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जुन्नारदेव थाने की टूटी दिवार! अब ‘जवाबदेही’ की दीवार कब टूटेगी? बिना अनुमति दीवार तोड़े जाने के आरोप पर FIR की जगह सिर्फ प्रतिवेदन! >> मामले को दबाये जाने का किया जा रहा भरसक प्रयास. जुन्नारदेव थाना प्रभारी ने कहा—नगर पालिका के जवाब का इंतजार; सवालों के घेरे में ठेकेदार को संरक्षण और नगर पालिका की भूमिका ! ब्यूरो चीफ गोपाल मालवीय की रिपोर्ट.. (न्यूज़ ऐसीपी भारत -जुन्नारदेव)- सुलभ शौचालय निर्माण की आड़ में थाना परिसर की बाउंड्रीवाल तोड़े जाने का मामला अब एक और नया मोड़ ले चुका है। थाना प्रभारी से हुई चर्चा में सामने आया कि पुलिस द्वारा नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी को प्रतिवेदन भेज दिया गया है और उनके जवाब का इंतजार किया जा रहा है। इसी बीच जिस बाउंड्रीवाल को निर्माण कार्य के दौरान तोड़े जाने की बात सामने आई थी, उसे अब दोबारा बना दिया गया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या दीवार दोबारा खड़ी कर देने से कथित रूप से बिना अनुमति उसे तोड़ने की जिम्मेदारी भी खत्म हो जाती है? आम आदमी करता तो क्या पुलिस भी पहले ‘प्रतिवेदन का जवाब’ मांगती? • यही वह सवाल है जिसने पूरे मामले को अब कानून के समान अनुपालन बनाम प्रभावशाली ठेकेदार की बहस में ला खड़ा किया है। • आम नागरिक द्वारा किसी शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप सामने आए तो उसके खिलाफ पुलिस कार्रवाई की मांग तत्काल उठती है। लेकिन यहां आरोप एक नगर पालिका के अधिकृत निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार पर है और मामला सीधे पुलिस थाना परिसर की बाउंड्रीवाल से संबंधित है। ऐसे में लोगों का सवाल स्वाभाविक है क्या ठेकेदार और आम नागरिक के लिए कानून की प्रक्रिया अलग-अलग है? • संविधान का अनुच्छेद 14 प्रत्येक व्यक्ति को कानून के समक्ष समानता और कानूनों के समान संरक्षण की गारंटी देता है। इसलिए किसी भी कार्रवाई में बिना उचित आधार के भेदभावपूर्ण व्यवहार सवालों के घेरे में आ सकता है। ‘प्रतिवेदन भेज दिया है’—लेकिन कार्रवाई कब? • जुन्नारदेव थाना प्रभारी जे. मशराम का यह कहना कि नगर पालिका CMO को प्रतिवेदन भेजा गया है और उनके जवाब का इंतजार किया जा रहा है, प्रशासनिक प्रक्रिया का एक हिस्सा हो सकता है। लेकिन यहीं दूसरा सवाल खड़ा होता है— क्या पुलिस की अपनी स्वतंत्र जांच की भूमिका केवल नगर पालिका के जवाब तक सीमित है? • यदि मौके पर दीवार तोड़े जाने की घटना हुई, तो मौके का निरीक्षण, टूटे हिस्से का रिकॉर्ड, फोटो-वीडियो, निर्माण स्थल की स्थिति, संबंधित मजदूरों/ठेकेदार के बयान, CCTV, कार्यादेश तथा अनुमति संबंधी दस्तावेज—इन सबकी जांच स्वतंत्र रूप से की जा सकती है • और सबसे महत्वपूर्ण—दीवार दोबारा बना दी गई, लेकिन कथित रूप से दीवार तोड़े जाने की घटना का सत्यापन तो अभी भी जरूरी है। दीवार खड़ी कर दी, क्या सबूत भी मिट गए? यही इस पूरे मामले का सबसे तीखा पहलू है। जिस दीवार को कथित तौर पर तोड़ा गया था, उसे अब पुनः बना दिया गया है। इससे थाना परिसर की सुरक्षा बहाल हो सकती है, लेकिन पूर्व में हुई कथित कार्रवाई की जांच समाप्त नहीं हो जाती। बल्कि अब सवाल यह है कि— ¥ दीवार कब तोड़ी गई? ¥ किसने तोड़ी? ¥ किसके निर्देश पर तोड़ी? ¥ क्या लिखित अनुमति थी? ¥ क्या पुलिस को पूर्व सूचना दी गई थी? ¥ रात में काम हुआ तो किस अनुमति के आधार पर? ¥ और यदि अनुमति नहीं थी तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? नगर पालिका भी कठघरे में—ठेका दिया, निगरानी कौन कर रहा था? • यहां मामला केवल ठेकेदार तक सीमित नहीं किया जा सकता। यदि पुलिस की शिकायत/प्रतिवेदन में निर्माण कार्य से थाना परिसर की दीवार प्रभावित