हरदोई गूजर में 24 लाख का मरघट निर्माण! जमीन पर न निर्माण, न ढांचा—ऑनलाइन रिकॉर्ड में भुगतान का खेल? जनपद जालौन के डकोर विकासखंड क्षेत्र के ग्राम हरदोई गूजर से सरकारी विकास कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। उपलब्ध ‘मेरी पंचायत’ ऑनलाइन रिकॉर्ड के स्क्रीनशॉट में मरघट निर्माण से संबंधित कार्यों पर लाखों रुपये के भुगतान का विवरण दिखाई दे रहा है, जबकि ग्रामीणों के साथ मौके पर किए गए निरीक्षण में निर्माण कार्य मौके पर दिखाई नहीं देने का दावा किया गया है। ऑनलाइन रिकॉर्ड में Marghat Nirman कार्य के लिए अनुमानित लागत ₹24.36 लाख और व्यय ₹23,28,583 दर्शाया गया है। रिकॉर्ड में कार्य को 4th State Finance Commission से संबंधित बताया गया है। वहीं भुगतान संबंधी स्क्रीनशॉट में KHUSI CONTRACTOR AND SUPPLIERS के नाम से अलग-अलग मदों में भुगतान दर्ज दिखाई देता है। एक अन्य रिकॉर्ड में Antesthi Sthal Nirman Hetu Bhugtan के नाम से क्रमशः ₹4,98,038, ₹3,70,980, ₹58,205, ₹78,844 और ₹3,23,366 जैसी धनराशियों के भुगतान का विवरण दिखाई दे रहा है। इन सभी रिकॉर्डों की वास्तविकता और कार्य की भौतिक स्थिति की आधिकारिक जांच जरूरी है। सबसे बड़ा सवाल—24 लाख खर्च हुए तो मरघट कहां है? ग्रामीणों का आरोप है कि मरघट निर्माण के नाम पर सरकारी धनराशि खर्च दिखाई जा रही है, लेकिन जमीन पर निर्माण कार्य नहीं दिख रहा। मौके पर सिर्फ झाड़ियां/देशी झंकार जैसी स्थिति दिखाई देने की बात कही गई है। यदि ऑनलाइन रिकॉर्ड में लाखों रुपये का खर्च दर्ज है तो— क्या खंड विकास अधिकारी ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया था? क्या ग्राम पंचायत सचिव ने निर्माण कार्य का सत्यापन किया? यदि निरीक्षण हुआ था तो निर्माण की वास्तविक स्थिति क्या पाई गई? बिना निर्माण के भुगतान कैसे हुआ? क्या माप पुस्तिका (MB), बिल-वाउचर और कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र मौजूद हैं? क्या भुगतान से पहले जियो-टैग/फोटो के आधार पर सत्यापन किया गया? एक ही कार्य के लिए अलग-अलग भुगतान किस आधार पर किए गए? क्या संबंधित ठेकेदार/फर्म ने वास्तव में मौके पर काम कराया? यदि काम हुआ है तो उसकी वर्तमान भौतिक स्थिति कहां है? रिकॉर्ड बनाम जमीन की हकीकत की जांच जरूरी यह मामला केवल आरोपों के आधार पर निष्कर्ष निकालने का नहीं, बल्कि ऑनलाइन भुगतान रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति का आधिकारिक मिलान कराने का है। यदि जांच में रिकॉर्ड के मुताबिक भुगतान और जमीन पर कार्य के बीच अंतर मिलता है तो जिम्मेदार अधिकारियों, पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित भुगतान प्राप्तकर्ता की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। खबर चलने के बाद क्या जिला प्रशासन मामले का संज्ञान लेकर मौके पर जांच कराएगा? क्या तकनीकी टीम से नाप-जोख कराकर यह पता लगाया जाएगा कि आखिर लाखों रुपये का मरघट निर्माण जमीन पर कहां हुआ? यह जांच का विषय है—सरकारी धन का एक-एक रुपया जनता के टैक्स से आता है। आपके गांव में भी विकास कार्यों के नाम पर ऐसा कोई मामला सामने आया है? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। वीडियो को आखिर तक देखिए और अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। #जालौन #उरई #डकोर #हरदोईगूजर #ग्रामपंचायत #मेरीपंचायत #मरघटनिर्माण #विकासकार्य #सरकारीधन #सरकारीपैसा #भ्रष्टाचार #विकासमेंभ्रष्टाचार #पंचायतभ्रष्टाचार #पंचायत #ग्रामप्रधान #सचिव #खंडविकासअधिकारी #BDO #जालौनन्यूज #उरईन्यूज #डकोरन्यूज #ब्रेकिंगन्यूज #ग्राउंडरिपोर्ट #ग्राउंडरियलिटी #जनताकीसच्चाई #जांचकीमांग #सरकारीयोजना #सरकारीखर्च #विकासकाकार्य #उत्तरप्रदेश
