औरंगाबाद के ओबरा थाना क्षेत्र में देवकली मोड़ के पास सड़क किनारे पैदल जा रहे तीन लोगों को एक अनियंत्रित कार ने जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में आठ वर्षीय मनीष कुमार की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि रोहित कुमार और रामेश्वर साव गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। मृतक मनीष कुमार और रोहित कुमार बाजार से किताबें खरीदकर अपने गांव लौट रहे थे, वहीं देवकली बिगहा निवासी रामेश्वर साव सब्जी बेचकर घर वापस जा रहे थे। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को सदर अस्पताल औरंगाबाद ले जाया गया, जहाँ से प्राथमिक उपचार के बाद मनीष को मगध मेडिकल कॉलेज गया रेफर कर दिया गया था, लेकिन अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। किशोर की मौत की खबर मिलते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और शुक्रवार सुबह ग्रामीणों ने देवकली मोड़ के पास औरंगाबाद-पटना मुख्य पथ को जाम कर दिया। इस प्रदर्शन के कारण यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे स्कूली बच्चों और यात्रियों को घंटों परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारी मृतक के परिजनों के लिए उचित मुआवजे और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग कर रहे थे। मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया। पुलिस ने दुर्घटना में शामिल कार को जब्त कर लिया है और फरार चालक की पहचान व गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। थानाध्यक्ष नीतीश कुमार के अनुसार, किशोर के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
औरंगाबाद के ओबरा थाना क्षेत्र में देवकली मोड़ के पास सड़क किनारे पैदल जा रहे तीन लोगों को एक अनियंत्रित कार ने जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में आठ वर्षीय मनीष कुमार की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि रोहित कुमार और रामेश्वर साव गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। मृतक मनीष कुमार और रोहित कुमार बाजार से किताबें खरीदकर अपने गांव लौट रहे थे, वहीं देवकली बिगहा निवासी रामेश्वर साव सब्जी बेचकर घर वापस जा रहे थे। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को सदर अस्पताल औरंगाबाद ले जाया गया, जहाँ से प्राथमिक उपचार के बाद मनीष को मगध मेडिकल कॉलेज गया रेफर कर दिया गया था, लेकिन अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। किशोर की मौत की खबर मिलते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और शुक्रवार सुबह ग्रामीणों ने देवकली मोड़ के पास औरंगाबाद-पटना मुख्य पथ को जाम कर दिया। इस प्रदर्शन के कारण यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे स्कूली बच्चों और यात्रियों को घंटों परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारी मृतक के परिजनों के लिए उचित मुआवजे और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग कर रहे थे। मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया। पुलिस ने दुर्घटना में शामिल कार को जब्त कर लिया है और फरार चालक की पहचान व गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। थानाध्यक्ष नीतीश कुमार के अनुसार, किशोर के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
- बांका जिले के कटोरिया प्रखंड में स्थित राजवाड़ा ओवरब्रिज का निर्माण कार्य कई वर्षों से अधूरा पड़ा है। इस परियोजना की धीमी गति और लंबे समय से निर्माण कार्य ठप रहने के कारण स्थानीय निवासियों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि इस अधूरे निर्माण के कारण उन्हें आवागमन में न केवल भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि क्षेत्र में हर समय दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि जनता को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके। मामले की गंभीरता को देखते हुए, U.K.Y News द्वारा जीपीएस लोकेशन के साथ मौके की वीडियो रिकॉर्डिंग कर जमीनी स्थिति को सामने लाया जाएगा। समाचार के माध्यम से जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से यह सवाल पूछा जाएगा कि निर्माण में देरी का वास्तविक कारण क्या है और इसे कब तक पूरा किया जाएगा। फिलहाल, इस मुद्दे पर विभाग या किसी अधिकारी का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से साझा किया जाएगा।1
- सहरसा के सदर थाना में कोशी रेंज के डीआईजी डॉ. कुमार आशीष के औचक निरीक्षण ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। निरीक्षण के दौरान कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही बरतने के मामले सामने आने पर एएसआई अशोक कुमार आजाद के साथ-साथ चौकीदार मोहम्मद अली खान और मनोज कुमार पर तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई की गई है। इन चौकीदारों पर बिना वर्दी ड्यूटी करने का आरोप है। डीआईजी ने सभी पुलिसकर्मियों को ड्यूटी के दौरान अनिवार्य रूप से वर्दी पहनने और फरियादियों के साथ संवेदनशील एवं सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। निरीक्षण के बाद डीआईजी ने एसडीपीओ, यातायात डीएसपी और सदर थानाध्यक्ष के साथ बैठक कर शहर की यातायात व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने कचहरी ढाला, शंकर चौक, गांधी चौक, महावीर चौक और गंगजला चौक जैसे प्रमुख चौराहों पर सुचारु आवागमन के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने का आदेश दिया। साथ ही, सड़कों पर अवैध अतिक्रमण करने वालों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी गई है।1
