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पटना के दनियावां में स्थित सीमेंट फैक्ट्री में मजदूरों का हड़ताल अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड पाटलिपुत्र सीमेंट वर्क्स में मजदूरों ने बुधवार को हड़ताल कर दिया है पेमेंट बढ़ोतरी को लेकर की यह हड़ताल किया गया है मजदूरों का कहना है कि हम लोगों को बिहार सरकार द्वारा निर्धारित 436 रुपए प्रतिदिन दिया जा रहा है जबकि हम लोगों को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित 783 रुपए दिया जाना चाहिए अगर नहीं मिलता है तो आगे यह आंदोलन जारी रहेगा
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पटना के दनियावां में स्थित सीमेंट फैक्ट्री में मजदूरों का हड़ताल अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड पाटलिपुत्र सीमेंट वर्क्स में मजदूरों ने बुधवार को हड़ताल कर दिया है पेमेंट बढ़ोतरी को लेकर की यह हड़ताल किया गया है मजदूरों का कहना है कि हम लोगों को बिहार सरकार द्वारा निर्धारित 436 रुपए प्रतिदिन दिया जा रहा है जबकि हम लोगों को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित 783 रुपए दिया जाना चाहिए अगर नहीं मिलता है तो आगे यह आंदोलन जारी रहेगा
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- पटना (फतुहा) के ग्राम कोलहर स्थित नंद नगर में ‘दादा पोता शुद्ध सरसों तेल’ ब्रांड का दूसरा वार्षिकोत्सव बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम में स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे आयोजन एक यादगार अवसर बन गया। गांव और आसपास के क्षेत्रों से आए लोगों ने कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस मौके पर कंपनी के प्रोपराइटर एवं पूर्व जिला पार्षद सह समाजसेवी सुधीर कुमार यादव ने कहा कि उनका उत्पाद पूरी तरह शुद्ध है और यही उनकी सबसे बड़ी पहचान है। उन्होंने बताया कि आज के समय में बाजार में मिलावटी तेलों की भरमार है, ऐसे में शुद्धता बनाए रखना ही उनका मुख्य उद्देश्य और संकल्प है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि उनका ब्रांड सरकार द्वारा रजिस्टर्ड है और सभी गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरता है। कार्यक्रम के दौरान कंपनी द्वारा नए खाद्य मसाला उत्पाद को भी लॉन्च किया गया, जिससे ग्राहकों को शुद्धता के साथ बेहतर स्वाद का नया विकल्प मिलेगा। इस अवसर पर पूजा-पाठ के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिससे माहौल पूरी तरह सकारात्मक और धार्मिक बना रहा। समारोह की खास बात यह रही कि इसी अवसर पर प्रोपराइटर के नाती एकाग्र का जन्मोत्सव भी मनाया गया। साथ ही सैकड़ों लोगों के लिए भव्य भोज का आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने प्रसाद स्वरूप भोजन ग्रहण किया। कार्यक्रम में स्थानीय गणमान्य लोग, व्यवसायी और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जो इस ब्रांड के बढ़ते विश्वास और लोकप्रियता को दर्शाता1
- अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड पाटलिपुत्र सीमेंट वर्क्स में मजदूरों ने बुधवार को हड़ताल कर दिया है पेमेंट बढ़ोतरी को लेकर की यह हड़ताल किया गया है मजदूरों का कहना है कि हम लोगों को बिहार सरकार द्वारा निर्धारित 436 रुपए प्रतिदिन दिया जा रहा है जबकि हम लोगों को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित 783 रुपए दिया जाना चाहिए अगर नहीं मिलता है तो आगे यह आंदोलन जारी रहेगा1