हरदोई गूजर में 24 लाख का मरघट निर्माण! जमीन पर न निर्माण, न ढांचा—ऑनलाइन रिकॉर्ड में भुगतान का खेल? जनपद जालौन के डकोर विकासखंड क्षेत्र के ग्राम हरदोई गूजर से सरकारी विकास कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। उपलब्ध ‘मेरी पंचायत’ ऑनलाइन रिकॉर्ड के स्क्रीनशॉट में मरघट निर्माण से संबंधित कार्यों पर लाखों रुपये के भुगतान का विवरण दिखाई दे रहा है, जबकि ग्रामीणों के साथ मौके पर किए गए निरीक्षण में निर्माण कार्य मौके पर दिखाई नहीं देने का दावा किया गया है। ऑनलाइन रिकॉर्ड में Marghat Nirman कार्य के लिए अनुमानित लागत ₹24.36 लाख और व्यय ₹23,28,583 दर्शाया गया है। रिकॉर्ड में कार्य को 4th State Finance Commission से संबंधित बताया गया है। वहीं भुगतान संबंधी स्क्रीनशॉट में KHUSI CONTRACTOR AND SUPPLIERS के नाम से अलग-अलग मदों में भुगतान दर्ज दिखाई देता है। एक अन्य रिकॉर्ड में Antesthi Sthal Nirman Hetu Bhugtan के नाम से क्रमशः ₹4,98,038, ₹3,70,980, ₹58,205, ₹78,844 और ₹3,23,366 जैसी धनराशियों के भुगतान का विवरण दिखाई दे रहा है। इन सभी रिकॉर्डों की वास्तविकता और कार्य की भौतिक स्थिति की आधिकारिक जांच जरूरी है। सबसे बड़ा सवाल—24 लाख खर्च हुए तो मरघट कहां है? ग्रामीणों का आरोप है कि मरघट निर्माण के नाम पर सरकारी धनराशि खर्च दिखाई जा रही है, लेकिन जमीन पर निर्माण कार्य नहीं दिख रहा। मौके पर सिर्फ झाड़ियां/देशी झंकार जैसी स्थिति दिखाई देने की बात कही गई है। यदि ऑनलाइन रिकॉर्ड में लाखों रुपये का खर्च दर्ज है तो— क्या खंड विकास अधिकारी ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया था? क्या ग्राम पंचायत सचिव ने निर्माण कार्य का सत्यापन किया? यदि निरीक्षण हुआ था तो निर्माण की वास्तविक स्थिति क्या पाई गई? बिना निर्माण के भुगतान कैसे हुआ? क्या माप पुस्तिका (MB), बिल-वाउचर और कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र मौजूद हैं? क्या भुगतान से पहले जियो-टैग/फोटो के आधार पर सत्यापन किया गया? एक ही कार्य के लिए अलग-अलग भुगतान किस आधार पर किए गए? क्या संबंधित ठेकेदार/फर्म ने वास्तव में मौके पर काम कराया? यदि काम हुआ है तो उसकी वर्तमान भौतिक स्थिति कहां है? रिकॉर्ड बनाम जमीन की हकीकत की जांच जरूरी यह मामला केवल आरोपों के आधार पर निष्कर्ष निकालने का नहीं, बल्कि ऑनलाइन भुगतान रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति का आधिकारिक मिलान कराने का है। यदि जांच में रिकॉर्ड के मुताबिक भुगतान और जमीन पर कार्य के बीच अंतर मिलता है तो जिम्मेदार अधिकारियों, पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित भुगतान प्राप्तकर्ता की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। खबर चलने के बाद क्या जिला प्रशासन मामले का संज्ञान लेकर मौके पर जांच कराएगा? क्या तकनीकी टीम से नाप-जोख कराकर यह पता लगाया जाएगा कि आखिर लाखों रुपये का मरघट निर्माण जमीन पर कहां हुआ? यह जांच का विषय है—सरकारी धन का एक-एक रुपया जनता के टैक्स से आता है। आपके गांव में भी विकास कार्यों के नाम पर ऐसा कोई मामला सामने आया है? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। वीडियो को आखिर तक देखिए और अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। #जालौन #उरई #डकोर #हरदोईगूजर #ग्रामपंचायत #मेरीपंचायत #मरघटनिर्माण #विकासकार्य #सरकारीधन #सरकारीपैसा #भ्रष्टाचार #विकासमेंभ्रष्टाचार #पंचायतभ्रष्टाचार #पंचायत #ग्रामप्रधान #सचिव #खंडविकासअधिकारी #BDO #जालौनन्यूज #उरईन्यूज #डकोरन्यूज #ब्रेकिंगन्यूज #ग्राउंडरिपोर्ट #ग्राउंडरियलिटी #जनताकीसच्चाई #जांचकीमांग #सरकारीयोजना #सरकारीखर्च #विकासकाकार्य #उत्तरप्रदेश
- हरदोई गूजर में 24 लाख का मरघट निर्माण! जमीन पर न निर्माण, न ढांचा—ऑनलाइन रिकॉर्ड में भुगतान का खेल? जनपद जालौन के डकोर विकासखंड क्षेत्र के ग्राम हरदोई गूजर से सरकारी विकास कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। उपलब्ध ‘मेरी पंचायत’ ऑनलाइन रिकॉर्ड के स्क्रीनशॉट में मरघट निर्माण से संबंधित कार्यों पर लाखों रुपये के भुगतान का विवरण दिखाई दे रहा है, जबकि ग्रामीणों के साथ मौके पर किए गए निरीक्षण में निर्माण कार्य मौके पर दिखाई नहीं देने का दावा किया गया है। ऑनलाइन रिकॉर्ड में Marghat Nirman कार्य के लिए अनुमानित लागत ₹24.36 लाख और व्यय ₹23,28,583 दर्शाया गया है। रिकॉर्ड में कार्य को 4th State Finance Commission से संबंधित बताया गया है। वहीं भुगतान संबंधी स्क्रीनशॉट में KHUSI CONTRACTOR AND SUPPLIERS के नाम से अलग-अलग मदों में भुगतान दर्ज दिखाई देता है। एक अन्य रिकॉर्ड में Antesthi Sthal Nirman Hetu Bhugtan के नाम से क्रमशः ₹4,98,038, ₹3,70,980, ₹58,205, ₹78,844 और ₹3,23,366 जैसी धनराशियों के भुगतान का विवरण दिखाई दे रहा है। इन सभी रिकॉर्डों की वास्तविकता और कार्य की भौतिक स्थिति की आधिकारिक जांच जरूरी है। सबसे बड़ा सवाल—24 लाख खर्च हुए तो मरघट कहां है? ग्रामीणों का आरोप है कि मरघट निर्माण के नाम पर सरकारी धनराशि खर्च दिखाई जा रही है, लेकिन जमीन पर निर्माण कार्य नहीं दिख रहा। मौके पर सिर्फ झाड़ियां/देशी झंकार जैसी स्थिति दिखाई देने की बात कही गई है। यदि ऑनलाइन रिकॉर्ड में लाखों रुपये का खर्च दर्ज है तो— क्या खंड विकास अधिकारी ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया था? क्या ग्राम पंचायत सचिव ने निर्माण कार्य का सत्यापन किया? यदि निरीक्षण हुआ था तो निर्माण की वास्तविक स्थिति क्या पाई गई? बिना निर्माण के भुगतान कैसे हुआ? क्या माप पुस्तिका (MB), बिल-वाउचर और कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र मौजूद हैं? क्या भुगतान से पहले जियो-टैग/फोटो के आधार पर सत्यापन किया गया? एक ही कार्य के लिए अलग-अलग भुगतान किस आधार पर किए गए? क्या संबंधित ठेकेदार/फर्म ने वास्तव में मौके पर काम कराया? यदि काम हुआ है तो उसकी वर्तमान भौतिक स्थिति कहां है? रिकॉर्ड बनाम जमीन की हकीकत की जांच जरूरी यह मामला केवल आरोपों के आधार पर निष्कर्ष निकालने का नहीं, बल्कि ऑनलाइन भुगतान रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति का आधिकारिक मिलान कराने का है। यदि जांच में रिकॉर्ड के मुताबिक भुगतान और जमीन पर कार्य के बीच अंतर मिलता है तो जिम्मेदार अधिकारियों, पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित भुगतान प्राप्तकर्ता की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। खबर चलने के बाद क्या जिला प्रशासन मामले का संज्ञान लेकर मौके पर जांच कराएगा? क्या तकनीकी टीम से नाप-जोख कराकर यह पता लगाया जाएगा कि आखिर लाखों रुपये का मरघट निर्माण जमीन पर कहां हुआ? यह जांच का विषय है—सरकारी धन का एक-एक रुपया जनता के टैक्स से आता है। आपके गांव में भी विकास कार्यों के नाम पर ऐसा कोई मामला सामने आया है? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। वीडियो को आखिर तक देखिए और अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। #जालौन #उरई #डकोर #हरदोईगूजर #ग्रामपंचायत #मेरीपंचायत #मरघटनिर्माण #विकासकार्य #सरकारीधन #सरकारीपैसा #भ्रष्टाचार #विकासमेंभ्रष्टाचार #पंचायतभ्रष्टाचार #पंचायत #ग्रामप्रधान #सचिव #खंडविकासअधिकारी #BDO #जालौनन्यूज #उरईन्यूज #डकोरन्यूज #ब्रेकिंगन्यूज #ग्राउंडरिपोर्ट #ग्राउंडरियलिटी #जनताकीसच्चाई #जांचकीमांग #सरकारीयोजना #सरकारीखर्च #विकासकाकार्य #उत्तरप्रदेश1
- *शिकायतों का निर्धारित समयसीमा के भीतर करें गुणवत्तापूर्ण निस्तारण: जिलाधिकारी* *जिलाधिकारी ने संपूर्ण समाधान दिवस डेरापुर में सुनीं जनसमस्याएं, त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के दिए निर्देश।* कानपुर देहात, 1 अगस्त 2026 जनपद की समस्त तहसीलों में संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया गया। जिला स्तरीय संपूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी कपिल सिंह एवं पुलिस अधीक्षक श्रद्धा नरेन्द्र पाण्डेय, अपर जिलाधिकारी न्यायिक दिग्विजय सिंह ने तहसील डेरापुर में आमजन की समस्याओं एवं शिकायतों को गंभीरतापूर्वक सुना तथा संबंधित अधिकारियों को प्रत्येक प्रकरण के त्वरित, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए। तहसील डेरापुर में आयोजित समाधान दिवस के दौरान कुल 251 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 05 शिकायत का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी शिकायतों का निर्धारित समयसीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए तथा शिकायतकर्ता की संतुष्टि को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिकायत का मौके पर जाकर परीक्षण किया जाए और समाधान के उपरांत शिकायतकर्ता से वार्ता कर उसका फीडबैक भी लिया जाए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही अथवा उदासीनता पाए जाने पर संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भूमि विवाद से जुड़े मामलों में राजस्व एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही मुख्यमंत्री संदर्भ, जनप्रतिनिधियों के संदर्भ, आईजीआरएस तथा तहसील दिवस में प्राप्त सभी शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण पर विशेष बल दिया। जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने कार्यालयों में प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से 12 बजे तक नियमित जनसुनवाई करें, शिकायत पंजिका का संधारण करें, प्रकरणों की