करने और अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष छापेमारी अभियान चलाने का निर्देश दिया है। फिलहाल पुलिस दुकान और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है ताकि अपराधियों की पहचान की जा सके। इस बड़ी लूट के बाद स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों में पुलिस प्रशासन के खिलाफ गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। व्यवसायियों का कहना है कि जिले में लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाओं के कारण अब व्यापार करना सुरक्षित नहीं रह गया है, वहीं स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि हाल के दिनों में चोरी और लूट की वारदातों में तेजी आई है, जिससे जनता खौफ के साये में जीने को मजबूर है। व्यापारियों ने पुलिस प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने और अपराधियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की कई टीमें संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं और पुलिस अधिकारियों का दावा है कि अपराधियों को जल्द ही चिह्नित कर सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा और कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं होगा।4
- मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सभा में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तस्वीर नदारद रहने पर उनके चाहने वाले नाराज़ हो गए। इस घटना से गुस्साए समर्थकों ने सम्राट चौधरी के सामने ही नीतीश कुमार के समर्थन में 'जिंदाबाद' के नारे लगाए, जिससे सभा में विरोध दर्ज कराया गया।1
- बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मां मुंडेश्वरी धाम धर्मशाला में आयोजित सहयोग शिविर में अपना संबोधन दिया। इस दौरान उन्होंने शिविर में उपस्थित लोगों को संबोधित किया।1
- गाजीपुर में सैदपुर ब्लॉक प्रमुख हीरा यादव की पिटाई के आरोपी ठाकुर देवराज सिंह के घर पुलिस ने दबिश दी है। यह कार्रवाई कोतवाल अनिल सिंह के नेतृत्व में की गई।1
- चंदौली जिले में आयोजित दिशा की बैठक में पत्रकारों को प्रवेश नहीं दिया गया, जिस पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के जिला अध्यक्ष घनश्याम प्रधान ने एक बड़ा बयान जारी किया है।1
- चंदौली के नौगढ़ ब्लॉक में महत्वाकांक्षी 'अमृत सरोवर योजना' की स्थानीय स्तर पर हो रही उपेक्षा की एक 'जीती-जागती मिसाल' सामने आई है। 'देश के महान सपूत और वीर चक्र विजेता' के नाम पर बने 'वीर अब्दुल हमीद अमृत सरोवर' में 'बूंद-भर पानी' भी नहीं है, जिससे जिम्मेदार अधिकारियों और ग्राम पंचायत द्वारा योजना को 'ठेंगा दिखाने' का आरोप लगाया गया है। जल संरक्षण के तमाम बड़े-बड़े दावों के बावजूद यह सरोवर पूरी तरह सूखा पड़ा है, जो शासन की मूल मंशा और इस पर खर्च हुए 'लाखों रुपयों' पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस अमृत सरोवर के निर्माण और सुंदरीकरण के नाम पर सरकारी खजाने से 'लाखों रुपये' का बजट निकाला जा चुका है। जहाँ कागजों पर इसे 'हरा-भरा और पानी से लबालब' दिखाया जा रहा है, वहीं हकीकत में सरोवर में 'सिर्फ धूल उड़ रही' है, क्योंकि न तो पानी रोकने की कोई सही व्यवस्था की गई और न ही पानी के इनलेट (आवक) रास्तों को दुरुस्त किया गया। भीषण गर्मी के इस मौसम में, जब पानी की एक-एक बूंद के लिए हाहाकार मचा है, स्थानीय लोगों ने बताया कि इस सरोवर में पानी होने से 'आसपास के मवेशियों और जंगली पशु-पक्षियों' को पीने का पानी मिलता और 'क्षेत्र का भूजल स्तर' भी सुधरता। हालांकि, 'अधिकारियों और ठेकेदारों की लापरवाही' के चलते यह केवल एक सूखा गड्ढा बनकर रह गया है, जो 'कागजों पर जल संरक्षण, धरातल पर सिर्फ धूल' की स्थिति को दर्शाता है।4
- यह पोस्ट संतों के दुर्लभ दर्शनों के महत्व पर जोर देती है, जिन्हें सौभाग्यशाली लोगों के लिए एक विशेष अवसर बताया गया है। इसमें कबीर के एक दोहे का उल्लेख किया गया है, जिसके अनुसार संत से मिलने के लिए माया और अभिमान का त्याग करके आगे बढ़ना चाहिए। जो भी व्यक्ति ऐसे मिलन के लिए कदम बढ़ाता है, उसे यज्ञ करने के समान पुण्य प्राप्त होता है।1