logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

बंगाल की रैली में बीजेपी के नेता अमित शाह ने क्या कहा और जवाबी हमलों में ममता बनर्जी ने क्या कुछ कहा क्या हो सकता है आने वाले समय में ?

2 hrs ago
user_MOHD Ahsan.   9540623826
MOHD Ahsan. 9540623826
Media house मयूर विहार, पूर्वी दिल्ली, दिल्ली•
2 hrs ago

बंगाल की रैली में बीजेपी के नेता अमित शाह ने क्या कहा और जवाबी हमलों में ममता बनर्जी ने क्या कुछ कहा क्या हो सकता है आने वाले समय में ?

More news from New Delhi and nearby areas
  • दिल्ली एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा टलाः दो विमानों के पंख टकराए नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर गुरुवार को बड़ा हादसा होते-होते टल गया। यहां उड़ान भरने की तैयारी कर रहे SpiceJet के विमान का पंख खड़ी Akasa Air के विमान से टकरा गया। जानकारी के मुताबिक, आकासा एयर का विमान पहले से खड़ा था, जबकि स्पाइसजेट का विमान टेकऑफ की तैयारी में था। इसी दौरान दोनों विमानों के पंख आपस में टकरा गए। घटना के तुरंत बाद स्पाइसजेट की उड़ान रोक दी गई। हालांकि इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। एयरपोर्ट प्रशासन और संबंधित एजेंसियां मामले की जांच में जुट गई हैं। समय रहते एक बड़ा हादसा टल गया।
    1
    दिल्ली एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा टलाः दो विमानों के पंख टकराए
नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर गुरुवार को बड़ा हादसा होते-होते टल गया। यहां उड़ान भरने की तैयारी कर रहे SpiceJet के विमान का पंख खड़ी Akasa Air के विमान से टकरा गया।
जानकारी के मुताबिक, आकासा एयर का विमान पहले से खड़ा था, जबकि स्पाइसजेट का विमान टेकऑफ की तैयारी में था। इसी दौरान दोनों विमानों के पंख आपस में टकरा गए। घटना के तुरंत बाद स्पाइसजेट की उड़ान रोक दी गई।
हालांकि इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। एयरपोर्ट प्रशासन और संबंधित एजेंसियां मामले की जांच में जुट गई हैं। समय रहते एक बड़ा हादसा टल गया।
    user_Mohit Badtiya
    Mohit Badtiya
    Shahdara, New Delhi•
    52 min ago
  • Post by MOHD Ahsan. 9540623826
    1
    Post by MOHD Ahsan.   9540623826
    user_MOHD Ahsan.   9540623826
    MOHD Ahsan. 9540623826
    Media house मयूर विहार, पूर्वी दिल्ली, दिल्ली•
    2 hrs ago
  • शाहदरा जिला के MS पार्क थाने को 12 अप्रैल को एक सूचना मिलती घर में चोरी के मामले में जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया था E FIR द्वारा और MS पार्क थाने के SHO के नेतृत्व में एक टीम बनाई थी पुलिस टीम ने घटना स्थल के आसपास के लगे सीसीटीवी फुटेज चेक किये और एक सस्पेक्ट दिखाई दिया लोकल इंटेलीजेंस भी तैनात किये जिसके बाद आरोपी को गिरफ्तार किया और चोरी का सारा सामान बरामद किया
    1
    शाहदरा जिला के MS पार्क थाने को 12 अप्रैल को एक सूचना मिलती घर में चोरी के मामले में जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया था E FIR द्वारा और MS पार्क थाने के SHO के नेतृत्व में एक टीम बनाई थी पुलिस टीम ने घटना स्थल के आसपास के लगे सीसीटीवी फुटेज चेक किये और एक सस्पेक्ट दिखाई दिया लोकल इंटेलीजेंस भी तैनात किये जिसके बाद आरोपी को गिरफ्तार किया और चोरी का सारा सामान बरामद किया
    user_Sanjay Khan
    Sanjay Khan
    शाहदरा, शाहदरा, दिल्ली•
    8 hrs ago