नियमित समीक्षा करें तथा आमजन के साथ संवेदनशील एवं शिष्ट व्यवहार सुनिश्चित करें। जनसुनवाई के दौरान दो शिकायतकर्ताओं राकेश कुमार निवासी ग्राम टिकनगांव झींझक व अमित बाजपेई निवासी ग्राम सैफाबाद द्वारा जिलाधिकारी को खतौनी में नाम संशोधन संबंधी प्रार्थना पत्र दिया गया जिस पर जिलाधिकारी ने तत्काल आवश्यक कार्रवाई करते हुए संशोधित सही खतौनी शिकायतकर्ताओं को सौंपी, शिकायतकर्ताओ द्वारा प्रसन्नता व्यक्त की गई। वहीं जिलाधिकारी द्वारा तहसील डेरापुर अंतर्गत संचालित गौशालाओं का जिला स्तरीय अधिकारियों को निरीक्षण कर आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। जनपद की अन्य तहसीलों में भी प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में संपूर्ण समाधान दिवस आयोजित कर शिकायतकर्ताओं की समस्याओं को सुना गया तथा उनके निस्तारण हेतु आवश्यक निर्देश दिए गए। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) दिग्विजय सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा0 जयगोविन्द, उप जिलाधिकारी डेरापुर, क्षेत्राधिकारी, जिला विकास अधिकारी सुनील तिवारी, जिला परियोजना अधिकारी डीआरडीए अनिरूद्ध सिंह सहित समस्त जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।1
- कानपुर देहात से ब्रेकिंग न्यूज़ रिपोर्टिंग वेद प्रकाश कानपुर देहात से नई नियुक्त ADO पुष्पा देवी एवं विकास अधिकारी अनिल यादव कर्मचारी लगाई तीखी फटकार की फटकार दिया सख्त से निर्देश ADO पुष्पा देवी एवं ग्राम विकास अधिकारी अनिल यादव,पूरा मामला कानपुर देहात का है ! ब्लॉक सरवन खेड़ा ग्राम पंचायत लोदीपुर चौपाल बैठक मे बदलती देखिए समस्याएं उलट फे र और सुलझाईं समस्या कानपुर देहात के सरवन खेड़ा क्षेत्र में ग्राम पंचायत लोदीपुर पंचायत भवन में आज दिनांक 30 /07/26 मैं आयोजित बैठक कार्यक्रम वीडियो समाज कल्याण विभाग अध्यक्ष पुष्पा देवी एवं ग्राम विकास अधिकारी अनिल यादव पंचायत प्रधान प्रतिनिधि दीपक के उपस्थिति में आयोजित चौपाल बैठक ग्रामीणों की शिकायतों को लेकर दिखाई नाराजगी ! जैसे विधाव् पेंशन योजना,वृद्धा दिव्यांग,पेंशन कन्या सुमंगला योजना के बारे में भी जानकारी नई निर्वाचित ADO पुष्पा देवी ब्लॉक सरवन खेड़ा कानपुर देहात से सुनी गई समस्या ग्रामीणों की समस्या तुरंत सख्त से सख्त दिशा निर्देश उपस्थित कर्मचारी आशा बहु, रानी देवी, केयरटेकर बेबी, पंचायत सहायक दीपमाला, रोजगार सेवक संदीप बाबू, एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ती। ग्रामीणों की उपस्थिति 50 लगभग में ग्रामीण रहे उपस्थित ग्रामीणों के बीच चली बैठक सुनी गई समस्याए। सरवन खेड़ा ब्लॉक नई निर्वाचित ADO पुष्पा देवी योजना को लेकर हुई गंभीर जैसे राशनकार्ड, पेंशन, नाली, सड़क,बिजली,आवास, एवं अन्य समस्या सूचना के अतिरिक्त बाद चौपाल बैठक मे ना हुए अधिकारी एवं कर्मचारी ब्लाक जिम्मेदार नहीं निभा रहा है अधिकारी एवं कर्मचारी समय से नहीं पहुंच सके वह अपनी जिम्मेदारियां को भूल रहे इसीलिए मौके पर समाधान नहीं हो सकता ग्राम पंचायत लोदीपुर ब्लॉक सरवन खेड़ा कानपुर देहात।4
