सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उत्तर प्रदेश पुलिस से जुड़ा एक कथित वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दावा किया जा रहा है कि चेकिंग के दौरान एक बाइक सवार ने अपने वाहन के सभी वैध दस्तावेज़ DigiLocker ऐप पर दिखाए, लेकिन इसके बावजूद यूपी पुलिस के पुलिसकर्मियों ने डिजिटल दस्तावेज़ों को स्वीकार नहीं किया और कथित तौर पर बाइक को सीज़ कर दिया। इस घटना के वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों में भारी नाराज़गी देखने को मिल रही है। कई यूज़र्स इस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं और पूछ रहे हैं कि जब केंद्र सरकार स्वयं DigiLocker और mParivahan पर उपलब्ध ड्राइविंग लाइसेंस (DL) और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) को कानूनी रूप से वैध मानती है, तो फिर उन्हें अस्वीकार कर वाहन को सीज़ करने का आधार क्या था। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के नियमों के अनुसार, DigiLocker और mParivahan पर प्रदर्शित दस्तावेज़ सामान्य परिस्थितियों में वैध माने जाते हैं, और किसी भी वाहन चालक को केवल हार्ड कॉपी दिखाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। हालांकि, वायरल वीडियो में किए गए दावों की अभी तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, और यह भी स्पष्ट नहीं है कि बाइक को किसी अन्य कानूनी कारण से सीज़ किया गया था या नहीं। यदि वीडियो के दावे सही पाए जाते हैं, तो यह पूरा मामला पुलिस की कार्यप्रणाली और नागरिकों के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस पूरी स्थिति की स्पष्टता केवल संबंधित अधिकारियों द्वारा की जाने वाली निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकेगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उत्तर प्रदेश पुलिस से जुड़ा एक कथित वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दावा किया जा रहा है कि चेकिंग के दौरान एक बाइक सवार ने अपने वाहन के सभी वैध दस्तावेज़ DigiLocker ऐप पर दिखाए, लेकिन इसके बावजूद यूपी पुलिस के पुलिसकर्मियों ने डिजिटल दस्तावेज़ों को स्वीकार नहीं किया और कथित तौर पर बाइक को सीज़ कर दिया। इस घटना के वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों में भारी नाराज़गी देखने को मिल रही है। कई यूज़र्स इस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं और पूछ रहे हैं कि जब केंद्र सरकार स्वयं DigiLocker और mParivahan पर उपलब्ध ड्राइविंग लाइसेंस (DL) और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) को कानूनी रूप से वैध मानती है, तो फिर उन्हें अस्वीकार
कर वाहन को सीज़ करने का आधार क्या था। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के नियमों के अनुसार, DigiLocker और mParivahan पर प्रदर्शित दस्तावेज़ सामान्य परिस्थितियों में वैध माने जाते हैं, और किसी भी वाहन चालक को केवल हार्ड कॉपी दिखाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। हालांकि, वायरल वीडियो में किए गए दावों की अभी तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, और यह भी स्पष्ट नहीं है कि बाइक को किसी अन्य कानूनी कारण से सीज़ किया गया था या नहीं। यदि वीडियो के दावे सही पाए जाते हैं, तो यह पूरा मामला पुलिस की कार्यप्रणाली और नागरिकों के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस पूरी स्थिति की स्पष्टता केवल संबंधित अधिकारियों द्वारा की जाने वाली निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकेगी।