  • गाज़ियाबाद की आग: हादसा या सुनियोजित साज़िश,आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। कबाड़ियों के गोदाम एवं झुग्गी-झोपड़ियों में विशेष रिपोर्ट: इंडिया न्यूज़ 7 पवन सूर्यवंशी ब्यूरो चीफ ऑल एनसीआर गाज़ियाबाद के इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के अंतर्गत कनावनी गांव के पास स्थित कबाड़े के गोदाम झुग्गी-झोपड़ियों में लगी हालिया भीषण आग ने एक बार फिर OGW नेटवर्क और झुग्गी क्लस्टर पर उठते गंभीर सवाल,उन सवालों को जिंदा कर दिया है, जो पिछले कई वर्षों से दबे हुए थे, लेकिन हर नई घटना के साथ फिर सतह पर आ जाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि एक ऐसा सिलसिला है जो समय-समय पर दोहराया जाता रहा है और हर बार कारण अलग-अलग बताकर मामला ठंडा कर दिया जाता है। कभी इसे शॉर्ट सर्किट कहा जाता है, कभी सिलेंडर ब्लास्ट, तो कभी गर्मी का असर, लेकिन लगातार दोहराती घटनाएं अब संयोग से ज्यादा कुछ प्रतीत होने लगी हैं। जिलाधिकारी महोदय श्री रविन्द्र कुमार मॉंदड़ द्वारा 150 लगभग झुकी झोपड़िया में समान लग जा रहा है। डीसीपी श्री धवल जायसवाल एवं समस्त पुलिस प्रशासन द्वारा जलकल पुलिस द्वारा आंख पर काबू करने की मस्कट जारी है। कनावनी, इंदिरापुरम, कौशांबी से लेकर गाजीपुर मंडी और आसपास के डेरी क्षेत्रों तक फैले झुग्गी क्लस्टर्स को अगर एक साथ जोड़कर देखा जाए, तो एक ऐसा भूगोल सामने आता है जहां आबादी घनी है, निगरानी सीमित है और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया कमजोर मानी जाती है। ऐसे क्षेत्रों में किसी भी बाहरी व्यक्ति के लिए लंबे समय तक बिना ध्यान आकर्षित किए रहना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है। यही वह बिंदु है जहां से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता शुरू होती है, खासकर तब जब हाल के दिनों में कौशांबी क्षेत्र से कुछ संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों की गिरफ्तारी की खबरें सामने आई हों और “ओवर ग्राउंड वर्कर” यानी OGW नेटवर्क की चर्चा तेज हुई हो।OGW शब्द आमतौर पर उन लोगों के लिए इस्तेमाल होता है जो किसी बड़े नेटवर्क के लिए जमीन पर रहकर सहायता प्रदान करते हैं—चाहे वह लॉजिस्टिक सपोर्ट हो, सूचना जुटाना हो या अस्थायी ठिकाने उपलब्ध कराना। हालांकि गाज़ियाबाद की इन घटनाओं को सीधे किसी ऐसे नेटवर्क से जोड़ना अभी जांच का विषय है, लेकिन स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। खासतौर पर तब, जब इन कबाड़ा के गोदाम एवं झुग्गी क्लस्टर्स के आसपास CRPF और PAC जैसे सुरक्षा बलों के कैंप मौजूद हों, जो इन इलाकों को रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील बनाते हैं।स्थानीय चर्चाओं में एक और पहलू सामने आता है—तकनीक का उपयोग। कुछ लोगों का दावा है कि संदिग्ध तत्व छोटे सोलर उपकरणों या कैमरों का इस्तेमाल कर सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी, आधुनिक दौर में निगरानी के साधनों के छोटे और सस्ते हो जाने के कारण इस संभावना को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा सकता। यदि इस दिशा में कोई ठोस तथ्य सामने आते हैं, तो यह मामला केवल स्थानीय अपराध की सीमा से बाहर निकलकर एक बड़े सुरक्षा आयाम में प्रवेश कर सकता है।इन सभी सवालों के बीच सबसे महत्वपूर्ण और चिंताजनक पहलू बार-बार लगने वाली आग है। हर घटना के बाद झुग्गियां पूरी तरह जलकर खाक हो जाती हैं, जिससे वहां रहने वाले लोगों के दस्तावेज, पहचान पत्र और अन्य साक्ष्य भी नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह केवल दुर्घटना है, या फिर अनजाने में या जानबूझकर ऐसी स्थिति बन रही है जहां हर बार सब कुछ “रीसेट” हो जाता है। यह केवल एक संदेह है, लेकिन जांच के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा जरूर हो सकती है।हाल ही में लखनऊ में सामने आए एक जासूसी से जुड़े मामले के बाद वहां भी झुग्गी क्षेत्र में आग लगने की घटना ने कई लोगों को चौंकाया था। अब गाज़ियाबाद में इसी तरह की घटना के बाद कुछ लोग इन दोनों को जोड़कर देखने लगे हैं, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले ठोस साक्ष्य जरूरी हैं और केवल समानता के आधार पर पैटर्न तय करना जल्दबाजी होगी।इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी चुनौती प्रशासन के सामने है, जिसे एक साथ दो मोर्चों पर काम करना होता है—एक ओर मानवीय संकट है, जहां झुग्गियों में रहने वाले लोग हर बार आग में अपना सब कुछ खो देते हैं और पुनर्वास की मांग करते हैं, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा का प्रश्न है, जहां इन अनियंत्रित बस्तियों के कारण संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। स्थानीय निवासी भी इसी द्वंद्व में हैं—वे न तो किसी निर्दोष को नुकसान पहुंचते देखना चाहते हैं और न ही अपने आसपास किसी संभावित खतरे को अनदेखा करना चाहते हैं। प्रशासन ने इस बार घटना के बाद जांच तेज करने की बात कही है। फॉरेंसिक टीमों को लगाया गया है, आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि हर एंगल से जांच की जाएगी और बिना साक्ष्य के किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाएगा।फिलहाल, गाज़िया बाद की यह आग एक बार फिर कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गई है। क्या यह केवल एक और दुर्घटना है, जिसे समय के साथ भुला दिया जाएगा, या फिर यह किसी गहरे और लंबे समय से चल रहे तंत्र की एक झलक है? सच्चाई जो भी हो, वह जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन इतना तय है कि इस तरह की लगातार घटनाएं अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गई हैं, बल्कि शहरी सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक संतुलन—तीनों पर एक साथ सवाल खड़े कर रही हैं।
    4
    गाज़ियाबाद की आग: हादसा या सुनियोजित साज़िश,आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। कबाड़ियों के गोदाम एवं झुग्गी-झोपड़ियों में 
विशेष रिपोर्ट: इंडिया न्यूज़ 7 पवन सूर्यवंशी ब्यूरो चीफ ऑल एनसीआर 
गाज़ियाबाद के इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के अंतर्गत कनावनी गांव के पास स्थित कबाड़े के गोदाम झुग्गी-झोपड़ियों में लगी हालिया भीषण आग ने एक बार फिर 
OGW नेटवर्क और झुग्गी क्लस्टर पर उठते गंभीर सवाल,उन सवालों को जिंदा कर दिया है, जो पिछले कई वर्षों से दबे हुए थे, लेकिन हर नई घटना के साथ फिर सतह पर आ जाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि एक ऐसा सिलसिला है जो समय-समय पर दोहराया जाता रहा है और हर बार कारण अलग-अलग बताकर मामला ठंडा कर दिया जाता है। कभी इसे शॉर्ट सर्किट कहा जाता है, कभी सिलेंडर ब्लास्ट, तो कभी गर्मी का असर, लेकिन लगातार दोहराती घटनाएं अब संयोग से ज्यादा कुछ प्रतीत होने लगी हैं।
जिलाधिकारी महोदय श्री रविन्द्र कुमार मॉंदड़ द्वारा 150 लगभग झुकी झोपड़िया में समान लग जा रहा है। डीसीपी श्री धवल जायसवाल एवं समस्त पुलिस प्रशासन द्वारा जलकल पुलिस द्वारा आंख पर काबू करने की मस्कट जारी है। कनावनी, इंदिरापुरम, कौशांबी से लेकर गाजीपुर मंडी और आसपास के डेरी क्षेत्रों तक फैले झुग्गी क्लस्टर्स को अगर एक साथ जोड़कर देखा जाए, तो एक ऐसा भूगोल सामने आता है जहां आबादी घनी है, निगरानी सीमित है और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया कमजोर मानी जाती है। ऐसे क्षेत्रों में किसी भी बाहरी व्यक्ति के लिए लंबे समय तक बिना ध्यान आकर्षित किए रहना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है। यही वह बिंदु है जहां से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता शुरू होती है, खासकर तब जब हाल के दिनों में कौशांबी क्षेत्र से कुछ संदिग्ध गतिविधियों में शामिल लोगों की गिरफ्तारी की खबरें सामने आई हों और “ओवर ग्राउंड वर्कर” यानी OGW नेटवर्क की चर्चा तेज हुई हो।OGW शब्द आमतौर पर उन लोगों के लिए इस्तेमाल होता है जो किसी बड़े नेटवर्क के लिए जमीन पर रहकर सहायता प्रदान करते हैं—चाहे वह लॉजिस्टिक सपोर्ट हो, सूचना जुटाना हो या अस्थायी ठिकाने उपलब्ध कराना। हालांकि गाज़ियाबाद की इन घटनाओं को सीधे किसी ऐसे नेटवर्क से जोड़ना अभी जांच का विषय है, लेकिन स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों को पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। खासतौर पर तब, जब इन कबाड़ा के गोदाम एवं झुग्गी क्लस्टर्स के आसपास CRPF और PAC जैसे सुरक्षा बलों के कैंप मौजूद हों, जो इन इलाकों को रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील बनाते हैं।