होने की बात सामने आई है, तो नगर पालिका को यह भी बताना होगा कि उसके अधिकृत ठेकेदार ने कार्यादेश और स्वीकृत योजना की सीमाओं में रहकर काम किया या नहीं। • यदि ठेकेदार ने अपनी मर्जी से सरकारी परिसर की दीवार तोड़ी, तो नगर पालिका की निगरानी व्यवस्था पर सवाल है। और यदि नगर पालिका को इसकी जानकारी थी, तो पुलिस विभाग से समन्वय और अनुमति प्रक्रिया पर सवाल है। दोनों ही परिस्थितियों में जवाबदेही का प्रश्न नगर पालिका तक पहुंचता है। कानून क्या कहता है? • भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 324 रिष्टि (mischief) से संबंधित है और सरकारी या स्थानीय प्राधिकरण की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की स्थिति के लिए अलग प्रावधान करती है। धारा 324(3) में Government या Local Authority की property को नुकसान पहुंचाने वाली mischief के लिए दंड का प्रावधान है। • इसके अतिरिक्त, Prevention of Damage to Public Property Act, 1984 की धारा 3 सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली mischief को दंडनीय बनाती है और सामान्य स्थिति में पांच वर्ष तक के कारावास तथा जुर्माने का प्रावधान करती है। हालांकि इन प्रावधानों में से कौन-सी धारा वास्तव में लागू होती है, यह जांच के तथ्यों, संपत्ति की कानूनी प्रकृति, नुकसान के प्रमाण और घटना की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। FIR की मांग, लेकिन कानून के मुताबिक जांच भी जरूरी • क्या घटना में धारा 324(3) के अलावा कोई अन्य संज्ञेय अपराध बनता है? • क्या लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम लागू होता है? • क्या किसी अन्य व्यक्ति/अधिकारी की भूमिका सामने आती है? • और क्या पुलिस ने इसकी निष्पक्ष जांच शुरू की है? राजनीतिक रसूख’ का आरोप—सच है तो जांच हो, नहीं है तो खारिज हो • स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या ठेकेदार या नगर पालिका के प्रभाव के कारण कार्रवाई धीमी है। यह अभी एक आरोप/आशंका है, सिद्ध तथ्य नहीं। लेकिन यदि पुलिस के सामने ऐसी शिकायत या सामग्री आती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कानून की विश्वसनीयता इसी से बनती है कि ठेकेदार हो, अधिकारी हो, जनप्रतिनिधि हो या आम नागरिक—जांच तथ्य के आधार पर हो और जवाबदेही व्यक्ति की हैसियत देखकर तय न हो। आज दीवार दोबारा बन गई, लेकिन जनता के सवाल अभी भी खड़े हैं • थाना परिसर की दीवार का दोबारा निर्माण अच्छी बात है, क्योंकि सुरक्षा बहाल होना आवश्यक है। लेकिन इससे मूल विवाद समाप्त नहीं होता। दीवार आज बन गई—लेकिन सवाल अभी भी टूटा हुआ है। • किसने तोड़ी? • किसकी अनुमति से? • क्या पुलिस को सूचना दी गई थी? • रात में काम क्यों हुआ? • नगर पालिका की निगरानी कहां थी? • और यदि अनुमति नहीं थी तो जिम्मेदारी तय कब होगी? जनता का सबसे बड़ा सवाल—कानून सबके लिए एक है या नहीं? • अगर एक आम नागरिक पर शासकीय संपत्ति से संबंधित कथित नुकसान के मामले में पुलिस तत्काल कठोर कार्रवाई करती है, तो किसी ठेकेदार के मामले में भी समान कानूनी कसौटी लागू होनी चाहिए—बशर्ते दोनों मामलों के तथ्य और अपराध के तत्व समान हों। >> यही Article 14 की भावना है—किसी को केवल उसकी हैसियत के कारण कानून से ऊपर न माना जाए। अब गेंद नगर पालिका और पुलिस—दोनों के पाले में • नगर पालिका को प्रतिवेदन का जवाब देना है और पुलिस को उस जवाब के साथ-साथ उपलब्ध स्वतंत्र साक्ष्यों की भी जांच करनी है। • क्योंकि मामला अब सिर्फ टूटी हुई दीवार का नहीं है। मामला यह है कि क्या सरकारी थाना परिसर की सुरक्षा से कथित खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति की जवाबदेही तय होगी—या दीवार बनाने के बाद मामला भी ‘सीमेंट’ में दबा दिया जाएगा?

