अनुज चौहान, मुख्य संवाददाता (मनुज क्रांति न्यूज़ - वतन की गरिमा) ने समाज के एक गंभीर मुद्दे को उठाया है, जिसे उन्होंने 'समाज की जड़ पर लगा दीमक' बताया है। उनका कहना है कि अक्सर 'बेटी पढ़ाओ, बहू पढ़ाओ, उन्हें आज़ाद करो' जैसे नारे सुने जाते हैं, लेकिन आज़ादी की इस आड़ में समाज से मर्यादा, शिष्टाचार और शर्म खत्म होती दिख रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बरेली की एसडीएम ज्योति मौर्य और आलोक मौर्य के मामले का ज़िक्र करते हुए कहा कि देश के अलग-अलग कोनों से ऐसे ही कई डरावने कांड सामने आ रहे हैं। इन मामलों में एक गरीब पति दिन-रात एक करके, अपनी ज़मीन और खेत बेचकर पत्नी को पढ़ाता-लिखाता है, ताकि उसका भविष्य सुधर सके। लेकिन, जैसे ही पत्नी को सरकारी नौकरी या अफ़सरी की कुर्सी मिलती है, वह सिन्दूर की कीमत और पति के सालों के त्याग को ठुकरा देती है। चौहान ने सवाल उठाया कि 10-15 साल की शादी और बच्चों के बाद, अफ़सर बनते ही किसी बाहरी व्यक्ति से 'अफेयर' और प्यार कैसे हो जाता है? वे इसे प्यार नहीं, बल्कि 'विशुद्ध रूप से स्वार्थ का खेल' करार देते हैं, जहाँ शादियों को व्यापार समझा जा रहा है और बेहतर पद वाला कोई दूसरा मिलने पर पहले वाले को दूध में से मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया जाता है। उन्होंने अफ़सोस जताया कि पुराने समय का समाज का डर, अपनों के प्रति लिहाज़ और लोक-लाज अब ढोंग बनकर रह गए हैं। इस धोखे के भयानक सामाजिक प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए, चौहान ने चेतावनी दी कि इस खेल का सबसे बड़ा नुकसान उन लाखों मासूम बेटियों और बहुओं को उठाना पड़ेगा जो सच में पढ़ना चाहती हैं। उनके अनुसार, गरीब या मध्यमवर्गीय पति या पिता अपनी बहुओं को घर से बाहर भेजने से डरने लगेंगे कि 'कहीं अफ़सर बनने के बाद यह भी हमें छोड़ कर न चली जाए!' उन्होंने कहा कि अगर समाज में ऐसे ही कांड चलते रहे और मर्यादा का कत्ल होता रहा, तो पवित्र रिश्तों से लोगों का भरोसा उठ जाएगा, और चंद लोगों के इस लालच तथा व्यापार की सज़ा पूरे समाज को भुगतनी पड़ेगी। अंत में, उन्होंने सभी प्रबुद्ध साथियों से सवाल किया कि क्या आज़ादी के नाम पर मर्यादा खो देना सही है, और इस कलयुगी खेल तथा टूटते विश्वास पर उनकी राय और इस पोस्ट को समाज को जगाने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा साझा करने का आग्रह किया।
अनुज चौहान, मुख्य संवाददाता (मनुज क्रांति न्यूज़ - वतन की गरिमा) ने समाज के एक गंभीर मुद्दे को उठाया है, जिसे उन्होंने 'समाज की जड़ पर लगा दीमक' बताया है। उनका कहना है कि अक्सर 'बेटी पढ़ाओ, बहू पढ़ाओ, उन्हें आज़ाद करो' जैसे नारे सुने जाते हैं, लेकिन आज़ादी की इस आड़ में समाज से मर्यादा, शिष्टाचार और शर्म खत्म होती दिख रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बरेली की एसडीएम ज्योति मौर्य और आलोक मौर्य के मामले का ज़िक्र करते हुए कहा कि देश के अलग-अलग कोनों से ऐसे ही कई डरावने कांड सामने आ रहे हैं। इन मामलों में एक गरीब पति दिन-रात एक करके, अपनी ज़मीन और खेत बेचकर पत्नी को पढ़ाता-लिखाता है, ताकि उसका भविष्य सुधर सके। लेकिन, जैसे ही पत्नी को सरकारी नौकरी या अफ़सरी की कुर्सी मिलती है, वह सिन्दूर की कीमत और पति के सालों के त्याग को ठुकरा देती है। चौहान ने सवाल उठाया कि 10-15 साल की शादी और बच्चों के बाद, अफ़सर बनते ही किसी बाहरी व्यक्ति से 'अफेयर' और प्यार कैसे हो जाता है? वे इसे प्यार नहीं, बल्कि 'विशुद्ध रूप से स्वार्थ का खेल' करार देते हैं, जहाँ शादियों को व्यापार समझा जा रहा है और बेहतर पद