- फारूक अब्दुल्ला की यात्रा को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह किसी आगामी बड़े राजनीतिक कदम का संकेत है। उनकी इस गतिविधि ने चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है कि भविष्य में किस तरह के बदलाव देखने को मिल सकते हैं।1
- बिहार के बांका नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या-11 में संचालित हॉट मिक्सिंग प्लांट को लेकर स्थानीय स्तर पर मामला एक बार फिर गरमा गया है। इस रिहायशी इलाके में स्थित प्लांट के कारण स्थानीय लोग धूल और प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं, जिसके चलते प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। भाजपा नेता एवं समाजसेवी ओमप्रकाश गुप्ता ने इस संबंध में उप विकास आयुक्त (DDC) से मुलाकात कर लंबित जांच को जल्द पूरा करने की मांग की है। ओमप्रकाश गुप्ता का कहना है कि इस विषय पर पहले भी कई बार जिलाधिकारी से मुलाकात की जा चुकी है और जांच के आदेश भी दिए गए थे, लेकिन अब तक जांच की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है।1
- बांका स्थित शंकर मोटर्स में टाटा टियागो का भव्य लॉन्च कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान ग्राहकों को नई कार के आधुनिक फीचर्स और डिजाइन की विस्तार से जानकारी दी गई। इस लॉन्च के माध्यम से कंपनी ने स्थानीय ग्राहकों को टाटा टियागो की खूबियों से रूबरू कराया।1
- बांका जिले के चांदन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गुरुवार 9 जुलाई को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के तहत एक विशेष प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) शिविर का आयोजन किया गया। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रजनीश कुमार के नेतृत्व में आयोजित इस शिविर में प्रखंड के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर कुल 382 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। इसमें चांदन सीएचसी में 160, सुइया अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 136 और भैरोगंज हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में 86 महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ। चिकित्सकों ने महिलाओं का वजन, रक्तचाप और हीमोग्लोबिन जांचकर हाई रिस्क वाली गर्भवतियों की पहचान की और उन्हें नियमित चिकित्सकीय निगरानी की सलाह दी। डॉ. मेघना कुमारी, डॉ. शशिकांत कुमार और डॉ. रजनीश कुमार ने सुरक्षित प्रसव के लिए संतुलित आहार, आयरन-कैल्शियम की गोलियों के सेवन और संस्थागत प्रसव के महत्व पर जोर दिया। इस अभियान के सफल आयोजन में स्वास्थ्य प्रबंधक परशुराम सिंह, बीसीएम संजय कुमार, लैब टेक्नीशियन ममता कुमारी और शंभू कुमार सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वास्थ्य प्रबंधक ने इस उपलब्धि के लिए आशा कार्यकर्ताओं और आशा फैसिलिटेटरों के योगदान की सराहना की। शिविर के दौरान ही आशा कार्यकर्ताओं ने सरकार की नीतियों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। आशा कर्मियों ने बताया कि सीयूजी सिम रिचार्ज के लिए मिलने वाली राशि 200 रुपये से घटाकर 150 रुपये कर दी गई है, जबकि डेटा और नेटवर्क सुविधा के लिए 339 रुपये का रिचार्ज आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उनसे एम-आशा पोर्टल अपडेट, टीकाकरण, आयुष्मान और आभा कार्ड बनाने जैसे व्यापक कार्य करवा रही है, लेकिन पारिश्रमिक दिहाड़ी मजदूरों से भी कम है। आशा कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो वे वर्ष 2018 की तर्ज पर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगी।1
- बिहार के औरंगाबाद स्थित सबसे बड़े और मॉडल मान्यता प्राप्त अस्पताल की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था ने सरकार के दावों की पोल खोल दी है। अस्पताल प्रबंधक प्रफुल्ल कुमार ने स्वीकार किया कि यह स्वास्थ्य केंद्र लंबे समय से दलालों के चंगुल में फंसा था, जहाँ जन्म प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर बड़े पैमाने पर धांधली की जा रही थी। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि संज्ञान लेने के बाद प्रक्रिया में बदलाव किए गए हैं, जिससे 99% दलालों पर शिकंजा कसा गया है। प्रबंधक प्रफुल्ल कुमार ने अस्पताल की बुनियादी कमियों को भी उजागर किया है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में किसी भी विषय के स्पेशलिस्ट डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं, जिस कारण मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। डॉक्टरों के भारी अभाव के कारण बिहार सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए महंगे उपकरण भी संचालित नहीं हो पा रहे हैं; उदाहरण के तौर पर, अल्ट्रासाउंड की सुविधा मौजूद होने के बावजूद विशेषज्ञ डॉक्टर न होने की वजह से मरीजों को यह सुविधा नहीं मिल पा रही है। अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा निजी क्लिनिक चलाने के गंभीर आरोपों पर भी प्रबंधक ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने पुष्टि की कि उन्हें निजी क्लिनिक न चलाने और अन्यत्र योगदान न देने संबंधी बिहार सरकार का निर्देश पत्र प्राप्त हुआ है, लेकिन उन्होंने इस मामले में चुप्पी साधते हुए कहा कि इस पर बड़े अधिकारी ही कुछ बता सकते हैं। प्रबंधक के इस बयान से यह साफ जाहिर होता है कि डॉक्टर खुलेआम नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए अपनी निजी प्रैक्टिस कर रहे हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारी कुंभकर्णी निद्रा में सोए हुए हैं।1
- देवघर के धनगोरी इलाके में एक युवक और युवती को लेकर हंगामा होने की खबर सामने आई है। इस घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस युवक को अपने साथ थाने ले गई है।1