7 hrs ago
user_गोपाल मालवीय
गोपाल मालवीय
Newspaper publisher जमाई, छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश•
7 hrs ago
0684b447-961d-4d4d-8100-84559a0a52a0

जुन्नारदेव थाने की टूटी दिवार! अब ‘जवाबदेही’ की दीवार कब टूटेगी? बिना अनुमति दीवार तोड़े जाने के आरोप पर FIR की जगह सिर्फ प्रतिवेदन! >> मामले को दबाये जाने का किया जा रहा भरसक प्रयास. जुन्नारदेव थाना प्रभारी ने कहा—नगर पालिका के जवाब का इंतजार; सवालों के घेरे में ठेकेदार को संरक्षण और नगर पालिका की भूमिका ! ब्यूरो चीफ गोपाल मालवीय की रिपोर्ट.. (न्यूज़ ऐसीपी भारत -जुन्नारदेव)- सुलभ शौचालय निर्माण की आड़ में थाना परिसर की बाउंड्रीवाल तोड़े जाने का मामला अब एक और नया मोड़ ले चुका है। थाना प्रभारी से हुई चर्चा में सामने आया कि पुलिस द्वारा नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी को प्रतिवेदन भेज दिया गया है और उनके जवाब का इंतजार किया जा रहा है। इसी बीच जिस बाउंड्रीवाल को निर्माण कार्य के दौरान तोड़े जाने की बात सामने आई थी, उसे अब दोबारा बना दिया गया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या दीवार दोबारा खड़ी कर देने से कथित रूप से बिना अनुमति उसे तोड़ने की जिम्मेदारी भी खत्म हो जाती है? आम आदमी करता तो क्या पुलिस भी पहले ‘प्रतिवेदन का जवाब’ मांगती? • यही वह सवाल है जिसने पूरे मामले को अब कानून के समान अनुपालन बनाम प्रभावशाली ठेकेदार की बहस में ला खड़ा किया है। • आम नागरिक द्वारा किसी शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप सामने आए तो उसके खिलाफ पुलिस कार्रवाई की मांग तत्काल उठती है। लेकिन यहां आरोप एक नगर पालिका के अधिकृत निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार पर है और मामला सीधे पुलिस थाना परिसर की बाउंड्रीवाल से संबंधित है। ऐसे में लोगों का सवाल स्वाभाविक है क्या ठेकेदार और आम नागरिक के लिए कानून की प्रक्रिया अलग-अलग है? • संविधान का अनुच्छेद 14 प्रत्येक व्यक्ति को कानून के समक्ष समानता और कानूनों के समान संरक्षण की गारंटी देता है। इसलिए किसी भी कार्रवाई में बिना उचित आधार के भेदभावपूर्ण व्यवहार सवालों के घेरे में आ सकता है। ‘प्रतिवेदन भेज दिया है’—लेकिन कार्रवाई कब? • जुन्नारदेव थाना प्रभारी जे. मशराम का यह कहना कि नगर पालिका CMO को प्रतिवेदन भेजा गया है और उनके जवाब का इंतजार किया जा रहा है, प्रशासनिक प्रक्रिया का एक हिस्सा हो सकता है। लेकिन यहीं दूसरा सवाल खड़ा होता है— क्या पुलिस की अपनी स्वतंत्र जांच की भूमिका केवल नगर पालिका के जवाब तक सीमित है? • यदि मौके पर दीवार तोड़े जाने की घटना हुई, तो मौके का निरीक्षण, टूटे हिस्से का रिकॉर्ड, फोटो-वीडियो, निर्माण स्थल की स्थिति, संबंधित मजदूरों/ठेकेदार के बयान, CCTV, कार्यादेश तथा अनुमति संबंधी दस्तावेज—इन सबकी जांच स्वतंत्र रूप से की जा सकती है • और सबसे महत्वपूर्ण—दीवार दोबारा बना दी गई, लेकिन कथित रूप से दीवार तोड़े जाने की घटना का सत्यापन तो अभी भी जरूरी है। दीवार खड़ी कर दी, क्या सबूत भी मिट गए? यही इस पूरे मामले का सबसे तीखा पहलू है। जिस दीवार को कथित तौर पर तोड़ा गया था, उसे अब पुनः बना दिया गया है। इससे थाना परिसर की सुरक्षा बहाल हो सकती है, लेकिन पूर्व में हुई कथित कार्रवाई की जांच समाप्त नहीं हो जाती। बल्कि अब सवाल यह है कि— ¥ दीवार कब तोड़ी गई? ¥ किसने तोड़ी? ¥ किसके निर्देश पर तोड़ी? ¥ क्या लिखित अनुमति थी? ¥ क्या पुलिस को पूर्व सूचना दी गई थी? ¥ रात में काम हुआ तो किस अनुमति के आधार पर? ¥ और यदि अनुमति नहीं थी तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? नगर पालिका भी कठघरे में—ठेका दिया, निगरानी कौन कर रहा था? • यहां मामला केवल ठेकेदार तक सीमित नहीं किया जा सकता। यदि पुलिस की शिकायत/प्रतिवेदन में निर्माण कार्य से थाना परिसर की दीवार प्रभावित

