*वाराणसी में ट्रैफिक नहीं, “सेटिंग” का साम्राज्य: कैंट के सामने रोज़ का खेल, शिकायतें बेअसर!* वाराणसी। की सड़कों पर ट्रैफिक जाम अब सिर्फ भीड़ का नतीजा नहीं रह गया है, बल्कि यह “सेटिंग” और सिस्टम की चुप्पी का खुला प्रदर्शन बन चुका है। खासकर कैंट क्षेत्र के सामने रोज़ वही हालात देखने को मिलते हैं, जहां सड़क पर अव्यवस्था और अनदेखी आम बात बन गई है। आजमगढ़, जौनपुर और इलाहाबाद की ओर जाने वाले वाहनों की आवाज़ें और जाम की गूंज लगातार सुनाई देती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों तक यह शोर पहुंचकर भी जैसे दब जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतें की जाती हैं, आवाज़ उठाई जाती है, मगर कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा ही मिलता है। इलाके में यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि यहां नियमों से ज्यादा “नजराना” काम करता है। जो व्यवस्था को साध लेता है, उसके लिए रास्ते आसान हो जाते हैं, और बाकी लोग घंटों जाम में फंसे रहते हैं। नतीजा यह है कि आम जनता को रोज़ाना परेशानी झेलनी पड़ती है, लेकिन जिम्मेदार तंत्र की प्रतिक्रिया नदारद रहती है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब यह सिर्फ ट्रैफिक की समस्या नहीं रह गई, बल्कि प्रशासनिक निष्क्रियता और जवाबदेही पर सवाल बन चुकी है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक यह “सेटिंग” का खेल चलता रहेगा और कब सड़कों पर कानून का राज दिखेगा। फिलहाल, कैंट क्षेत्र में हालात जस के तस हैं—जहां ट्रैफिक कम और “चुप्पी” ज्यादा चलती है, और कार्रवाई की उम्मीद हर दिन थोड़ी और कमजोर होती जा रही है। *वाराणसी में ट्रैफिक नहीं, “सेटिंग” का साम्राज्य: कैंट के सामने रोज़ का खेल, शिकायतें बेअसर!* वाराणसी। की सड़कों पर ट्रैफिक जाम अब सिर्फ भीड़ का नतीजा नहीं रह गया है, बल्कि यह “सेटिंग” और सिस्टम की चुप्पी का खुला प्रदर्शन बन चुका है। खासकर कैंट क्षेत्र के सामने रोज़ वही हालात देखने को मिलते हैं, जहां सड़क पर अव्यवस्था और अनदेखी आम बात बन गई है। आजमगढ़, जौनपुर और इलाहाबाद की ओर जाने वाले वाहनों की आवाज़ें और जाम की गूंज लगातार सुनाई देती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों तक यह शोर पहुंचकर भी जैसे दब जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतें की जाती हैं, आवाज़ उठाई जाती है, मगर कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा ही मिलता है। इलाके में यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि यहां नियमों से ज्यादा “नजराना” काम करता है। जो व्यवस्था को साध लेता है, उसके लिए रास्ते आसान हो जाते हैं, और बाकी लोग घंटों जाम में फंसे रहते हैं। नतीजा यह है कि आम जनता को रोज़ाना परेशानी झेलनी पड़ती है, लेकिन जिम्मेदार तंत्र की प्रतिक्रिया नदारद रहती है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब यह सिर्फ ट्रैफिक की समस्या नहीं रह गई, बल्कि प्रशासनिक निष्क्रियता और जवाबदेही पर सवाल बन चुकी है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक यह “सेटिंग” का खेल चलता रहेगा और कब सड़कों पर कानून का राज दिखेगा। फिलहाल, कैंट क्षेत्र में हालात जस के तस हैं—जहां ट्रैफिक कम और “चुप्पी” ज्यादा चलती है, और कार्रवाई की उम्मीद हर दिन थोड़ी और कमजोर होती जा रही है।
