बांदा के तिंदवारी थाना क्षेत्र के सिंहपुर गांव के निवासी दिव्यांग धर्मेंद्र ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, 14 महीने पहले हुई मारपीट और मोबाइल तोड़े जाने की एक घटना में कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। जब वे डीआईजी के निर्देश पर इंसाफ़ की उम्मीद में थाने पहुंचे, तो उन्हें कथित तौर पर अपमान, मारपीट और धमकियों का सामना करना पड़ा और उन्हें बिना न्याय के लौटना पड़ा। यदि ये आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो यह केवल एक व्यक्ति का दर्द नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था की संवेदनहीनता को दर्शाता है जिसकी प्राथमिक जिम्मेदारी पीड़ित की रक्षा करना है। दूसरी ओर, थानाध्यक्ष संदीप पटेल ने इन सभी आरोपों को सिरे से निराधार बताते हुए इसे ₹6000 के लेन-देन से जुड़ा एक विवाद बताया है। इस स्थिति में, असली सवाल यह नहीं है कि कौन क्या कह रहा है, बल्कि यह है कि सच आखिर कहाँ दबा पड़ा है। लेख में इस बात पर जोर दिया गया है कि लोकतंत्र में न्याय केवल बयानबाजी से नहीं, बल्कि एक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के माध्यम से स्थापित होता है। सबसे पीड़ादायक पहलू यह है कि यह दिव्यांग व्यक्ति अब अपने परिवार सहित आत्मदाह करने की चेतावनी देने को मजबूर होने की बात कह रहा है। यदि किसी नागरिक को अपनी फरियाद सुनाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने की चेतावनी देनी पड़ती है, तो यह केवल उसकी बेबसी नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनशीलता पर एक तीखा कटाक्ष है। अब प्रशासन के सामने चुनौती केवल इन आरोपों का जवाब देना ही नहीं है, बल्कि यह साबित करना भी है कि कानून की चौखट पर न्याय बिकता नहीं, बल्कि मिलता भी है, और वर्दी का सम्मान उसके अधिकार से नहीं, बल्कि उसके आचरण से तय होता है।
बांदा के तिंदवारी थाना क्षेत्र के सिंहपुर गांव के निवासी दिव्यांग धर्मेंद्र ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, 14 महीने पहले हुई मारपीट और मोबाइल तोड़े जाने की एक घटना में कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। जब वे डीआईजी के निर्देश पर इंसाफ़ की उम्मीद में थाने पहुंचे, तो उन्हें कथित तौर पर अपमान, मारपीट और धमकियों का सामना करना पड़ा और उन्हें बिना न्याय के लौटना पड़ा। यदि ये आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो यह केवल एक व्यक्ति का दर्द नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था की संवेदनहीनता को दर्शाता है जिसकी प्राथमिक जिम्मेदारी पीड़ित की रक्षा करना है। दूसरी ओर, थानाध्यक्ष संदीप पटेल ने इन सभी आरोपों को सिरे से निराधार बताते हुए इसे ₹6000 के लेन-देन से जुड़ा एक विवाद बताया है। इस स्थिति में, असली सवाल यह नहीं है कि कौन क्या कह रहा है, बल्कि यह है कि सच आखिर कहाँ दबा पड़ा है। लेख में इस बात पर जोर दिया गया है कि लोकतंत्र में न्याय केवल बयानबाजी से नहीं, बल्कि एक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के माध्यम से स्थापित होता है। सबसे पीड़ादायक पहलू यह है कि यह दिव्यांग व्यक्ति अब अपने परिवार सहित आत्मदाह करने की चेतावनी देने को मजबूर होने की बात कह रहा है। यदि किसी नागरिक को अपनी फरियाद सुनाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने की चेतावनी देनी पड़ती है, तो यह केवल उसकी बेबसी नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनशीलता पर एक तीखा कटाक्ष है। अब प्रशासन के सामने चुनौती केवल इन आरोपों का जवाब देना ही नहीं है, बल्कि यह साबित करना भी है कि कानून की चौखट पर न्याय बिकता नहीं, बल्कि मिलता भी है, और वर्दी का सम्मान उसके अधिकार से नहीं, बल्कि उसके आचरण से तय होता है।
- उत्तर प्रदेश के बबेरू में मोहर्रम के नौवें दिन (नवमी) पर मातम मनाया गया। इस मौके पर लोगों ने आलाव में कूदकर मातम की रस्म अदा की। इसके साथ ही, ताजिया भी निकाला गया।1
- मौदहा नगर में नवमी मोहर्रम के अवसर पर मरहूम हाजी हकीमुद्दीन के बड़े इमामबाड़ा से कदीमी ताजिया जुलूस निकाला गया। इस दौरान पूरा नगर 'या हुसैन' के नारों से गूंज उठा, जिसमें हजारों की संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए और मातमी धुनों के बीच गम का इजहार किया। निजामी जामा मस्जिद पहुंचने के बाद अलाव कूदने की परंपरा निभाई गई। कर्बला के शहीदों की याद में छोटे-बड़े, बुजुर्ग और बच्चों ने आग का मातम किया। इस आयोजन को देखने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए एएसपी, एडीएम, एसडीएम, सीओ, कोतवाली प्रभारी सहित भारी पुलिस बल तैनात रहा।1
- ताजिया और मोहर्रम के नाम पर की जा रही 'खुराफात' पर एक संदेश में सीधे 'मोमिनों' और 'ईमान वालों' से सवाल किया गया है। इसमें पूछा गया है कि यह किस तरह की खुराफात है।1
- हमीरपुर जिले के सुमेरपुर थाना क्षेत्र के देवगांव गांव में तीन दोस्तों के साथ नदी में नहाने गए एक युवक की डूबने से मौत हो गई, जिससे इलाके में कोहराम मच गया। ग्रामीणों ने समय रहते दो बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन मृतक कृष्णा के शव की खोजबीन करने के बाद उसे नदी से निकाला और जिला अस्पताल पहुँचाया। इस घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, क्योंकि मात्र दो दिन पहले ही कृष्णा के पिता छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उनका इलाज कानपुर में चल रहा है। घर में पहले से ही संकट का माहौल था, और अब बेटे की मौत से परिवार और भी गहरे सदमे में है।4
- पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने गोवंश संरक्षण से संबंधित प्रयासों और विभागीय योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की है।1
- बंडा जिले के बबेरू कस्बे में दैनिक अमर उजाला के पत्रकार बाबूलाल गुप्त की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई है।1
- उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में स्थित जैतपुर कस्बे में ताजियों के अवसर पर गंगा-जमुनी तहजीब की एक अनुपम मिसाल देखने को मिली है। यह घटना धार्मिक सौहार्द और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बनी।1
- एक विज्ञापन के माध्यम से छात्र-छात्राओं और परिवारों के लिए अलग कमरों की अग्रिम बुकिंग उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। यह सुविधा केवल सीमित समय के लिए है, और इच्छुक व्यक्तियों को तुरंत संपर्क करने के लिए कहा गया है। संपर्क और व्हाट्सएप के लिए 9559160040 नंबर जारी किया गया है। इसके अतिरिक्त, वीआईपी कमरे भी अग्रिम बुकिंग के लिए उपलब्ध हैं, जिनके भुगतान संबंधी जानकारी के लिए 8299674120 पर संपर्क किया जा सकता है।1
- अरफाज खान नाम के एक व्यक्ति पर लड़कियों का पीछा करने और उनके वीडियो बनाने का आरोप लगा है। इस मामले में, यह मांग की जा रही है कि ऐसे कृत्य करने वाले लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।1