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होने की बात सामने आई है, तो नगर पालिका को यह भी बताना होगा कि उसके अधिकृत ठेकेदार ने कार्यादेश और स्वीकृत योजना की सीमाओं में रहकर काम किया या नहीं। • यदि ठेकेदार ने अपनी मर्जी से सरकारी परिसर की दीवार तोड़ी, तो नगर पालिका की निगरानी व्यवस्था पर सवाल है। और यदि नगर पालिका को इसकी जानकारी थी, तो पुलिस विभाग से समन्वय और अनुमति प्रक्रिया पर सवाल है। दोनों ही परिस्थितियों में जवाबदेही का प्रश्न नगर पालिका तक पहुंचता है। कानून क्या कहता है? • भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 324 रिष्टि (mischief) से संबंधित है और सरकारी या स्थानीय प्राधिकरण की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की स्थिति के लिए अलग प्रावधान करती है। धारा 324(3) में Government या Local Authority की property को नुकसान पहुंचाने वाली mischief के लिए दंड का प्रावधान है। • इसके अतिरिक्त, Prevention of Damage to Public Property Act, 1984 की धारा 3 सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली mischief को दंडनीय बनाती है और सामान्य स्थिति में पांच वर्ष तक के कारावास तथा जुर्माने का प्रावधान करती है। हालांकि इन प्रावधानों में से कौन-सी धारा वास्तव में लागू होती है, यह जांच के तथ्यों, संपत्ति की कानूनी प्रकृति, नुकसान के प्रमाण और घटना की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। FIR की मांग, लेकिन कानून के मुताबिक जांच भी जरूरी • क्या घटना में धारा 324(3) के अलावा कोई अन्य संज्ञेय अपराध बनता है? • क्या लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम लागू होता है? • क्या किसी अन्य व्यक्ति/अधिकारी की भूमिका सामने आती है? • और क्या पुलिस ने इसकी निष्पक्ष जांच शुरू की है? राजनीतिक रसूख’ का आरोप—सच है तो जांच हो, नहीं है तो खारिज हो • स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या ठेकेदार या नगर पालिका के प्रभाव के कारण कार्रवाई धीमी है। यह अभी एक आरोप/आशंका है, सिद्ध तथ्य नहीं। लेकिन यदि पुलिस के सामने ऐसी शिकायत या सामग्री आती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कानून की विश्वसनीयता इसी से बनती है कि ठेकेदार हो, अधिकारी हो, जनप्रतिनिधि हो या आम नागरिक—जांच तथ्य के आधार पर हो और जवाबदेही व्यक्ति की हैसियत देखकर तय न हो। आज दीवार दोबारा बन गई, लेकिन जनता के सवाल अभी भी खड़े हैं • थाना परिसर की दीवार का दोबारा निर्माण अच्छी बात है, क्योंकि सुरक्षा बहाल होना आवश्यक है। लेकिन इससे मूल विवाद समाप्त नहीं होता। दीवार आज बन गई—लेकिन सवाल अभी भी टूटा हुआ है। • किसने तोड़ी? • किसकी अनुमति से? • क्या पुलिस को सूचना दी गई थी? • रात में काम क्यों हुआ? • नगर पालिका की निगरानी कहां थी? • और यदि अनुमति नहीं थी तो जिम्मेदारी तय कब होगी? जनता का सबसे बड़ा सवाल—कानून सबके लिए एक है या नहीं? • अगर एक आम नागरिक पर शासकीय संपत्ति से संबंधित कथित नुकसान के मामले में पुलिस तत्काल कठोर कार्रवाई करती है, तो किसी ठेकेदार के मामले में भी समान कानूनी कसौटी लागू होनी चाहिए—बशर्ते दोनों मामलों के तथ्य और अपराध के तत्व समान हों। >> यही Article 14 की भावना है—किसी को केवल उसकी हैसियत के कारण कानून से ऊपर न माना जाए। अब गेंद नगर पालिका और पुलिस—दोनों के पाले में • नगर पालिका को प्रतिवेदन का जवाब देना है और पुलिस को उस जवाब के साथ-साथ उपलब्ध स्वतंत्र साक्ष्यों की भी जांच करनी है। • क्योंकि मामला अब सिर्फ टूटी हुई दीवार का नहीं है। मामला यह है कि क्या सरकारी थाना परिसर की सुरक्षा से कथित खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति की जवाबदेही तय होगी—या दीवार बनाने के बाद मामला भी ‘सीमेंट’ में दबा दिया जाएगा?

