गाजियाबाद के भोजपुर थाना क्षेत्र के गांव महमदपुर सुजानपुर में दबंगों की मनमानी के कारण ग्रामीणों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। आरोप है कि कुछ लोगों ने नाली के पानी की निकासी का रास्ता बंद कर दिया है, जिससे बारिश और घरों का गंदा पानी गलियों, खेतों और लोगों के घरों में भरने लगा है। इस गंभीर जलभराव की वजह से स्थानीय लोगों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। बदबू और चारों तरफ फैली गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है, जिससे छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन से शिकायत की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से मांग की है कि नाली की निकासी को तुरंत बहाल कराया जाए, रास्ता बंद करने वाले आरोपियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए। अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि इस गंभीर समस्या का समाधान कब तक होता है।
गाजियाबाद के भोजपुर थाना क्षेत्र के गांव महमदपुर सुजानपुर में दबंगों की मनमानी के कारण ग्रामीणों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। आरोप है कि कुछ लोगों ने नाली के पानी की निकासी का रास्ता बंद कर दिया है, जिससे बारिश और घरों का गंदा पानी गलियों, खेतों और लोगों के घरों में भरने लगा है। इस गंभीर जलभराव की वजह से स्थानीय लोगों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। बदबू और चारों तरफ फैली गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है, जिससे छोटे बच्चों,
बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन से शिकायत की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से मांग की है कि नाली की निकासी को तुरंत बहाल कराया जाए, रास्ता बंद करने वाले आरोपियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए। अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि इस गंभीर समस्या का समाधान कब तक होता है।
- गाजियाबाद के भोजपुर थाना क्षेत्र के गांव महमदपुर सुजानपुर में दबंगों की मनमानी के कारण ग्रामीणों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। आरोप है कि कुछ लोगों ने नाली के पानी की निकासी का रास्ता बंद कर दिया है, जिससे बारिश और घरों का गंदा पानी गलियों, खेतों और लोगों के घरों में भरने लगा है। इस गंभीर जलभराव की वजह से स्थानीय लोगों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। बदबू और चारों तरफ फैली गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है, जिससे छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन से शिकायत की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से मांग की है कि नाली की निकासी को तुरंत बहाल कराया जाए, रास्ता बंद करने वाले आरोपियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए। अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि इस गंभीर समस्या का समाधान कब तक होता है।2
- गाजियाबाद नगर निगम का मुख्यालय 10 अप्रैल 2026 को हुई बारिश के बाद पूरी तरह जलमग्न हो गया। शहर को जलभराव से मुक्त रखने की जिम्मेदारी संभालने वाले निगम कार्यालय के भीतर पानी भर जाने से वहां कीचड़ फैल गया और सरकारी फाइलों का ढेर भीग कर क्षतिग्रस्त हो गया है। सामने आई तस्वीरों से स्पष्ट है कि राजस्व, संपत्ति कर और निर्माण अनुमति से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज पानी में डूब गए हैं, जिससे भविष्य में आम नागरिकों के काम प्रभावित होने की पूरी आशंका बनी हुई है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब नगर निगम की ओर से मानसून पूर्व तैयारियों के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे। इस स्थिति ने निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि यदि वे अपना कार्यालय ही सुरक्षित नहीं रख सकते, तो शहर को जलभराव से कैसे बचाएंगे। स्वतंत्र पत्रकार धीरेंद्र त्रिपाठी ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही, क्षतिग्रस्त दस्तावेजों के संरक्षण, उनके डिजिटलीकरण और शहर में जलनिकासी के लिए एक समयबद्ध कार्ययोजना को सार्वजनिक करने की मांग उठाई गई है।4
- गाज़ियाबाद जिले के मुरादनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत त्रिमूर्ति विहार के वार्ड नंबर 2, गली नंबर 4 में जलभराव की गंभीर स्थिति बनी हुई है। पूरी गली बारिश के पानी से लबालब भरी है, जिसके कारण यहाँ छोटे बच्चों के डूबने का बड़ा खतरा बना हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि क्षेत्र में न तो कोई नाली है और न ही सड़क की उचित व्यवस्था है। स्थानीय लोगों ने इस समस्या की जानकारी कई बार मुरादनगर नगरपरिषद को दी है, लेकिन आरोप है कि निगम के अधिकारी कुंभकर्ण की तरह सो रहे हैं। निवासियों का मानना है कि ऐसे अधिकारियों का होना न होने के बराबर है। जिले में बच्चों के पानी में डूबने की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, जिसमें हाल ही में विजयनगर से आई एक घटना में एक छोटी बच्ची की मौत का मामला भी शामिल है।1
- अनूपशहर के डीपीबीएस कॉलेज में विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी के दौरान मुख्य रूप से बढ़ती आबादी और उससे उत्पन्न होने वाले आर्थिक असंतुलन जैसे गंभीर विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।1
- गाजियाबाद के मोदीनगर तहसील क्षेत्र के ग्राम खुर्रामपुर में ग्राम समाज की भूमि को लेकर विवाद गहरा गया है। भारतीय किसान यूनियन भानू ने आरोप लगाया है कि खसरा नंबर 387, जो राजस्व अभिलेखों में बंजर, ऊसर और चरागाह भूमि के रूप में दर्ज है, उस पर नियमों के विरुद्ध रजिस्ट्री की जा रही है। संगठन का दावा है कि इस भूमि से जुड़ा मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसके बावजूद वहां निर्माण कार्य लगातार जारी है। इस मामले को लेकर किसानों का कहना है कि उन्होंने एसडीएम मोदीनगर समेत कई प्रशासनिक अधिकारियों को बार-बार शिकायत दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये से नाराज संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि चार दिनों के भीतर इन कथित अवैध रजिस्ट्रियों को निरस्त नहीं किया गया और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू नहीं हुई, तो भारतीय किसान यूनियन भानू मोदीनगर तहसील पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर देगा। संगठन ने इस आंदोलन से उत्पन्न होने वाली किसी भी परिस्थिति की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन पर मढ़ी है।2
- उत्तर प्रदेश के कानपुर में कोतवाली थाना क्षेत्र के सिविल लाइंस इलाके से मारपीट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक वकील और पुलिसकर्मी के बीच राहगीरों और अन्य पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में जमकर लात-घूंसे चलते दिखाई दे रहे हैं। इस घटना का संज्ञान लेते हुए जॉइंट सीपी (लॉ एंड ऑर्डर) विपिन टाडा ने कार्रवाई की है। वीडियो में दिख रहे यूपी-112 में तैनात एक सिपाही को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं, इस मारपीट में शामिल दूसरा सिपाही पहले से ही किसी अन्य मामले में निलंबित चल रहा था।1