*वाराणसी में ट्रैफिक नहीं, “सेटिंग” का साम्राज्य: कैंट के सामने रोज़ का खेल, शिकायतें बेअसर!* वाराणसी। की सड़कों पर ट्रैफिक जाम अब सिर्फ भीड़ का नतीजा नहीं रह गया है, बल्कि यह “सेटिंग” और सिस्टम की चुप्पी का खुला प्रदर्शन बन चुका है। खासकर कैंट क्षेत्र के सामने रोज़ वही हालात देखने को मिलते हैं, जहां सड़क पर अव्यवस्था और अनदेखी आम बात बन गई है। आजमगढ़, जौनपुर और इलाहाबाद की ओर जाने वाले वाहनों की आवाज़ें और जाम की गूंज लगातार सुनाई देती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों तक यह शोर पहुंचकर भी जैसे दब जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतें की जाती हैं, आवाज़ उठाई जाती है, मगर कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा ही मिलता है। इलाके में यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि यहां नियमों से ज्यादा “नजराना” काम करता है। जो व्यवस्था को साध लेता है, उसके लिए रास्ते आसान हो जाते हैं, और बाकी लोग घंटों जाम में फंसे रहते हैं। नतीजा यह है कि आम जनता को रोज़ाना परेशानी झेलनी पड़ती है, लेकिन जिम्मेदार तंत्र की प्रतिक्रिया नदारद रहती है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब यह सिर्फ ट्रैफिक की समस्या नहीं रह गई, बल्कि प्रशासनिक निष्क्रियता और जवाबदेही पर सवाल बन चुकी है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक यह “सेटिंग” का खेल चलता रहेगा और कब सड़कों पर कानून का राज दिखेगा। फिलहाल, कैंट क्षेत्र में हालात जस के तस हैं—जहां ट्रैफिक कम और “चुप्पी” ज्यादा चलती है, और कार्रवाई की उम्मीद हर दिन थोड़ी और कमजोर होती जा रही है। *वाराणसी में ट्रैफिक नहीं, “सेटिंग” का साम्राज्य: कैंट के सामने रोज़ का खेल, शिकायतें बेअसर!* वाराणसी। की सड़कों पर ट्रैफिक जाम अब सिर्फ भीड़ का नतीजा नहीं रह गया है, बल्कि यह “सेटिंग” और सिस्टम की चुप्पी का खुला प्रदर्शन बन चुका है। खासकर कैंट क्षेत्र के सामने रोज़ वही हालात देखने को मिलते हैं, जहां सड़क पर अव्यवस्था और अनदेखी आम बात बन गई है। आजमगढ़, जौनपुर और इलाहाबाद की ओर जाने वाले वाहनों की आवाज़ें और जाम की गूंज लगातार सुनाई देती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों तक यह शोर पहुंचकर भी जैसे दब जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतें की जाती हैं, आवाज़ उठाई जाती है, मगर कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा ही मिलता है। इलाके में यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि यहां नियमों से ज्यादा “नजराना” काम करता है। जो व्यवस्था को साध लेता है, उसके लिए रास्ते आसान हो जाते हैं, और बाकी लोग घंटों जाम में फंसे रहते हैं। नतीजा यह है कि आम जनता को रोज़ाना परेशानी झेलनी पड़ती है, लेकिन जिम्मेदार तंत्र की प्रतिक्रिया नदारद रहती है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब यह सिर्फ ट्रैफिक की समस्या नहीं रह गई, बल्कि प्रशासनिक निष्क्रियता और जवाबदेही पर सवाल बन चुकी है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक यह “सेटिंग” का खेल चलता रहेगा और कब सड़कों पर कानून का राज दिखेगा। फिलहाल, कैंट क्षेत्र में हालात जस के तस हैं—जहां ट्रैफिक कम और “चुप्पी” ज्यादा चलती है, और कार्रवाई की उम्मीद हर दिन थोड़ी और कमजोर होती जा रही है।
- Post by ᴛʜᴇ ʟᴜᴄᴋɴᴏᴡ ᴄʀɪᴍᴇ1
- *वाराणसी में ट्रैफिक नहीं, “सेटिंग” का साम्राज्य: कैंट के सामने रोज़ का खेल, शिकायतें बेअसर!* वाराणसी। की सड़कों पर ट्रैफिक जाम अब सिर्फ भीड़ का नतीजा नहीं रह गया है, बल्कि यह “सेटिंग” और सिस्टम की चुप्पी का खुला प्रदर्शन बन चुका है। खासकर कैंट क्षेत्र के सामने रोज़ वही हालात देखने को मिलते हैं, जहां सड़क पर अव्यवस्था और अनदेखी आम बात बन गई है। आजमगढ़, जौनपुर और इलाहाबाद की ओर जाने वाले वाहनों की आवाज़ें और जाम की गूंज लगातार सुनाई देती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों तक यह शोर पहुंचकर भी जैसे दब जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतें की जाती हैं, आवाज़ उठाई जाती है, मगर कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा ही मिलता है। इलाके में यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि यहां नियमों से ज्यादा “नजराना” काम करता है। जो व्यवस्था को साध लेता है, उसके लिए रास्ते आसान हो जाते हैं, और बाकी लोग घंटों जाम में फंसे रहते हैं। नतीजा यह है कि आम जनता को रोज़ाना परेशानी झेलनी पड़ती है, लेकिन जिम्मेदार तंत्र की प्रतिक्रिया नदारद रहती है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब यह सिर्फ ट्रैफिक की समस्या नहीं रह गई, बल्कि प्रशासनिक निष्क्रियता और जवाबदेही पर सवाल बन चुकी है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक यह “सेटिंग” का खेल चलता रहेगा और कब सड़कों पर कानून का राज दिखेगा। फिलहाल, कैंट क्षेत्र में हालात जस के तस हैं—जहां ट्रैफिक कम और “चुप्पी” ज्यादा चलती है, और कार्रवाई की उम्मीद हर दिन थोड़ी और कमजोर होती जा रही है।1
- चाय की चुस्कियां में वाहन लगाकर गपशप करने वालों को अब पढ़ सकता है भारी हुसैनाबाद में बढ़ते ट्रैफिक पर सख्ती ठाकुरगंज पुलिस ने उठाया बड़ा कदम हुसैनाबाद इलाके में लगातार बढ़ रहे ट्रैफिक दबाव को देखते हुए ठाकुरगंज पुलिस ने अहम की है पहल इलाके में नो पार्किंग के पोस्टर चिपकाए गए जिनमें साफ निर्देश दिया गया है कि वाहन इधर-उधर खड़ा न करें पोस्टर में लिखा गया है कि सभी वाहन चालक अपने वाहन पिक्चर गैलरी के पीछे बने निर्धारित पार्किंग स्थल पर ही करें खड़ा पुलिस ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त की जाएगी कार्रवाई इस कदम से हुसैनाबाद क्षेत्र में जाम की समस्या से राहत मिलने की है उम्मीद1
- Radhe Radhe 🙏 🙏 Nidhivan kaha jata hai ki Nidhivan me koi bhi prani ratri me Nidhivan me visram nahi karta kiu ki ratri me bhagwan shree Krishna or Radha rani rash lila karte hai or Rang mahel me visram karte hai jai shree Radhe Krishna 🙏🙏🙏🚩🚩🛕🛕1
- लखनऊ बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने अखिलेश यादव के नोएडा दौरे पर बोला हमला नोएडा का विकास अखिलेश यादव को आकर्षित कर रहा वो नोएडा को अपशगुन माना करते थे- राकेश त्रिपाठी सत्ता में रहते कभी नोएडा नही गए सपा सरकार में नोएडा को करप्शन और क्राइम की कैपिटल बना दिया- बीजेपी प्रवक्ता आज नोएडा क्राइम करप्शन से फ्री हुआ1
- लखनऊ में शिया समुदाय का सऊदी अरब के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन।प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की तस्वीर जलाई।जन्नतुल बकी के दोबारा निर्माण की करी मांग1
- 🎯🎯 *पहले सिलेंडर चोरी, अब डीजल की जमाखोरी!* *यह इत्तेफाक नहीं, बल्कि सपा की कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है।* उत्तर प्रदेश के रुद्रपुर क्षेत्र के जोगिया खुर्द गांव में प्रशासन की छापेमारी के दौरान सपा से जुड़े रामानंद यादव के ठिकाने से 3600 लीटर डीजल बरामद हुआ। इससे पहले भी एक सपा नेता के घर से बड़ी संख्या में गैस सिलेंडर पकड़े गए थे। यह घटनाएँ समाजवादी पार्टी में जड़ जमा चुके भ्रष्टाचार को उजागर करती हैं। सपा के ‘प्रोपेगेंडाजीवी’ एक ओर अफवाहें फैलाकर जनता को गुमराह करते हैं, और दूसरी ओर खुद जमाखोरी व घोटालों में लिप्त पाए जाते हैं। *अब जनता सब समझ चुकी है। आने वाले चुनाव में उत्तर प्रदेश की जनता सपा को इसका जवाब जरूर देगी।* *साफ है — भ्रष्टाचार और घोटाले ही सपा की असली पहचान बन चुके हैं।* 🔥🔥🔥🔥1
- लखनऊ के गुडम्बा थाना क्षेत्र में मारपीट का मामला सामने आया है, जहां पीड़ित युवक ने आरोप लगाया है कि घटना के बाद से वह लगातार थाने के चक्कर काट रहा है, लेकिन पुलिस अब तक उसकी शिकायत पर मुकदमा दर्ज नहीं कर रही। इस बीच घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें युवक के साथ बेरहमी से मारपीट होती दिखाई दे रही है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों में भी आक्रोश है और पीड़ित को न्याय दिलाने की मांग की जा रही है।1