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    user_Aakash Mandrah
    Aakash Mandrah
    Local News Reporter तामिया, छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
  • विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता गेट खोलकर घुसे पशु चिकित्सालय में छिंदवाड़ा में गौवंश की मौत के मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल का गुस्सा फूट पड़ा। कार्यकर्ताओं ने प्रशासन और पशुपालन विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया, पुतला दहन किया और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। बजरंग दल का आरोप है कि जिले की गौशालाओं में पिछले दो महीनों में 500 से अधिक गौवंश की मौत हुई है, जबकि सात माह से गौशालाओं को चारा-भूसा मद की राशि नहीं मिली। संगठन ने उप संचालक पशुपालन विभाग डॉ. हरजान सिंह पवार को हटाने, पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि कार्रवाई नहीं होने पर बड़ा आंदोलन और छिंदवाड़ा बंद किया जाएगा।
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    विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता गेट खोलकर घुसे पशु चिकित्सालय में
छिंदवाड़ा में गौवंश की मौत के मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल का गुस्सा फूट पड़ा। कार्यकर्ताओं ने प्रशासन और पशुपालन विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया, पुतला दहन किया और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
बजरंग दल का आरोप है कि जिले की गौशालाओं में पिछले दो महीनों में 500 से अधिक गौवंश की मौत हुई है, जबकि सात माह से गौशालाओं को चारा-भूसा मद की राशि नहीं मिली। संगठन ने उप संचालक पशुपालन विभाग डॉ. हरजान सिंह पवार को हटाने, पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि कार्रवाई नहीं होने पर बड़ा आंदोलन और छिंदवाड़ा बंद किया जाएगा।
    user_Cwa
    Cwa
    छिंदवाड़ा नगर, छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश•
    20 hrs ago
  • एक माह में ही टेढ़ा हुआ नया बिजली का खंभा, बिजली विभाग की लापरवाही से मंडरा रहा हादसे का खतरा पुराने थाने के पास नाली में लगाया गया था खंभा, नगर पालिका ने पहले ही जताई थी आपत्ति आमला। नगर के मुख्य मार्ग स्थित पुराने थाना परिसर के समीप बिजली विभाग द्वारा लगाया गया नया बिजली का खंभा महज एक माह के भीतर ही टेढ़ा हो गया है। खंभे की झुकी हुई स्थिति अब राहगीरों और आसपास के दुकानदारों के लिए चिंता का विषय बन गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग की लापरवाही के कारण किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद अब तक सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। जानकारी के अनुसार बिजली विभाग ने यह खंभा नाली के किनारे स्थापित किया था। नगर पालिका ने खंभा लगाए जाने के समय ही बिजली विभाग को इसकी जानकारी देते हुए आगाह किया था कि नाली के किनारे लगाया गया खंभा भविष्य में खतरा बन सकता है। इसके बावजूद विभाग ने चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया। लगातार हो रही बारिश के कारण खंभे के आसपास की जमीन कमजोर होती जा रही है, जिससे खंभा और अधिक झुक गया है। यदि समय रहते इसे सीधा कर सुरक्षित नहीं किया गया या किसी उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित नहीं किया गया, तो इसके गिरने से बड़ा हादसा हो सकता है। यह मार्ग नगर का व्यस्ततम मार्ग है, जहां दिनभर लोगों और वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। स्थानीय नागरिकों ने बिजली विभाग से मांग की है कि खंभे का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए और आवश्यक मरम्मत अथवा पुनः स्थापना की जाए। लोगों का कहना है कि हादसा होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय विभाग को पहले ही सतर्कता बरतनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि से बचा जा सके।
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    एक माह में ही टेढ़ा हुआ नया बिजली का खंभा, बिजली विभाग की लापरवाही से मंडरा रहा हादसे का खतरा
पुराने थाने के पास नाली में लगाया गया था खंभा, नगर पालिका ने पहले ही जताई थी आपत्ति

आमला। नगर के मुख्य मार्ग स्थित पुराने थाना परिसर के समीप बिजली विभाग द्वारा लगाया गया नया बिजली का खंभा महज एक माह के भीतर ही टेढ़ा हो गया है। खंभे की झुकी हुई स्थिति अब राहगीरों और आसपास के दुकानदारों के लिए चिंता का विषय बन गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग की लापरवाही के कारण किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद अब तक सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई है।
