मथुरा जनपद की छाता तहसील स्थित उप निबंधन कार्यालय में निजीकरण के विरोध में दस्तावेज लेखक संघ और अधिवक्ताओं की हड़ताल आज 14वें दिन भी जारी रही। आंदोलनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए एक विरोध रैली निकाली, जिसके बाद उन्होंने तहसील परिसर से रैली निकालकर अपना रोष व्यक्त किया और प्रदेश के स्टाम्प एवं न्यायालय शुल्क राज्य मंत्री रविंद्र जायसवाल का पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर रजिस्ट्री व्यवस्था के निजीकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि इस कदम से हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी। हड़ताल पर बैठे संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती और निजीकरण के फैसले को वापस नहीं लेती, तब तक उनका आंदोलन और संघर्ष और अधिक तेज किया जाएगा। इस रैली और पुतला दहन के दौरान तहसील परिसर में काफी संख्या में दस्तावेज लेखक, अधिवक्ता और अन्य कर्मचारी मौजूद रहे, जिन्होंने एक स्वर में सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की। इस हड़ताल के चलते उप निबंधन कार्यालय में रजिस्ट्री संबंधी कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं, जिससे आम जनता को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मथुरा जनपद की छाता तहसील स्थित उप निबंधन कार्यालय में निजीकरण के विरोध में दस्तावेज लेखक संघ और अधिवक्ताओं की हड़ताल आज 14वें दिन भी जारी रही। आंदोलनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए एक विरोध रैली निकाली, जिसके बाद उन्होंने तहसील परिसर से रैली निकालकर अपना रोष व्यक्त किया और प्रदेश के स्टाम्प एवं न्यायालय शुल्क राज्य मंत्री रविंद्र जायसवाल का पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर रजिस्ट्री व्यवस्था के निजीकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि इस कदम से हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी। हड़ताल पर बैठे संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती और निजीकरण के फैसले को वापस नहीं लेती, तब तक उनका आंदोलन और संघर्ष और अधिक तेज किया जाएगा। इस रैली और पुतला दहन के दौरान तहसील परिसर में काफी संख्या में दस्तावेज लेखक, अधिवक्ता और अन्य कर्मचारी मौजूद रहे, जिन्होंने एक स्वर में सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की। इस हड़ताल के चलते उप निबंधन कार्यालय में रजिस्ट्री संबंधी कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं, जिससे आम जनता को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
- भगवान श्री राम के मंदिर में चोरी की एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ चोरों ने मंदिर में रखे चंदा और चढ़ावा को चुरा लिया। इस पूरी वारदात का एक वीडियो भी सामने आया है। इस घटना के वीडियो को बड़े पैमाने पर साझा करने की अपील की जा रही है, ताकि इन 'दरिंदो' और 'नरपिशाच' लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके, चाहे वे कोई भी हों। पोस्ट में गहरी निराशा व्यक्त की गई है कि कुछ लोग यह जानते हुए भी कानून और भगवान से नहीं डरते कि उन्हें चंद दिनों बाद यह दुनिया छोड़कर जाना है।1
- मथुरा में 42 करोड़ रुपये के सरकारी दावों की पोल खुल गई है, जहाँ एक लेखपाल पर खुलेआम 'कमीशन' लेने का आरोप लगा है। यह खुलासा हुआ है कि ओलावृष्टि से बर्बाद हुए किसानों को मुआवजे के पैसे पाने के लिए 4000 रुपये की रिश्वत देनी पड़ी है। इस घटना ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं कि क्या किसान का हक पाने के लिए भी रिश्वत देना ज़रूरी है। एक तरफ जहाँ ओलावृष्टि से किसान बर्बाद हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ लेखपाल 'मालामाल' हो रहे हैं, जो सीधे तौर पर 'सुशासन' के दावों पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।1
- उत्तर प्रदेश के छाता स्थित उप निबंधन कार्यालय में कर्मचारियों की हड़ताल लगातार 14वें दिन भी जारी रही। इस हड़ताल के दौरान, कर्मचारियों ने अपना विरोध प्रदर्शन करते हुए एक राज्य मंत्री का अंतिम संस्कार किया।1
- मथुरा में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 16वीं वाहिनी सीआरपीएफ द्वारा एक योग दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।1
- भारतीय किसान यूनियन आजाद हिंद के पदाधिकारियों ने मंडल अध्यक्ष विपिन शर्मा और जिला अध्यक्ष कृष्णा ओझा के नेतृत्व में आगरा टोल मैनेजर को एक ज्ञापन दिया।1
- करणी सेना के प्रदेश प्रवक्ता दीपक दीक्षित ने पुलिस प्रशासन से संपर्क स्थापित किया।1
- मथुरा जनपद की छाता तहसील स्थित उप निबंधन कार्यालय में निजीकरण के विरोध में दस्तावेज लेखक संघ और अधिवक्ताओं की हड़ताल आज 14वें दिन भी जारी रही। आंदोलनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए एक विरोध रैली निकाली, जिसके बाद उन्होंने तहसील परिसर से रैली निकालकर अपना रोष व्यक्त किया और प्रदेश के स्टाम्प एवं न्यायालय शुल्क राज्य मंत्री रविंद्र जायसवाल का पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर रजिस्ट्री व्यवस्था के निजीकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि इस कदम से हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी। हड़ताल पर बैठे संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती और निजीकरण के फैसले को वापस नहीं लेती, तब तक उनका आंदोलन और संघर्ष और अधिक तेज किया जाएगा। इस रैली और पुतला दहन के दौरान तहसील परिसर में काफी संख्या में दस्तावेज लेखक, अधिवक्ता और अन्य कर्मचारी मौजूद रहे, जिन्होंने एक स्वर में सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की। इस हड़ताल के चलते उप निबंधन कार्यालय में रजिस्ट्री संबंधी कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं, जिससे आम जनता को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।1