- दैनिक मजदूर का शोषण का आरोप, दो घंटे तक मुख्य गेट पर धरना, लंबा जाम फतुहा संवाददाता, 8 अप्रैल 2026 दनियामा प्रखंड के शाहजहांपुर थाना क्षेत्र स्थित अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री में सोमवार को मजदूरों ने वेतन वृद्धि और श्रम शर्तों में सुधार की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। मजदूरों ने फैक्ट्री के मुख्य गेट पर करीब दो घंटे तक धरना दिया, जिससे सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात प्रभावित रहा। प्रदर्शन के दौरान मजदूरों में खासा उत्साह देखा गया, हालांकि कई श्रमिक कैमरे पर बोलने से बचते नजर आए। उनका कहना था कि उन्हें नौकरी से निकाले जाने का डर सता रहा है। मजदूरों ने आरोप लगाया कि उन्हें वर्तमान में 436 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी दी जा रही है, जिसमें से पीएफ भी काट लिया जाता है। उनका कहना है कि इतनी कम आय में परिवार का भरण-पोषण करना बेहद कठिन हो गया है। इसके अलावा, महीने में मिलने वाली साप्ताहिक छुट्टियों (रविवार) का वेतन भी नहीं दिया जाता, जिससे उनकी औसत आय और कम होकर लगभग 300 रुपये प्रतिदिन रह जाती है। मजदूरों का कहना है कि यह राशि वर्तमान समय की न्यूनतम मजदूरी से भी कम है और इससे जीवन यापन करना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कंपनी प्रबंधन से वेतन बढ़ाने और अन्य सुविधाएं देने की मांग की। सूचना मिलने पर एचआर विभाग के अधिकारी सतेन्द्र धधिची और शशि कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे मजदूरों को समझाने का प्रयास किया। सतेन्द्र धधिची ने कहा कि मजदूर अपनी शिकायतें लिखित रूप में दें, ताकि उन्हें कंपनी प्रबंधन तक पहुंचाया जा सके और उचित निर्णय लिया जा सके। इसके बाद मजदूरों ने अपनी मांगों को लिखित रूप में एचआर को सौंप दिया और आश्वासन मिलने के बाद धरना समाप्त कर दिया।1
- पटना: बिहार की राजनीति एक बार फिर बयानबाज़ी को लेकर गरमा गई है। राजद नेता तेज प्रताप यादव के एक विवादित बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। पटना में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने बोरिंग रोड इलाके को लेकर ऐसा दावा किया, जिस पर सियासी घमासान शुरू हो गया है। तेज प्रताप यादव ने कहा कि “पटना के बोरिंग रोड में महिलाएं सिगरेट और शराब पीती हैं और पुरुष उन्हें देखते रहते हैं।” उनके इस बयान को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान समाज में गलत संदेश देते हैं और महिलाओं की छवि को ठेस पहुंचाते हैं। इसी दौरान तेज प्रताप ने बिहार में शराबबंदी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में हर जगह शराब आसानी से उपलब्ध है और महिलाएं-पुरुष दोनों इसका सेवन कर रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार पर भी टिप्पणी करते हुए उन्हें “शून्य” बताया। इस टिप्पणी को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। तेज प्रताप यादव के इन बयानों के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। जदयू और भाजपा नेताओं ने इसे गैर-जिम्मेदाराना और आपत्तिजनक बताते हुए माफी की मांग की है, जबकि राजद की ओर से इस पर अब तक कोई आधिकारिक सफाई सामने नहीं आई है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर बिहार की सियासत में बयानबाज़ी के स्तर और मर्यादा को लेकर बहस छेड़ दी है।1