जानकारी के अनुसार बिजली विभाग ने यह खंभा नाली के किनारे स्थापित किया था। नगर पालिका ने खंभा लगाए जाने के समय ही बिजली विभाग को इसकी जानकारी देते हुए आगाह किया था कि नाली के किनारे लगाया गया खंभा भविष्य में खतरा बन सकता है। इसके बावजूद विभाग ने चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया।
लगातार हो रही बारिश के कारण खंभे के आसपास की जमीन कमजोर होती जा रही है, जिससे खंभा और अधिक झुक गया है। यदि समय रहते इसे सीधा कर सुरक्षित नहीं किया गया या किसी उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित नहीं किया गया, तो इसके गिरने से बड़ा हादसा हो सकता है। यह मार्ग नगर का व्यस्ततम मार्ग है, जहां दिनभर लोगों और वाहनों की आवाजाही बनी रहती है।
स्थानीय नागरिकों ने बिजली विभाग से मांग की है कि खंभे का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए और आवश्यक मरम्मत अथवा पुनः स्थापना की जाए। लोगों का कहना है कि हादसा होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय विभाग को पहले ही सतर्कता बरतनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि से बचा जा सके।
    user_Dabang kesari amla mohd. asif
    Dabang kesari amla mohd. asif
    Local News Reporter आमला, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • आठनेर में प्रशासन की कार्रवाई से उठे सवाल बस स्टैंड से हटाया गया फल विक्रेताओं कों रोज़ी-रोटी पर संकट? आठनेर में प्रशासन की कार्रवाई से उठे सवाल बस स्टैंड से हटाया गया फल विक्रेताओं कों रोज़ी-रोटी पर संकट? ​आठनेर (बैतूल)। नगर परिषद आठनेर में बस स्टैंड परिसर में अचानक चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान ने शहर में चर्चाओं का बाज़ार गर्म कर दिया है। नवपदस्थ तहसीलदार की 'सिंघम स्टाइल' एंट्री के साथ पुलिस, राजस्व विभाग और नगर परिषद की संयुक्त टीम सड़कों पर उतरी। अभियान की शुरुआत में सबसे पहले कार्रवाई की गाज़ बस स्टैंड पर लगे गरीब फल-फ्रूट विक्रेताओं और उनके अस्थायी ठेलों पर गिरी। ​कार्रवाई के बाद से जहाँ एक तरफ सड़क पर कुछ देर के लिए जगह साफ नज़र आई, वहीं दूसरी तरफ प्रशासन की निष्पक्षता और संवेदनशीलता पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ​गरीब फल विक्रेताओं की रोज़ी-रोटी पर संकट ​अचानक हुई इस कार्रवाई से दैनिक फल विक्रेताओं की आजीविका पर गहरा संकट मंडराने लगा है। स्थानीय लोगों और प्रभावित दुकानदारों का पूछना है कि क्या कार्रवाई से पहले इन गरीब विक्रेताओं के लिए किसी वैकल्पिक स्थान या स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था की गई थी? बिना किसी पूर्व वैकल्पिक इंतज़ाम के ठेलों को हटा देने से इन परिवारों के सामने रोज़ी-रोटी का सवाल खड़ा हो गया है। ​चुनिंदा कार्रवाई या निष्पक्ष प्रशासन? ​स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर भारी असंतोष है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान का निशाना केवल कमजोर वर्ग ही क्यों बनता है? ​कॉम्प्लेक्स के बाहर बेतरतीब पार्किंग: बस स्टैंड स्थित कमर्शियल कॉम्प्लेक्सों के बाहर ग्राहकों के वाहन सड़क तक खड़े रहते हैं, जिससे हर समय ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या इन रसूखदार कॉम्प्लेक्स मालिकों और अव्यवस्थित पार्किंग पर भी प्रशासन की 'सिंघम' वाली सख्ती देखने को मिलेगी? ​लाखों के बजट पर सवाल: हाल ही में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि चौड़ी हुई सड़क का फायदा आम जनता और सुगम यातायात को मिलने के बजाय अव्यवस्था की भेंट चढ़ रहा है। ​जनमानस के प्रमुख सवाल ​क्या आठनेर बस स्टैंड पर अतिक्रमण का दायरा सिर्फ गरीब फल विक्रेताओं तक ही सीमित था? ​क्या नगर परिषद बड़े व्यापारियों और कॉम्प्लेक्सों की अवैध पार्किंग पर डंडा चलाने की हिम्मत दिखाएगी? ​सड़कों के चौड़ीकरण पर खर्च हुए लाखों रुपये का वास्तविक लाभ आखिर किसे मिल रहा है? ​संवेदनशीलता और निष्पक्षता की परीक्षा ​आठनेर में हुई यह कार्रवाई अब प्रशासन की साख पर सवालिया निशान लगा रही है। यदि अतिक्रमण हटाना यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए ज़रूरी है, तो गरीबों के पुनर्वास और बड़े अतिक्रमणकारियों पर समान कार्रवाई भी उतनी ही अनिवार्य है। देखना यह होगा कि नगर परिषद और तहसील प्रशासन आने वाले दिनों में अपनी निष्पक्षता साबित करता है या यह अभियान महज़ "कमज़ोरों पर कार्रवाई" बनकर रह जाएगा।
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    आठनेर में प्रशासन की कार्रवाई से उठे सवाल बस स्टैंड से हटाया गया फल विक्रेताओं कों  रोज़ी-रोटी पर संकट?