स्थानीय चर्चाओं में एक और पहलू सामने आता है—तकनीक का उपयोग। कुछ लोगों का दावा है कि संदिग्ध तत्व छोटे सोलर उपकरणों या कैमरों का इस्तेमाल कर सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी, आधुनिक दौर में निगरानी के साधनों के छोटे और सस्ते हो जाने के कारण इस संभावना को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा सकता। यदि इस दिशा में कोई ठोस तथ्य सामने आते हैं, तो यह मामला केवल स्थानीय अपराध की सीमा से बाहर निकलकर एक बड़े सुरक्षा आयाम में प्रवेश कर सकता है।इन सभी सवालों के बीच सबसे महत्वपूर्ण और चिंताजनक पहलू बार-बार लगने वाली आग है। हर घटना के बाद झुग्गियां पूरी तरह जलकर खाक हो जाती हैं, जिससे वहां रहने वाले लोगों के दस्तावेज, पहचान पत्र और अन्य साक्ष्य भी नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह केवल दुर्घटना है, या फिर अनजाने में या जानबूझकर ऐसी स्थिति बन रही है जहां हर बार सब कुछ “रीसेट” हो जाता है। यह केवल एक संदेह है, लेकिन जांच के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा जरूर हो सकती है।हाल ही में लखनऊ में सामने आए एक जासूसी से जुड़े मामले के बाद वहां भी झुग्गी क्षेत्र में आग लगने की घटना ने कई लोगों को चौंकाया था। अब गाज़ियाबाद में इसी तरह की घटना के बाद कुछ लोग इन दोनों को जोड़कर देखने लगे हैं, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले ठोस साक्ष्य जरूरी हैं और केवल समानता के आधार पर पैटर्न तय करना जल्दबाजी होगी।इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी चुनौती प्रशासन के सामने है, जिसे एक साथ दो मोर्चों पर काम करना होता है—एक ओर मानवीय संकट है, जहां झुग्गियों में रहने वाले लोग हर बार आग में अपना सब कुछ खो देते हैं और पुनर्वास की मांग करते हैं, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा का प्रश्न है, जहां इन अनियंत्रित बस्तियों के कारण संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। स्थानीय निवासी भी इसी द्वंद्व में हैं—वे न तो किसी निर्दोष को नुकसान पहुंचते देखना चाहते हैं और न ही अपने आसपास किसी संभावित खतरे को अनदेखा करना चाहते हैं।
प्रशासन ने इस बार घटना के बाद जांच तेज करने की बात कही है। फॉरेंसिक टीमों को लगाया गया है, आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हालिया गिरफ्तारियों के साथ किसी संभावित कनेक्शन को भी परखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि हर एंगल से जांच की जाएगी और बिना साक्ष्य के किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाएगा।फिलहाल, गाज़िया बाद की यह आग एक बार फिर कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गई है। क्या यह केवल एक और दुर्घटना है, जिसे समय के साथ भुला दिया जाएगा, या फिर यह किसी गहरे और लंबे समय से चल रहे तंत्र की एक झलक है? सच्चाई जो भी हो, वह जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन इतना तय है कि इस तरह की लगातार घटनाएं अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गई हैं, बल्कि शहरी सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक संतुलन—तीनों पर एक साथ सवाल खड़े कर रही हैं।
    user_Pawan k Suryavansi
    Pawan k Suryavansi
    Advertising agency Ghaziabad, Uttar Pradesh•
    8 min ago
  • 543 से 850 सीटें: क्या बदल जाएगा देश का पावर बैलेंस? नॉर्थ vs साउथ पर बड़ा सवाल देश में लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने की चर्चा तेज हो गई है। यह सिर्फ संख्या बढ़ाने का मामला नहीं, बल्कि भारत के पूरे राजनीतिक पावर मैप को बदलने वाला फैसला साबित हो सकता है। दरअसल, सीटों का पुनर्निर्धारण (Delimitation) जनसंख्या के आधार पर होता है। ऐसे में जिन राज्यों की आबादी ज्यादा तेजी से बढ़ी है—जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश—उन्हें ज्यादा सीटें मिल सकती हैं। इससे उत्तर भारत की राजनीतिक ताकत और मजबूत हो सकती है। वहीं दक्षिण भारत के राज्य—जैसे तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक—जहां जनसंख्या वृद्धि नियंत्रित रही है, वहां सीटों का अनुपात कम हो सकता है। इससे “नॉर्थ vs साउथ” का संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर ऐसा होता है तो संसद में नीतियों और फैसलों पर उत्तर भारत का प्रभाव और बढ़ जाएगा, जबकि दक्षिण भारत खुद को राजनीतिक रूप से कमजोर महसूस कर सकता है। फिलहाल यह मुद्दा सिर्फ चर्चा में है, लेकिन अगर यह लागू हुआ तो देश की राजनीति में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है।