वाला कोई दूसरा मिलने पर पहले वाले को दूध में से मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया जाता है। उन्होंने अफ़सोस जताया कि पुराने समय का समाज का डर, अपनों के प्रति लिहाज़ और लोक-लाज अब ढोंग बनकर रह गए हैं। इस धोखे के भयानक सामाजिक प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए, चौहान ने चेतावनी दी कि इस खेल का सबसे बड़ा नुकसान उन लाखों मासूम बेटियों और बहुओं को उठाना पड़ेगा जो सच में पढ़ना चाहती हैं। उनके अनुसार, गरीब या मध्यमवर्गीय पति या पिता अपनी बहुओं को घर से बाहर भेजने से डरने लगेंगे कि 'कहीं अफ़सर बनने के बाद यह भी हमें छोड़ कर न चली जाए!' उन्होंने कहा कि अगर समाज में ऐसे ही कांड चलते रहे और मर्यादा का कत्ल होता रहा, तो पवित्र रिश्तों से लोगों का भरोसा उठ जाएगा, और चंद लोगों के इस लालच तथा व्यापार की सज़ा पूरे समाज को भुगतनी पड़ेगी। अंत में, उन्होंने सभी प्रबुद्ध साथियों से सवाल किया कि क्या आज़ादी के नाम पर मर्यादा खो देना सही है, और इस कलयुगी खेल तथा टूटते विश्वास पर उनकी राय और इस पोस्ट को समाज को जगाने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा साझा करने का आग्रह किया।
- अनुज चौहान, मुख्य संवाददाता (मनुज क्रांति न्यूज़ - वतन की गरिमा) ने समाज के एक गंभीर मुद्दे को उठाया है, जिसे उन्होंने 'समाज की जड़ पर लगा दीमक' बताया है। उनका कहना है कि अक्सर 'बेटी पढ़ाओ, बहू पढ़ाओ, उन्हें आज़ाद करो' जैसे नारे सुने जाते हैं, लेकिन आज़ादी की इस आड़ में समाज से मर्यादा, शिष्टाचार और शर्म खत्म होती दिख रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बरेली की एसडीएम ज्योति मौर्य और आलोक मौर्य के मामले का ज़िक्र करते हुए कहा कि देश के अलग-अलग कोनों से ऐसे ही कई डरावने कांड सामने आ रहे हैं। इन मामलों में एक गरीब पति दिन-रात एक करके, अपनी ज़मीन और खेत बेचकर पत्नी को पढ़ाता-लिखाता है, ताकि उसका भविष्य सुधर सके। लेकिन, जैसे ही पत्नी को सरकारी नौकरी या अफ़सरी की कुर्सी मिलती है, वह सिन्दूर की कीमत और पति के सालों के त्याग को ठुकरा देती है। चौहान ने सवाल उठाया कि 10-15 साल की शादी और बच्चों के बाद, अफ़सर बनते ही किसी बाहरी व्यक्ति से 'अफेयर' और प्यार कैसे हो जाता है? वे इसे प्यार नहीं, बल्कि 'विशुद्ध रूप से स्वार्थ का खेल' करार देते हैं, जहाँ शादियों को व्यापार समझा जा रहा है और बेहतर पद वाला कोई दूसरा मिलने पर पहले वाले को दूध में से मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया जाता है। उन्होंने अफ़सोस जताया कि पुराने समय का समाज का डर, अपनों के प्रति लिहाज़ और लोक-लाज अब ढोंग बनकर रह गए हैं। इस धोखे के भयानक सामाजिक प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए, चौहान ने चेतावनी दी कि इस खेल का सबसे बड़ा नुकसान उन लाखों मासूम बेटियों और बहुओं को उठाना पड़ेगा जो सच में पढ़ना चाहती हैं। उनके अनुसार, गरीब या मध्यमवर्गीय पति या पिता अपनी बहुओं को घर से बाहर भेजने से डरने लगेंगे कि 'कहीं अफ़सर बनने के बाद यह भी हमें छोड़ कर न चली जाए!' उन्होंने कहा कि अगर समाज में ऐसे ही कांड चलते रहे और मर्यादा का कत्ल होता रहा, तो पवित्र रिश्तों से लोगों का भरोसा उठ जाएगा, और चंद लोगों के इस लालच तथा व्यापार की सज़ा पूरे समाज को भुगतनी पड़ेगी। अंत में, उन्होंने सभी प्रबुद्ध साथियों से सवाल किया कि क्या आज़ादी के नाम पर मर्यादा खो देना सही है, और इस कलयुगी खेल तथा टूटते विश्वास पर उनकी राय और इस पोस्ट को समाज को जगाने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा साझा करने का आग्रह किया।2
- उन्नाव पुलिस ने एक बड़े लूटकांड का खुलासा करते हुए पाँच शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह मामला 25 मई की रात का है, जब आशाखेड़ा क्षेत्र से कानपुर के लिए फ्रिज और एसी यूनिट्स से भरा एक ट्रक निकला था। ट्रक चालक नीरज कुमार वाहन लेकर रवाना हुए, लेकिन जीपीएस ट्रैकिंग में ट्रक कानपुर की बजाय वापस लखनऊ की ओर जाता दिखा, और कुछ देर बाद टोल प्लाजा के पास उसका जीपीएस भी बंद हो गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हो गई। जांच और सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर सामने आया कि बदमाशों ने चालक पर हमला कर उसे घायल कर दिया था और ट्रक लूट लिया था। इतना ही नहीं, आरोपियों ने ट्रक में रखे कई फ्रिज बाजार में बेच भी दिए थे। उन्नाव पुलिस की लगातार कार्रवाई के बाद इस गिरोह के सभी पाँच सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक कंटेनर, लूटे गए 77 फ्रिजों में से 47 फ्रिज, और 40 एसी बरामद किए हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में आगे की विधिक कार्रवाई जारी है और गिरोह से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। इस सफल कार्रवाई को उन्नाव पुलिस की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।1