आठनेर में प्रशासन की कार्रवाई से उठे सवाल बस स्टैंड से हटाया गया फल विक्रेताओं कों  रोज़ी-रोटी पर संकट?
​आठनेर (बैतूल)। नगर परिषद आठनेर में बस स्टैंड परिसर में अचानक चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान ने शहर में चर्चाओं का बाज़ार गर्म कर दिया है। नवपदस्थ तहसीलदार की 'सिंघम स्टाइल' एंट्री के साथ पुलिस, राजस्व विभाग और नगर परिषद की संयुक्त टीम सड़कों पर उतरी। अभियान की शुरुआत में सबसे पहले कार्रवाई की गाज़ बस स्टैंड पर लगे गरीब फल-फ्रूट विक्रेताओं और उनके अस्थायी ठेलों पर गिरी।
​कार्रवाई के बाद से जहाँ एक तरफ सड़क पर कुछ देर के लिए जगह साफ नज़र आई, वहीं दूसरी तरफ प्रशासन की निष्पक्षता और संवेदनशीलता पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
​गरीब फल विक्रेताओं की रोज़ी-रोटी पर संकट
​अचानक हुई इस कार्रवाई से दैनिक फल विक्रेताओं की आजीविका पर गहरा संकट मंडराने लगा है। स्थानीय लोगों और प्रभावित दुकानदारों का पूछना है कि क्या कार्रवाई से पहले इन गरीब विक्रेताओं के लिए किसी वैकल्पिक स्थान या स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था की गई थी? बिना किसी पूर्व वैकल्पिक इंतज़ाम के ठेलों को हटा देने से इन परिवारों के सामने रोज़ी-रोटी का सवाल खड़ा हो गया है।
​चुनिंदा कार्रवाई या निष्पक्ष प्रशासन?
​स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर भारी असंतोष है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान का निशाना केवल कमजोर वर्ग ही क्यों बनता है?
​कॉम्प्लेक्स के बाहर बेतरतीब पार्किंग: बस स्टैंड स्थित कमर्शियल कॉम्प्लेक्सों के बाहर ग्राहकों के वाहन सड़क तक खड़े रहते हैं, जिससे हर समय ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या इन रसूखदार कॉम्प्लेक्स मालिकों और अव्यवस्थित पार्किंग पर भी प्रशासन की 'सिंघम' वाली सख्ती देखने को मिलेगी?
​लाखों के बजट पर सवाल: हाल ही में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि चौड़ी हुई सड़क का फायदा आम जनता और सुगम यातायात को मिलने के बजाय अव्यवस्था की भेंट चढ़ रहा है।
​जनमानस के प्रमुख सवाल
​क्या आठनेर बस स्टैंड पर अतिक्रमण का दायरा सिर्फ गरीब फल विक्रेताओं तक ही सीमित था?
​क्या नगर परिषद बड़े व्यापारियों और कॉम्प्लेक्सों की अवैध पार्किंग पर डंडा चलाने की हिम्मत दिखाएगी?
​सड़कों के चौड़ीकरण पर खर्च हुए लाखों रुपये का वास्तविक लाभ आखिर किसे मिल रहा है?