- पुराने खराब मोबाइलों के जरिए निजी डेटा में सेंध! विदेश से जुड़े कबाड़ियों के तार, बिहार STF ने किया पर्दाफाश उत्तर प्रदेश के रायबरेली में दर्ज एक मामले को लेकर बिहार के कटिहार में गिरफ्तार किए गए एक कबाड़ी ने पुलिस के सामने ऐसा खुलासा किया है जो हैरत में डालने वाला है। बिहार सहित देश के कई राज्यों में पुराने मोबाइल फोन खरीदकर उनका डेटा चुराकर विदेशों को बेचा जा रहा था। पटना: पुराने या बेकाम हुए मोबाइल फोन को खराब मानते हुए आम तौर पर या तो फेंक दिया जाता है, या फिर उसे कबाड़ियों को बेच दिया जाता है। लेकिन ऐसा करके बहुत बड़ा जोखिम लिया जाता है। मोबाइल फोन भले ही खराब हो जाए, लेकिन उसमें स्टोर डेटा तो सुरक्षित रहता है। पुराने मोबाइल फोन के इस डेटा से आपकी निजता में सेंध लगाई जा रही है। इसका खुलासा बिहार पुलिस की एसटीएफ ने किया है। यह सुनकर आपको हैरत होगी, लेकिन सच यह है कि इस डेटा को बेचने और खरीदने का काला कारोबार विदेशों तक फैला है। कबाड़ की आड़ में यह कैसा काला धंधा? बिहार एसटीएफ ने तीन दिन पहले एक अप्रैल को उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ कटिहार में छापे की कार्रवाई की थी। पुलिस ने कटिहार के हथिया दियरा में रहने वाले इस्तार आलम को उसके कबाड़ की दुकान से पकड़ा था। उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के लालगंज थाने में एक केस दर्ज है, जिसमें वह वांछित था। पुलिस के मुताबिक वह बिहार और कई अन्य राज्यों में पुराने मोबाइल फोन खरीदता था। इसके लिए वह एक पूरा रैकेट चला रहा था। मौबाइल से कैसे निकालते हैं डेटा? आरोपी इस्तार आलम की गिरफ्तारी के बाद इस काले धंधे का पर्दाफाश हुआ। एसटीएफ को पता चला है कि बिहार के कबाड़ का व्यवसाय करने वाले कुछ लोग विदेशी डेटा सेंटरों को पुराने मोबाइल फोन का मदर बोर्ड बेचते हैं। फोन भले ही पुराना और खराब होता है लेकिन उसके डेटा को रिकवर किया जा सकता है। इस तरह पुराने फोन के मदर बोर्ड से डेटा चोरी किया जा रहा था। पता चला है कि कबाड़ियों के जरिए लाखों मोबाइल फोनों का डेटा कई देशों में पहुंच चुका है।1
- पटना/दनियावां - प्रखंड के शाहजहांपुर थाना क्षेत्र में शाहजहांपुर में स्थित पाटलिपुत्रा सीमेंट वर्क्स के सैकड़ों मजदूरों ने अपने वेतन वृद्धि के मांग को ले बुधवार की सुबह छह बजे से दस बजे तक सीमेंट फैक्ट्री के गेट पर बैठक कर हड़ताल कर दी जिससे सीमेंट फैक्ट्री में किसी भी बड़े मालवाहक वाहन नहीं जा सके. जिससे फैक्ट्री के अंदर जाने वाली सड़क पर गाड़ियों की लंबी कतार लग गई. मजदूरों की हड़ताल की सूचना मिलते ही शाहजहांपुर थाना अध्यक्ष मुन्ना दास व दनियावां थानाध्यक्ष अनिल प्रसाद दलबल के साथ फैक्ट्री गेट पर पहुंच कर मजदूरों को समझाने का प्रयास किया पर मजदूर अपनी मांग पर अड़े रहे और सीमेंट फैक्ट्री में काम को ठप करा दिया। मजदूरों द्वारा अपने प्रति दिन की मजदूरी 436 रुपए से बढ़ाकर केंद्र सरकार द्वारा दी गई नए रेट 783रुपए की मांग की जा रही थी. मजदूरों का कहना है कि हमलोग का वेतन ठेकेदारों के द्वारा और पेटी कॉन्ट्रैक्टर द्वारा दी जाती है।इसलिए हमलोग का वेतन की कटौती कर शोषण हो रहा है.436 रुपए प्रतिदिन दी जाती है उसी में से पीएफ का पैसा भी काटा जाता है। ईएसआई कार्ड और आई कार्ड भी कंपनी द्वारा नहीं दी गई है सिर्फ गेट पास दिया गया है.