- उन्नाव से एक बेहद सनसनीखेज़ मामला सामने आया है जिसने हर किसी को चौंका दिया है। एक ट्रांसजेंडर महिला ने आरोप लगाया है कि फेसबुक पर हुई दोस्ती के बाद एक युवक ने उसे शादी का झांसा देकर प्रेमजाल में फंसाया और कथित तौर पर उसका जेंडर परिवर्तन कराने के लिए मजबूर किया। पीड़िता का दावा है कि सर्जरी के बाद उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया गया। साथ ही, आरोपी ने उससे लाखों रुपये, सोने के गहने और एक बाइक भी हड़प ली। इतना ही नहीं, आरोपी पर ब्लैकमेलिंग करने, जबरन देह व्यापार में धकेलने और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। पीड़िता का कहना है कि पुलिस से शिकायत के बावजूद उसे न्याय नहीं मिला है। अब उसने आरोपी और उसके परिवार के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।1
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उत्तर प्रदेश पुलिस से जुड़ा एक कथित वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दावा किया जा रहा है कि चेकिंग के दौरान एक बाइक सवार ने अपने वाहन के सभी वैध दस्तावेज़ DigiLocker ऐप पर दिखाए, लेकिन इसके बावजूद यूपी पुलिस के पुलिसकर्मियों ने डिजिटल दस्तावेज़ों को स्वीकार नहीं किया और कथित तौर पर बाइक को सीज़ कर दिया। इस घटना के वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों में भारी नाराज़गी देखने को मिल रही है। कई यूज़र्स इस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं और पूछ रहे हैं कि जब केंद्र सरकार स्वयं DigiLocker और mParivahan पर उपलब्ध ड्राइविंग लाइसेंस (DL) और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) को कानूनी रूप से वैध मानती है, तो फिर उन्हें अस्वीकार कर वाहन को सीज़ करने का आधार क्या था। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के नियमों के अनुसार, DigiLocker और mParivahan पर प्रदर्शित दस्तावेज़ सामान्य परिस्थितियों में वैध माने जाते हैं, और किसी भी वाहन चालक को केवल हार्ड कॉपी दिखाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। हालांकि, वायरल वीडियो में किए गए दावों की अभी तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, और यह भी स्पष्ट नहीं है कि बाइक को किसी अन्य कानूनी कारण से सीज़ किया गया था या नहीं। यदि वीडियो के दावे सही पाए जाते हैं, तो यह पूरा मामला पुलिस की कार्यप्रणाली और नागरिकों के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस पूरी स्थिति की स्पष्टता केवल संबंधित अधिकारियों द्वारा की जाने वाली निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकेगी।2
- महाराष्ट्र के पुणे में पिछले तीन दिनों से हो रही लगातार भारी बारिश के कारण मौसम पूरी तरह सुहाना हो गया है। इस लगातार बारिश के चलते रात के समय ठंड का प्रकोप काफी बढ़ गया है। बढ़ती ठंड की वजह से लोग रात में अपने घरों में कंबल ओढ़कर सो रहे हैं। मौजूदा स्थिति ऐसी है कि पुणे, महाराष्ट्र शिमला जैसा प्रतीत हो रहा है, मानो यह शिमला का ही दूसरा रूप बन गया हो। लोग इस सुहाने मौसम में बारिश और ठंड का खूब आनंद ले रहे हैं।2
- Post by Vimlesh kumar3
- बिहार में एक मुस्लिम महिला को कथित तौर पर पाकिस्तान पैसे भेजते हुए पकड़ा गया है। इस मामले में अधिकारी गहन जांच कर रहे हैं ताकि इस लेनदेन का सही मकसद और सीमा पार नेटवर्क से संभावित संबंधों का पता लगाया जा सके।1
- उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में स्थित अनवर नगर, नवीन मंडी (पिन कोड 209801) में स्थानीय लोगों को गंभीर जलभराव और खराब सड़कों की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। निवासियों के अनुसार, उनके सभासद मनोज यादव जी क्षेत्र में समस्याओं की सुनवाई नहीं कर रहे हैं, जिसके चलते नालियों में पानी भरा रहता है और बरसात में सड़कें खराब हो जाती हैं। क्षेत्र में एक मदरसा भी है, जहाँ छोटे-छोटे बच्चे पढ़ने आते हैं। सड़कों पर भरे गंदे पानी की छींटें बच्चों पर पड़ती हैं, जिससे उनके कपड़े कथित तौर पर 'नापाक' हो जाते हैं। स्थानीय निवासियों ने इस समस्या को नगर पालिका के सीनियर अधिकारियों तक पहुँचाने की अपील की है और अपनी शिकायत को दर्ज करने का आग्रह किया है।1