​संवेदनशीलता और निष्पक्षता की परीक्षा
​आठनेर में हुई यह कार्रवाई अब प्रशासन की साख पर सवालिया निशान लगा रही है। यदि अतिक्रमण हटाना यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए ज़रूरी है, तो गरीबों के पुनर्वास और बड़े अतिक्रमणकारियों पर समान कार्रवाई भी उतनी ही अनिवार्य है। देखना यह होगा कि नगर परिषद और तहसील प्रशासन आने वाले दिनों में अपनी निष्पक्षता साबित करता है या यह अभियान महज़ "कमज़ोरों पर कार्रवाई" बनकर रह जाएगा।
    user_M. Afsar khan
    M. Afsar khan
    Local News Reporter Multai, Betul•
    9 hrs ago
  • 9 लाख की लूट का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, ₹10 हजार का इनामी बदमाश पुलिस के शिकंजे में पड़ोसी ने दी थी बैंक से रुपये ले जाने की सूचना, उसी इनपुट पर रची गई थी वारदात की साजिश; मुख्य आरोपी पर हत्या, लूट, चोरी समेत 8 से अधिक मामले दर्ज
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    9 लाख की लूट का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, ₹10 हजार का इनामी बदमाश पुलिस के शिकंजे में

पड़ोसी ने दी थी बैंक से रुपये ले जाने की सूचना, उसी इनपुट पर रची गई थी वारदात की साजिश; मुख्य आरोपी पर हत्या, लूट, चोरी समेत 8 से अधिक मामले दर्ज
    user_AMLA NEWS
    AMLA NEWS
    आमला, बैतूल, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • बाढ का कहर: बाढ़ में बहे व्यक्ति का मिला शव, क्षेत्र में शोक की लहर 12 घंटे की तलाश के बाद बरामद हुआ शव, पुलिस ने पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। अमरवाड़ा। हर्रई विकासखण्ड में लगातार दो दिन से हो रही बारिश के कारण उफान पर आए नदी-नालों ने एक बार फिर जान ले ली।बुधवार शाम को ग्राम बरुल की नदी पार करते समय हर्रई निवास भगवान दास सोनी मोटरसाइकिल सहित बाढ़ के तेज बहाव में बह गए थे तलाश अभियान के बाद उनका शव बारगी टोला की नदी से बरामद कर लिया गया। शव मिलने की सूचना से क्षेत्र में शोक का माहौल है। सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचा। आवश्यक पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बारिश के दौरान उफान पर आए नदी-नालों और पुल-पुलियों को पार करने का प्रयास न करें तथा सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करें। बाढ का कहर: बाढ़ में बहे व्यक्ति का मिला शव, क्षेत्र में शोक की लहर 12 घंटे की तलाश के बाद बरामद हुआ शव, पुलिस ने पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। अमरवाड़ा। हर्रई विकासखण्ड में लगातार दो दिन से हो रही बारिश के कारण उफान पर आए नदी-नालों ने एक बार फिर जान ले ली।बुधवार शाम को ग्राम बरुल की नदी पार करते समय हर्रई निवास भगवान दास सोनी मोटरसाइकिल सहित बाढ़ के तेज बहाव में बह गए थे तलाश अभियान के बाद उनका शव बारगी टोला की नदी से बरामद कर लिया गया। शव मिलने की सूचना से क्षेत्र में शोक का माहौल है। सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचा। आवश्यक पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बारिश के दौरान उफान पर आए नदी-नालों और पुल-पुलियों को पार करने का प्रयास न करें तथा सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करें।
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    बाढ का कहर: बाढ़ में बहे व्यक्ति का मिला शव, क्षेत्र में शोक की लहर

12 घंटे  की तलाश के बाद बरामद हुआ शव, पुलिस ने पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।


अमरवाड़ा। हर्रई विकासखण्ड में लगातार दो दिन से  हो रही बारिश के कारण उफान पर आए नदी-नालों ने एक बार फिर जान ले ली।बुधवार शाम को ग्राम बरुल की नदी पार करते समय हर्रई निवास भगवान दास सोनी मोटरसाइकिल सहित बाढ़ के तेज बहाव में बह गए थे तलाश अभियान के बाद उनका शव बारगी टोला की नदी से बरामद कर लिया गया। शव मिलने की सूचना से क्षेत्र में शोक का माहौल है।
सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचा। आवश्यक पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बारिश के दौरान उफान पर आए नदी-नालों और पुल-पुलियों को पार करने का प्रयास न करें तथा सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करें।
बाढ का कहर: बाढ़ में बहे व्यक्ति का मिला शव, क्षेत्र में शोक की लहर
12 घंटे  की तलाश के बाद बरामद हुआ शव, पुलिस ने पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
अमरवाड़ा। हर्रई विकासखण्ड में लगातार दो दिन से  हो रही बारिश के कारण उफान पर आए नदी-नालों ने एक बार फिर जान ले ली।बुधवार शाम को ग्राम बरुल की नदी पार करते समय हर्रई निवास भगवान दास सोनी मोटरसाइकिल सहित बाढ़ के तेज बहाव में बह गए थे तलाश अभियान के बाद उनका शव बारगी टोला की नदी से बरामद कर लिया गया। शव मिलने की सूचना से क्षेत्र में शोक का माहौल है।
सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचा। आवश्यक पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बारिश के दौरान उफान पर आए नदी-नालों और पुल-पुलियों को पार करने का प्रयास न करें तथा सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करें।
    user_मानव अधिकार मिशन मीडिया सेक्रे
    मानव अधिकार मिशन मीडिया सेक्रे
    छिंदवाड़ा नगर, छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
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