साथ ही नाश्ता और भोजन भी इधर बंद कर दिया गया है.सभी मजदूर अपनी वेतन को एचआर के द्वारा खाता में भेजने की मांग कर रहे थे।हड़ताल के करीब दो घंटे बाद मौके पर पहुंचे अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री के एचआर हेड श्यामेंद्र दधीचि अपने कई साथियों के साथ मौके पर पहुंच कर मजदूरों को समझाया और अपनी समस्या को लिखकर देने की बात की।उसके बाद सभी मजदूर इक्कठे होकर अपनी मांगों की सूची अपना हस्ताक्षर कर दिया.उसके बाद प्लांट में बड़े गाड़ियों का प्रवेश कराया गया.करीब चार घंटे तक सीमेंट फैक्ट्री के गेट को मजदूर घेरे रहे. मजदूर अपनी मांगों का लिखित मांग पत्र एचआर हेड को दिया जिसको के एचआर हेड द्वारा तीन माह का समय दिया गया तब जाकर मजदूर हड़ताल से हटे और अपने अपने घर और काम पर चले गए.3
- पटना (फतुहा) – फतुहा नदी थाना क्षेत्र में पुलिस ने गांजा तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 7 अप्रैल 2026 की शाम करीब 5:50 बजे गुप्त सूचना के आधार पर की गई। पुलिस को सूचना मिली थी कि सबलपुर सिक्स लेन पुल के ऊपर से एक व्यक्ति गांजा लेकर पैदल गुजर रहा है। सूचना मिलते ही वरीय अधिकारियों के निर्देश पर थाना अध्यक्ष के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई और इलाके में चेकिंग अभियान चलाया गया। चेकिंग के दौरान एक संदिग्ध युवक पीठ पर काले रंग का बैग लेकर आता दिखाई दिया। पुलिस को देखते ही वह भागने लगा, लेकिन टीम ने पीछा कर उसे पकड़ लिया। गिरफ्तार युवक की पहचान बुधन कुमार (उम्र 19 वर्ष), पिता धनंजय राय, निवासी काला दियारा, थाना सालिमपुर, जिला पटना के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान उसके बैग से करीब 2.188 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया। पुलिस ने मादक पदार्थ को जब्त कर लिया है और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले में नदी थाना में कांड संख्या 131/26 दर्ज कर एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है।2
- फतुहा क्षेत्र में बहने वाली पुनपुन नदी अब लोगों के लिए जीवनदायिनी नहीं बल्कि जहर बनती जा रही है। नदी का पानी काला पड़ चुका है और उस पर तैरती जहरीली झाग व बदबू ने स्थानीय लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लोग इसे “जहर बनी नदी” कहने लगे हैं। इस गंभीर समस्या के विरोध में मानव अधिकार मंच के बैनर तले स्थानीय लोगों और पदाधिकारियों ने जोरदार धरना-प्रदर्शन और विरोध यात्रा निकाली। यह पदयात्रा समसपुर लोहा पुल से शुरू होकर गोविंदपुर, महारानी चौक, फतवा चौराहा, स्टेशन रोड और कल्याण नाथ मंदिर होते हुए महंत केशव महाविद्यालय तक पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार स्वास्थ्य योजनाओं की बात तो करती है, लेकिन प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों—जैसे गंदे नाले और कारखानों—पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय रहते पुनपुन नदी की सफाई नहीं हुई, तो इसका सीधा असर गंगा नदी की स्वच्छता पर भी पड़ेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी किनारे रहने वाले परिवारों में बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। बच्चों और बुजुर्गों में सांस, त्वचा और पेट संबंधी समस्याएं सामने आ रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि अगर जल्द कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।1