- उन्नाव जिले के सगौली स्थित एक तालाब में दस साल के लंबे अंतराल के बाद कमल के फूल फिर से खिले हैं, जो एक दुर्लभ नजारा है। हालांकि, यहां के स्थानीय परिवार लगातार इन कमल के फूलों को नष्ट कर रहे हैं। उनका उद्देश्य सिंघाड़े की फसल उगाना है, जिसके लिए वे कमल के पौधों को या तो उखाड़कर फेंक देते हैं या उन्हें किसी और तरीके से हटा देते हैं, जिससे कमल की यह बहुप्रतीक्षित फसल हर बार बर्बाद हो जाती है।1
- उन्नाव में भीषण गर्मी के बीच पुलिस प्रशासन का एक मानवीय और प्रेरणादायक चेहरा सामने आया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जय प्रकाश सिंह ने भीषण गर्मी और लू से बचाव के लिए यातायात व्यवस्था संभाल रहे पुलिसकर्मियों को सहायता प्रदान की है। पुलिस कार्यालय परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने 88 पीआरडी और होमगार्ड जवानों को पानी की बोतलें और छाते वितरित किए। उन्होंने जवानों का उत्साहवर्धन करते हुए इस बात पर जोर दिया कि चिलचिलाती धूप में यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है। इसी को ध्यान में रखते हुए, जवानों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी गई है, और उन्हें आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई है। एसएसपी ने जवानों को समय-समय पर पानी पीने, छाते का उपयोग करने और गर्मी से बचाव के सभी आवश्यक उपाय अपनाने के निर्देश भी दिए। इस अवसर पर पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। उन्नाव पुलिस की यह पहल जवानों के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान का एक बड़ा संदेश दे रही है।1
- कानपुर में साइबर ठगों के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। पनकी पुलिस ने इस मामले में पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से 12,383 फर्जी आईडी पर सक्रिय किए गए सिम कार्ड, आठ लैपटॉप, आठ स्मार्टफोन और 42 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। ये आरोपी साइबर ठगों को प्री-एक्टिवेटेड सिम और ओटीपी उपलब्ध कराते थे। मामले की गहराई से जांच के लिए पुलिस कमिश्नर ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।1
- प्रकृति के साथ रहकर स्वस्थ जीवन जीने और दीर्घायु प्राप्त करने पर जोर दिया गया है। संदेश में कहा गया है कि प्रकृति के साथ रहने से रोगों से मुक्ति मिलती है और लंबा जीवन दान प्राप्त होता है। यह भी अपील की गई है कि इस संदेश को जनहित में जारी किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां बीमारियों से दूर रहकर स्वस्थ और लंबा जीवन जी सकें। जय श्री राम।1
- उन्नाव में पुलिस और एक बदमाश के बीच हुई मुठभेड़ में बड़ी सफलता हाथ लगी है। एसओजी, सर्विलांस और अजगैन पुलिस की एक संयुक्त टीम ने ट्रक लूटकांड के आरोपी छोट्टन चौधरी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, यह मुठभेड़ नवाबगंज क्षेत्र में हुई, जहां घेराबंदी के दौरान बदमाश ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी थी। जवाब में हुई कार्रवाई में छोट्टन चौधरी के पैर में गोली लगी और वह घायल हो गया। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक अवैध तमंचा, जिंदा कारतूस और खोखा कारतूस बरामद किए हैं। पूछताछ में आरोपी ने अजगैन थाना क्षेत्र में हुई ट्रक लूट की वारदात को अंजाम देने की बात कबूल कर ली है। घायल बदमाश को इलाज के लिए सीएचसी नवाबगंज भेजा गया है। पुलिस अब इस पूरे गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में तेजी से जुटी हुई है। उन्नाव पुलिस की इस कार्रवाई से जिले के अपराधियों में हड़कंप मच गया है।2
- उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक मौलाना को दो दिन पहले योगी, मोदी और अमित शाह को 'गुंडा' बताने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी के बाद उसकी 'चाल बदल' गई है।1