    1
    543 से 850 सीटें: क्या बदल जाएगा देश का पावर बैलेंस? नॉर्थ vs साउथ पर बड़ा सवाल
देश में लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने की चर्चा तेज हो गई है। यह सिर्फ संख्या बढ़ाने का मामला नहीं, बल्कि भारत के पूरे राजनीतिक पावर मैप को बदलने वाला फैसला साबित हो सकता है।
दरअसल, सीटों का पुनर्निर्धारण (Delimitation) जनसंख्या के आधार पर होता है। ऐसे में जिन राज्यों की आबादी ज्यादा तेजी से बढ़ी है—जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश—उन्हें ज्यादा सीटें मिल सकती हैं। इससे उत्तर भारत की राजनीतिक ताकत और मजबूत हो सकती है।
वहीं दक्षिण भारत के राज्य—जैसे तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक—जहां जनसंख्या वृद्धि नियंत्रित रही है, वहां सीटों का अनुपात कम हो सकता है। इससे “नॉर्थ vs साउथ” का संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर ऐसा होता है तो संसद में नीतियों और फैसलों पर उत्तर भारत का प्रभाव और बढ़ जाएगा, जबकि दक्षिण भारत खुद को राजनीतिक रूप से कमजोर महसूस कर सकता है।
फिलहाल यह मुद्दा सिर्फ चर्चा में है, लेकिन अगर यह लागू हुआ तो देश की राजनीति में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है।
    user_Rekha Panchal
    Rekha Panchal
    Delhi Cantonment, New Delhi•
    14 min ago
  • पनीर खाने के शौकीन हैं तो यह खबर आपको सावधान कर सकती है। मेरठ में फूड विभाग ने नकली पनीर बनाने वाली दो फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान टीम ने फैक्ट्रियों से 2800 किलो से ज्यादा नकली पनीर बरामद किया। अधिकारियों के अनुसार, यह नकली पनीर दिल्ली-एनसीआर समेत आसपास के इलाकों में सप्लाई किया जाता था। जांच में सामने आया है कि नकली पनीर तैयार करने के लिए रिफाइंड तेल और हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा था, जो लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। फूड विभाग ने मौके से सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए हैं और आगे की कार्रवाई जारी है।
    1
    पनीर खाने के शौकीन हैं तो यह खबर आपको सावधान कर सकती है। मेरठ में फूड विभाग ने नकली पनीर बनाने वाली दो फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ किया है।
कार्रवाई के दौरान टीम ने फैक्ट्रियों से 2800 किलो से ज्यादा नकली पनीर बरामद किया। अधिकारियों के अनुसार, यह नकली पनीर दिल्ली-एनसीआर समेत आसपास के इलाकों में सप्लाई किया जाता था।
जांच में सामने आया है कि नकली पनीर तैयार करने के लिए रिफाइंड तेल और हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा था, जो लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
फूड विभाग ने मौके से सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए हैं और आगे की कार्रवाई जारी है।
    user_AIB Hindi
    AIB Hindi
    Media house करोल बाग, मध्य दिल्ली, दिल्ली•
    22 min ago
  • ऐसा हो गया तो बदल जाएगा सोना-चांदी का खेल!
    1
    ऐसा हो गया तो बदल जाएगा सोना-चांदी का खेल!
    user_Stock market updates
    Stock market updates
    दिल्ली छावनी, नई दिल्ली, दिल्ली•
    33 min ago
  • Post by MOHD Ahsan. 9540623826
    1
    Post by MOHD Ahsan.   9540623826
    user_MOHD Ahsan.   9540623826
    MOHD Ahsan. 9540623826
    Media house मयूर विहार, पूर्वी दिल्ली, दिल्ली•
    3 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.