- श्रावण की तैयारियों का डीएम-एसपी ने लिया जायजा, कपालेश्वर महादेव मंदिर में किया निरीक्षण; सुरक्षा और सुविधाओं के दिए सख्त निर्देश कानपुरदेहात,श्रावण मास और कांवड़ यात्रा को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रहा है। शनिवार करीब 3 बजे जिलाधिकारी कपिल सिंह एवं पुलिस अधीक्षक श्रद्धा नरेंद्र पांडेय ने डेरापुर स्थित प्राचीन श्री कपालेश्वर महादेव मंदिर का स्थलीय निरीक्षण कर तैयारियों का व्यापक जायजा लिया। अधिकारियों ने मंदिर परिसर, कांवड़ मार्ग और श्रद्धालुओं के लिए की जा रही व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी कपिल सिंह ने मंदिर परिसर एवं आसपास नियमित साफ-सफाई, पर्याप्त पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, बैरिकेडिंग तथा श्रद्धालुओं की सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर समय से पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रावण मास में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, इसलिए व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। वहीं पुलिस अधीक्षक श्रद्धा नरेंद्र पांडेय ने सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण करते हुए कांवड़ मार्ग पर प्रभावी पुलिस तैनाती, यातायात संचालन, भीड़ प्रबंधन और संवेदनशील स्थलों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति से तत्काल प्रभाव से निपटा जा सके। निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने श्री कपालेश्वर महादेव मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर जनपदवासियों के सुख, शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी (न्याय) दिग्विजय सिंह, उपजिलाधिकारी डेरापुर सुप्रिया गुप्ता, क्षेत्राधिकारी डेरापुर, तहसीलदार डेरापुर, नगर पंचायत डेरापुर के अधिशासी अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं पुलिस बल मौजूद रहा।1
- Jaloun डीपीआरओ ने सचिवों संग की अभद्रता, मामले से गुस्साए धरने l डीपीआरओ ने सचिवों संग की अभद्रता, मामले से गुस्साए धरने पर बैठे, ज्ञापन देने पहुंचे थे ग्राम पंचायत अधिकारी संघ के पदाधिकारी, डीपीआरओ पर ज्ञापन फेंकने व अभद्रता के आरोप, मामले से गुस्साए सचिव व पदाधिकारी, कार्यालय के बाहर शुरू किया धरना, पूर्व में भी विवादों में रहे हैं डीपीआरओ राम अयोध्या प्रसाद, कलक्ट्रेट परिसर स्थित डीपीआरओ कार्यालय का मामला।1
- जालौन के राजकीय मेडिकल कॉलेज में परिजनों को अपनी बच्ची का इलाज कराना पड़ा भारी जालौन के राजकीय मेडिकल कॉलेज में परिजनों को अपनी बच्ची का इलाज कराना पड़ा भारी, District Magistrate/District Election Officer, Jalaun Dio Jalaun इलाज करने की जगह बच्ची का पैर ही तोड़ दिया अपने आप को 4 साल का एक्सपीरियंस होल्डर बताने वाले डॉक्टर साहब ने राजकीय मेडिकल कॉलेज में नए प्राचार्य के आने के बाद लगातार सुविधाएं बेहतर होती नजर आ रही वही दूसरी ओर रमन पटेल नाम के प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर उनकी मेहनत पर पानी फेरते नजर आ रहे परिजनों के मना करने के बाद भी जोर जबरजस्ती करते हुए साहब इलाज कर रहे परिजनों द्वारा मना करने पर हड़का कर भगा दिया और सुनो साहब की करतूत xra भी करा दिया और भगा दिया परिजनों द्वारा रात भर बच्ची को दर्द होने पर जिला चिकित्सालय उरई में दिखाया तो बच्ची को 2 जगह फैक्चर निकला परिजनों द्वारा जिलाधिकारी और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन देकर कार्यवाही करने की बात कही1